New Age Islam
Sat Nov 27 2021, 10:40 AM

Hindi Section ( 24 Oct 2021, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Targeting Hindus in Bangladesh Must Stop बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाना बंद होना चाहिए

अरशद आलम, न्यू एज इस्लाम

17 अक्टूबर, 2021

बांग्लादेश में पूजा स्थलों पर नियमित हमले हो रहे हैं। जो एक लोकतांत्रिक देश की धर्मनिरपेक्ष विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है

प्रमुख बिंदु:

1. हिंदू अल्पसंख्यकों पर ये हमले एक बार के मामले नहीं हैं। इसके विपरीत उन पर इस तरह के हमले नियमित होते रहते हैं।

2. हमलों के पैमाने और पैटर्न यह स्पष्ट करते हैं कि ये हमले अकारण नहीं थे। इसके विपरीत, सुनियोजित हमलों के पीछे जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा के होने की आशंका है।

3. हमलों के पीछे इस्लामी ताकतों का नाम न लेकर मीडिया अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है

4. अच्छी दक्षिण बांग्लादेश की वह सिविल सोसाइटी है जो अब तक धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद के मूल सपने को जीवित रखे हुए है।

 ----

दुर्गा पूजा के अंतिम दिनों में बांग्लादेश के विभिन्न शहरों के पंडालों और मंदिरों पर हमले हुए। कई अन्य हिंदू-बहुल शहरों में हिंसा, आगजनी और मौतों की रिपोर्ट के साथ, सबसे ज्यादा प्रभावित शहर कमीला था। देश में हिंदू आबादी लगभग 9% है जो कई वर्षों से घट रही है। यह पहली बार नहीं है जब किसी कमजोर अल्पसंख्यक पर हमला किया गया है। उनके जीवन, संपत्ति और प्रतीकों पर इस तरह के हमले नियमित होते रहे हैं।

बड़ी राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस हिंसा के दोषियों को कड़ी धमकी देते हुए कहा है कि उन्हें गिरफ्तार कर सजा दी जाएगी। हालांकि, उसी बयान में उन्होंने यह उम्मीद भी जाहिर की कि ''भारत में ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे बांग्लादेश के हालात और खराब हों और हमारे हिंदू समुदाय पर असर पड़े।उनकी बात का मतलब अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। क्या वह इशारा कर रही थी कि जब तक भारत में मुसलमान सुरक्षित हैं, बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित रहेंगे? क्या यह वही बंधक विचारधारा नहीं है जिसे उपमहाद्वीप के विभाजन के दौरान कुछ बहुत ही सांप्रदायिक नेताओं ने सामने रखा था? एक स्वतंत्र गणराज्य के प्रमुख के रूप में, उन्हें अन्य बहाने खोजने के बजाय अपने देश में व्यवस्था बहाल करने पर ध्यान देना चाहिए।

Representational image. | Photo: Commons

-----

दूसरी ओर, भारत सरकार का बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाना सही है। लेकिन यह उस सरकार द्वारा तर्कहीन लगता है जिसका रवैया अलग होता है जब भारत में मुसलमानों के जीवन और संपत्ति को नष्ट कर दिया जाता है। क्या हमारे पास अभी भी यह सवाल करने का नैतिक अधिकार है कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है जब भारत में मस्जिदों को जमीनी स्तर पर ध्वस्त किया जाता है और किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता है?

बांग्लादेश में हमले का कारण यह बताया गया था कि एक पंडाल में कथित तौर पर मुसलमानों की पवित्र किताब कुरआन का अपमान किया गया था। यह सामान्य ज्ञान को नकारता है। एक धार्मिक अल्पसंख्यक जिस पर वर्षों से हमले हो रहे हैं, अब ऐसा कदम क्यों उठाएगा? इतना ही नहीं, हमले की शैली और इतने कम समय में जिस गति से यह बढ़ा है, यह सभी संकेत देते हैं कि अल्पसंख्यक आबादी को लक्षित करने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है। हमलों स्वचालित रूप से प्रतिक्रिया का परिणाम मालुम नहीं होते। बल्कि, इसमें एक पूर्व नियोजित बलपूर्वक हमले के सभी लक्षण हैं।

इसमें जमात-ए-इस्लामी और खासकर उसकी छात्र शाखा इस्लामी छत्र शबर का हाथ मालुम होता है। इस इस्लामी समूह के सरकार के साथ मतभेद हैं। शेख हसीना ने सत्ता में आने के बाद से उन पर नज़र रखी है, और बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम में उनके खतरनाक और पाकिस्तान समर्थक रुख के लिए अदालतों ने कई प्रमुख पक्षों को मौत की सजा सुनाई है। इसलिए, इस पार्टी की एक विशिष्ट राजनीतिक महत्वाकांक्षा है जो सरकार को बदनाम करने के लिए देश को अस्थिर करने की पूरी कोशिश करेगी।

