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Hindi Section ( 22 Aug 2017, NewAgeIslam.Com)

Islam: The Greatest Flag-bearer of Peace इस्लाम शांति का महानतम अलमबरदार

 

मोहम्मद शोएब क़ासमी

13 अप्रैल, 2017

आज इंसान विज्ञान और टेक्नालोजी के ऐसे स्वर्ण युग से गुजर रहा है जिसमें विभिन्न प्रकार के खुलासे सामनें आ रहे हैं, कला और विज्ञान के विभिन्न विभाग अस्तित्व में आ रहे हैं, रहनें सहनें के तरीके काफी तीव्रता से बदल रहे हैं, गगनचुंबी महलें, आकर्षक इमारतें पूर्वावलोकन का आमंत्रण दे रही हैं, उद्योग और व्यापार के आकर्षक केन्द्र दिन प्रति दिन एक नये अस्तित्व के साथ हैं,यह मनुष्य भूमी और समुन्द्र के हर कोने में अपनी जीत और अजेय की कमंडें डाले हुए है,लेकिन यह सब दृश्य एक मोड़ प्रदान करते हैं,इसका दूसरा रुख यह है कि आज मानव जीवन अराजकता और अव्यवस्था और विनाश से ग्रस्त है, अत्याचार व शत्रुता चरम पर है,पार्टी के व्यक्तियों में कलह और संघर्ष जारी है,राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से मानव दुश्मन ताकतें मानवता को तहे तैग करनें के दर पर हैं प्रतिदिन इन प्रयासों में वृद्धि होती है,यह मानवता विरोधी ताकतें अपनी शक्ती की वजह से दुनिया भर में हजारों और लाखों लोगों को अपना खुराक बना लेती हैं,मासूम इंसानों को ऐसे काटा जाता है जैसे बेजान पेड़ पर आरे चल रहे हों,शक्ति और सत्ता के मतवालों द्वारा संपत्ति ऐसे नष्ट किया जा रहा है जैसे कि सारी दुनिया पर उन्हीं का स्वामित्व हो और पूरी मानवता उनकी प्रजा हो। मानवता के दुश्मन ऐसे ऐसे विधि अपनाते हैं कि रूह कांप उठती है। ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि सारी दुनिया उनकी अधीनता स्वीकार करने का निर्णय ले। उनकी दया पर अपनी जीवन बिताए,मानो पूरे दुनिया में शक्ति और बल जोर और दबदबा का शासन चल रहा हैlदुर्बलों का कोई हाल लेने वाला नहीं,गरीबी से त्रस्त वर्ग अमीरों के उत्पीड़न और हिंसा के साये में जीवन बसर करता नज़र आता है,पूरी मानवता सिसकती और बिलखती नज़र आ रही है।

मानव जीवन का कोई विभाग और दुनिया का कोई क्षेत्र भ्रष्टाचार और झांसे बाज़ी से मुक्त नहीं है जिसमें रहकर व्यक्ति राहत और शांति महसूस कर सकेlवर्तमान स्तिथी के लिए जिम्मेदार कौन है?फ़ितना व फसाद किसनें बरपा कर रखा है, अशांति और भ्रष्टाचार के नियम एवं प्रक्रिया कौन बना रहा है। नरसंहार व क्रूरता का वातावरण किसने गर्म कर रखा है, मासूम इंसानों के खून चूस कर अपनी प्यास को कौन बुझा रहा है, पाक दामन औरतों की इज़्ज़त कौन दाग दार कर रहा है, संपत्ति को तबाह व बर्बाद कौन कर रहा है, दुनिया में शांति व आशती, इंसाफ, मानवाधिकार के नाम पर उत्पीड़न, दमन एवं हिंसा, अशांति के माहौल से समाज को तितर बितर किसने किया है,कानून के नाम पर अराजकता,धर्म के नाम पर आतंकवाद किसने फैला रखी है, इन सभी सवालों का जवाब दुनिया में रहने वाले लोगों की चीख-पुकार, आह व बुका, विरोध खुद इसके गवाह हैं, लेकिन इन सभी मनहुस स्थितियों को पश्चिमी नीति ने इस्लाम और मुसलमानों से जोड़ रखा है, आखिर यह भी देखें कि इसमें सच्चाई कितनी है, इस्लाम किन चीजों की शिक्षा देता है और उसके मानने वालों का मानवता के साथ क्या प्रक्रिया है, क्या इस्लाम वास्तव में खूंखार और आतंकवाद की शिक्षा देता है जिसे पश्चिम ने अपनी महिमा बना ली है, इस्लाम के उज्ज्वल शिक्षाओं उसके जीवित नियम एवं आदेश दुनिया के सामने मौजूद हैं और पूरी स्पष्टता उनके सामने हैं,इस्लाम अल्लाह सर्वशक्तिमान की ओर से मानवता के लिए जीने का तरीका है जो सहानुभूति और प्रेम,मानवीय उद्धार और मानव मित्रता की शिक्षा देता है न यहाँ दूसरे धर्म के अलमबरदारों के प्रति दमन होता है और न ही दूसरे धर्म और धर्म वालों की भावनाओं से खिलवाड़ करने की अनुमति दी जाती है,हाँ दावते तबलीग इसके अलमबरदारों की अलग पहचान है और यहाँ भी हिकमत व नसीहत की शिक्षा दी जाती है, नीचे इस्लाम के शांतिपूर्ण धर्म होने से संबंधित सम्पूर्ण लेख देखें।

