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Hindi Section ( 27 Jul 2021, NewAgeIslam.Com)

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Female security in Makkah मस्जिदे हराम में महिला सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक छोटा कदम

कार्यस्थल पर महिलाओं से प्रतिबंध हटा लिया गया है

प्रमुख बिंदु:

1. 2017 में महिलाओं पर ड्राइविंग प्रतिबंध हटा लिया गया था

2. गार्जियनशिप एक्ट में 2018 में ढील दी गई

3. रक्षा विभागों में महिलाओं की भर्ती 2021 में शुरू कर दी गई

4. एक लाख से ज्यादा महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस दिए गए

5. सिनेमाघरों और खेल के मैदानों में जिंसी इख़्तिलात (औरत और मर्द का इकट्ठा होने) की अनुमति थी

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स्टाफ राइटर, न्यू एज इस्लाम

22 जुलाई 2021

First women security guards deployed at Masjid-al-Haram/ Photo: Twitter/Saudi Interior Ministry

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सऊदी अरब के राज्य में राजनीतिकसामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए सऊदी अरब के विजन २०३० के हिस्से के रूप में सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख और नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एहतियाती उपायों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इस साल मक्का और बैतुल हराम के अंदर महिला सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।

सऊदी सरकार के सत्तारूढ़ प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन २०३० इकदाम महिलाओं के ख़ास तौर पर सरपरस्ती कानूनों में सुधारों के तहत है। यह कदम कार्यस्थल से महिलाओं पर प्रतिबंध हटाता है।

हालांकि यह पहली बार था कि हज यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए महिलाओं को तैनात किया गया थासुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं को शामिल करने की प्रक्रिया 2017 में ही शुरू हुई थी। इस साल पहली बार हज सीजन के दौरान मक्का में एक महिला कॉल सेंटर का उद्घाटन किया गयाजहां महिला अधिकारियों को आगअपराधदुर्घटनाओं और बीमारी जैसी परेशानियों के बारे में हज करने वालों की तरफ से फोन आए। इसकी शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि कभी-कभी महिलाएं अपनी समस्याओं की संवेदनशीलता के कारण किसी महिला से बात करना चाहती हैं।

हालांकि महिला कॉल सेंटर को पुरुष कॉल सेंटर से अलग विभाग में रखा गया था।

रक्षा मंत्रालय ने सेनानौसेना और वायु सेना और रक्षा के चिकित्सा क्षेत्र की सेवाओं में महिलाओं के लिए भर्ती शुरू किये जाने के बाद इस सालसऊदी अरब में हज के दौरान महिलाओं को सुरक्षा क्षेत्र में नियुक्त किया गया था।

लेकिन सऊदी अरब में महिलाओं के लिए कार्यबल की शुरुआत आसान नहीं रही है। पिछले एक दशक मेंकई नारीवादियों ने सऊदी महिलाओं पर प्रतिबंधों को कम करने और हटाने के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने रूढ़िवादी संरक्षण कानूनों को हटाने और महिलाओं के ड्राइविंग और अन्य समान लिंग प्रतिबंधों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है।

अंत मेंविज़न २०३० के तहत सुधारों के हिस्से के रूप मेंसऊदी सरकार ने २०१७ में महिलाओं के ड्राइविंग पर प्रतिबंध हटा दिया और संरक्षण प्रणाली पर कुछ प्रमुख प्रतिबंधों को हटा दिया जिनके अनुसार एक महिला पुरे जीवन भर नाबालिग रहती  उसे स्वतंत्रता नहीं थी कि वह अपनी शादीशिक्षायात्रा या संपत्ति पर फैसला करें।

Female Saudi officers guarding the Prophet’s Mosque in Madinah (Twitter)

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देर से ही सही अब महिलाओं को पुरुष अभिभावक की सहमति के बिना ड्राइव करने या यात्रा करने की अनुमति दे दी गई हैमहिला कार्यकर्ता का मानना है कि यह सुधार प्रतीकात्मक हैं और महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया है। हालांकिमहिलाओं पर लगे प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू हो गई है। सिनेमाघरों और खेल के मैदानों में इख़्तिलात (औरत और मर्द के एक जगह इकट्ठा होने) की अनुमति दी गई हैहालांकि इस कदम की इस्लामिक उलमा ने गैर-इस्लामी के रूप में आलोचना की है। विडंबना यह है कि इन परिवर्तनों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं को देशद्रोहआतंकवाद और एक विदेशी एजेंडे के लिए काम करने के आरोप में सलाखों के पीछे डाल दिया गया है। सऊदी अरब की सबसे प्रमुख नारीवादी कार्यकर्ताओं में से एकलेजीन अल-हदलौलपांच साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे है और उसे यातना का शिकार होना पड़ा है। दर्जनों नारीवादी कार्यकर्ता अभी भी सलाखों के पीछे हैं।

हालांकिएक महिला कार्यकर्ता ने खुलासा किया है कि शाही खानदान महिलाओं को इस डर से आजादी नहीं देता है कि वे सरकार में अपने प्रभुत्व के लिए चुनौती बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर सऊदी सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है तो उसे पहले शाही परिवार की महिलाओं को आजादी देनी चाहिए।

सऊदी अरब में महिलाएं वर्तमान में इस्लाम द्वारा उन्हें दिए गए उनके वैध अधिकारों के लिए लड़ रही हैंऔर इस साल मक्का में हज के दौरान सुरक्षाकर्मियों के रूप में महिलाओं की नियुक्ति सऊदी अरब में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम है। यह एक छोटा कदम है। इस दिशा में देश को अभी लंबा सफर तय करना है।

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