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Hindi Section ( 5 Jan 2013, NewAgeIslam.Com)

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Horrible Consequences Of Ill-Treatment Of Girls लड़कियों के साथ नकारात्मक व्यवहार के भयानक परिणाम

मौलाना असरारुल हक़ क़ासमी

4 जनवरी, 2013

(उर्दू से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

लड़कियों के साथ बुरे व्यवहार की कहानी बहुत पुरानी है, लेकिन हैरत की बात ये है कि मौजूदा दौर में जबकि हर तरफ तरक्की का नारा दिया जा रहा है और औरतों के अधिकारों की बात की जा रही है तब भी लड़कियों के साथ वहशियाना सुलूक जारी है बल्कि इस दौर में लड़कियों को जिस तरह के नाज़ुक हालात का सामना करना पड़ रहा है, उसकी मिसाल पहले के दौर में नहीं मिलती। लड़कियों के साथ इससे बड़ा ज़ुल्म और क्या होगा कि कई जगहों पर उन्हें दुनिया में न लाने की कोशिश की जाती है। आजकल अल्ट्रासाउंड जैसी मशीनें ईजाद हो गई हैं जिनकी मदद से गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिंग के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। होना तो ये चाहिए था कि इस मशीन का इस्तेमाल जन्म से पहले गर्भ में पल रहे बच्चे की हालत और स्वास्थ्य विकास के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता लेकिन लोगों ने इसे बच्चे के लिंग के बारे में जानने की शुरुआत कर दी। नतीजतन आज भी बहुत से बेरहम लोग और लड़कों की ख्वाहिश रखने वाले लोग हैं जो गर्भ में लड़की की मौजूदगी के बारे में पता होते ही उसे दुनिया में न आने देने की कोशिश करते हैं। इसके लिए गर्भपात और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करके न सिर्फ बच्चों की जानें ली जाने लगी हैं बल्कि माँओं की ज़िंदगी को खतरे में डाला जाने लगा है।

जाहिलियत के दौर में लड़कियों को ज़िंदा दफना दिया जाता था मगर इस्लाम ने बरसों पुरानी इस कुप्रथा का अंत कर दिया और लड़कियों को जीने का पूरा हक़ दिया बल्कि लड़कियों पर विशेष ध्यान देने की ताकीद की, इसके लिए बड़े इनाम की बात कही। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया: ''जो शख्स बेहतरीन तरीके से लड़कियों की सरपरस्ती करे, उनकी तर्बियत करे और अच्छा बर्ताव करे वो जहन्नम में नहीं जाएगा। (सही बुखारी जिल्द दो) एक और मौक़े पर आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: ''जो शख्स दो या तीन बहनों, या लड़कियों की बेहतरीन तरीके पर तर्बियत करे और किसी तरह की ज़्यादती न करे वो जन्नत में जाएगा। (तिर्मज़ी) अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस्लाम में लड़कियों को कितना ऊँचा स्थान दिया गया है। मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया: ''जो शख्स दो लड़कियों की परवरिश करे, मैं और वो जन्नत में इतने करीब होंगे, जैसे एक हाथ की बराबर की दो उंगलियां'' अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने बताया कि इस दुनिया की ज़िंदगी के बाद आखिरत की ज़िंदगी है जो हमेशा हमेशा बाक़ी रहेगी और जो काम हम यहाँ करेंगे, उसका नतीजा मौत के बाद आखिरत की ज़िंदगी में हमारे सामने आएगा, अगर हमने अच्छा काम किया होगा तो हमें उसका अच्छा नतीजा मिलेगा और अगर हमने बुरा काम किया होगा तो वो भी हमारे सामने आ जाएगा। वहाँ कण कण का हिसाब होगा। खुदा सबके साथ इंसाफ करेगा, इसलिए हमेशा रहने वाली ज़िंदगी को अच्छा करने के लिए हमें यहाँ अच्छे काम करने चाहिए, अपने परवरदिगार की फरमाबरदारी (आज्ञाकारिता) होना चाहिए। रसूले पाक सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की इन शिक्षाओं का ये असर सामने आया कि जो इस्लाम लाने से पहले बेरहम थे, नर्म हो गये और हुस्ने सुलूक दिखाने लगे, उन पर जिनके हुकूक वाजिब थे उनकी अदायगी की, चाहे वो पड़ोसी के अधिकार हों या रिश्तेदारों के, औरतों के अधिकार या लड़कियों के। आज भी इंसानियत को इसी तरह की तालीम की ज़रूरत है ताकि सबको समान अधिकार मिलें और सभी को सम्मान की निगाहों से देखा जाए और लड़कियों को क़त्ल करना तो दूर की बात उन पर किसी भी तरह की ज़्यादती को उचित न समझा जाए।

