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Hindi Section ( 18 March 2022, NewAgeIslam.Com)

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Quran Does Not Prescribe Physical Punishment for Blasphemy कुरआन तौहीने रिसालत के लिए कोई शारीरिक दंड निर्धारित नहीं करता है - मुसलमान आज कुरआन की शिक्षाओं के बिलकुल खिलाफ खड़े हैं

नबियों के समकालीनों ने बार-बार वही कार्य किया है जिसे अब तौहीने रिसालत कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु:

हर युग में नबियों के समकालीनों ने उनका उपहास किया और उन्हें अपमानित किया और उन पर अत्याचार किया।

'पैगंबर की बुराई करना' सजा का विषय नहीं है

तौहीने रिसालत शांतिपूर्ण नसीहत का विषय है।

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डॉ. असद सैयद, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

15 दिसंबर, 2021

इस्लाम में, तौहीने रिसालत शारीरिक दंड के बजाय बौद्धिक बहस का विषय है। कुरआन में यह अवधारणा बहुत स्पष्ट है।

कुरआन हमें बताता है कि प्राचीन काल से खुदा ने हर शहर और समुदाय में एक के बाद एक नबी भेजे। और इन सभी नबियों के समकालीनों का उनके प्रति नकारात्मक रवैया था।

कुरआन में 200 से अधिक आयतें हैं जो दर्शाती हैं कि नबियों के समकालीनों ने बार-बार वही काम किया जिसे अब 'अल्लाह के रसूल की निन्दा या बदनामी' या 'पैगंबर के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल' कहा जाता है। नबियों का हर युग में उनके समकालीनों द्वारा उपहास और दुर्व्यवहार किया गया है (36:30); कुरआन इस संबंध में कुछ शब्दों का उल्लेख करता है, जिनमें "झूठा" (40:24), "पागल" (15: 6), "गढ़ने वाला" (16: 101), और "बेवकूफ आदमी" (7:66) शामिल हैं। कुरआन में नबियों के समकालीनों द्वारा इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों का उल्लेख है, लेकिन कुरआन में कहीं भी यह कोड़े मारने, मौत की सजा या किसी अन्य शारीरिक दंड का सुझाव नहीं देता है।

इससे स्पष्ट है कि 'पैगंबर का अपमान' सजा की बात नहीं बल्कि शांतिपूर्ण नसीहत की बात है। यानी जो व्यक्ति नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का अपमान करता है, उसे शारीरिक दंड नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसके दिमाग को सही करने के लिए तर्क दिए जाने चाहिए। दूसरे शब्दों में, अन्य अपमान के अपराधी को समझाने के लिए, उसे दंडित करने के बजाय, उसे शांतिपूर्वक ठीक करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

जो लोग पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति नकारात्मक रवैया रखते हैं, उनका न्याय अल्लाह द्वारा किया जाएगा, जो उनके दिलों के रहस्यों को जानता है। मोमिनों का यह कर्तव्य है कि वे बचने की नीति का पालन करें और अल्लाह के संदेश को दया के साथ उन तक पहुँचाएँ ताकि उनकी व्याख्या की जा सके।

इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुरआन में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि जो कोई भी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपमान करता है, उसे ऐसा करने से रोका जाना चाहिए और यदि वह ऐसा करता है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इसके विपरीत कुरआन मोमिन को आदेश देता है कि वह विरोधियों को बुरा भला न कहें: और उन्हें गाली न दो वह जिनको वह अल्लाह के सिवा पूजते हैं कि वह अल्लाह की शान में बेअदबी करेंगे ज़्यादती और जेहालत से (6:108)

कुरआन की यह आयत यह स्पष्ट करती है कि किसी भी कीमत पर ईमान वालों का काम नहीं है कि वे मीडिया वॉच कार्यालयस्थापित करें और पैगंबर का अपमान करने वाले को तलाश करें और फिर उसके हत्या की साजिश रचें। इसके विपरीत, कुरआन मोमिनों से इस तरह के कार्यों से परहेज करने का आग्रह करता है क्योंकि लोग क्रोधित हो सकते हैं और इस्लाम और पैगंबर का अपमान करके बदला लेने का प्रयास कर सकते हैं। कुरआन की यह आज्ञा यह स्पष्ट करती है कि यह जिम्मेदारी मोमिनों पर आती है, न कि दूसरों को जवाबदेह ठहराया जाए और उन्हें दंडित किया जाए।

इस दृष्टि से आधुनिक मुसलमानों की स्थिति कुरआन की शिक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है। जब भी कोई - उनके अनुसार - मौखिक या लिखित रूप से "पैगंबर का अपमान" करता है, तो वे तुरंत क्रोधित हो जाते हैं और सड़कों पर मार्च करके जवाब देते हैं, जो अक्सर हिंसक हो जाता है। और फिर वे मांग करते हैं कि पैगंबर का अपमान करने वालों का सिर कलम कर दिया जाए।

English Article: Quran Does Not Prescribe Physical Punishment for Blasphemy – The Stance Of Present-Day Muslims Goes Totally Against The Teachings Of The Quran

Urdu Article: Quran Does Not Prescribe Physical Punishment for Blasphemy قرآن توہین رسالت کے لیے کسی جسمانی سزا کا تعین نہیں کرتا – دور حاضر میں مسلمانوں کا موقف قرآنی تعلیمات کے بالکل خلاف ہے

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/blasphemy-quran-punishment-muslims/d/126601

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