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Hindi Section ( 4 Feb 2019, NewAgeIslam.Com)

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Acceptance of Islam by the Islam Enemies इस्लाम के दुश्मनों का इस्लाम कुबूल करना


२० जनवरी, २०१९

जो इस्लाम के दुश्मन थे जो कुरआन ए पाक के खिलाफ थे और जो मुसलमानों के खून के प्यासे थे वही इस्लाम कुबूल कर रहे हैं, वही कुरआन ए पाक पर ईमान ला रहे हैं और वही मुसलमान बन रहे हैंl अजीबो गरीब वास्तविकता हैl दुनिया आश्चर्यचकित हैl आए दिन ऐसा हो रहा है कि इस्लाम के खिलाफ ज़हर उगलने वाला ईमान ले आता हैl कुरआन ए पाक के खिलाफ अपमानजनक शब्द प्रयोग करने वाला इसको चूमता दिखाई देता हैl और मुसलमानों के खिलाफ हमले करने वाला मुसलमानों की ढाल बना दिखाई देता हैl असल में प्रकृति ने इस्लाम में ऐसी लचक रखी है कि वह उतना ही उभरता है जितना उसे दबाने की कोशिश की जाती हैl इस्लामी इतिहास का अध्ययन  करें तो साफ़ दिखाई देता है कि जब जब अमन की फिज़ा का दौर आया तो इस्लाम फैलता ही चला गयाl अल्लाह के रसूल के जमाने पर एक नजर दौड़ाएं तो यह समझने में बिलकुल दिक्कत पेश नहीं आती कि अकीदा ए तौहीद की दावत इतनी सीधी साफ़ और दिल में उतर जाने वाली है कि हर शुद्ध हृदय रखने वाला व्यक्ति इसे तुरंत स्वीकार कर लेने पर आमादा हो जाता हैl इस पर मुस्ताजाद यह कि कुरआन ए पाक का अंदाज़ ए बयान इतना प्रभावी और मीठा है कि इसके अन्दर लोगों के दिल व दिमाग को अधीन करने की बेपनाह शक्ति हैl मिल्ली ज़िन्दगी में मुशरेकीन के अत्यधिक अत्याचार के कारण इस्लाम कुबूल करना जैसे अपनी मौत को दावत देना था, लेकिन इसके बावजूद जो व्यक्ति एक बार तौहीद समझ लेता और कुरआन ए पाक की आयतें सुन लेता, वह हर प्रकार का खतरा मोल ले कर इस्लाम के दायरे में दाखिल हो जाताl मक्का के मुशरेकीन का विरोध, मज़ाक उड़ाना, बदतरीन जिस्मानी और दिमागी हिंसा जैसा कोई भी हथकंडा लोगों को इस्लाम के दायरे में दाखिल होने से नहीं रोक सकाl यह सिलसिला अब भी जारी हैl इस दौर में भी यूरोप और अमेरिका में इस्लाम दुश्मनी चरम पर रही हैl ख़ास तौर पर अमेरिका पर अल कायदा के हमले के बाद तो इस्लामोफोबिया ने सुनामी का रूप धारण कर लिया था, मगर यह भी अल्लाह की शान है कि जब जब इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत की लहर चलाई गई, इसका उलटा प्रभाव हुआl जिसने कुरआन ए पाक के खिलाफ मोर्चा बनाया बाद में उसने कुरआन ए पाक को चूम लिया, जिसने इस्लाम के खिलाफ फिल्म बनाई वह अब पैगम्बरे इस्लाम की ज़िन्दगी पर फिल्म बना चुका है, जिसने मुसलमानों के खिलाफ राजनीति करके सफलता हासिल की, उसने जब इस्लाम का अध्ययन किया तो राजनीति और कुर्सी को लात मार दी और कलिमा ए तय्यबा पढ़ लियाl इस अजीब व गरीब रुझान ने दुनिया के बड़े बड़े दिमागों को चकरा दिया हैl एक बात तो स्पष्ट है कि किसी भी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ घृणित प्रचार उस समय तक काम करता है जब तक कि कोई उस पर विश्वास करता रहेl अगर कोई उसके बारे में अध्ययन शुरू कर देता है तो एक अलग तस्वीर सामने आ जाती हैl बहरहाल ऐसे मामले अब सामने आ रहे हैं, जिनमें इस्लाम विरोधी और दुश्मन जब इस्लाम का अध्ययन करते हैं तो सजदा रेज़ हो जाते हैंl

