New Age Islam
Thu Jun 24 2021, 06:42 PM

Hindi Section ( 3 Jul 2019, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Human Rights In Islam Part-1 इस्लाम में मानव अधिकार


कनीज़ फातमा, न्यू एज इस्लाम

इस्लाम ने अल्लाह के हक़ के साथ साथ बन्दों के हक़ की भी शिक्षा दी हैl बन्दों के हक़ का अर्थ बन्दों के अधिकारों या दोसरे शब्दों में मानवाधिकार होता हैl कुरआन व सुन्नत के अध्ययन से पता चलता है कि इस्लाम ने मानवाधिकारों में विशेषतः जान, माल, इज्जत व आबरू के सुरक्षा पर जोर दिया है, और चूँकि मौजूदा दौर में नए नए संगठन वजूद में आ रहे हैं जो इस्लाम के नाम पर हत्या का माहौल बनाने से बाज़ नहीं आ रहे, इसलिए इस्लाम की एक छात्रा होने की हैसियत से इस विषय पर कलमबंद करने की हिम्मत कर रही हूँ और दुआ करती हूँ कि अल्लाह इस सेवा को स्वीकार फरमा कर ख़ास और आम में मकबूल फरमाएl आमीन بجاہ سید المرسلین صلی اللہ علیہ وسلم ۔

जान की अहमियत और खुद को हलाकत में डालने की मनाही

अल्लाह पाक इरशाद फरमाता है:

وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا ﴿٢٩﴾ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللہ يَسِيرًا ﴿٣٠﴾

और अपनी जानों को मत हालाक करो, बेशक अल्लाह तुम पर मेहरबान है, और जो कोई उल्लंघन और अत्याचार से ऐसा करेगा तो हम जल्द ही उसे (दोज़ख की) आग में डाल देंगे, और यह अल्लाह पर बिलकुल आसान है” (अन्निसा:२९-३०)

तफसीर की किताबों में इस आयत की तीन तरह से तफसीर की गई है एक तो यह कि मुसलमान एक दोसरे को क़त्ल ना करें क्योंकि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया सारे मुसलमान एक जिस्म की तरह हैं (सहीह मुस्लिम) इसलिए अगर एक मुसलमान ने दोसरे मुसलमान को क़त्ल किया तो यह ऐसा ही है जैसे उसने अपने आपको क़त्ल कियाl

दोसरी तफसीर यह है कि कोई ऐसा काम ना करो जिसके परिणाम में तुम हालाक हो जाओ इसकी मिसाल सहीह बुखारी की इस हदीस ए पाक में बयान हुई:

हज़रत अम्र बिन आस (रज़ीअल्लाहु अन्हु) एक सर्द रात में जुनुबी हो गए तो उन्होंने तयम्मुम किया और यह आयत पढ़ी “ولا تقتلوا انفسکم ان اللہ کان بکم رحیما”l तुम अपनी जानों को क़त्ल मत करो बेशक अल्लाह तुम पर बेहद रहम फरमाने वाला है” फिर नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से इसका ज़िक्र किया तो आपने (उनको) मलामत नहीं कियाl (सहीह बुखारी: किताबुल तयम्मुम बाब ७)

इस पाक हदीस के संदर्भ से मालुम होता है कि सख्त ठंडी में हज़रत अम्र बिन आस राज़ीअल्लाहु अन्हु ने पानी के मौजूद होते हुए तयम्मुम किया और वजह यह बयान की कहीं सख्त ठंडी की वजह से बीमार ना हो जाएं इसलिए उन्होंने तयम्मुम किया और जब यह बात मालुम हुई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनको मलामत नहीं कियाl

