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Hindi Section ( 20 March 2022, NewAgeIslam.Com)

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The Virtue and Importance of Repentance इस्लाम में तौबा व इस्तिगफार की अहमियत व फ़ज़ीलत

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

20 दिसंबर 2021

इस्लाम में तौबा व इस्तिगफार की अहमियत व फ़ज़ीलत कुरआन व हदीस से साबित है। गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह से मुआफी मांगने से अल्लाह खुश होता है और अल्लाह बंदों के गुनाहों को बख्श देता है और उस पर अपनी रहमतों की बारिश करता है। कुरआन में कई मुकामात पर बंदों को इस्तिगफार करने और तौबा करने की तलकीन की गई है। खुदा बंदों से कहता है कि अपने गुनाहों के लिए मुझसे सच्चे दिल से मुआफी मांग लो तो मैं मुआफ कर दूंगा। कुरआन में नबियों ने अपनी कौम से तौबा व इस्तिगफार की तलकीन की।

हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने अपनी कौम से फरमाया

वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं। (हूद:53)

हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने भी अपनी कौम समूद से फरमाया।

सो गुनाह बख्शवाओ और तौबा करो उसकी तरफ।(हूद:61)

हज़रत शुएब अलैहिस्सलाम ने भी अपनी कौम मदयन वालों से फरमाया।

और इस्तिगफार करो और तौबा करो।(हूद:9)

इसलिए, इन आयतों से यह स्पष्ट होता है कि सारे नबियों ने अपनी अपनी कौम को शिर्क कुफ्र और दुसरे बुराइयों से तौबा करने और इस्तिगफार करने की तलकीन की और खुदा की तरफ लौट आने पर नेक अंजाम की खुशखबरी सुनाई।

खुदा कुरआन में यह भी कहता है कि जो कौम हमेशा तौबा करती है उस पर खुदा अज़ाब नाजिल नहीं करेगा। तौबा इस्तिगफार की यह बहुत बड़ी फजीलत है कि खुदा तौबा इस्तिगफार करने वाली कौम पर अज़ाब नाजिल नहीं करेगा। इसकी सबसे रौशन मिसाल हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की कौम है जिसने हज़रत यूनुस की शिक्षाओं पर अमल नहीं किया और गुनाहों पर अड़े रहे। उनकी सरकशी और नाफरमानी की वजह से हज़रत यूनुस ने उनके लिए अल्लाह से अज़ाब की बददुआ कर दी और उनसे कह दिया कि अगर उन लोगों ने तीन दिन में तौबा इस्तिगफार नहीं किया तो उन पर अल्लाह का अज़ाब नाजिल होगा।

उनकी कौम ने उनकी बददुआ पर ध्यान नहीं दिया। तीन दिन के बाद जब आसमान पर अज़ाब के आसार नमूदार हुए तो उन्होंने सच्चे दिल से गुनाहों और शिर्क व कुफ्र से तौबा कर ली। खुदा ने उनकी तौबा कुबूल कर ली और उन पर से अज़ाब टाल दिया।

खुदा कहता है कि जब बंदा तौबा अल नसूह करता है अर्थात सच्चे दिल से गुनाहों से तौबा करता है तो खुदा उसके गुनाहों को बख्श देता है। हालांकि खुदा यह भी कहता है कि तौबा की तौफीक भी वही देता है और तौबा इस्तिगफार भी खुदा की रहमत का इशारा है।

Urdu Article: The Virtue and Importance of Repentance توبہ ا ستغفار کی فضیلت و اہمیت

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/virtue-importance-repentance/d/126613

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