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Hindi Section ( 2 March 2022, NewAgeIslam.Com)

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What Does the Quran Say About Re-birth or Re-incarnation आवागमन के बारे में कुरआन का दृष्टिकोण क्या है?

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

21 फरवरी 2022

आधुनिक रूहानी विकास के अनुसार, लोग अपने पिछले या भविष्य के जीवन में आगे बढ़ने में सक्षम हैं।

प्रमुख बिंदु:

1. पिछले जीवन का अनुभव अब एक वास्तविकता है।

2. हजारों लोगों ने अपने भूतकाल और भविष्य के जीवन को देखा है।

3. कर्मा जन्म से ही मनुष्य को परेशान करता है।

4. हमें अपने पिछले जन्मों से गैर मौरूसी गुण या दोष विरासत में मिलते हैं।

5. पिछले जन्म में हमारे कर्मा के कारण, हमारे परिवार के सदस्य, दोस्त या दुश्मन हमारे संपर्क में आते हैं।

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इंसान ने ज़मीन पर अब तक के अपने पुरे सफर में इल्म के क्षेत्र में बहुत विकास किया है। आधुनिक युग में इंसान ने न केवल उद्योग, विज्ञान और तकनीक के मैदान में विकास किया है बल्कि रूहानी मैदान में भी विकास किया है और रूहानियत भी अब उन बाबाओं या सूफियों की इजारा दारी नहीं रही जो जंगलों में जिंदगी बसर करते थे या पहाड़ों या खानकाहों में तनहाई का जीवन व्यतीत करते थे। रूहानी इल्म को सदियों से औलिया और सूफिया की अमानत समझा जाता था जिनका दावा था कि केवल वही खुदी या वजूद की हकीकत से अवगत हैं। जैसे जैसे इंसानी इल्म और तहज़ीब तरक्की करती गई, रूहानियत का इल्म भी तरक्की करता गया। आधुनिक युग में रूहानियत ने एक विज्ञान का रूप धारण कर लिया है और उसे रूहानी विज्ञान कहा जा सकता है।

चूँकि तसव्वुफ़ इंसान की नफ्सियाती काम से संबंधित है और एक रूहानी शख्सियत अपने दिमाग और अपनी नफ्सियात की तरबियत इस तरह करती है कि वह अपने शउर को दुनिया से ऊपर उठा कर अबदी नेमतों से लुत्फ़ अन्दोज़ हो सके, इसलिए इसे रूहानी नफ्सियात कहा जा सकता है। अब जबकि रूहानी नफ्सियात ने साइंस की शक्ल इख्तियार कर ली है, इसका अध्ययन और इसकी मश्क ऐसे पेशा वर अफराद कर रहे हैं जिनके अन्दर रूहानियत की तरफ झुकाव है और अब ज़िन्दगी, रूह और दिमाग के छुपे हुए पहलुओं को तलाश और उनका तजुर्बा किया जा रहा है।

लगभग सारे मजहबों ने रूह, ज़मीन पर इंसान की जगह और मौत के बाद की ज़िन्दगी जैसे मसले पर बात की है। हालांकि सारे मजहबों का मानना है कि मौत एक अनिवार्य वास्तविकता है, लेकिन मौत के बाद के मरहले पर उनके बीच थोड़ा मतभेद है। तमाम धर्म इस बात पर ज़ोर देते हैं कि रूह के सफर में मौत केवल एक वक्ती मरहला है और रूह नहीं मरती। यह केवल जिस्म को छोड़ देता है।

हालांकि हिन्दू मत का मानना है कि इंसान की रूह मौत के बाद मुंताकिल हो जाती है और दुसरे किसी इंसान, जानवर या कीड़े के जिस्म में दाखिल हो जाती है। इब्राहीमी मज़ाहिब और ख़ास तौर पर इस्लाम नकल मकानी या आवागमन के अकीदे का दावा नहीं करता है। इस्लामी नजरिया और अमल की बुनियाद किताब कुरआन पाक में आवागमन का ज़िक्र नहीं है। इसमें केवल यह खा गया है कि एक बार जब इंसान मर जाता है तो ज़मीन पर उसकी ज़िन्दगी में उसके आमाल की बुनियाद पर जहन्नम या जन्नत में जाना उसका मुकद्दर है। कुरआन ने कई आयतों में यह भी कहा है कि कयामत के दिन दुनिया ख़त्म हो जाएगी और उस दिन इंसानों का फैसला किया जाएगा और ज़मीन पर उनके आमाल के अनुसार उनकी अंजाम का फैसला किया जाएगा।