उल्लेखनीय है कि केवल पानी ना होने की स्थिति में कुरआन ने तयम्मुम की अनुमति दी है जैसा कि अल्लाह पाक का इरशाद है “فلم تجدوا ماء فتیمموا” अर्थात पानी ना पाओ तो तयम्मुम करोl (सुरह निसा ४३)l इस आयत की रौशनी में माए मुतलक ना होने की स्थिति में ही तयम्मुम जायज है, लेकिन ग़ालिब गुमान हो कि अगर ठंडा पानी से वजू किया जाएगा तो सख्त बीमार हो जाएगा तो ऐसी स्थिति में तयम्मुम जायज है और इसका इल्म उल्लेखनीय हदीस से भी होती है कि जिसमें नस कतई से दलील दी गई कि अपने आपको हलाकत में मत डालो और फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी हज़रत अम्र बिन आस के तयम्मुम करने पर कोई मलामत भी नहीं कियाl

इस आयत की तीसरी तफसीर में यह बयान हुआ कि मुसलमानों को अल्लाह पाक ने आत्महत्या करने से मना फरमाया है और इसी आयत और निम्नलिखित हदीसों की रौशनी में यह साबित हुआ कि आत्महत्या करना हराम हैl

हज़रत अबू हुरैरा (रज़ीअल्लाहु अन्हु) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया जो व्यक्ति हथियार से आत्महत्या करेगा तो दोज़ख में वह हथियार उस व्यक्ति के हाथ में होगा और वह व्यक्ति जहन्नम में इस हथियार से हमेशा खुद को ज़ख़्मी करता रहेगा’ और जो व्यक्ति ज़हर से आत्महत्या करेगा वह जहन्नम में हमेशा ज़हर खाता रहेगा और जो व्यक्ति पहाड़ से गिर कर आत्महत्या करेगा वह जहन्नम की आग में हमेशा गिरता रहेगाl (सहीह मुस्लिम)

उल्लेखनीय हदीस पर एक एतेराज़ और उसके दो जवाब

इस हदीस पर यह एतेराज़ होता है कि आत्महत्या करना गुनाह ए कबीरा है और गुनाह ए कबीरा कुफ्र है और इल्म वाले के नजदीक यह बात मुतहक्कक है कि कबीरा गुनाह के प्रतिबद्ध से इंसान दाइमी अज़ाब का हकदार नहीं होता फिर आत्महत्या करने वाला स्थायी अज़ाब में क्यों मुब्तिला होगा?

इस एतेराज़ के दो जवाब हैंl पहला यह कि यह हदीस उस व्यक्ति के संबंध में है जिसको आत्महत्या के हराम होने का इल्म था इसके बावजूद उसने हलाल और जायज समझ कर आत्महत्या कीl दोसरा जवाब यह है कि इस हदीस में खुलूद का इस्तिह्काक बयान किया गया है और यह जायज है कि हकदार खुलूद होने के बावजूद अल्लाह पाक इसको माफ़ कर दे या फिर खुलूद मक़स तवील के अर्थ में हैl

आयत ए करीमा पर एक सवाल यह होता है कि जब अल्लाह पाक की कुदरत के आगे सभी उमूर ए मुमकिन बराबर हैं जैसा कि इमाम राज़ी ने अपनी तफसीर में किया, तो फिर यहाँ क्यों फरमाया कि जहन्नम में दाखिल करना अल्लाह पाक पर बिलकुल आसान है? इससे पता चलता है कि कुछ उमूर (मआज़ अल्लाह) अल्लाह पाक के लिए आसान नहींl

इस प्रश्न के दो जवाब हैं) पहला यह कि अरब मुहावरे के तौर पर प्रयुक्त है कि अल्लाह पाक के लिए हर मामले आसान से आसान टार है और २) दोसरी बात यह कि यहाँ अतिशयोक्ति के तौर पर कहा गया है कि जहन्नम में दाखिल करना इसे आसान है फिर तुमको इससे भागने का कोई चारा नहीं और ना ही कोई उसके अज़ाब से बच सकता हैl इससे पता चला कि कोई भी काम उसके लिए कठिन नहींl (जवाब मनकुल  अज़ रुहुल बयान, इसमाइल हक़ी)

२- इरशाद ए बारी तआला है:

  وَمَا كَانَ لِمُؤْمِنٍ أَن يَقْتُلَ مُؤْمِنًا إِلَّا خَطَأً ۚ وَمَن قَتَلَ مُؤْمِنًا خَطَأً فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مُّؤْمِنَةٍ وَدِيَةٌ مُّسَلَّمَةٌ إِلَىٰ أَهْلِهِ إِلَّا أَن يَصَّدَّقُوا ۚ فَإِن كَانَ مِن قَوْمٍ عَدُوٍّ لَّكُمْ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مُّؤْمِنَةٍ ۖ وَإِن كَانَ مِن قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَاقٌ فَدِيَةٌ مُّسَلَّمَةٌ إِلَىٰ أَهْلِهِ وَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مُّؤْمِنَةٍ ۖ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ تَوْبَةً مِّنَ اللہۗ وَكَانَ اللہ عَلِيمًا حَكِيمًا ﴿٩٢﴾

अनुवाद: और किसी मुसलमान के लिए (जायज) नहीं कि वह किसी मुसलमान को क़त्ल कर दे मगर (बिना कस्द)गलती से, और जिसने किसी मुसलमान को अनजाने में क़त्ल कर दिया तो (इस पर) एक मुसलमान गुलाम/ बांदी का आज़ाद करना और खून बहा (का अदा करना) जो मकतूल के गहर वालों के हवाले किया जाए (लाजिम है) मगर कि वह माफ़ कर दें, फिर अगर वह (मकतूल) तुम्हारी दुश्मन कौम से हो और वह मोमिन (भी) हो तो (केवल) एक गुलाम/ बांदी का आज़ाद करना (ही लाज़िम) है और गर वह (मकतूल) उस कौम में से हो कि तुम्हारे और उनके बीच (सुलह का) समझौता है तो खून बहा (भी) जो उसके घर वालों के हवाले किया जाए और एक मुसलमान गुलाम/ बांदी का आज़ाद करना (भी लाज़िम) हैl फिर जिस व्यक्ति को (गुलाम/ बांदी) उपलब्ध ना हो तो (इस पर) एक के बाद एक दो महीने के रोज़े (लाज़िम) हैंl अल्लाह की तरफ से (यह इसकी) तौबा है, और अल्लाह खूब जानने वाला बड़ी हिकमत वाला है (अन्निसा: ९२०)

अगली आयत में अल्लाह पाक का इरशाद है:

وَمَن يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُّتَعَمِّدًا فَجَزَاؤُهُ جَهَنَّمُ خَالِدًا فِيهَا وَغَضِبَ اللهُ عَلَيْهِ وَلَعَنَهُ وَأَعَدَّ لَهُ عَذَابًا عَظِيمًا ﴿٩٣﴾

अनुवाद: और जो व्यक्ति किसी मुसलमान को जानबूझ कर क़त्ल करे तो उसकी सज़ा दोज़ख है कि मुद्दतों उसमें रहेगा और उस पर अल्लाह गुस्सा होगा और उस पर लानत करेगा और उसने उसके लिए ज़बरदस्त अज़ाब तैयार कर रखा है (अन्निसा ९३)

मोमिन के जानबूझ कर क़त्ल पर अनेकों रिवायतों में सख्त वईद आई हैंl अल्लामा सयूती की दुर्रे मंसूर के हवाले से जरुरत भर कुछ मरवियात देखें

तिरमिज़ी में इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया मकतूल अपने कातिल को कयामत के दिन इस हाल में लाएगा कि उसकी पेशानी और अपना सिर उसके हाथ में होगा और उसकी आंतें खून बहा रही होंगी और वह कहे गा ऐ मेरे रब! मुझे उसने क़त्ल किया है यहाँ तक कि वह अर्श से कर्र्ब हो जाएगा लोगों ने इब्ने अब्बास (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से इसकी तौबा का ज़िक्र किया तो उन्होंने यह आयत “ومن یقتل مؤمنا متعمدا” तिलावत फरमाई और फरमाया यह आयत मंसूख नहीं हुई और ना इसका हुक्म बदला गया तो फिर उसके लिए तौबा कहाँ हैl

