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Hindi Section ( 27 Sept 2012, NewAgeIslam.Com)

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Cyber-Terrorism and Freedom of Expression साइबर आतंकवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: सुल्तान शाहीन का संयुक्त राष्ट्र से इंटरनेट गवर्नेंस को नया स्वरूप देने की मांग

 

RADDHO और उसके साथी संगठनों द्वारा आयोजित एक समानांतर गैर-सरकारी संगठन की बैठक, जो संयुक्त राष्ट्र के पैलेस डि नेशंस में 25 सितम्बर, 2012 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, जिनेवा के 21वें नियमित सत्र के दौरान रूम संख्या XXIII में आयोजित क गई।

विषय: अनुच्छेद 19, अभिनव्यक्ति की स्वतंत्रता और साइबर सुरक्षा, मानवाधिकार मुद्दों के लिए एक चुनौती

सुल्तान शाहीन, एडिटर, न्यु एज इस्लाम

25 सितम्बर, 2012

अध्यक्ष महोदय, पैनल में शामिल साथियों और दोस्तों

मैं न्यु एज इस्लाम के नाम से एक वेबसाइट चलाता हूं, जो www.newageislam.com पर उपलब्ध है। इस वेबसाइट का उद्देश्य साइबर जगत में उग्रवाद से लड़ना है। वो साइबर दुनिया जहां इसके प्रारम्भ से ही विभिन्न विचारों वाले चरमपंथियों और कट्टरपंथियों की गतिविधियां जारी हैं। जहां तक ​​इस्लामी कट्टरपंथियों का संबंध है, तो उनके पास संसाधनों की कमी नहीं है और विशेषकर पेट्रोडालर से प्राप्त संसाधनों की वजह से उन्हें साइबर जगत में भारी लोकप्रियता हासिल है। लेकिन इंटरनेट पर उपलब्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कारण ये संभव हो सका है कि न्यु एज इस्लाम जैसी एक छोटी सी वेबसाइट संसाधन की कमी के बावजूद इन कट्टरपंथियों के घरों में भी अपना पैग़ाम पहुंचा रही है। हम अपना संदेश मुसलमानों तक पहुंचाने की कोशिश करते, विशेष रूप से मुस्लिम नौजवानों तक, ताकि कहीं वो वहाबी और सल्फ़ी संकीर्ण विचारधारा के जाल में न फंस जाएं जो मुसलमानों को दूसरे वर्गों से बिल्कुल अलग कर देना चाहते हैं। इस चरमपंथी विचार को बढ़ावा देने के लिए वो हमें एक के बाद एक विवाद में उलझाए रखना चाहते हैं। मैं इसको एक नवीनतम उदाहरण से स्पष्ट करना चाहूंगा। पिछले दिनों बर्मा (म्यांमार) में कुछ रोहिंग्या मुसलमान मारे गए, लेकिन इससे संबंधित स्थिति और तथ्य स्पष्ट नहीं थे। लेकिन जिहादी विचारधारा रखने वाली वेबसाइटों ने इस विषय को वैश्विक मुसलमानों और बौद्धों के बीच विवाद पैदा करने के लिए खूब तूल दिया। साइबर मीडिया में कृत्रिम तस्वीरें और भड़काऊ वीडियो प्रदर्शित करके इसका उपयोग बौद्धों के खिलाफ नफ़रत और हिंसा फैलाने के लिए किया गया। यहूदियों, ईसाइयों और हिन्दुओं के बाद अब ये जिहादी चाहते हैं कि मुसलमान बौद्धों से भी मुकाबला करें।