मौजूदा दौर में चूंकि हर तरफ पश्चिमी विचारधारा का बोलबाला है, इसलिए मानव समाज में तरह तरह की बुराईयां जन्म ले रही हैं। हालांकि बात औरतों की आज़ादी और उनके अधिकारों की जाती है लेकिन वास्तव में मौजूदा दौर में औरतों पर बहुत अत्याचार किया जाता है और विभिन्न तरीकों से उनका शोषण किया जाता है। ये आधुनिक दौर की बहुत बड़ी विडम्बना है कि एक तरफ इंसान जीवन के विभिन्न मैदानों को जीत कर अंतरिक्ष में उड़ान भरनी शुरू कर दी, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसे उपकरणों का आविष्कार करके व्यापक दुनिया को ग्लोब्लाईज़ेशन की शकल में एक छोटा सा गांव बनाने में कामयाबी हासिल कर ली लेकिन दूसरी तरफ इंसानियत की वो बुनियादी समस्याएं जो सदियों से सिर उठाए हुए खड़ी हैं, आज भी अपनी जगह मौजूद हैं। इसके कारण आम लोगों की बड़ी संख्या आज की तेज रफ्तार दुनिया में विभिन्न प्रकार की मुसीबतों का का बोझ उठाकर घायल चींटी की तरह रेंग रही है। विशेष रूप से महिलाएं जो मानव समाज का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है, उसका जीवन तो और अधिक कष्ट और परेशानी में हिचकोले खा रहा है। वो इंसान जो कभी चाँद पर कदम रखता है और कभी दूसरे ग्रहों को अपनी मुट्ठी में लेने का प्रयास करता है, वो महिलाओं को उनकी समस्याओं से निजात नहीं दिला सका बल्कि अलग अलग तरीकों से उसका शोषण करता रहा। ये अलग बात है कि आधुनिक दौर में औरतों पर ज़ुल्म व सितम के नए तरीके ढूंढ लिए गये हैं और उन्हें लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। मिसाल के लिए दहेज के रूप में औरतों का शोषण आज भी जारी है। औरतों के लिए दहेज एक ऐसी मुसीबत है जिसकी चपेट में आकर रोज़ाना कितनी औरतें मौत के मुंह में चली जाती हैं और कितनी औरतों की ज़िंदगी मौत से बदतर बनी हुई है।

