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Hindi Section ( 17 May 2022, NewAgeIslam.Com)

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Plight of Being a Hindu Player in Pakistani Cricket Team पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में हिन्दू खिलाड़ियों की बुरी हालत

सुमित पाल, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

9 मई 2022

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में एक हिन्दू खिलाड़ी की बुरी हालत पर कोई हमदर्दी ही ज़ाहिर कर सकता है। जी हाँ, आपने सहीह अंदाजा लगाया है। मैं दानिश कनेरिया की बात कर रहा हूँ, जो एक पाकिस्तानी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर के तौर पर और (विशेषतः) एक हिन्दू खिलाड़ी के तौर पर सफल रहे, जिन्होंने पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट खेले।

दानिश कनेरिया ने आरोप लगाया था कि क्रिकेट से पाबंदी के बाद पी सी बी ने उनकी कोई सहायता नहीं की।

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उनसे पहले दानिश के चचेरे भाई दलपत भी पाकिस्तान के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं। अब कनेरिया ने शाहिद आफरीदी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मुझे डराया और इस्लाम कुबूल करने पर मजबूर किया। यह कुछ नया नहीं है। एक ईसाई यूसुफ योहाना अपनी पेशेवराना जिंदगी को बाकी रखने के लिए जबरदस्ती मोहम्मद यूसुफ बन जाता है। पाकिस्तान के डॉन ने इशारा किया कि अगर उसने इस्लाम कुबूल नहीं किया होता तो उसे भी इसी तरह टीम से बाहर कर दिया जाता जैसे वाल्स मिथ्यास, डंकन शार्प और सुअहिल फज़ल जैसे तमाम ईसाई क्रिकेटरों के साथ हुआ। लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास पर नज़र डालें।

यहाँ बहुत सारे शानदार मुस्लिम क्रिकेटर टेस्ट टीम के हिस्सा बनें और देश का नाम रौशन किया। मंसूर अली खान पटौदी जूनियर, सलीम दुर्रानी, गैरी सोबर्ज़, मुश्ताक अली, अब्बास अली बेग, मोहम्मद अज़हरुद्दीन, आबिद अली, पठान बिरादरान जैसे इस कुछ नामों को कौन भूल सकता है? लेकिन पाकिस्तान का मामला बिलकुल अलग है। देश की गंदी राजनीति की तरह यहाँ क्रिकेट टीम पर भी धर्म (अर्थात इस्लाम) का पूरा कंट्रोल है।

बहुत पहले, कुछ पाकिस्तानी उर्दू अखबारों ने ऑफ़ रिकार्ड उल्लेख किया था कि न केवल आफरीदी, बल्कि कुछ दुसरे पाकिस्तानी क्रिकेटर भी कनेरिया का मज़ाक उड़ाते थे और उसे काफिर कहते थे। पाकिस्तानी उर्दू अखबार अज़कारने यह भी कहा कि दिनेश खुद को मुसलमान ज़ाहिर करने के लिए दानिश (अरबी में अक्लमंद; ज़हीन) बन गया, हालांकि दानिश कनेरिया ने हमेशा इसकी तरदीद की। पाकिस्तान में हिन्दू काफिर हैं और आपको मालुम होगा कि मराठा सल्तनत और दुर्रानी अफगान सल्तनत की हमला आवर फ़ौज के बीच 14 जनवरी 1761 को पानी पट की तीसरी जंग में फतह पाने वाले मरहटों की बदकिस्मत औलादें अब भी पाकिस्तान में हैं।

Vintage Pakistan - Salim Malik, Rameez Raja and Anil Dalpat in 80's Courtesy : Shoaib Ahmed / Moin Ahmad | Facebook

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इनमें से अक्सर लोगों ने जिंदा रहने के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया। जिन्होंने इस्लाम कुबूल नहीं किया उन्हें पाकिस्तानी जेलों में सफाई करने और जल्लाद के काम में लगा दिया गया। पाकिस्तान के एक इंसान दोस्त एयर चीफ मार्शल नूर खान ने उस वक्त की पाकिस्तान सरकार को ख़त लिखा कि सरकार बुरी तरह से हारी मराठों की इन बदकिस्मत औलादों की सामूहिक हालत को बेहतर बनाने के लिए कुछ करे, जिनमें से बहुत से लोग पाकिस्तान के स्टाफ कालेज में शौचालय साफ़ करने के काम पर नियुक्त हैं। एक मुस्लिम राज्य में गैर मुस्लिमों के साथ यह ना रवा सुलूक असल में इस्लाम के दामन पर एक बदनुमा दाग है। लेकिन हमेशा की तरह पाकिस्तान ने इसका खंडन किया है।

English Article: Plight of Being a Hindu Player in Pakistani Cricket Team

Urdu Article: Plight of Being a Hindu Player in Pakistani Cricket Team پاکستانی کرکٹ ٹیم میں ہندو کھلاڑیوں کی حالت زار

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/hindu-player-pakistani-cricket-team/d/127028

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