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The Idea of Book as Found In the Quran कुरआन में किताब की अवधारणा

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

21 मई, 2022

कुरआन में कई जगह पर आसमानी सहीफों को किताब कहा गया है जबकि उस समय मौजूदा कागज़ का अविष्कार नहीं हुआ था। कुरआन को भी किताब कहा गया है जबकि सातवीं शताब्दी तक भी कागज़ पर छपे किताब की अवधारणा नहीं थी। हज़रत मुसा अलैहिस्सलाम को तौरेत सीफायर या नीलम की तख्तियों पर मिली थी लेकिन तौरेत को भी कुरआन में कई जगहों पर किताब कहा गया है। कुछ आयतें देखें।

अलिफ़ लाम मीम- यह है वह किताब जिसमें किसी शक की गुंजाइश नहींअल बकरा-1

और हमने दी थी मूसा को किताब फिर उसमें मतभेद पड़ गया।अलशूरा 21

पूछो किसने उतारी वह किताब जो मूसा लेकर आया था।अल अनआम-91

सब तारीफ़ उसके लिए जिसने उतारी अपने बंदे पर किताब और न रखी उसमें कुछ कजी। अल कहफ़-5

उतारी तुझ पर किताब सच्ची तस्दीक करती है अगली किताबों कीआले इमरान 3

यह कुछ आयतें हैं जिनमें कुरआन तौरेत और इंजील को दुसरे आसमानी सहीफों को किताब कहा गया है।

ईसा पूर्व से ही मज़हबी एतेहासिक मवाद को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी की तख्तियों का इस्तेमाल किया जाता था। नर्म मिट्टी की तख्तियों पर कलम्स नामक नुकीले आले से लिखा जाता था और फिर इसको आग पर या धूप में सुखा लिया जाता था। जैसे तख्तियां कुरआन की भाषा में किताबें थीं। किताब से कुरआन हर वह चीज मुराद लेता है जिस पर कोई तहरीर महफूज़ कर ली गई हो। मिट्टी की इन तख्तियों का रिवाज तीसरी शताब्दी ईस्वी तक मिलता है। चौथी शताब्दी ईस्वी में मिस्र में पेपीर्स के पौधे के ताने को छील कर पेपीर्स तैयार किया गया और उससे किताबें और दूसरी चीजें तैयार की गईं। उसी दौरान रम में जानवर की खालों को छील कर पार्चमेंट अर्थात पारचे तैयार किये जाने लगे। उनका इस्तेमाल आम होने लगा क्योंकि जानवरों की खालों से बने हुए पारचे पायदार होते थे।

आज जो कागज़ हम इस्तेमाल करते हैं उसकी इजाद पहली सदी ईस्वी में चीन के एक शाही अफसर काई लिन की थी और वहाँ कागज़ बनाने का कारखाना भी कायम हो चूका था। चीन में प्रकाशित सबसे प्राचीन किताब बौद्ध धर्म की डायमंड सोतर्द उपलब्ध है जो 9 वीं शताब्दी में छिपी थी। इस्लामी फुतुहात के नतीजे में कागज़ बनाने की तकनीक चीनियों से अरब मुसलमानों को मिली और 712 ईस्वी में बग़दाद में कागज़ बनाने का उद्योग कायम हुआ। उस कारखाने का नाम सनअतुल वर्का था।

कुरआन का जो पहला मसहफ सातवीं शताब्दी ईस्वी में तैयार हुआ वह कागज़ पर नहीं बल्कि जानवरों की झिल्ली से तैयार पारचा पर हुआ। क्योंकि कागज़ का उद्योग अरब में 8 वीं शताब्दी में परिचित हुआ इससे पहले अरब में पारचे का उद्योग प्रचलित था। कुरआन में एक आयत में शब्द किर्तास का इस्तेमाल कागज़ के अर्थ में हुआ है। सुरह अल अनआम की आयत नंबर 7 देखें।

और अगर उतारे तुझ पर लिखा हुआ किर्तास पर फिर छू लें उसको अपने हाथों से अलबत्ता कहेंगे काफिर यह नहीं है मगर सरीह जादू।

इस आयत से यह इशारा मिलता है कि किर्तास अर्थात पेपीर्स या पारचा अरब देशों में प्रचलित था और लोग किर्तास से वाकिफ थे। चूँकि हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर वही नाज़िल होती थी और वह उनके हाफ्ज़े में महफूज़ हो जाती थी और इस्लाम के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कुरआन को अपने हाफ्ज़े से लोगों को सुनाते थे इसलिए कुफ्फार व मक्का के मुशरिकीन कहते थे कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आयतें अल्लाह की पनाह अपने ज़ेहन में गढ़ लेते थे। इसी पर खुदा कहता है कि अगर हम कुरआन को किर्तास पर लिखा हुआ भी उतारते और वह उसे छू कर भी देख लेते तो भी वह उसे नहीं मानते क्योंकि उनके दिलों पर टाला पड़ा हुआ है। हज़रत मूसा को भी अल्लाह ने तौरेत तख्तियों की शक्ल में दी थी लेकिन इनकार करने वाले उन पर ईमान नहीं लाए थे। इसलिए जिनके दिलों पर टाला लग चुका है वह दीन को नहीं मानेंगे चाहे उसे किर्तास में लिखी हुई शक्ल में ही क्यों न नाज़िल किया जाए।

इस बहस से यह बात स्पष्ट होती है कि कुरआन में किताब से मुराद हर दौर में अलग है। पुराने दौर में मिट्टी की तख्तियों पर या पत्थरों पर कंदा तहरीरें किताब कहलाती थीं बाद के दौर में पौधों की छालों और जानवरों की खालों से तैयार किये गए पारचों पर सुरक्षित लेखनी किताब कहलाईं और इसके बाद मौजूदा कागज़ से तैयार किताबों का दौर आया। आने वाले दौर में कागज़ का चलन भी उठ जाएगा और बुक का दौर आएगा। जो कागज़ से तैयार नहीं होगा। मगर फिर भी उसे किताब ही कहा जाएगा। इसलिए कुरआन में जब भी किसी आसमानी सहीफे या गैर मज़हबी किताब का उल्लेख हुआ है उससे मुराद केवल कागज़ से तैयार किताब नहीं लिया जाता बल्कि हर वह तहरीर जो दायमी तौर पर महफूज़ कर ली गई हो वह किताब है चाहे वह मौजूदा डिजिटल फॉर्म में ही क्यों न हो।

Urdu Article: The Idea of Book as Found In the Quran قرآن میں کتاب کا تصور

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