लेकिन कुछ आयतें ऐसी भी हैं जो कायनात की तखलीक और तहलील के एक न ख़त्म होने वाले तसलसुल की बात करती हैं। यह हिंदुओं के अकीदे के मुताबिक़ है कि हीरान्य गर्भ (ज़ातें बारी का जिस्मानी मज़हर) एक ख़ास मुद्दत के बाद तखलीक और तहलील होता रहता है जिसे कल्प कहते हैं। हीरान्य गर्भ का एक दिन लगभग 4.3 बीलियन साल है और यह एक सौ साल तक जिंदा रहता है। दिन भर के काम के बाद जब उसे नींद आती है तो प्रलय (कयामत) होती है। जब यह सौ साल बाद मरता है तो कायनात की मुकम्मल तहलील हो जाती है। यह ज़मीन 4.3 बीलियन साल पुरानी बताई जाती है जो कि हीरान्य गर्भ का एक दिन है।

चूँकि मुस्लिम अकीदे का मामला केवल कयामत और जहन्नम तक ही महदूद है, इसलिए इसमें कयामत से आगे की कोई बात नहीं मिलती। इसमें उन आयतों पर बहस नहीं की जाती जिनमें तखलीक और तहलील के तसलसुल का ज़िक्र है।

कुरआन मजीद में कई आयतें हैं जिनमें खा गया है कि तखलीक का एआदा किया गया है। कुछ आयतों का अनुवाद यहाँ नकल किया जाता है:

बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है (अल अनकबूत:19)

ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे (रूम:11)

इसी तरह कुरआन में ऐसी भी आयतें हैं जो कहती हैं कि यह कायनात एक निश्चित मुद्दत के लिए पैदा हुई है:

हमने तो सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है हिकमत ही से एक ख़ास वक्त तक के लिए ही पैदा किया है और कुफ्फ़ार जिन चीज़ों से डराए जाते हैं उन से मुँह फेर लेते हैं (अल अहकाफ: 3)

दोनों आयतें एक निश्चित मुद्दत के लिए तखलीक और तहलील की तकरार की बात करती हैं और उनमें कोई तजाद नहीं है बल्कि उनका संदर्भ अलग है।

एक और मसला इंसान की मौत के बाद रूहों की मुन्तकिली का है। हिन्दू और बुद्ध मत के मज़हबी फलसफे में, रूह एक ज़िन्दगी से दूसरी ज़िन्दगी में मुन्तकिल होती रहती है। इस अकीदे को आवागमन कहते हैं। इस फलसफे के मुताबिक़ पैदाइश और मौत नक्ल मकानी का चक्कर ही तमाम मसाइब की जड़ है। इसलिए इंसान को निर्वान या मोक्ष के हुसूल के लिए आवागमन के इस चक्कर को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। रूह पिछले जन्म में अपने आमाल के मुताबिक़ अच्छे या बुरे जिस्म में जन्म लेती है।

कुरआन आवागमन के बारे में क्या कहता है?

कुरआन मजीद की कम से कम एक आयत में यह मसला बयान हुआ है। आयत यह है:

हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं (60) कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते (61) और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते (62)” (अल वाकिया: 60-62)

कई तर्जुमा करने वालों ने इन आयतों का अनुवाद कद्रे मुख्तलिफ शब्दों में किया है लेकिन आयतों का मजमुई मफहूम एक ही है। पीकथाल और मोहसिन खान शब्द transfigure इस्तेमाल करते हैं जो transmigration से मिलता जुलता है।

इससे पता चलता है कि एक इंसान को खुदा किसी दुसरे वजूद में तब्दील कर सकता है। और उसकी रूह किसी दुसरे इंसान या किसी दूसरी हस्ती के जिस्म में खुदा के मंसूबे के मुताबिक़ हो सकती है। यहाँ तक कि अगर यह आयत रूहों की मुन्तकिली की तरफ भी इशारा करे तो भी यह कुरआन के उस मौकफ़ से मुत्सादुम नहीं है कि हर इंसान को उसकी पैदाइश में उसके आमाल की बुनियाद पर परखा जाए गा न कि उसकी तमाम पैदाइशों के जमा किये हुए आमाल की बुनियाद पर।