पिछले महीने जब असम में हिंसा भड़क उठी थी, तो साइबर मीडिया द्वारा कृत्रिम तस्वीरें और भड़काऊ वीडियो का ठीक इसी तरह  से इस्तेमाल किया गया। बेंग्लोर और अन्य दक्षिण भारतीय शहरों में ये अफवाहें फैला दी गईं कि जल्द ही दक्षिण भारत में रहने वाले उत्तर पूर्व के भारतीयों पर हमले होने वाले हैं। यह सब एक संगठित योजना के तहत किया गया और इसमें वेबसाइट्स, सोशल नेटवर्किंग साइटों, फ्री एसएमएस सर्विस आदि का इतना इस्तेमाल किया गया कि लगभग तीस हजार पूर्वोत्तर भारतीय नागरिक अपनी जान बचाने के लिए दो तीन दिन के अंदर ही दक्षिण भारत से अपने घरों को रवाना हो गए। बाद में पता चला कि इसके पीछे लश्कर जैसे जेहादी संगठनों का हाथ था।

हालांकि भारत सरकार ने इसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुछ वेबसाइटों और ब्लाग्स पर कुछ दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कई भारतीय बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ भी बताया। इस संबंध में सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन पर किए गए पैनल डिस्कशन के दौरान मैंने अपने आप को ये कहने में अकेला पाया कि सरकार के पास आपातकालीन स्थिति में हस्तक्षेप करने की शक्ति और सामर्थ्य होना चाहिए। क्योंकि बात सिर्फ इतनी नहीं है कि आतंकवादी तत्व साइबर मीडिया का दुरुपयोग कर हमारे समाज में जातीय हिंसा या सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देना चाहते हैं, या ये कि भय और आतंक फैलाना चाहते हैं जैसा उन्होंने बेंग्लोर में किया, बल्कि ये है कि हमारे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे या रक्षा संसाधनों पर हमला कर सकते हैं। कुछ महीने पहले, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर साइबर स्पेस के द्वारा आने वाले कंप्यूटर वायरस से हमला किया गया था, जिनके स्रोत का अभी तक पता नहीं है। जहाँ तक हमारी जानकारी है, ये परमाणु प्रतिष्ठान हथियार नहीं बना रहे थे। लेकिन अगर उन पर इस तरह से आज हमला किया जा सकता है तो फिर कल हथियार बनाने वाले परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की आशंका है। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि इस तरह के हमले कितने विनाशकारी और जानलेवा साबित होंगे।

इससे ये स्पष्ट है कि आज दुनिया की सुरक्षा को साइबर स्पेस से खतरा है। एक तरफ इंटरनेट इतना उपयोगी साबित हुआ कि इसने पूरी दुनिया को एक वैश्विक गांव में तब्दील कर दिया, कम से कम अरबों की संख्या में नेटीज़न्स (इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोग) को जरूर एक गजह इकट्ठा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर उसके अंदर विश्व शांति के लिए खतरा बनने की भी क्षमता मौजूद है।

बंग्लौर में साइबर स्पेस के द्वारा फैली अफ़वाहों के परिणामस्वरूप होने वाली तबाही के बारे में भारतीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि, मैं अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बार बार कहता रहा हूं कि वो साइबर आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए एक प्रभावी नीति खोजें

लेकिन बहुत से विशेषज्ञों को इसमें संदेह है। उनका मानना ​​है कि इस तरह प्रभावी नीति तब तक खोजी नहीं जा सकती जब तक कि विश्व इंटरनेट गवर्नेंस की समस्याएं हल न हो जायें। इस समय 13 रूट सर्वर में से 10 संयुक्त राज्य अमेरिका में, दो यूरोप में और एक जापान में स्थित है। ऐसा होना स्वाभाविक था, क्योंकि इंटरनेट को अमेरिका में तैयार किया गया था और उसका विकास भी सबसे पहले विकसित देशों में ही हुआ। लेकिन विकासशील देशों, जहां उपयोगकर्ता लाखों की संख्या में पाए जाते हैं और जिनकी सुरक्षा को साइबर स्पेस से गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है, इंटरनेट गवर्नेंस में कोई वास्तविक भूमिका न होने की वजह से वो स्थिति से निपटने में असमर्थ हैं।

