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Hindi Section ( 9 March 2018, NewAgeIslam.Com)

A Candle for Ankit अंकित के नाम एक श्रद्धांजलि

 

 

 

तीस्ता सेतलवाड़

6 फरवरी, 2018

अंकित को पश्चिमी दिल्ली के खयाला क्षेत्र में गुरुवार की रात कथित तौर पर एक लड़की के खानदान के लोगों ने क़त्ल कर दिया जिसके साथ उसके संबंध थेl

अपने आप में बिलकुल अलग होने के बावजूद यह हिंसा और आतंकवाद का एक कार्य थाl जब 23 वर्षीय अंकित सक्सेना को कुछ दिन पहले उसके बचपन के प्रिय के खानदान के मोम्बरों के साथ एक विवाद के बाद क़त्ल कर दिया गया थाl इसके बाद भाजपा के मनोज तिवारी और बजरंग दल ने हमेशा की तरह शत्रुता पर आधारित संदेह के तीर चलाए लेकिन, सार्वजनिक तौर पर “सेक्युलरिज्म” और “धार्मिक उदारवाद” के प्रशंसकों की एक परेशान कर देने वाली खामोशी फैली रहीl

अंकित के क़त्ल को व्यक्तिगत अत्याचार और धर्म ज़ात पात के नाम पर संगठित और नियोजित हत्या से अलग करार दे कर इस खामोशी के कारण पैदा होने वाले जुर्म के एहसास को कम करना आसान होगाl अंकित कि मौत को “सेक्युलरिज्म और संविधान खतरे में है” जैसे अफ़सानों से भी अलग रखा जा सकता हैl चेतावनी की घंटियां बजाने की कोई जरूरत नहीं हैl “लव जिहाद” अफ़साने के हलाकत अंगेज़ हामियों के लिए यह मामला बिलकुल उलटा है, जिसमें एक हिन्दू नवयुवक लिप्त है जो मज़लूम हैl गहरी साम्प्रदायिक बटवारे के दोनों ओर के लिए इसकी प्रतिक्रिया साझा है: साम्प्रदायिक अंतर की गहरी खाई, नवयुवकों की कम जम्हूरियत साजी और पूर्ण रूप से साझा का अभावl क्या अंकित और उसके खोए हुए प्यार के लिए एक दीपक भी प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है?

यह बड़े आश्चर्य की बात है कि 20 वर्षीय मुस्लिम लड़की को अभी तक कोई दोस्त नहीं मिला है, क्योंकि वह अपने खानदान के हिंसा और घृणा का एक और शिकार बन रही हैl उसने पुरे हिम्मत के साथ इस जुर्म में संभावित रूप से शामिल अपने सभी रिश्तेदारों को नामज़द कर दिया है और बड़े सदमे की हालत में हैl पुलिस ने कहा है कि उसकी ज़िंदगी खतरे में हैl कम से कम अब तक वह अकेले ही इस लड़ाई को लड़ रही है, और साफ़ है कि अगर उसे उसके खानदान और समाज पर ही छोड़ दिया गया तो उसे स्वायत्तता, स्वतंत्र निर्णय और प्रेम से वंचित जीवन गुज़ारने पर मजबूर किया जाएगाl विडंबना यह है कि 16 वर्षीय उसके छोटे भाई को उसकी जासूसी पर नियुक्त कर दिया गया था जो उसके फोन काल और मैसेजेज़ की निगरानी कर रहा थाl

जी हाँ, वह एक मुसलमान है और हमें बताया गया है कि संभावना यह हैं उसके मुसलमान बाप और चाचा ने मिल कर अंकित का यह हश्र किया थाl यकीनन हालाँकि वह आतंकवाद का एक व्यक्तिगत कार्य था, लेकिन उसका अंजाम हिंसक, साम्प्रदायिक और नाक़ाबिल सुलह हैl इसलिए कि एक लड़की की स्वत्व अधिकार की स्वतन्त्रता सभी सीमाओं से उपर हैl जब कानून और संविधान के सामने जीवन और स्वतन्त्रता के सुरक्षा की बात आती है तो हम “सेक्युलरिज्म” की बात कर सकते हैं, (और खुदा ही जनता है कि आज के भारत में उनकी कैसी चिंताजनक हालत है)l

अंकित और उसके बचपन के प्यार ने एक दुसरे के साथ खेले और सपने देखे, क्योंकि वह पश्चिमी दिल्ली के एक मिले जुले पड़ोस रघुबीर नगर की सड़कों और गलियों पर पले और बड़े हुए थेl उनकी उल्फत और मुहब्बत जो कि घातक साबित हुईl उस समय भी कायम रही जब उस लड़की का खानदान दूसरी जगह पलायन कर गया, शारीरिक दूरी इस रिश्ते को समाप्त नहीं कर सका जिसे एक शहरी, सेक्युलर माहौल ने परवान चढ़ाया थाl अखबार के रिपोर्ट हमें यह बताते हैं कि वह अगले महीने अंकित के जन्मदिन पर कोर्ट में शादी की योजना बना रहे थेl अब इस प्रकार की एक त्रासदी पेश आ जाने के बाद बजरंगदल जैसी हिंसक समूह ने लड़की के खानदान को आर्थिक तौर पर और भी कमज़ोर कर दिया है: हिन्दू-मुस्लिम की मिली जुली आबादी वाले पड़ोस के मोहल्ले में चलने वाली एक ब्यूटी पार्लर को कथित तौर पर उसके मकान मालिक विनोद कुमार को पश्चिमी दिल्ली में बजरंगदल मुखिया जगजीत सिंह गोल्डी की ओर से धमकी दिए जाने के बाद जबरन बंद करवा दिया गया था जिसे उस मुस्लिम लड़के की खातून रिश्तेदार चलाती थीl अब स्तिथी यह है कि उसके खानदान के दुसरे लोग “मीडिया में बदनामी” से बचने के लिए अपने पैतृक राज्य उत्तर प्रदेश वापस होने पर मजबूर हैंl

