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Indian Ex-Muslims Are Speaking Out and the Youth Have Started Leaving Islam असर करने लगी भारतीय एक्स मुस्लिमों की आवाज, तेजी से बढ़ रहे मजहबी कट्टरता छोड़ने वाले युवा

संजीव तिवारी

01 दिसंबर 2021

जेएनएन, नई दिल्ली। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की ओर से ईशनिंदा का कानून बनाने की मांग ने अन्य अनेक लोगों के साथ भारत के एक्स मुस्लिम( ExMuslim) समुदाय को भी संशकित कर दिया है। खासकर उन्हें, जो अपने-अपने यूट्यूब चैनल के जरिये इस्लामी कट्टरता और कुरीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। इनमें से कुछ किसी भी मजहब पर यकीन नहीं करते और ईश्वर, अल्लाह, जीसस यानी सभी की सत्ता को चुनौती देते हैं। उनका तर्क है कि इंसान ने मजहब को बनाया, न कि किसी ईश्वर-अल्लाह ने। कुछ यह मानते हैं कि हो सकता है कि किसी ने कायनात यानी सृष्टि बनाई हो, लेकिन वह कोई ऐसी शक्ति नहीं, जो हमारे दैनिक जीवन में दखल देती हो। उन्हें ऐसी शक्ति के होने को लेकर संशय है। इसी कारण वे खुद को एग्नास्टिक कहते हैं। सभी यह कहते हैं कि सबसे बड़ा धर्म-मजहब यदि कोई है तो वह है इंसानियत।

भारत के साथ दुनिया के अन्य देशों और यहां तक कि कट्टर इस्लामी देश माने जाने वाले सउदी अरब, ईरान और पाकिस्तान में भी एक्स मुस्लिम( EXMUSLIMS) तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। उनकी बढ़ती संख्या से चिंतित एक मौलाना को यह कहना पड़ा कि एक्स मुस्लिम की सुनामी आने वाली है। चूंकि एक्स मुस्लिम अपनी सुरक्षा के भय से खुलकर सामने नहीं आते, इसलिए किसी भी देश में उनकी ठीक-ठीक संख्या बता पाना कठिन है। इसके बाद भी प्यू(pew) का सर्वे यही कहता है कि उनकी संख्या हर कहीं बढ़ रही है। हालांकि अमेरिका, यूरोप में एक्स मुस्लिमों के अपने संगठन हैं और वे खुले आम अपने आयोजन भी करते हैं, लेकिन अभी यह स्थिति अन्य देशों और खासकर इस्लामी देशों के साथ भारत में भी नहीं बनी। भारत में अन्य धर्मों के लोग तो आसानी से यह कह सकते हैं कि वे किसी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानते और उन्हें किसी मजहब पर यकीन नहीं, लेकिन मुस्लिम( MUSLIM) खुले तौर पर ऐसा नहीं कह सकते, क्योंकि उन्हें अपने समाज के उन तत्वों से खतरा रहता है, जो यह कहते-मानते हैं कि इस्लाम छोड़ने की सजा मौत है। फिर भी कुछ एक्स मुस्लिम युवा इस खतरे की परवाह नहीं कर रहे हैं। कुछ तो तसलीमा नसरीन( Taslima Nasrin) की तरह सार्वजनिक रूप से खुद को एक्स मुस्लिम कहने लगे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ एक समय जाकिर नाइक के दीवाने थे।

करीब एक वर्ष पहले भारत में ऐसे मुस्लिम की संख्या दो-तीन ही थी, जो एक्स मुस्लिम के रूप में अपने यू ट्यूब( you tube) चैनल चला रहे थे। इनमें प्रमुख थे शकील प्रेम(Shakeel Prem), जो तर्कशील भारत (Tarksheel Bharat) नाम से अपना यू ट्यूब चैनल चलाते हैं। इसके अलावा जफर हेरेटिक( zafar heretic) भी थे, जो इस्लामी इतिहास के साथ कुरान(Quran) और हदीस(hadith) के भी जानकार हैं। आज ऐसे एक्स मुस्लिम की संख्या एक दर्जन से अधिक हो गई है, जो अपने यू ट्यूब चैनल चला रहे हैं। इनमें सचवाला (sachawala), आजाद ग्राउंड( azad ground channel), कोहराम(kohram ex muslim), साहिल (Sahil ex muslim), एपोस्टेट इमाम(apostate imam), यास्मीन खान( yasmeen khan), फैज आलम(Faiz Alam - The Humanist Murtad) प्रमुख हैं। इनके अलावा इनके समर्थक सुलेमानी जलेबियां(sulemani jalebiya) नाम से अपना चैनल चलाते हैं। ऐसे लोगों की संख्या निरंतर बढ़ रही हैं। एक समय भारतीय एक्स मुस्लिम का पाकिस्तानी मूल के एक्स मुस्लिम हैरिस सुल्तान और गालिब कमाल से संवाद होता था, जो विदेश में रहकर अपना यू ट्यूब चैनल चला रहे हैं, लेकिन बीते कुछ समय से भारतीय और इन पाकिस्तानी एक्स मुस्लिमों के बीच मतभेद उभर आए हैं। हैरिस और गालिब अब ऐसी विचित्र दलीलें देने लग गए हैं कि जैसे इस्लाम में हलाला है, वैसे ही हिंदू धर्म में नियोग।

