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Hindi Section ( 13 May 2019, NewAgeIslam.Com)

The entire universe sings hosanna to God पूरी कायनात खुदा को सजदा करती है



सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम

कुरआन खुदा का कलाम है और इसमें खुदा की वहदानियत और बड़ाई का बयान हैl खुदा की इस किताब में जाबजा खुदा की प्रशंसा की गई है और उसकी शक्तियों और विशेषताओं का उल्लेख किया गया हैl और इसके साथ ही इंसानों को खुदा के ज़िक्र और उसकी तस्बीह व तौसीफ की तलकीन की गई हैl कुरआन में खुदा के ज़िक्र की इतनी बार तलकीन की गई है की इससे खुदा के ज़िक्र की अहमियत का अंदाजा होता हैl यह कायनात खुदा की तखलीक है और कायनात की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी मखलूक उसकी ताक़त और हिकमत और उसके जमालियाती पहलु की जीती जागती तस्वीर मालुम होती हैl हर मखलूक का जिस्मानी और ज़हनी निजाम इतना पेचीदा है की उस पर गौर करने पर खुदा की हिकमत और ताक़त पर इंसान का दिमाग चकराने लगता हैl खुदा ने अपनी मख्लुकात पर गौर व फ़िक्र करने को भी ईमान का जुज़ ठहराया हैl और यह भी कहा है कि कुरआन के ज़िक्र से खाली दिल शैतान की आमाजगाह बन जाता हैl और गौर व फ़िक्र से खाली ज़हन व फ़िक्र से खाली ज़हन में मुज़िर और गन्दी बातें समा जाती हैंl खुदा की अजमत और उसकी नेमतें इस बात का तकाज़ा करती हैं की इंसान हर वक्त खुदा की ही याद में मगन रहे और उसकी नेमतों का शुक्रिया अदा करता हैl इसलिए कुरआन ऐसे लोगों को खुदा की रज़ा मंदी की बशारत देता है जो हर वक्त खुदा का ज़िक्र जली व ख़फी करते रहते हैं और कायनात में छिपी हुई खुदा की हिकमतों पर गौर करते रहते हैं:

“जो खड़े और बैठे और लेटे खुदा को याद करते और ज़मीन और आसमान की पैदाइश में गौर करते हैंl कि ऐ खुदा तूने इसको बे फायदा नहीं बनायाl” (आल ए इमरान: १९१)

कुरआन इंसानों को खुदा की अजमतों का ज़िक्र करते हुए यह बिंदु भी बयान करता है कि खुदा की अजमतों का एतेराफ ना केवल जानवर करते हैं बज़ाहिर गैर जानदार चीजें भी करती हैं क्योंकि उनको खुदा की हिकमत और ताक़त का अंदाजा हैl यह ज़मीन और आसमान, पेड़, पहाड़, चाँद, सूरज और कीड़े मकोड़े यहाँ तक कि साए भी खुदा को सजदा करते हैंl पंछी भी खुदा की हम्द व सना अपने अपने तरीके से करते हैं जो इंसानों की फहम से बालातर हैl

“क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं”l (अल हज: १८)

और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) (अल अम्बिया: ७९)

कुरआन यह भी कहता है कि फरिश्ते भी खुदा को सजदा करते हैं जो कि खुदा की एक महबूब और इताअत बरदार मखलूक हैंl

और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करतेl” (अन नहल: ४९)

कुरआन में और भी कई जगहों पर इस मफहूम की आयतें हैं जिनमें इंसानों को बताया गया है कि इस कायनात की सभी मख्लुकात चाहे वह जानदार हों या गैर जानदार खुदा को सजदा करती हैं, उसकी हम्द व सना करती हैं और उसके ज़िक्र में मशगुल रहती हैंl कुछ मख्लुकात तो रगबत और ख़ुशी से करती हैं और कुछ मख्लुकात जब्र व इक्राह से खुदा की इबादत व इताअत करती हैं क्योंकि वह खुदा की ताक़त के सामने मगलुब व मजबूर हैंl

“और आसमानों और ज़मीन में (मख़लूक़ात से) जो कोई भी है खुशी से या ज़बरदस्ती सब (अल्लाह के आगे सर बसजूद हैं और (इसी तरह) उनके साए भी सुबह व शाम (सजदा करते हैं)” (अल राअद:१५)

“जो जो चीज़ सारे आसमान व ज़मीन में है सब ख़ुदा की तसबीह करती है और वही ग़ालिब हिकमत वाला है”l (अल हदीद:१)

“क्या उन लोगों ने ख़ुदा की मख़लूक़ात में से कोई ऐसी चीज़ नहीं देखी जिसका साया (कभी) दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ पलटा रहता है कि (गोया) ख़ुदा के सामने सर सजदा है और सब इताअत का इज़हार करते हैं”l (अन नहल: ४८)

