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Hindi Section ( 27 Jan 2022, NewAgeIslam.Com)

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Loudspeakers Laws Introduced By Saudi Government Should Serve As A Lesson सऊदी सरकार द्वारा पेश किए गए लाउडस्पीकर कानून उपमहाद्वीप के मुसलमानों के लिए शिक्षाप्रद हैं

लाउडस्पीकर के इस्तेमाल में भारतीय मुसलमानों को सऊदी नीति अपनानी चाहिए

प्रमुख बिंदु:

1. मस्जिदों को केवल अज़ान और इक़ामत के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करने की आज्ञा दी गई है

2. मस्जिदों को बाहरी एम्पलीफायरों का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया गया है

3. लाउडस्पीकर की आवाज़ कम करके एक तिहाई कर दी जाए

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न्यू एज इस्लाम विशेष संवाददाता

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

29 मई, 2021

Photo courtesy Op India: Use of loudspeakers restricted in Saudi Arabia mosque

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मस्जिदों में लाउडस्पीकर का उपयोग बहस का एक समस्या रहा है और कभी कभी भारत में इसकी वजह से विवाद भी पैदा हो जाता है। गैर मुस्लिम अधिकतर यह शिकायत करते हैं कि अज़ान की तेज़ आवाज़ से उनकी नींद और ज़हनी सुकून में खलल पैदा होता है जबकि मुसलमान लाउडस्पीकर के उपयोग को अपना धार्मिक हक़ समझते हैं। अज़ान देते समय बाहरी एम्पलीफायर का उपयोग किया जाता है ताकि अज़ान की आवाज़ इलाके के हर घर तक पहुंचे। भारत के कुछ शहरों में नमाज़ तरावीह या जुमा भी बाहरी लाउडस्पीकर की मदद से अदा की जाती है। जो कि कभी-कभी सांप्रदायिक झड़प का कारण भी बन जाता है। दूसरी तरफ मुसलमानों का उदार वर्ग ख़ास तौर पर रमजान के दौरान मस्जिदों में लाउडस्पीकर के सीमित उपयोग की हिमायत करता है। लेकिन मुख्य धारा के मुसलमान और धार्मिक उलमा का वर्ग इस तरह के आज़ाद ख्यालों की निंदा करता है।

लेकिन मस्जिदों में बाहरी एम्पलीफायर और लाउडस्पीकर के उपयोग के हवाले से सऊदी सरकार के पेश किये गए नए नियमों से बाहरी एम्पलीफायर और लाउडस्पीकर के बे लगाम उपयोग की हिमायत करने वालों की आँखें खुल जानी चाहिए।

सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्रालय ने देश की सभी मस्जिदों में लाउडस्पीकर और बाहरी एम्पलीफायर के उपयोग से संबंधित नई हिदायत जारी की है।

मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार  मस्जिदों में लाउडस्पीकर का उपयोग अब केवल दो उद्देश्यों के लिए किया जाएगा: एक नमाज़ के लिए अज़ान देने के लिए और दूसरा इक़ामत पुकारने के लिए। मस्जिद के लाउडस्पीकर का उपयोग इसके अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है।

मंत्रालय की ओर से जारी एक अन्य निर्देश में कहा गया है कि इमाम द्वारा अदा की जाने वाली नमाजें केवल मस्जिद के अंदर ही नमाजियों के लिए होनी चाहिए, जिन्हें घर में लोगों तक पहुंचने की कोई जायज आवश्यकता नहीं है।

इस अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि पवित्र कुरआन के तिलावत में बाहरी एम्पलीफायरों का उपयोग नहीं किया जाएगा क्योंकि यह पवित्र कुरआन का अपमान है क्योंकि बाहर कोई भी इन आयतों पर ध्यान नहीं दे रहा होता।

इस सर्कुलर को इस्लामिक मामलों के मंत्री अब्दुल लतीफ अल शेख ने जारी किया है। यह सर्कुलर हदीस पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि "किसी को भी दूसरों को तकलीफ न पहुंचाए और कोई भी तिलावत या नमाज़ में दूसरे की आवाज़ पर अपनी आवाज़ बुलंद न करे।"

यह सर्कुलर वरिष्ठ इस्लामिक विद्वानों शेख मुहम्मद बिन सालेह अल-उसमैन और शेख सालेह अल-फौजान द्वारा जारी किए गए फतवों पर आधारित है।

मंत्रालय ने एक रिपोर्ट के बाद कानून बनाया है जिसमें कहा गया है कि अज़ान के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बाहरी एम्पलीफायरों और लाउडस्पीकरों से मस्जिदों के आसपास के घरों में रहने वाले मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को तकलीफ होती है।

इसके अलावा, मंत्रालय ने मस्जिदों को अज़ान और इक़ामत के लिए लाउडस्पीकरों में तीसरे नंबर पर आवाज़ लगाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इन कानूनों के किसी भी उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

सऊदी अरब  जो भारतीय मुसलमानों सहित दुनिया भर के मुस्लिम समुदायों के लिए एक मॉडल है, उसकी इस हिदायत से भारतीय मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में परिवर्तन होना चाहिए, जहाँ लाउडस्पीकर का उपयोग न केवल अज़ान और इक़ामत के लिए किया जाता है बल्कि कुछ कस्बों और शहरों में  बाहरी लाउडस्पीकरों का जुमे की नमाज और तरावीह की नमाज में भी उपयोग किया जाता है जिससे न केवल गैर मुस्लिमों को बल्कि बीमार मुसलमानों, बच्चों या बुजुर्गों को भी असुविधा होती है।

लाउडस्पीकर जोर से बजाए जाते हैं जिससे गैर मुस्लिमों की हिंसक प्रतिक्रिया भी होती है जैसा कि पिछले साल रमजान के महीने में भारत के कुछ हिस्सों में देखा गया था।

भारत के कुछ शहरों में, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों का उपयोग सुबह की नमाज़ और जुमे की नमाज़ के बाद सलात व सलाम के लिए भी किया जाता है। वे बाहरी एम्पलीफायरों का उपयोग करते हैं जिससे आसपास के लोगों को असुविधा होती है।

चूंकि भारत एक हिंदू बहुल देश है और मस्जिदों के आसपास हिंदू भी रहते हैं, इसलिए सऊदी सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश भारत के लिए भी फायदेमंद हैं और भारतीय मुसलमानों को भी लाउडस्पीकर के उपयोग के संबंध में इस सऊदी नीति को अपनाना चाहिए ताकि देश में विभिन्न धार्मिक दलों के साथ शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो सके।

English Article: New Rules For The Use Of Loudspeakers Introduced By Saudi Government Should Serve As A Lesson For Muslims Of Indian Sub-Continent

Urdu Article: The Use of Loudspeakers Introduced By Saudi Government Should Serve As A Lesson سعودی حکومت کے متعارف کردہ لاؤڈ اسپیکر سے متعلق قوانین برصغیر کے مسلمانوں کے لئے سبق آموز

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/loudspeaker-saudi-government-indian-muslim/d/126253

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