इससे भी अधिक गंभीर समस्या औरतों के खरीदने और बेचने का है। खरीदी हुई औरत के साथ जो बर्ताव किया जाता है उसकी कल्पना करके ही कंपकंपी आ जाती है। हालांकि खरीदी हुई औरतों से अक्सर शादी कर ली जाती है लेकिन शादी से इन औरतों की मुसीबतें कम नहीं होतीं क्योंकि दुल्हन बना लेने के बाद भी उन्हें खरीदी हुई चीज़ ही समझा जाता है। कुछ साल पहले प्रकाशित कुछ रिपोर्टों से पता चला है कि वो लड़कियाँ जो ज़्यादा खूबसूरत होती हैं उनकी कीमतें भी ज़्यादा होती हैं और वो लड़कियाँ जो अधिक सुंदर दिखाई नहीं देती उनकी क़ीमत भी कम लगाई जाती है। कभी कभी लड़कियों की कीमत की कमी व ज़्यादती इलाके के आधार पर निर्भर होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक असम और झारखंड की लड़कियां 7 हजार से 25 हजार रुपये के बीच मिल जाती हैं। लेकिन ज़्यादा पसंद आने वाली हिमाचली लड़कियां 50 हजार में आती हैं। वो लड़कियाँ जिनको बेचा जाता है चाहे उन्हें शादी के साथ बेचा जाये या बिना शादी के, हालांकि उन्हें बहुत कष्ट और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ सर्वे बताते हैं कि जो लोग शादी करके इन लड़कियों को अपने पास रखते हैं, वो उनके साथ ज़र ख़रीद गुलामों जैसा बर्ताव करते हैं और अगर वो किसी दूसरे को बेच देते हैं तब उनके साथ और अधिक घिनौना बर्ताव किया जाता है। खरीदी हुई लड़कियों का बहुत हद तक शारीरिक और यौन शोषण भी किया जाता है और कभी कभी सिर्फ पति ही नहीं बल्कि घर के दूसरे लोग भी शारीरिक और यौन शोषण में पीछे नहीं रहते और चूंकि हिंसा घर की चार दीवारी के भीतर होता है इसलिए इन बेबस औरतों की आह और सिसकियों की आवाज़ बाहर सुनाई नहीं देती।

औरतों पर होने वाले लगातार दमन और लड़कियों को गर्भ में क़त्ल किए जाने के खतरनाक प्रभाव सामने आ रहे हैं। जैसे औरतों का अनुपात घटता जा रहा है। 1991 की जनगणना के अनुसार हरियाण राज्य में प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले में सिर्फ 865 महिलाएं थीं। 2001 की जनगणना के अनुसार ये संख्या 1000 पुरुषों की तुलना में और भी घटकर 820 रह गई। जब किसी राज्य में लड़कियों का अनुपात इस हद तक घट जाएगा और लड़कों की संख्या बढ़ जाएगी तो फिर इन राज्यों से जहाँ लड़कियों का अनुपात अधिक या जिन राज्यों में गरीबी है वहां से शादी करके लाना उनकी एक मजबूरी बन जाएगी। दूसरे राज्यों या क्षेत्रों में शादी करना भले ही कोई समस्या न हो लेकिन क्षेत्रीय तौर तरीके में अंतर होने के कारण कुछ न कुछ समस्याएं जरूर पेश आती हैं। खासकर उस वक्त इन परेशानियों में और अधिक इज़ाफा हो जाता है जबकि शौहर औरत पर जुल्म करता है। अगर बीवी इलाके की ही होती है तो उसके परिवार वाले इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं या अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके पति को नियंत्रण में रखते हैं इसलिए कभी कभी ये भी होता है कि पति इस डर से कि पत्नी के रिश्तेदार नाराज़ होंगे और बात बिगड़ जाएगी, इस तरह के किसी काम से दूर रहते हैं। लेकिन वो बीवियाँ जो दूसरे राज्यों की रहने वाली होती हैं और जिनका कोई हाल लेने वाला नहीं होता, वो खामोशी से पतियों के ज़ुल्म व सितम को सहती रहती हैं। मगर राज्यों या दूरदराज के क्षेत्रों से शादी के बढ़ते चलन का एक पहलू ये भी है इस तरह क्षेत्रों की अपनी संस्कृति और समाज प्रभावित हो रहा है। तौर तरीके और परंपराओं के अलग अलग होने के कारण वैवाहिक जीवन में कई तरह की उलझनें भी पैदा हो रही हैं। कई बार लड़कियों को क्षेत्रीय घृणा पर आधारित ताने भी सुनने पड़ते हैं। इसके अलावा दूसरे वो सभी संभावित कारण जिनकी वजह से लिंग अनुपात में असंतुलन की स्थिति पाई जा रही है उन पर भी गहराई से विचार किया जाना चाहिए। मर्द व औरत की रचना की व्यवस्था अल्लाह के हाथों में है अगर इंसान इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश करेगा तो यह उसकी मौत का सामान होगा।

4 जनवरी, 2013, स्रोत: इंक़लाब, नई दिल्ली

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