अब हम रूहानी साइंस के मैदान में होने वाली जदीद तरक्कियों की तरफ आते हैं। इस मैदान में काफी तरक्की हुई है। खास तौर पर, अब लोग माज़ी की ज़िन्दगी का तजुर्बा करने के काबिल हो चुके हैं, और रूहों की मुन्तकिली अब उनके लिए एक हकीकत है।कुछ रूहानी तकनीकों की मदद से लोग अपने अतीत या भविष्य की ज़िन्दगी में भी जाने के काबिल हैं जहां वह अपनी पिछली ज़िन्दगी में होने वाले कुछ घटनाओं का तसव्वुर करते हैं: जैसे उनका नाम क्या था, उनकी ज़िन्दगी में उनका शौहर या मां या दोस्त कौन था? और वह कैसे मरे, वह अपनी रूह को अपने जिस्म से उठते हुए देखते हैं। वह अपनी आने वाली ज़िन्दगी में भी जा सकते हैं और देख सकते हैं कि वह कहाँ और किस जिस्म में पैदा हुए हैं और उनके रिश्तेदार कौन हैं।

यह एक हकीकत बन चुकी है। अपनी माज़ी और मुस्तकबिल की ज़िन्दगी के अनुभवों के अनुसार इंसान एक जन्म में मुसलमान हुआ, मौजूदा जन्म में हिन्दू और आइन्दा जन्म में ईसाई। इसी तरह एक शख्स अपने पिछले जन्म में औरत था और अपने मौजूदा जन्म में एक मर्द, या मौजूदा जन्म में एक मर्द और आइन्दा जन्म में एक औरत है। इन माज़ी और मुस्तकबिल की ज़िन्दगी के अनुभवों के अनुसार एक और दिलचस्प हकीकत यह है कि औरत का बाप मौजूदा ज़िन्दगी में उसके शौहर के तौर पर जन्म लेता है या उसका बाप उसकी ज़िन्दगी में उसके बेटे के तौर पर जन्म लेता है। औरत का मौजूदा शौहर उसके आने वाले जन्म में उसका दोस्त होता है।

पिछली ज़िन्दगी के अनुभवों के दौरान लोग अपने मरने वाले रिश्तेदारों जैसे मां या बाप या सुसर या सास को देखने और उनसे बात चीत करने के काबिल भी होते हैं और मरने वाले की रूह यह बताती है कि उसने अपने बेटे के तौर पर जन्म लिया है या बेटी या भतीजे के तौर पर।

मिस्टर एन के शर्मा एक रेकी मास्टर हैं जिन्होंने 25000 से अधिक लोगों को उनकी पिछली ज़िन्दगी और भविष्य की ज़िन्दगी में जाने में मदद की है। भारत के मर्दों और औरतों के यह मौजूदा अनुभव रूहों की मुन्तकिली के तसव्वुर की तस्दीक करते हैं। यह तमाम लोग पढ़े लिखे लोग हैं अनपढ़ या अंधविश्वासी लोग नहीं।

मिस्टर एन के शर्मा जिन्होंने अपनी पिछली ज़िन्दगी देखी है, कहते हैं कि वह 3000 साल पहले तक की अपनी पैदाइश देख सकते थे। वह बुद्ध राहिब थे। फिर उन्होंने दक्षिण में एक हिन्दू राहिब के तौर पर जन्म लिया। वह तीन सौ साल पहले मुग़ल दौर में उर्दू के अदीब थे और एक जन्म में राजस्थान के एक मंदिर के पुजारी थे।

