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Hindi Section ( 18 Nov 2013, NewAgeIslam.Com)

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Taimiyah is the Glory of Bihar 'बिहार की शान है तैमिया'

 

जेएनयू में जामिया इमाम इब्ने तैमिया के पूर्वछात्रों के प्रतिनिधित्व के बैनर तले बैठक आयोजित

नई दिल्ली, 17 नवंबर ( मोहम्मद खालिद ) बिहार में डॉक्टर मोहम्मद लुक़मान के हाथों बनाए, सजाए और सँवारे गए बाग़ और अदब 'जामिया इमाम इब्ने तैमिया' के पूर्वछात्रों के शिक्षा के लगभग हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में किसी भी संस्था से पीछे नहीं बल्कि कुछ क्षेत्रों में तो वो सबसे आगे नज़र आते हैं। वो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दूसरे धार्मिक संस्थानों के साथ साथ युनिवर्सिटियों में अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं और हर जगह प्रोग्राम आयोजित करते रहते हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी में आज जामिया इब्ने तैमिया के पूर्वछात्रों के प्रतिनिधियों के बैनर तले एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कावेरी हॉस्टल के रूम नंबर 145 में पीएचडी के स्कालर मोहम्मद असद तैयमी की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रोग्राम का विषय तैयमी बंधुओं की शैक्षिक गतिविधियों की समीक्षा और जामिया इब्ने तैमिया में अध्ययनरत छात्रों के लिए जेएनयू का मार्ग प्रशस्त करने का तरीका था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रिसर्च स्कालर सनाउल्लाह सादिक़ तैयमी ने कहा जेएनयू में तैयमी बंधुओं की बहुतायत उन सभी लोगों के चेहरे पर ज़ोरदार तमाचा है जिन लोगों का ये कहना है कि जामिया इमाम इब्ने तैमिया का शिक्षा का स्तर गिरावट का शिकार हो चुका है।

रिसर्च स्कालर सनाउल्लाह सादिक़ तैयमी ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि जामिया इमाम इब्ने तैमिया के बच्चों को जेएनयू कैसे लाया जा सकता है और कौन सा तरीका बेहतर हो सकता है। उन्होंने सलाह के रूप में इन बातों की ओर इशारा किया कि हमें आधिकारिक तौर पर जामिया में एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में जाना चाहिए और वहां विद्यार्थियों जेएनयू के बारे में प्रेरणा पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए, साथ ही साथ हमें अपने अनुभवों के आधार पर कुछ नमूना सवाल बनाकर उन तक पहुँचाना चाहिए और व्यक्तिगत रूप से हमें उनकी भरपूर सहायता करनी चाहिए।

मौलाना जावेद इसरार तैयमी ने अपने भाषण में कहा कि हमें अंग्रेज़ी की शिक्षा शुरू से ही दी जाती है लेकिन इसके बावजूद हम पूरी तरह अंग्रेजी बोलने में असमर्थ होते हैं और खुलकर हम किसी से अंग्रेज़ी में बात नहीं कर पाते। उन्होंने इसका हल निकालते हुए कहा कि हमें आपसी बातचीत को उर्दू और मातृभाषा में न करके इंग्लिश में ही करनी चाहिए। जे.आर.एफ. पास मौलाना हिफ़्ज़ुर्रहमान तैयमी ने जे.आर.एफ. के बारे में अपने संबोधन में कहा कि ये टेस्ट बहुत आसान है। हम अगर अपनी मेहनत के साथ साथ थोड़ी सी समझदारी का सहारा लें तो ये टेस्ट आसानी से पास किया जा सकता है। तैयारी के लिए हमें सबसे अच्छा प्रतियोगिता दर्पण के संपादकीय बोर्ड द्वारा प्रकाशित किताब लगी। इसके अलावा टेस्ट में कुछ कंप्यूटर से सम्बंधित प्रश्न होते हैं जिसको देखकर हम घबरा जाते हैं, जबकि हम ज़रा सा ध्यान दें तो वो भी आसानी से हल हो सकता है।

प्रोग्राम की अध्यक्षता कर रहे पीएचडी स्कालर असद तैयमी ने अपने भाषण में कहा कि सबसे पहले हमें अपने लक्ष्य को निर्धारित करना चाहिए, और फिर इस क्षेत्र में ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए, साथ ही आज के इस प्रतियोगी युग में  जितने भी मुक़ाबले हो रहे हैं हमें इसमें भरपूर हिस्सा लेना चाहिए और जहां तक हो सके जेएनयू ने जो कुछ सुविधाएं आपको दी हैं हमें उनके साथ न्याय करने की कोशिश करनी चाहिए। गौरतलब है कि आज की इस सभा में मौलाना हारून रशीद तैयमी, मौलाना तबरेज़ आलम तैयमी, मौलाना महेर आलम तैयमी, मौलाना महबूब आलम तैयमी, मौलाना जमील अख्तर शफीक तैयमी, मौलाना हारून सज्जाद तैयमी, मौलाना फिरदौस आलम तैयमी, मौलाना महफ़ूज़ आलम तैयमी, मौलाना अहसान बद्र तैयमी, मौलाना सैफ़ुर्रहमान तैयमी और रहमतुल्ला तैयमी भी कार्यक्रम में शामिल रहे और सभी ने भाई हिफ़्ज़ुर्रहमान को जे.आर.एफ. निकालने पर बधाई दी।

8 नवम्बर, 2013 स्रोत: रोज़नामा सहाफ़त, नई दिल्ली

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