अब्द बिन हमीद व बुखारी व इब्ने जरीर व हाकिम व इब्ने मर्दोया ने सईद बिन जुबैर से रिवायत किया कि अब्दुर्रहमान बिन ज़हरी से पूछा कि वह इब्ने अब्बास से उन दोनों आयतों का सवाल करे जो निसा में हैअर्थात “ومن یقتل مؤمنا متعمدا فجزاؤہ جہنم” आखरी आयत तक और वह जो फुरकान में है “ومن یفعل ذلک یلق اثاما” रावी ने कहा मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने फरमाया जब कोई आदमी इस्लाम में दाखिल हो गया और शरीअत के अहकाम को जान लिया फिर उसने एक मोमिन को जान बुझ कर क़त्ल कर दिया तो उसकी जज़ा जहन्नम होगी और उसकी तौबा नहीं हैl और जो आयत सुरह फुरकान में है जब यह नाज़िल हुई तो मक्का के मुश्रेकीन ने कहा हम ने अल्लाह के साथ शिर्क किया और हमने नाहक क़त्ल किये और हमने बुरे काम किये तो फिर हमें इस्लाम कोई लाभ ना देगा तो यह आयत नाज़िल हुई लफ्ज़ आयत “الا لمن تاب” अर्थात मगर जो तौबा कर ले (फुरकान आयत ७०) यह आदेश (अर्थात तौबा का आदेश) उन लोगों (मुशरेकीन) के लिए हैl

इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि सबसे बड़े गुनाह यह हैं अल्लाह के साथ शिर्क करना किसी जान को क़त्ल करना जिसको अल्लाह पाक ने हराम फरमाया हो क्योंकि अल्लाह पाक फरमाता है लफ्ज़ आयत “فجزاؤہ جہنم خالدا فیھا وغضب اللہ علیہ ولعنہ واعد لہ عذابا عظیما”l

इब्ने मसूद (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से मरवी है कि “ومن یقتل مؤمنا متعمدا” के बारे में रिवायत किया कि यह आयत मोहकम है और इसकी शिद्दत में भी इज़ाफा हुआl

मरवी है कि अबू हुरैरा, इब्ने अब्बास और इब्ने उमर (रज़ीअल्लाहु अन्हुम) (तीनों हज़रात) से एक आदमी के बारे में पूछा गया जिसने एक मोमिन को जान बुझ कर क़त्ल किया था तो उन्होंने फरमाया क्या वह ऐसा कर सकता है कि उसको मौत ना आए और क्या वह ऐसा कर सकता है कि वह एक सुरंग ज़मीन में बना ले या आसमान में सीढ़ी लगा ले या मकतूल को ज़िंदा कर लेl

जान बुझ कर क़त्ल को हलाल समझ कर क़त्ल करने वाले की मगफिरत नहीं होगी

हज़रत अबू हुरैरा (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से मरवी है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया जिस व्यक्ति ने किसी मुसलमान के क़त्ल में आधे शब्द के साथ भी मदद की तो वह कयामत के दिन अल्लाह पाक से इस हाल में मुलाक़ात करेगा कि उसकी पेशानी पर लिखा हुआ होगा अल्लाह की रहमत से मायूसl

एक मोमिन के क़त्ल में शरीक होने वाले सब लोग जहन्नमी हैं

अबू सईद व अबू हुरैरा (रज़ीअल्लाहु अन्हु) दोनों से रिवायत किया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया आसमान और ज़मीन वाले एक मोमिन के खून में शरीक हो तो अल्लाह पाक सबको औंधे मुंह जहन्नम में गिरा देगाl

इब्ने अदी बेहकी ने शाब में वल अस्बहानी ने तरगीब में बराअ बिन आज़िब (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से रिवायत किया कि (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया दुनिया और जो कुछ इसमें है इन सबका समाप्त होना अल्लाह के नजदीक अधिक आसान है एक मोमिन के कत्ल से और अगर आसमान और ज़मीन वाले एक मोमिन के क़त्ल में शरीक हों तो अल्लाह पाक उन सबको जहन्नम की आग में दाख़िल कर देगाl

