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Hindi Section ( 20 Oct 2011, NewAgeIslam.Com)

Allama Iqbal Targeted By Sectarians अल्लामा इक़बाल फिरकापरस्तों के निशाने पर


एम. आरिफ हुसैन (उर्दू से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम डाट काम)

बीजेपी में मोहम्मद अली जिन्ना पर लम्बी बहस और इस बहस के नतीजे में एक अहम लीडर जसवंत सिंह के निष्कासन और इसके बाद निष्कासन को लेकर ज़बर्दस्त हंगामे के बाद मध्य प्रदेश के एक विधान सभा सदस्य ने शाएरे मशरिक अल्लामा इक़बाल को निशाना बनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मांग किया है कि वो इक़बाल सम्मान को प्रदान करना बंद कर दे। ज्ञात रहे कि इक़बाल सम्मान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दिया जाता है, और इस समय मध्य प्रदेश में बीजेपी की ही सरकार है। गिरिजा शंकर शर्मा नाम के इस विधान सभा सदस्य ने आरोप लगाया है कि दो राष्ट्रों के नज़रिए को सबसे पहले इक़बाल ने ही पेश किया था। राज्य के होशंगाबाद असेम्बली सीट से चुने गये विधान सभा सदस्य ने राज्य सरकार से मांग की है कि हर साल दिया जाने वाला इक़बाल सम्मान समाप्त कर दिया जाये। मीडिया से बातचीत में इन्होंने कहा है कि इक़बाल ने ही दो राष्ट्रों के नज़रिए को सबसे पहले पेश किया था और वही जिन्ना के दिमाग में बंटवारे का बीज बोने के लिए ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इक़बाल जिन्ना के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक थे और उन्होंने पाकिस्तान को बनाने में जिन्ना से ज़्यादा भूमिका अदा की थी। गिरिजा शंकर शर्मा ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि इक़बाल सम्मान को समाप्त किया जाये और ये एवार्ड इक़बाल के बजाये उर्दू के किसी और साहित्यकार के नाम से दिया जाये।

ज्ञात रहे कि राज्य के संस्कृति विभाग की ओर से अल्लामा इक़बाल की याद में हर साल एक उर्दू अदीब या शायर को इक़बाल सम्मान प्रदान किया जाता है। देश के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्रता दिवस के अवसर पर इक़बाल के कौमी गीत सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमाराकी गूंज हर तरफ सुनाई देती है। हाल ही में जिन्ना की तारीफ करने पर बीजेपी ने सीनियर लीडर जसवंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया था। इसी दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता के.मिश्रा ने बीजेपी लीडर के बयान को संकीर्ण मानसिकता वाला करार दिया और पार्टी से उनको निकालने की मांग की। जमाते इस्लामी मध्य प्रदेश के प्रवक्ता अनवर सफी और आल इण्डिया त्योहार कमेटी के अध्यक्ष शाह मीर खुर्रम ने भी बीजेपी लीडर के बयान की निंदा की और कहा कि अल्लामा इक़बाल उर्दू के महान कवि थे और महात्मा गांधी भी उनकी इज़्ज़त किया करते थे। इक़बाल की याद में राज्य में एवार्ड की स्थापना राज्य के लिए गर्व की बात है।

जसवंत सिंह ने किताब में लिखा है कि जिन्ना ने 1945 तक हर सम्भव कोशिश की कि हिंदुस्तान के मसले को मिल जुल कर हल किया जाये लेकिन उनकी नेहरू जैसे लीडरों के सामने न चली, क्योंकि नेहरू उस वक्त हिंदुस्तान के बंटवारे की स्क्रिप्ट लिख चुके थे। उन्होंने अपनी किताब में अहम खुलासा किया हैं कि गांधी, राजगोपालाचारी कांग्रेस के बहुसंख्यकवाद के सम्बंध में मुसलमानों की शंकाओं को समझते थे लेकिन हिंदू जाति  ये बात नहीं समझ सकी। अगर कोई नतीजा निकाला जाये तो वो ये है कि कांग्रेस अगर हिंदुस्तान के केंद्रीय संसदीय ढांचे को स्वीकार कर लेती तो हम निश्चित रूप से अविभाजित हिंदुस्तान में रह रहे होते।