इस्लाम को एक आक्रामक धर्म और मुसलमानों को आतंकवादी कौम घोषित करना इस्लाम के अटल सिद्धांतों से बेख़बरी का कारण या जानबूझ संकीर्ण मानसिकता का खराब उदाहरण है। इस्लाम हमेशा धार्मिक पवित्रता और कौम की पहचान,मानवीय उद्धार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध और लगातार प्रयास की अनुमति ज़रूर देता है और तबलीग व हिदायत की हर संभव पथ को व्याकुलता के साथ तय करने के लिए शिक्षा पर जोर देता है। अल्लाह पाक नें (सूरः नहल) में फरमाया ''ऐ नबी अपने रब के रास्ते की तरफ ज्ञान और उत्कृष्ट नसीहत के साथ निमंत्रण दो और लोगों से चर्चा करो ऐसे तरीके से जो अच्छा हो ''। यह शिक्षा उनको दी जा रही है जिनके पास सेना और सैनिक नहीं, जंगी उपकरण नहीं केवल भाषा की शक्ति है उसका उपयोग करने के लिए भी मीठी वाणी और अच्छे तरीके की कैद लगा दी गई।तबलीग व हिदायत के परिणाम में इस्लाम स्वीकार करने वालों के साथ दिलदारी करनें और अच्छा बर्ताव करने का दर्स दिया गया,हिदायत के हर संभव प्रयत्न के बाद भी इस्लाम से भटके रहने वालों के साथ दर गुजर से काम लेने का फरमान जारी किया गया और इस सहजता और अच्छे अंदाज़ से बात करनें की यहाँ तक शिक्षा दी गई कि काफिरों के देवताओं और पेशवाओं को भी बुरा कहने से रोक दिया गया। सूरह इनआम में है ''तुम उनके झूठे खुदाओं को जिन्हें यह अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं गालियां न दो,वरना तो वह अज्ञानता की वजह से अल्लाह को गालियां दें गे''एक दूसरी जगह सूरतुल बक़रा में इरशाद बारी है ''धर्म में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है,सीधे रास्ते गलत पथ से अलग करके दिखाई जा चुकी है अब जो कोई झूठे खुदाओं को छोड़कर अल्लाह पर ईमान लाता है वह एक मजबूत रिश्ते से संबंध जोड़ता है जो टूटने वाला नहीं है और अल्लाह सुनने वाला और जानने वाला है। ''