लेकिन, विश्व इंटरनेट गवर्नेंस की समस्या केवल सरकारों ही के लिए महत्व नहीं रखता, बल्कि आम उपभोक्ता और वेबसाइटों के मालिकों को भी कई जोखिमों और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि चार सालों से मैं खुद एक वेबसाइट चला रहा हूँ इसलिए इस संबंध में मैं अपना अनुभव बताते हुए यह कहने में सही हूं कि हम लोग बहुत ही नाजुक जीवन जी रहे हैं। मेरी तरह बहुत से ऐसे ब्लागर्स और वेबसाइट मैनेजर्स हैं जो विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखते हैं, इसलिए कई लोग इनके विरोधी नहीं बल्कि दुश्मन बन जाते हैं, और उनकी वेबसाइटों को समाप्त करने की इच्छा रखते हैं। लेकिन आखिर उनके लिए ऐसा करना इतना आसान क्यों होता है? धमकियाँ तो बहुत से लोगों की तरफ से आती रहती हैं। न्यु एज इस्लाम को कई बार इसके दुश्मनों ने हैक किया है और इसको खत्म करना चाहा है। हमारे दुश्मन लोग, शायद जिहादी लोग, विशेष रूप से हमारे न्यूज़लेटर के पीछे पड़े हुए हैं जो हर दिन लगभग साढ़े तीन लाख सबस्क्राइबर्स के पास पहुंचता है। हमारे न्यूज़लेटर के सबस्क्राइबर्स ईमेल आईडी कभी भी डिलीट की जा सकती है, जैसा कि न्यु एज इस्लाम को एक ही दिन में तीन बार इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। ये हैं हमारी सुरक्षा से जुड़ी समस्यां। जिनसे निपटने के लिए हमें सही प्रक्रिया और संसाधन का चयन करना होगा।

इसके अलावा, हमें कुछ ऐसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है, जिनका संबंध प्रत्यक्ष रूप से इंटरनेट गवर्नेंस से है। न्यु एज इस्लाम को इस तरह की कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, हमारे डोमेन नेम को किसी नोटिस या जांच के बिना निलंबित किया जा सकता है, और ऐसा उस वक्त होता है जब कोई व्यक्ति डोमेन रजिस्ट्रार को बिल्कुल झूठी शिकायत भेज देता है। इसी तरह वेब साइट होस्ट हमारे संचालन को निलंबित कर सकता है, जैसा कि न्यु एज इस्लाम कई बार इसकी चपेट में आ गया है,  और इसके पीछे इसी प्रकार के बिल्कुल झूठे और निराधार आरोप थे। दरअसल डोमेन रजिस्ट्रार या वेबसाइट होस्ट का कहना है कि वो शुद्ध व्यापारिक संगठन हैं, इसलिए वो अनावश्यक बातों में नहीं पड़ना चाहते है। वो ये भी कहते हैं कि चूंकि उनके पास ऐसे लोग नहीं हैं जो शिकायतों की समीक्षा कर सकें, इसलिए उनके लिए ज्यादा आसान काम है कि जब भी कोई शिकायत दर्ज हो तो वो इस पर एक्शन लेते हुए वेबसाइट को बंद कर दे। इसलिए जब मैंने अपने डोमेन रजिस्ट्रार से कहा कि वह कम से कम शिकायत को एक बार पढ़ लें जो मुझे उन्होंने बिना पढ़े फॉरवर्ड कर दिया है, तो उन्होंने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि ''मेरे पास न तो तुमसे बहस करने का समय है और न ही अनावश्यक मेल पढ़ने का। लेकिन कुछ दिनों के लिए आपका डोमेन बहाल कर रहा हूँ, लेकिन आप अपना डोमेन किसी डोमेन रजिस्टर में अभी इसी समय स्थानांतरिक करवा लो' मैंने ऐसा ही किया, लेकिन मेरी वेबसाइट कई सप्ताह तक प्रभावित रही।