इसके अलावा जसवंत सिंह के बाद हिंदुत्वादी संगठन के पूर्व प्रमुख सुदर्शन ने भी क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की है। सुदर्शन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जिन्ना देश भक्त थे और वो संयुक्त भारत के पक्ष में थे। अगर महात्मा गांधी ने बंटवारा न होने देने पर ज्यादा ज़ोर दिया होता तो हिंदुस्तान विभाजित न होता। लेकिन जब उनसे जसवंत सिंह के बारे में पूछा गया तो, उन्होंने कहा कि ये बीजेपी का आंतरिक मामला है। पूर्व कानून मंत्री और प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ राम जेठ मलानी ने भी कहा है कि जसवंत सिंह ने जो भी लिखा है उससे इंकार नहीं किया जा सकता है। अगर कैबिनेट मिशन प्लान 1946 आने के बाद नेहरू हठधर्मी न दिखाते और सरदार पटेल उनका साथ न देते तो उपमहाद्वीप का नक्शा ही कुछ और होता।

इसके अलावा ब्रिटेन के मशहूर अखबार डेली टेलीग्राफ ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में ये कहा कि, ‘पाकिस्तान के असली संस्थापक जिन्ना नहीं थे, बल्कि देश के बंटवारे के ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ जवाहर लाल नेहरू थे, जो सेकुलर जिन्ना के मुकाबले में एक कट्टर और पूर्वाग्रह से ग्रस्त हिंदू थे।इसलिए डेली टेलीग्राफ की इस रिपोर्ट में हिंदुस्तान के पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के विचार जो उन्होंने जिन्ना, सरदार पटेल और नेहरू के बारे में दिये, उनका पूरी तरह से पुष्टि की गयी है। रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि मोहम्मद अली जिन्ना हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल देने वाले और शांति के प्रचारक थे। हिंदुस्तान के बंटवारे के बाद भी जिन्ना पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बीच दोस्ती के इच्छुक थे, लेकिन जान बूझ कर कश्मीर को समस्या बनाकर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के सम्बंधों को तनावपूर्ण किया गया।

अब अगर गिरिजा शंकर शर्मा के आरोपों का अगर सरसरी तौर पर जायेज़ा लिया जाये तो इसमें सीधा नतीजा ये निकल कर आता है कि उन्हें अल्लामा इक़बाल पर सिर्फ इसलिए एतराज़ है कि वो मुसलमान थे। ये ठीक है कि दो राष्ट्रों के नजरिए को इक़बाल ने पेश किया था लेकिन इक़बाल वो चिंतक है जिन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए नया शिवालाजैसी नज़्म लिखी और ब्राह्मण और तकरीर करने वालों को निशाना बनाया। राष्ट्र गीत सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तां हमाराका एक मिसरा (पंक्ति) राष्ट्रीय एकता की निशानी है। फिर ऐसे बुद्धीजीवी की नुक्ताचीनी क्या सभी चिंतकों का अनादर नहीं है? गिरिजा शंकर शर्मा के बयान की न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है, और होनी भी चाहिए। सम्भव है कि गिरिजा शंकर शर्मा ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ये शोशा छोड़ा हो। कम से कम इस बहाने उनका नाम तो मीडिया में आया और लोग उन्हें जान तो गये।

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/علامہ-اقبال’-فرقہ-پرستوں-کے-نشانہ-پر/d/2011

URL: https://newageislam.com/hindi-section/allama-iqbal-targeted-by-sectarians--अल्लामा-इक़बाल-फिरकापरस्तों-के-निशाने-पर/d/5739


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