वह यह भी कहते हैं कि किसी के खानदान या उसके आस पास के तमाम लोग पिछले जन्म में कर्मा की वजह से मौजूदा जन्म में उसके राब्ते में आते हैं। वह उसकी पिछली ज़िन्दगी के दौरान या तो उसके खानदान के रुक्न, या दोस्त या दुश्मन या विरोधी के तौर पर उसके राब्ते में थे। उनका कहना है कि पिछले जन्म में जिन लोगों को उसने जाने अनजाने तौर पर देख लिया वह इस जन्म में उसके राब्ते में आए और किसी न किसी तरह उसे तकलीफ दी और फिर राब्ते से बाहर हो गए। एक खातून ने बताया कि जिस नर्स ने उसके पिछले जन्म में उसकी देख भाल की वह इस ज़िन्दगी में उसकी मां है। अपनी मां से अक्सर झगडा करने वाली खातून का कहना है कि उसके पिछले जन्म में मेरी मां मेरी पड़ोसी थी जिससे मेरा बहुत झगड़ा होता था। इसलिए उसने इस ज़िन्दगी में मां की हैसियत से जन्म लिया है ताकि वह एक मां के तौर पर मुझ पर गलबा हासिल कर सके और अपनी अपमान का बदला ले सके। मिस्टर शर्मा का यह कहना है कि जिन लोगों को आप ने पिछले जन्म में प्यार किया था और उनकी देखभाल की थी वह पिछले जन्म में जज़बाती बंधन की वजह से आपके खानदान में या इस जन्म में आप के राब्ते में वापस आते हैं।

इसी तरह की बहुत साड़ी घटनाएं हैं जिनसे हमें कर्मा के प्रभाव और रूह की मुन्तकिली के बारे में मालुम होता है।

अब कोई यह कह सकता है कि अतीत में तो जाया जा सकता है लेकिन भविष्य में कैसे जाया जा सकता है। जवाब यह है: ज़मान व मकान का एहसास माद्दी दुनिया की एक खुसूसियत है। आसमानी खुला में ज़मान व मकान मिट जाते हैं और वजूद एक वहदत के तौर पर नज़र आता है। मिसाल के तौर पर हम केवल सफहात को पलट कर ही किताब का आगाज़, वुस्त और इख्तिताम देख सकते हैं या हम किसी धागे या इससे मिलती जुलती चीज के दोनों सिरे और बीच को देख सकते हैं। इसलिए, वह रूह जो हाज़िर व नाज़िर है अतीत, भविष्य और वर्तमान को एक साथ देख सकती है। कुरआन में खुदा कहता है कि इंसान की ज़िन्दगी की तमाम लम्हात की तफ्सीलात---उसका माज़ी, हाल और मुस्तकबिल किताब में दर्ज हैं। इसलिए एक हमा गीर रूह एक ही समय में अतीत, वर्तमान और भविष्य सब को देख सकती है। बुद्ध मत के फलसफे के मुताबिक़, एक इंसान का शउर कई जन्मों से होता हुआ एक नदी की तरह बहता है इसलिए तमाम पिछली जिंदगियों की यादें इंसान के तहतुश शउर (अचेतन) में सुरक्षित हो जाती हैं। शउर का यह धारा केवल निर्वान के मरहले पर पहुंच कर रुकता है। इसलिए इंसान कुछ रूहानी तकनीकों को अपना कर अपने शउर के धारे को बेदार कर सकता है।

हज़ारों लोगों के अतीत की ज़िन्दगी का अनुभव यह बताता है कि इल्म का यह शोबा मज़ीद तरक्की करेगा और भविष्य में एक आम इंसान अपने अतीत और भविष्य को देख सकेगा। जैसा कि अहर आदमी को उसकी पिछली ज़िन्दगी का इल्म हो जाए गा, और कुरआन की मजकुरा बाला आयतें मोह्कमात हो जाएंगी जो अभी मुत्शाबेहात मालुम होती हैं। और इंसानों की पिछली ज़िन्दगी का अनुभव उसे बुरे कामों के खिलाफ एक तंबीह का काम देगा। वह यह जान लेगा कि उसकी पिछली ज़िन्दगी में उसके बुरे आमाल उसके लिए उसकी ज़िन्दगी में दुःख और तकलीफ का कारण बनें हैं। इसलिए उसे चाहिए कि वह अपनी रविश को दुरुस्त करे और अपनी इस्लाह करे ताकि वह एक और पैदाइशी मसाइब का शिकार न हो और कयामत के आखरी दिन जन्नत में जाए।

English Article: What Does the Quran Say About Re-birth or Re-incarnation

Urdu Article: What Does the Quran Say About Re-birth or Re-incarnation آواگون کے بارے میں قرآن کا نظریہ کیا ہے؟

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/quran-rebirth-reincarnation-modern-spiritual/d/126494

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