इस्लाम के अनुयायी न केवल यह कि इस पर कार बंद हुए बल्कि उस पर अमल करके दुनिया को बता दिया कि इस्लाम जो कहता है उसी के अनुसार अपने मानने वालों को हिदायत भी करता है। विश्व इतिहास में कोई ऐसा धर्म नहीं है जो इस्लामी न्याय व्यवस्था की ऐसी मिसाल पेश कर सके अहदे फारूकी का यह आदर्श कारनामा क्या सारी दुनिया को आश्चर्य में डालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि इस्लाम के अनुयाईयों ने किस तरह से मानवता दोस्ती का सुबूत पेश किया,एक बार फारूक आजम रादिअल्लाहू अन्हु ने एक बूढ़े आदमी को भीख मांगते हुए देखा तो पूछा कि क्यों भीख मांग रहे हो उसने निवेदन किया जज़िया अदा करने के लिए,वह बेचारा बूढ़ा कहां पहचान सका कि पूछने वाला कौन है, आपनें तभी घोषणा करवा दिया कि ऐसे सारे आदमी जिनके पास साधन आय नहीं उनके जिम्मे जो बुढ़ापे या बीमारी के कारण कमा नहीं सकते उन्हें भीख मांगने की ज़िल्लत व रुसवाई से बचाया जा सके और शाही खजाने से उन्हें वजीफा निर्धारित किया जाए। इतहास के दरीचे से आज भी झांक कर देखा जा सकता है कि बैतूल मुक़द्दस पर जब अंग्रेज काले और सफेद,जाति पाती और उच्च और नीच का बंटवारा करने वालों ने वर्चस्व हासिल किया था तो मुसलमानों का कैसे खून बहाया था,मुसलमानों को भेड़ बकरीयों की तरह सड़क पर वध करके उनका खून नालियों में पानी की तरह बहाया गया,महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों के साथ बिना भेदभाव यह रवैया अपनाया गया आज भी सबसे बड़ा आतंकवादी कौन है,सरकार बदलेगी,उस गद्दी पर बैठने वाला प्रमुख बदलेगा मगर उसकी इस्लाम दुश्मनी नीति नहीं बदलेगी, फिर भी दुनिया के सामने यही तस्वीर पेश होगी।

दामन पे कोई छींट न खंजर पे कोई दाग

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो

 बहरहाल इस के मुकाबले इतिहास गवाह है कि नब्बे (90) वर्ष बादजब हज़रत सलाहुद्दीन अय्यूबी ने बैतूल मुक़द्दस पर विजय प्राप्त की तो सभी नागरिकों को व्यवस्था दी गई थी, यहां तक कि हथियार डाल देने वाले सैनिकों की भी जान बख्श दी गई, पूरे शहर में घोषणा कर दिया गया कि जो कोई यहाँ से जाना चाहे वह केवल अपनी जान नहीं बल्कि अपना सारा धन समेट कर ले जा सकता है,तो एक प्रसिद्ध गिरजाघर के पादरी से संबंधित सुल्तान को बताया गया कि गिरजाघर में प्रस्तुत किये गये करोड़ों का सोना वह ले जा रहा है यह सरकारी खजाने में जमा होना चाहिए, तो सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी ने कहा कि उसे न रोकों क्योंकि मेरे आदेश का उल्लंघन होगा,चश्म फ़लक ने ऐसे हजारों घटनाएं देखे हैं, जो आज भी इतिहास अपने सीने में सहेजे हुए है,इसी बात को स्वीकार एक फ्रांसीसी इतिहासकार डॉक्टर गस्तावलि बान अपनी पुस्तक तमद्दुने अरब पेज नंबर 209,210,पर लिखते हैं। इशाअते कुरआन और इस्लाम के अद्भुत त्वरक ने इतिहासकारों को बहुत आश्चर्य में डाल दिया है, और केवल इसके कोई ध्यान न बन पड़ी कि इस धर्म में नफ्सानी इच्छाओं की बागडोर ढीली कर दी गई है जिसकी वजह से जनता की चाह इसी ओर हुई और इसके अलावा यह बात बहुत आसानी से साबित हो सकता है कि उनका मानना बिल्कुल निराधार है। आगे चलकर डॉक्टर लेबान पेज 10 पर लिखते हैं: '' जब हम जीत अरब पर नज़र डालेंगे और उनकी सफलता के कारण को उभार कर दिखाएंगे तो मालूम होगा कि इस्लाम के प्रकाशन में तलवार से काम नहीं लिया गया क्यों कि मुसलमान हमेशा हरी हुई कौम को अपने धर्म के पालन में स्वतंत्र छोड़ देते थे अगर ईसाई कौम नें अपने विजेताओं के धर्म स्वीकार कर लिया और अंततः उनकी भाषा को भी अपनाया।

13 अप्रैल, 2017 स्रोत: रोज़नामा हिन्दुस्तान एक्सप्रेस, नई दिल्ली

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/mohammad-shoaib-qasimi/islam--the-greatest-flag-bearer-of-peace--اسلام-امن-کا-عظیم-ترین-علمبر-دار/d/110742

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