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Hindi Section ( 3 Sept 2021, NewAgeIslam.Com)

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Taliban, ISIS, Boko Haram And Al Qaida Espouse Noble Causes To Hide Their Terrorist Ideology तालिबान, आईएसआईएस, बोको हराम और अल-कायदा अपनी आतंकवादी विचारधाराओं को छिपाने के लिए इस्लाम का इस्तेमाल करते हैं।

अतिवादी संगठनों की विचारधारा को पूरी तरह से खारिज करने की जरूरत है

प्रमुख बिंदु:

1. अल कायदा अमेरिका विरोधी बयानबाजी पर परवान चढ़ी   

2. खिलाफत के नारे पर ISIS परवान चढ़ी

3. तालिबान इस्लाम के सच्चे प्रतिनिधि होने का दावा करते हैं 

4. बोको हराम आधुनिक शिक्षा का विरोध करता है 

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न्यू एज इस्लाम स्टाफ राइटर

उर्दू से अनुवाद, न्यू एज इस्लाम  

 28 अगस्त, 2021

दशकों से, तालिबान और अन्य चरमपंथी मुस्लिम संगठनों ने इबादतगाहों को नष्ट कर करके, मुसलमानों और गैर-मुसलमानों को समान रूप से मार कर, और गैर-मुसलमानों को जबरन धर्मांतरित करने की कोशिश करके और अपने नागरिकों पर इस्लाम की अतिवादी और असहिष्णु व्याख्याओं को लागू करके, उन्होंने पृथ्वी पर फितना और फसाद पैदा किया है। फिर भी इस्लामी उलमा और इस्लामी संगठनों का एक बड़ा वर्ग खुले तौर पर या गुप्त रूप से उनका समर्थन करता है और यहां तक कि उन्हें इस्लाम का सच्चा प्रतिनिधि और अग्रणी भी मानता है। यह उदार मुसलमानों के लिए बेहद दर्दनाक है जो इस्लाम की असल रूह को जानते और समझते हैं।

ऐसे आतंकवादी और चरमपंथी संगठन एक महान लक्ष्य को व्यक्त करके बहुसंख्यक मुसलमानों का समर्थन हासिल करते हैं। और उनके सारे खूनी और चरमपंथी रवैये उनके अच्छे इरादों की आड़ में छिपे होते हैं। वे एक महान उद्देश्य की आड़ में हिंसा और रक्तपात करते हैं और सांप्रदायिक घृणा फैलाते हैं।

उदाहरण के लिए, अल-कायदा ने मुसलमानों के बीच यह धारणा बनाकर मुसलमानों के एक बड़े वर्ग का समर्थन हासिल कर लिया है कि वह अमेरिकी साम्राज्यवादी शक्ति से लड़ रहा है और मुसलमानों की हत्या और इस्लामी देशों के विनाश का बदला ले रहा है। अल-कायदा की गैर-इस्लामी गतिविधियों की निंदा और आलोचना करने वालों को उसके समर्थकों द्वारा चुप करा दिया जाता है और उन्हें मुस्लिम विरोधी और अमेरिकी एजेंट कहते हैं। वास्तव में, अल-कायदा ने मुसलमानों को अधिक नुकसान पहुँचाया है और संयुक्त राज्य अमेरिका को मुस्लिम देशों के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करने और उन पर हमला करने की अनुमति देकर इस्लामी देशों को अधिक नुकसान पहुँचाया है। संयुक्त राज्य अमेरिका जहां भी गया, उसने अल कायदा का पीछा किया और अल कायदा को नष्ट करने और आतंकवाद से लड़ने के नाम पर उन देशों में कहर बरपाया। अल-कायदा की इस्लाम की छवि दो दशकों में विकृत हो गई है, और बिन लादेन की आतंकवादी गतिविधियों के कारण दुनिया भर के मुसलमानों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।