बीते कुछ समय से भारत में करीब हर माह कोई न कोई एक्स मुस्लिम अपना यू ट्यूब चैनल ले आकर रहा है। इनमें से सभी कुरान, हदीस के जानकार हैं। इसके अलावा कुछ अरबी भाषा में भी दक्ष हैं, जैसे कि सचवाला। उनके साथी उन्हें सचगुरू (SachGuru) भी कहते हैं। वह करीब तीस साल सउदी अरब में रहे हैं। इस दौरान वहां उन्होंने एक मस्जिद(MOSQUE) में नमाज(namaz) भी पढ़ाई, लेकिन अब वह अपने यू ट्यूब चैनल के जरिये इस्लाम की उन मान्यताओं पर सवाल उठा रहे हैं, जो उनकी समझ से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के मुसलमानों की अरबों की जहनी गुलामी का कारण हैं। उनका मकसद मुसलमानों को इस जहनी गुलामी से निकालना और भाईचारे तथा इंसानियत का संदेश देना है। यही संदेश दे रहे एक्स मुस्लिम साहिल भी एक समय दीन की दावत देते थे यानी लोगों को इस्लाम(Islam) स्वीकार करने के लिए प्रेरित करते थे, लेकिन बाद में वह एक्स मुस्लिम बन गए।

अब वह अपने चैनल के जरिये मुस्लिम समाज के लोगों और खासकर आलिमों से अपने सवालों के जवाब मांगते हैं और उन्हें खुद को गलत साबित करने की चुनौती देते हैं। वह अपने चैनल पर घंटों बहस करते हैं और कुतर्क करने वालों को भी धैर्य के साथ सुनते हैं। वह अपने को धमकियां देने वालों के सवालों के भी जवाब देते हैं। एपोस्टेट इमाम भी कुरान, हदीस के अच्छे जानकार हैं। वह जाकिर नाइक( ZAKIR NAIK) के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (Islamic research foundation )में काम कर चुके हैं। फिलहाल वह लंदन में हैं। भारतीय एक्स मुस्लिमों को भारत के साथ-साथ बांग्लादेशी और पाकिस्तानी भी सुनते हैं और उनसे सवाल भी करते हैं। इन्हें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और सऊदी अरब में हिंदू-ऊर्दू बोलने-समझने वाले भी सुनते हैं। इनमें सभी धर्मों-समुदायों के वैसे लोग अधिक हैं, जो खुद को नास्तिकता के करीब पाते हैं या फिर किसी धर्म पर यकीन नहीं करते अथवा ईश्वरीय सत्ता पर संशय करते हैं।

बीते करीब 15 दिनों से सचवाला, साहिल आदि से चिढ़ा एक पाकिस्तानी मुहम्मद अली इनके चैनलों पर आकर इन्हें सिर तन से जुदा करने की धमकी दे रहा है। इस आधार पर कि उसका इस्लाम यही कहता है। उसकी ऐसी धमकियों से आजाद ग्राउंड और कोहराम भी दो-चार हो रहे हैं। कोहराम डिस्टोपिया टू रीजन(dystopia to reason) नाम से अपना चैनल चलाते हैं। आजाद ग्राउंड को जब ये धमकियां मिलीं कि उनके मरने के बाद उन्हें कब्रिस्तान में दफन नहीं होने दिया जाएगा तो उन्होंने अपने लिए एक अलग जगह का प्रबंध कर लिया यानी अपना खुद का कब्रिस्तान बना लिया। इन सब एक्स मुस्लिम की मांग है कि सरकार एक तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे और यह देखे कि उनकी आवाज बंद करने की कोशिश कामयाब न होने पाए। भारतीय एक्स मुस्लिम यू ट्यूबरों की आवाज किस तरह असर कर रही है, इसका एक प्रमाण यह है कि अभी तक उनके सवालों का जवाब देने से कतरा रहे मौलाना-मुप्ती अब इसके लिए तैयार दिखने लगे हैं। बीते दिनों साहिल और उनके साथी एडम सीकर(adam seeker urdu) ने एक मुफ्ती ( Mufti Fazal Hamdard) से बात की। जल्द ही सचवाला की भी मुफ्ती यासिर (Mufti Yasir Nadeem al Wajidi) से बात हो सकती है।

Source: https://www.jagran.com/news/national-the-voice-of-indian-ex-muslims-started-to-make-an-impact-the-youth-leaving-the-fast-growing-religious-fanaticism-22255115.html

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/indian-ex-muslims-started-leaving-islam/d/125906

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