अस्बहानी ने अबू दर्दा (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से रिवायत किया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया मुसलमान हमेशा इज्ज़त वाला और सालेह रहता हैl जब तक कि नाहक खून ना करे जब उसने नाहक खून कर लिया तो मोहताज हो जाता हैl

अस्बहानी ने इब्ने उमर (रज़ीअल्लाहु अन्हु) से रिवायत किया कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया अगर जिन व इंसान किसी मोमिन के क़त्ल में इकट्ठे हो जाएं तो अल्लाह पाक उनको औंधे मुंह आग में गिरा देगा और अल्लाह पाक ने कातिल और हुक्म देने वाले पर जहन्नम को वाजिब कर दिया हैl

बेहकी ने शोअबुल ईमान में सहाबा (रज़ीअल्लाहु अन्हुम) में से एक आदमी से रिवायत किया कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया जहन्नम की आग को सत्तर हिस्सों में बांटा जाए गा हुक्म करने वाले के लिए ९९ हिस्से होंगे और एक हिस्सा कातिल के लिए होगाl

सुरह निसा की आयत ९२ में क़त्ल ए खता (गलती से क़त्ल करना) का ज़िक्र था और उसकी आयत ९३ में क़त्ल अमद (जानबूझ कर क़त्ल करना) का ब्यान थाl कुरआन पाक और अल्लाह के नबी के इरशाद इस जुर्म के बड़ा होने पर गवाह हैंl कुरआन ए पाक की यही आयत इंसान गौर से पढ़ने और उसमें क़ातिल की जो सज़ा बयान की गई है उस पर निगाह डाले तो रोंगटे खड़े हो जाएं, हुजुर नबी ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि क्त्लुल मोमिन आज़मु इन्दल्लाह मिन ज़वालुद्दुनिया कि दुनिया के फना होने से भी बे गुनाह मोमिन का क़त्ल अल्लाह पाक के नजदीक शदीद तरीन हैl मोअतजेला के नजदीक जान बुझ कर क़त्ल करने वाले की तौबा कुबूल नहीं लेकिन अहले सुन्नत की यह राए है कि सच्चे दिल से तौबा करने वाले की तौबा कुबूल हो जाती हैl और यह वईद उनके लिए है जो तौबा नहीं करते और इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहु अन्हु से क़त्ल ए आमद की जो तफसीर मनकुल है उसके मद्देनज़र तो यह उलझन पैदा हही नहीं होतीl आप ने फरमाया मूतअम्मिदन मुस्तहलन मुकत्तला अर्थात जो जानबूझ कर और मुसलमान के क़त्ल को हलाल समझते हुए क़त्ल करता है उसकी यह सज़ा हैl वल्लाहु तआला आलम बिस्सवाबl

(जारी, इंशाअल्लाह)

स्रोत और संदर्भ

  1. कुरआन ए पाक, कन्जुल ईमान, इमाम अहमद रजा

  2. तफसीर दुर्रे मंसूर, अल्लामा सयूती

  3. तफसीर ए ज़मख्सरी

  4. तफसीर ए बैज़ावी

  5. सहीह बुखारी

  6. सहीह मुस्लिम

  7. इरफानुल कुरआन, ताहिरुल कादरी

  8. ज़ियाउल कुरआन, पीर कर्म शाह अजहरी

  9. अह्कामुल शरइया फी कौनुल इस्लाम दीनल खिदमतिल इंसानियह, ताहिरुल कादरी

  10. रुहुल ब्यान, शैख़ इस्माइल हक़ी

उर्दू से हिंदी अनुवाद

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/kaniz-fatma,-new-age-islam/human-rights-in-islam-part-1--اسلام-میں-انسانی-حقوق/d/119037

URL: http://newageislam.com/hindi-section/kaniz-fatma,-new-age-islam/human-rights-in-islam-part-1--इस्लाम-में-मानव-अधिकार/d/119069

New Age Islam, Islam Online, Islamic Website, African Muslim News, Arab World News, South Asia News, Indian Muslim News, World Muslim News, Women in Islam, Islamic Feminism, Arab Women, Women In Arab, Islamophobia in America, Muslim Women in West, Islam Women and Feminism


Loading..

Loading..