अलकायदा के कमजोर होने के बाद 2014 में आईएसआईएस नाम से एक और आतंकी संगठन उभरा। हालांकि इसके नेता अबू बक्र अल-बगदादी को कोई नहीं जानता था, कई धार्मिक नेताओं और संगठनों ने उन्हें अमीर अल-मुमिनिन के रूप में मान्यता दी और उनकी सरकार को एक प्रतीक्षारत खिलाफत कहा। बगदादी ने दावा किया कि उसने उस्मानी खिलाफत के पतन के बाद खिलाफत को फिर से स्थापित किया है। तथ्य यह है कि आईएसआईएस का उदय अल-कायदा का पुनरुत्थान था क्योंकि अल-कायदा की अमेरिका विरोधी बयानबाजी पुरानी थी और अब मुसलमानों के लिए आकर्षक नहीं थी। ये चरमपंथी मुसलमानों के बीच खिलाफत की लोकप्रियता और खिलाफत को फिर से स्थापित करने की इच्छा से अच्छी तरह वाकिफ थे क्योंकि सदियों से उलमा ने यह अफवाह फैलाई थी कि केवल खिलाफत ही मुसलमानों के लिए सरकार का आदर्श रूप है और एक बार खिलाफत की स्थापना हो जाएगी तो मुसलमानों की सारी मुसीबतें और पिछड़ापन दूर हो जाएगा और मुसलमान मिलकर दुनिया पर राज करेंगे। एक प्रसिद्ध भारतीय आलिम शाह वलीउल्लाह ने भी खिलाफत पर एक विस्तृत पुस्तक लिखी है। तथ्य यह है कि कुरआन खिलाफत को सरकार का मॉडल नहीं मानता है। बल्कि, कुरआन केवल एक ऐसे वातावरण के निर्माण पर जोर देता है जो सरकार के कुरआनी के सिद्धांतों को पूरा करता हो।

इसलिए, जैसे ही बगदादी की खिलाफत की घोषणा की गई, मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग उसके सामने झुक गया और सभी मुस्लिम देशों में प्रशंसा का अभियान शुरू हो गया। अफ्रीका, एशिया और फिलीपींस में नशीली दवाओं के व्यापार, वेश्यावृत्ति और जबरन शोषण में शामिल कई आतंकवादी और चरमपंथी संगठनों ने अपने-अपने देशों में मुसलमानों का समर्थन हासिल करने के लिए अपना समर्थन देने का एलान कर दिया। इस प्रकार, उन्होंने खिलाफत के महान लक्ष्य को केवल एक इस्लामी संगठन के रूप में केवल इसलिए मान्यता दी कि उन्हें एक ऐसी इस्लामी संगठन के तौर पर स्वीकार कर लिया जाए जो स्थानीय स्तर पर खिलाफत स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

केवल पाँच वर्षों में, आइएसआइएस का पर्दाफाश हुआ जब उसने बांग्लादेश, अफगानिस्तान, फिलीपींस, अफ्रीकी देशों और इराक, सीरिया और श्रीलंका में आतंकवादी हमले किए, जैसा कि अल कायदा ने किया था। और जो लोग उसे खिलाफत का अग्रदूत कह रहे थे, वे छिप गए और कानून से बचने के लिए उसकी आलोचना करने लगे।

नाइजीरिया में बोको हराम आधुनिक शिक्षा के खिलाफ झूठा प्रचार करता है। वे आधुनिक शिक्षा और महिला शिक्षा के खिलाफ हैं। वे सैकड़ों स्कूली छात्राओं का अपहरण करते हैं और सूफी मुसलमानों को मारते हैं। नाइजीरिया के कई प्रमुख मुस्लिम विद्वान और कुछ मंत्री उसके झूठे प्रचार का शिकार हुए हैं, यह मानते हुए कि बोको हराम एक वास्तविक इस्लामी संगठन है जो इस क्षेत्र में शरिया कानून स्थापित करना चाहता है। क्योंकि इस्लामी कानून को लागू करने में उनका एक बड़ा लक्ष्य है, ईसाईयों के खिलाफ उनके हिंसक अभियानों को अधिकांश मुसलमानों द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है।

