मौलाना वहीदुद्दीन खान
21 जुलाई, 2018
कुरआन में है कि क़यामत (न्याय) के दिन जब मनुष्य खुदा के सामने इकट्ठा होंगे तो एक व्यक्ति अपने कर्मों को देखेगाl जिन्होंने खुदा को झुटलाया और उसके विरुद्ध बगावत (विद्रोह) किया वह उन अज़ाबों का अवलोकन करेंगे जो उनके प्रतीक्षा में हैंl ग़म की तीव्रता में वह पुकार उठेंगे कि “काश कि मैं ख़ाक (मिट्टी) होता” (78:40)
जब दुसरे ख़लीफा हज़रत उमर अबू लूलू फीरोज़ के खंजर से घायल हो कर अपने मृत्युशय्या पर थे तो उनके बेटे अब्दुल्लाह बिन उमर अपने पिता का सिर अपनी गोद में रखे हुए थेl हज़रत उमर ने उनसे कहा, “ऐ अबुल्लाह! मेरी गाल पर मिट्टी मलोl”
अब्दुल्लाह बिन उमर ने ऐसा ही कियाl फिर उन्होंने अपने पिटा के सिर को ज़मीन पर रखते हुए स्वयं से यह कहा: “ऐ उमर आप पर अफ़सोस और जिसने आप को जन्म दिया उस पर अफ़सोस अगर खुदा आप को माफ़ ना करे”l (तबकात इब्ने साद)
अगर दोनों बातों की तुलना की जाए तो यह पता चलेगा कि आख़िरत में पापी और ढ़ोंगी वही शब्द अदा करेंगे जो इस दुनिया में एक नेक और सच्चे इंसान ने अदा किया हैl
मौत के बाद के जीवन में पापी और ढ़ोंगी यह चाहेंगे वह धूल बन जातेl लेकिन यहाँ हमने देखा कि एक नेक और सच्चा मनुष्य भूमि पर अपने जीवन में मृत्यु से पहले कह रहा है: “मुझ पर मिट्टी लगाओ”l
जब खुदा मनुष्य के सामने तो कौन है जो उसके खिलाफ विद्रोह की हिम्मत रखे? हर कोई उस समय उसके आगे झुका होगाl लेकिन खुदा की बारगाह में वही तसलीम व रज़ा विश्वासनीय है जो खुदा की बारगाह में पेश होने से पहले बजा लाइ जाएl जो लोग पाप और बुरे कर्म करते हैं वह खुदा के सामने उस समय झुके होंगे जब वह उसकी बारगाह में पेश किए जाएंगेl लेकिन एक ईमानदार मनुष्य इसी संसार में उसकी इताअत व फर्माबरदारी (आज्ञाकारिता और अनुपालन) बजा लाता हैl
सच यह है कि एक सच्चा मनुष्य इस संसार में ही उन चरणों से गुज़र जाता है जिनसे गुनाहगार आख़िरत में गुज़रने वाले हैंl एक पापी मनुष्य खुदा को देखने के बाद उसकी बारगाह में विनम्रता का सर झुकाए गा जबकि एक नेक मनुष्य खुदा को देखे बिना ही अपना सिर उसकी आज्ञाकारिता में झुका देता हैl
स्रोत: sundayguardianlive.com/opinion/pious-people-wrongdoers
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