“सातों आसमान और ज़मीन और जो लोग इनमें (सब) उसकी तस्बीह करते हैं और (सारे जहाँन) में कोई चीज़ ऐसी नहीं जो उसकी (हम्द व सना) की तस्बीह न करती हो मगर तुम लोग उनकी तस्बीह नहीं समझते इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा बुर्दबार बख्शने वाला है”l (अल इसरा: ४४)

यह कहने से कुरआन का उद्देश्य इंसानों पर खुदा की अजमत और हक्कानियत को स्पष्ट करना है कि जब खुदा की अदना से अदना मखलूक भी खुदा की हिकमत उसकी ताक़त और उसकी हक्कानियत को तस्लीम करती है और उसकी हम्द व सना करती है तो फिर इंसान जिसे खुदा ने अशरफुल मख्लुकात का दर्जा दिया है वह क्यों ना खुदा की तस्बीह व बंदगी करे जब कि खुदा ने उसे अकल व दानिश अता किया है जिसकी मदद से वह खुदा की ताक़त व कुव्वत और उसकी हिकमत को उनसे बेहतर तौर पर समझ सकता हैl अल्लाह ने इंसान को गौर व फ़िक्र और इजाद व दरयाफ्त की सलाहियत भी अता की हैl खुदा की यह कायनात में खुदा की हिकमतों के ऐसे ऐसे नमूने मौजूद हैं कि अगर इंसान उनकी तफसील लिखने बैठे तो क़यामत तक उसकी हिकमत की बातें ख़तम ना होंl अगर वह तमाम दुनिया के समन्दरों को स्याही बना ले और जमीन के सभी दरख्तों के कलम बना ले तो भी खुदा की बनाई हुई इस कायनात की सभी तफ्सीलात को कलमबंद करना इंसान के लिए असंभव होगाl बल्कि अगर वह और भी सात समंदर ले आए और उनके पानी को स्याही बना ले तो भी खुदा की कायनात की तफसील ना लिख सके क्योंकि सभी मख्लुकात की सिफात असल में खुदा की सिफात व हिकमत का पर तौ हैंl

“(ऐ रसूल उन लोगों से) कहो कि अगर मेरे परवरदिगार की बातों के (लिखने के) वास्ते समन्दर (का पानी) भी सियाही बन जाए तो क़ब्ल उसके कि मेरे परवरदिगार की बातें ख़त्म हों समन्दर ही ख़त्म हो जाएगा अगरचे हम वैसा ही एक समन्दर उस की मदद को लाँए”l (अल कहफ़: १०९)

“और जितने दरख्त ज़मीन में हैं सब के सब क़लम बन जाएँ और समन्दर उसकी सियाही बनें और उसके (ख़त्म होने के) बाद और सात समन्दर (सियाही हो जाएँ और ख़ुदा का इल्म और उसकी बातें लिखी जाएँ) तो भी ख़ुदा की बातें ख़त्म न होगीं बेशक ख़ुदा सब पर ग़ालिब (और) दाना (बीना) है”l

खुदा की हम्द व सना और उसकी तस्बीह को कुरआन ने सबसे बड़ी इबादत करार दिया हैl क्योंकि खुदा की इबादत करने वाला तो कुछ विशेष क्षणों में खुदा को याद करता है और उसका उल्लेख करता है मगर खुदा का ज़िक्र करने वाला हर समय जली और खफी तौर पर खुदा को याद करता रहता हैl बल्कि जब वह फितरत के खुबसूरत दृश्यों पर नज़र करते हुए खुदा की हिकमत पर दिल ही दिल में खुश होता है और दिल ही दिल में खुदा की कुदरत का एतेराफ करता है तो उस समय भी असल में वह खुदा का ज़िक्र ही कर रहा होता हैl कुरआन ने ज़िक्र को इस आयत में सबसे बड़ी इबादत कहा हैl

“ख़ुदा की याद यक़ीनी बड़ा मरतबा रखती है” (अल अनकबूत: ४५)

इसलिए, उपर्युक्त अध्ययन से यह बात साफ़ हो जाती है कि पूरी कायनात ए खुदा की हम्द व सना करती है और कायनात की हर मखलूक अपने अपने तरीके से खुदा की हम्द व सना करती हैं और उसको सजदे करती हैl इसलिए इंसान को भी कुरआन यह तलकीन करता है कि अशरफुल मखलुकात होते हुए उस पर भी यह फर्ज हो जाता है कि वह हर समय खुदा का ज़िक्र बुलंद आवाज़ में या खामोशी से करता रहे और खुदा की बंदगी का हक़ अदा करता रहेl खुदा की नेमतों पर उसका शुक्र अदा करना भी उसके ज़िक्र में शामिल हैl

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URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/s-arshad,-new-age-islam/the-entire-universe-sings-hosanna-to-god--पूरी-कायनात-खुदा-को-सजदा-करती-है/d/118583

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