तालिबान एक ऐसा संगठन है जो हिंसक इस्लामी विचारधारा को आगे बढ़ाता है। वह इस्लामी कानून पर आधारित सरकार के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन कानून की उनकी व्याख्या अधिकांश उदार इस्लामी विशेषज्ञों और उलमा को स्वीकार्य नहीं है। वे लड़कियों की शिक्षा का समर्थन नहीं करते हैं और महिलाओं को घर से बाहर काम करने की अनुमति नहीं देते हैं। हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों को अक्सर सताया जाता है। पाकिस्तान में, वे शियाओं, ईसाइयों और अल्पसंख्यकों पर हिंसक हमले करते रहे हैं और लोकतांत्रिक सरकार को मान्यता नहीं देते हैं।

1996 और 2001 के बीच अफगानिस्तान में अपने शासन के दौरान, उन्होंने अत्यधिक लिंग अलगाव, शियाओं, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रति असहिष्णुता की नीति अपनाई, लेकिन इस्लामिक संगठनों और उलमा के एक समूह द्वारा उन्हें एक सच्चा इस्लामी संगठन माना गया और उनकी छोटी मोटी ज्यादतियों को अनदेखा किया गया जो एक भारतीय आलिम के लिए, एक महान लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक थे।

अफगानिस्तान के लोग अपने पिछले अनुभव के आधार पर तालिबान से डरते हैं। वे एक और दमनकारी तालिबान शासन से बचने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक उड़ान में सवार होने के लिए काबुल हवाई अड्डे पर इकट्ठा होते हैं। उत्पीड़न, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विकास से वंचित होने के दौर को देखने के लिए महिलाएं एक बार फिर भयभीत हैं। अपनी उड़ान के दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है। तालिबान के डर से हजारों लोग तुर्की, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में भाग गए हैं, लेकिन ये इस्लामी संगठन और उलमा का अभी भी मानना है कि तालिबान एक वास्तविक इस्लामी संगठन है। वे आम अफगानों की राय से बेखबर हैं जो अपने दैनिक जीवन में उनका सामना करते हैं और उनकी यातना, उत्पीड़न और अपमान को यहां तक कि मौत की हद तक सहते हैं। उनके अत्याचारों और चरमपंथी और दमनकारी विचारधाराओं को इस्लामी संगठनों और उलमा द्वारा केवल इसलिए नज़रअंदाज़ किया जा रहा है क्योंकि वे एक महान लक्ष्य ले कर चलने का दावा करते हैं और यह दावा एक इस्लामी राज्य की स्थापना है।

ये संगठनें आधुनिक शिक्षा या वैज्ञानिक प्रगति के महत्व को नहीं समझते हैं और सातवीं शताब्दी के इस्लामी समाज को पुनर्जीवित करना चाहते हैं। कुरआन वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक शिक्षा को प्रोत्साहित करता है और चाहता है कि मुसलमान एक बुद्धिमान समुदाय बनें। लेकिन तालिबान, बोको हराम और आईएसआईएस जैसे संगठन हिंसा, रक्तपात और हत्याओं और तकफीरी विचारधारा में विश्वास करते हैं। हिंसा और तकफीर उनकी विचारधारा के केंद्र में हैं। वे मानव जीवन या स्वतंत्र विचार का सम्मान नहीं करते हैं।

अब समय आ गया है कि अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों का हनन करने वाले इन संगठनों को भंग करने और इस्लामी दुनिया के लिए इन चरमपंथी संगठनों को नकारने के लिए एक सामूहिक प्रस्ताव जारी किया जाए। इस्लामी धार्मिक सोच में सुधार जरूरी है।

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