लेकिन यह हमला बांग्लादेश के धार्मिक मिजाज में बदलाव का बड़ा सवाल खड़ा करता है। दक्षिण एशियाई राष्ट्र के नवीनतम सदस्य मुजीब-उर-रहमान ने धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर देश की स्थापना की। फिर भी हम धर्म में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखते हैं, और कई वर्ग इस्लाम को राजकीय धर्म घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इस परिवर्तन के मद्देनज़र धार्मिक समूहों ने सरकार पर अपना एजेंडा थोप कर बढ़त हासिल कर ली है। शेख हसीना सरकार ने इनमें से कुछ इकदामात का विरोध किया है लेकिन अन्य मांगों को स्वीकार किया है। उदाहरण के लिए, उन्होंने 'स्टैच्यू ऑफ जस्टिस' को हटाने की मांगों को स्वीकार किया और उनके विचार अलग थे जब इस्लामवादी रूढ़िवादी धर्मनिरपेक्ष और नास्तिक ब्लॉगर्स की हत्या कर रहे थे। यह शेख हसीना सरकार की जर्जर स्थिति है जिसने अब इनमें से कुछ समूहों को अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन करने और खुलेआम मूर्तियों को तोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार अपनी जिम्मेदारी से खुद को मुक्त नहीं कर सकती है।

मीडिया ने इन हमलों को कवर करने में सराहनीय भूमिका निभाई। लेकिन मजे की बात यह है कि मीडिया भी हिंसा करने वालों का नाम लेने की हिम्मत नहीं करता। सुर्खियों में आगजनी करने वालों के लिए 'गुंडे', 'बदमाश' और 'शरपसंद' शब्दों का इस्तेमाल किया गया। जाहिर है, मीडिया मुस्लिम रूढ़िवादियों की हरकत न बता कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है, बल्कि इस मुद्दे को छुपा रहा है। इस बुराई का नाम लेकर दुनिया को बताने की जरूरत है ताकि हम इससे निपटने का रास्ता खोज सकें। उदारवादियों सहित अधिकांश मुसलमान आसानी से स्वीकार करते हैं कि इस्लाम के नाम पर ऐसी हिंसा की अनुमति है। इस्लाम की ऐसी घातक शिक्षाओं को न नकार कर वे समस्या की जड़ पर प्रहार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस नासूर को फैलने और समग्र रूप से समाज पर इसके प्रभाव का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

खुशी की बात है कि बांग्लादेश के सिविल सोसाइटी, विशेषकर उसके युवाओं ने पूजा पंडालों और मंदिरों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। कई छात्र संगठन अपने क्षेत्र में ऐसे स्थानों और आसपास के क्षेत्रों में गश्त कर इस तरह के किसी भी हमले के खिलाफ हाई अलर्ट पर थे। सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने भी हमलों की निंदा करने के लिए रैली की और उग्रवाद को भड़काने के आरोपी कुछ मुस्लिम पार्टियों की खुले तौर पर निंदा की। इस तरह की सहानुभूतिपूर्ण कार्रवाइयों ने हमें यह विश्वास दिलाया कि बांग्लादेश की मूल विचारधारा अभी भी देश में जीवित है, और मुस्लिम बहुसंख्यक अभी भी एक धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी बांग्लादेश चाहते हैं। अफसोस की बात है कि भारत और पाकिस्तान के बहुमत के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है, जो अपने-अपने देशों में धार्मिक रूढ़िवादियों द्वारा इस तरह के हमलों का मुकाबला करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।

English Article: Targeting Hindus in Bangladesh Must Stop

Urdu Article: Targeting Hindus in Bangladesh Must Stop بنگلہ دیش میں ہندوؤں کو نشانہ بنایا جانا بند ہونا چاہیے

Malayalam Article: Targeting Hindus in Bangladesh Must Stop ബംഗ്ലാദേശിലെ ഹിന്ദുക്കളെ ലക്ഷ്യമിടുന്നത് അവസാനിപ്പിക്കണം

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/durga-puja-pandal-bangladesh-hindu/d/125637

New Age IslamIslam OnlineIslamic WebsiteAfrican Muslim NewsArab World NewsSouth Asia NewsIndian Muslim NewsWorld Muslim NewsWomen in IslamIslamic FeminismArab WomenWomen In ArabIslamophobia in AmericaMuslim Women in WestIslam Women and Feminism


Loading..

Loading..