ऑर्थर वाग्नर- इस्लाम दुश्मनी से इस्लाम कुबूल करने तक

पहली घटना ऑर्थर वाग्नर की हैl इस्लाम के विरोध के बाद जर्मन राजनीतिज्ञ स्वयं ही मुसलमान हो गयाl जर्मनी में मुहाजेरीन और इस्लाम विरोधी राजनीतिक पार्टी “ए एफ डी” के एक राजनीतिज्ञ ने इस्लाम कुबूल करने के बाद पार्टी की नेशनल एग्ज़िक्युतीव कमेटी के मेम्बर के पद से इस्तीफा दे दियाl हैरत की बात यह है कि इसी इस्लाम दुश्मनी के कारण चुनाव में ए एफ डी तीसरी बड़ी राजनीतिक शक्ति बन कर सामने आई थीl ए एफ डी ने अपनी केन्द्रीय एग्जिक्यूटिव कमेटी के मेम्बर और महत्वपूर्ण राजनीतिज्ञ ऑर्थर वाग्नर के इस्लाम कुबूल करने की तस्दीक की हैl ए एफ डी का कहना है कि यूरोपीय यूनियन की बाहरी सीमाओं को बंद कर देना चाहिए ताकि कानूनी मुहाजेरीन इस ब्लाक में दाखिल ना हो सकेंl उसका यह भी कहना है कि राष्ट्रीय सीमाओं की निगरानी भी सख्त कर दी जाएl इस पार्टी का इसरार है कि ऐसे राजनीतिक शरण के खोजी लोगों को त्वरित रूप से देश निकाला कर दिया जाए जिनमें अधिक संख्या मध्य पूर्व के रहने वालों की है जिनकी दरख्वास्त अस्वीकार हो चुकी हैंl ऑर्थर वाग्नर का संबंध वफाती जर्मन रियासत ब्रांड नबर्ग से हैl ए एफ डी ने इस बात की भी वजाहत की कि पार्टी को उनके इस्लाम कुबूल करने से कोई समस्या नहीं हैl

ऑर्थर वाग्नर २०१५ में मुहाजेरीन और इस्लाम विरोधी पार्टी के शामिल हुए थेl पार्टी की प्रांतीय कमेटी में उन्हें चर्च और धार्मिक मामलों का निगरां नियुक्त किया गया थाl वाग्नर रुसी मूल जर्मन नागरिक हैं और ए एफ डी में शमूलियत से पहले वह चांसलर एंजेला मार्केल की राजनीतिक पार्टी सी डी यू के प्लेटफार्म से राजनीत कर रहे थेl पिछले वर्ष जनवरी में इसे एफ डी की केन्द्रीय एग्ज़िक्युतिव कमेटी के सदस्य की हैसियत से इस्तीफा देते हुए लिखा था कि वह निजी कारणों की बिना पर कमेटी के सदस्य के तौर पर काम नहीं करेंगेl एक स्थानीय जर्मन अखबार ने उनसे इस्लाम कुबूल किये जाने के हवाले से पूछा तो उन्होंने इस विषय पर बात करने से इनकार करते हुए कहा “यह मेरा निजी मामला है”l

अर्नोद्वान डोरन- इस्लाम विरोधी फिल्म से इश्के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

यह है हालैंड के एक अतिवादी वैज्ञानिक अर्नोद्वान डोरन के इस्लाम कुबूल करने की आश्चर्यजनक घटना जिस देश में नबी करीम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के गुस्ताखाना खाके कई बार प्रकाशित किये जा चुके हैंl इनका दाएं बाजू के इस्लाम दुश्मन गिरोह से संबंध थाl इस्लाम से इतनी घृणा हुई कि उन्होंने ने इस्लाम के संबंध में अपमानजनक फिल्म बनाने का इरादा कर लियाl इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने इस्लाम का अध्ययन शुरू कियाl अध्ययन के बीच उन्हें इस्लाम की सच्चाई पता चल गई और उन्होंने अंत में पिछले महीने इस्लाम कुबूल कर लियाl वह उमरा के लिए सउदी अरब गएl इस बीच उन्होंने काबे के गिलाफ की कढ़ाई में भी भाग लियाl वह मस्जिदे नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इमाम से भी मिले और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रौज़े पर जा कर रोते रहेl उनका इरादा है कि अब वह हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान के संबंध में प्रलेखन फिल्म बना कर अतीत की इस्लाम दुश्मनी का कफ्फारा अदा करेंगेl बेशक बंदों के दिल अल्लाह के हाथ में हैं वह जब चाहे उनको बदल देl अल्लाह पाक इस नए मुसलमान डच को बुतकदे हालैंड की अंधेरियों में राहे हक़ पर जमना अता करे और उनसे दीने इस्लाम की खिदमत लेl