अंकित के पिटा यशपाल सिंह ने राजनीतिज्ञों और मीडिया को इस मामले पर राजनीति ना करने की अपील की हैl कुछ इलेक्ट्रानिक मीडिया के कवरेज पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि “हमने अपना बेटा खोया हैl हम किसी भी बिरादरी के खिलाफ नहीं हैं”l

एक आलोचक राजनितिक दार्शनिक बाबा साहब अम्बेडकर ने ज़ात पात पर आधारित पृथक्करण और भेदभाव के अंत को सुनिश्चित बनाने के लिए धर्मों के बीच और बिरादरियों के बीच शादियों के बारे में लिखा और उनहे बढ़ावा देने की बात कीl

सामजिक और धार्मिक महज़रात के खिलाफ आयोजित होने वाली शादियाँ हमें उन नए रास्तों से परिचित करते हैं जिनका खाका उन्होंने पेश किया थाl उन्होंने इससे कुछ कदम और आगे बढ़ कर यहाँ तक कहा कि बराबरी और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों पर चाल रहे राज्यों को इस तरह के एकता, साझेदारी को बढ़ावा देना जरुरी हैl

इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इस समय महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में सरकार इस तरह के गैर पारंपरिक एकता की हौसला अफजाई करती हैl

क्या धर्मों के बीच शादियों और भागीदारी में भी इस सिद्धांत को लागू किया जाएगा या किया जाना चाहिए? साम्प्रदायिकता के राक्षस को वास्तविक अर्थ में हार देने के लिए विभिन्न बिरादरियों के नवयुवकों के बीच शादी और भागीदारी को एक हरा, सेक्युलर और प्रगतिशील सिग्नल देना आवश्यक हैl लेकिन हम आज ना केवल यह कि इस विषय पर बहस का कोई हवाला नहीं पते बल्कि हम अंकित के हत्या पर एक सोची समझी आपराधिक खामोशी और बेचैनी का अवलोकन भी कर रहे हैंl

संवैधानिक मूल्यों और सेक्युलरिज्म के लिए संघर्ष अब केवल भीड़, शारीरिक और वास्तविक के बीच अधिकार तक सीमित कर दी गई हैl इस भीड़ की कई बीज कई दहाइयों के बीच बोई गई है जिसका कारण अल्पसंख्यकों के विरुद्ध योजनाबद्ध हिंसा और अत्याचार हैl इस भीड़ के अंदर बराबरी के लोगों के बीच इंटरेक्शन सीमित है और यहाँ तक कि उनको कंट्रोल भी किया जाता हैl एक जीवित सेक्युलरिज्म के लिए हमारा संघर्ष लगभग पूर्ण रूप से दम तोड़ चुका है, सार्वजनिक स्थानों पर स्वतन्त्रता को बहाल करने और भीड़ को खत्म करने के लिए एक दोहरी शक्ति के सात संघर्ष प्रारम्भ करना आवश्यक है जो कि हमेशा खतरे से भरा हुआ हैl

दिल्ली की उन सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों का साझा किया जाना चाहिए जहां अंकित और उसकी खोई हुई मुहब्बत ने अपना लड़कपन गुज़ारा जहां उनके रिश्ते मजबूत हुए और जिनमें एक मजबूत और फलते फूलते सेक्युलरिज्म का हमारा सपना परवान चढ़ा हैl जैसा कि दुसरे स्थानीय निवासी अब भी विविध और अलग हिन्दुस्तानी समाजी माहौल में जीवन व्यतीत करते हैंl वास्तविक सेक्युलरिज्म को खुद उसकी चिंगारियों से दुबारा प्रकाशमय करने के लिए संघर्ष का यह काल्पनिक और रचनात्मक योजना बहुत आवश्यक हैl

स्रोत:

indianexpress.com/article/opinion/columns/ankit-saxena-murder-west-delhi-hindu-muslim-love-secularism-5052722/

URL for English article: http://www.newageislam.com/current-affairs/teesta-setalvad/a-candle-for-ankit/d/114174

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/teesta-setalvad,-tr-new-age-islam/a-candle-for-ankit--انکت-کے-نام-ایک-خراج-محبت/d/114377

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/teesta-setalvad,-tr-new-age-islam/a-candle-for-ankit--अंकिता-के-नाम-एक-श्रद्धांजलि/d/114539

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