लेकिन जब मैंने इस बारे में ठंडे दिमाग से सोचा, तो मैंने पाया कि रजिस्ट्रार का इसमें दोष नहीं है। क्योंकि अगर आप इसके अर्थशास्त्र पर नज़र डालें, तो आपको पता चलेगा कि रजिस्ट्रार की बात में दम है। वो मुझसे डोमेन नेम के बदले 12 से 15 डॉलर सालाना लेता है। यानी हर साल मुझसे 5 से 7 डॉलर का लाभ प्राप्त करता है। अब आप ही सोचिए कि वह व्यक्ति मुझसे बहस करके कीमती समय भला क्यों गंवाएगा या मेरी वेबसाइट के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जाँच करा अपने संसाधनों को क्यों बर्बाद करेगा और इस तरह वो अपने व्यापार को दांव पर किस लिए लगाएगा? उस व्यक्ति का इसमें बिल्कुल भी कोई लाभ नहीं है, जबकि व्यापार हमेशा लाभ और हानि के सरल सिद्धांत पर चलता है। इसलिए, मुझे उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र की कमेटियाँ जब कभी भी इंटरनेट गवर्नेंस के बड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगी, तो इन मुद्दों पर भी अवश्य ध्यान देंगी जो लाखों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और वेबसाइट मालिकों से संबंध रखते हैं। बहरहाल, ये हम नेटीज़ंस (इंटरनेट का उपयोग करने वाले) हैं जिन्होंने इंटरनेट को सूचना राजमार्ग (इंफार्मेशन हाईवे) बना रखा है। इसलिए हमें खुद सुरक्षा की जरूरत है।

लेकिन क्या मैं ये सुझाव दे रहा हूँ कि ये काम सरकार को सौंप दिया जाये?

1987 में जब मैं एक साप्ताहिक प्रिंट पत्रिका शुरू कर रहा था, तो मुझे सिर्फ इसके नाम के लिए कई सप्ताह भारतीय अखबारों के रजिस्ट्रार के ऑफिस में क्लर्क के पीछे दौड़ना पड़ा था। उन दिनों नाम कई बातों का लिहाज़ करके आवंटित किए जाते थे। जब भी मैं कोई नाम चुनता तो अधिकारी कहते कि ये नाम पहले ही लिया जा चुका है। कोई कंप्युटराईज़्ड सिस्टम न होने के कारण उनके लिए हजारों की संख्या में रखी फाइलों को खंगालना बड़ा मुश्किल काम था।

इसके विपरीत, जब मैंने 2008 में एक वेबसाइट शुरू करना चाहा, तो एक सेकंड से भी कम समय में कंप्यूटर द्वारा नामों की छान बीन कर ली गई,  और प्रक्रिया में सरकारी लोगों तो दरकिनार कोई इंसान (जो गलतियों का पुतला है) शामिल नहीं था। इसलिए जब मुझे मेरा डोमेन नेम मिल गया और मुझे ये बताया गया कि में एक ग्लोबल आडियंस के लिए जो कोई लेख या ब्लॉग पोस्ट करना चाहूं कर सकता हूँ और जो कुछ लिखना चाहूँ तो, लिख सकता हूँ तो मुझे (आश्चर्य और खुशी के कारण) इस पर विश्वास नहीं हो रहा था। कई दिनों तक मैंने कुछ पोस्ट नहीं किया। (मैं इस आश्चर्य में गुम था कि) क्या कोई इतना महान काम सरकार के अमल दखल के बिना संभव हो सकता है?  यह मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी।

URL for English Article:

http://www.newageislam.com/islam,terrorism-and-jihad/sultan-shahin,-editor,-new-age-islam/cyber-terrorism-and-freedom-of-expression--sultan-shahin-asks-united-nations-to-redesign-internet-governance/d/8789

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/cyber-terrorism-and-freedom-of-speech--sultan-shahin-demands-un-to-re-design-internet-governance--سائبر-دہشت-گردی-اور-اظہاررائے-کی-آزادی---سلطان-شاہین-کا-اقوام-متحدہ-سے-انٹرنیٹ-گورننس-کو-دوبارہ-ڈیزائن-کرنے-کا-مطالبہ/d/8793

URL for this Article:  https://newageislam.com/hindi-section/cyber-terrorism-freedom-expression-/d/8802

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