इंटरव्यू में डोरन ने कहा कि वह अपनी ज़िन्दगी पुर्णतः इस्लाम के सहीह संदेश की तबलीग में वक्फ़ कर देंगे और दुनिया भर में इस फिल्म को बढ़ावा देते हुए रहमतुल्लिल आलमीन की शिक्षाओं को फैलाएंगेl उन्होंने कहा “मैं सभी यूरोपीय देशों में मुसलमानों के अधिकारों के सुरक्षा के साथ साथ दुनिया भर में इस्लाम और मोमिनीन की खिदमत में कोई कसर बाकी नहीं रखूँगाl मैं बेहतरीन कोशिश करते हुए उस नुक्सान की भरपाई करूंगा, जो मैंने फिल्म “फ़ितना” के ज़रिये इस्लाम और इसके पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पहुंचाईl डोरन जो पूर्व में वलंदेज़ी राजनीतिज्ञ ग्रेट वाइल्डर्स की देन बाजू वाली शिद्दत पसंद पार्टी के प्रमुख सदस्य रहेl उन्होंने मस्जिद ए नबवी में नमाज़ अदा की और गुस्ताखाना फिल्म का हिस्सा बनने पर पछतावे का इज़हार कियाl डोरन उन फ्रीडम पार्टी नेताओं में से थे जिन्होंने फिल्म “फ़ितना” बनाईl

गैरी मेलर- कुरआन को चैलेंज किया, फिर कुरआन पर ईमान ले आया

यह कहानी उस व्यक्ति की है, जिसने कुरआन को चैलेंज किया लेकिन बाद में अपना नाम अब्दुल अहद रखाl गैरी मेलर जो टोरंटो यूनिवर्सिटी में गणित और तर्कशास्त्र के लेक्चरार हैं, अब कनाडा के एक सक्रिय मुबल्लिग हैं एक समय उन्होंने फैसला किया कि वह इसाइयत की अजीम खिदमत करने के लिए कुरआन पाक की वैज्ञानिक और एतेहासिक गलतियों को दुनिया के सामने लाएंगे, जो इसके मुबल्लिग अनुयायियों की सहायता करे ताकि मुसलमानों को इसाइयत की ओर लाया जा सके तथापि परिणाम इसके बिलकुल उलट था मेलर की दस्तावेज़ जायज थीं और व्याख्या और नोट्स से सकारात्मक थेl मुसलमानों से भी अच्छे जो वह कुरआन पाक  के संबंध में दे सकते थेl उसने कुरआन पाक को बिलकुल ऐसा ही लिया जैसा होना चाहिए था और इनका परिणाम यह था कि यह कुरआन किसी इंसान का काम नहींl

प्रोफेसर गैरी मेलर के अनुसार किसी भी पवित्र किताब ने इस प्रकार का अंदाज़ नहीं अपनाया कि जिसमें पढ़ने वाले को एक खबर दी जा रही हो और फिर यह कहा जाता है कि यह नई खबर (इत्तेला) हैl यह एक बेनज़ीर चैलेंज हैl प्रोफेसर मेलर कैथोलिक इनसाइक्लोपीडीया के वर्तमान (जमाने) का ज़िक्र करते हैं जो कुरआन के संबंध में यह स्पष्ट करता है कि बावजूद इतने अधिक अध्ययन दृष्टिकोण और कुरआन के नाज़िल होने की सच्चाई पर हमलों की कोशिश और बहोत सारे बहाने और हुज्जतें, जिनको तार्किक तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता कि चर्च को अपने आप में यह हिम्मत नहीं हुई कि इन सिद्धांतों को अपना सकेl अभी तक उसने मुसलमानों के सिद्धांत की सच्चाई और वास्तविकता को स्वीकार नहीं किया कि कुरआन पाक में कोई शक नहीं और यह आखरी आसमानी किताब हैl वास्तव में प्रोफेसर मेलर अपना दृष्टिकोण परिवर्तित करने और सहीह रास्ता चुनने में काफी हद तक साफ़ गो और इमानदार थाl १९७८ में प्रोफेसर मेलर ने इस्लाम कुबूल किया और अपने आपको अब्दुल अहद के नाम से पुकाराl उसने कुछ समय सऊदी अर्ब में तेल और खनिज की यूनिवर्सिटी में काम किया और अपनी ज़िन्दगी को टेलीविजन और लेक्चर के जरिये दावत देने के लिए वक्फ़ कर दियाl

२० जनवरी, २०१९ स्रोत: साप्ताहिक नई दुनिया, नई दिल्ली

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