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Hindi Section ( 24 May 2014, NewAgeIslam.Com)

Remedy of the Terrorists is Necessary आतंकवादियों का इलाज ज़रूरी है

 

इरफान ताहिर

18 अक्टूबर, 2012

अल्लाह का फरमान है कि मेरे बारे में जैसा गुमान अपने दिल में पैदा करोगे मुझे वैसा ही पाओगे। जब इंसान अपनी तंत्रिकाओं पर खौफ व खतरे और रंजिश व अंदेशों को हावी कर लेता है तो फिर ये उसकी बेबसी और बेकसी है कि अपमान और तबाही व बर्बादी उसका भाग्य बन जाता है। आज आतंकवादियों कों हमसे ऐतराज़ है कि कोई भी उनके खिलाफ ज़बान न खोले, लिखित में या भाषण में, कोई भी उन्हें बुरा भला कहने की हिम्मत न करे। उनका शासन है मानव जाति पर वो चाहें तो रात को रात जानें वो चाहें तो दिन को दिन बोलें, वो चाहें तो अच्छाई को अच्छाई समझें और वो चाहें तो बुराई में फर्क करें। नहीं नहीं ये तरीक़ा और सलीक़ा हमारा धर्म, हमारा ईमान और हमारा दीन बिल्कुल भी नहीं देता है। एक क्षण भर की खामोशी और उदासीनता हमारे ईमान की दौलत को भी सुरक्षित नहीं रहने देगी। आज पूरी दुनिया आतंकवादियों को खिलाफ ज़बान खोलने पर मजबूर है। मुनाफिक़ों के प्रमुख ओबामा से लेकर बान की मून तक, शांति की राजदूत मलाला से लेकर अमन बीबी तक सभी तो शांति और सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन जो कोई भी आतंकवादियों, उग्रवादियों, चरमपंथियों और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सच्चाई की आवाज़ बुलंद करता है और उनका खण्डन करता है और उनकी नापाक महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट करता है और उनकी बुराई की पहचान करता है तो वो उनकी हिट लिस्ट में आ जाता है यानि अब दुनिया में ही अल्लाह की मौजूदगी में इंसानों को जीवन और मौत के परवाने जारी किए जाते हैं।

कुछ मित्र हम में से हर विचारधारा से सम्बंध रखने वाले ऐसे भी है जो इन आतंकवादियों को अच्छा मानते हुए उनके लिए दिल के अंदर नरमी रखते हैं वो चाहे अमानवीय अत्याचार करें लेकिन उनसे समझौते और बातचीत की बात दुहराई जाती है। जो लोग अस्वाभाविक और गैर शरई काम करते हुए ये भी नहीं सोचते हैं कि अल्लाह देख रहा है तो उनके लिए नरमी और दिल में उनके साथ सहानुभूति का मतलब क्या हो सकता है। हम भी उनके बुरे कामों और बुराईयों में बराबर के भागीदार बन जाते हैं। हमारा देश वर्तमान स्थिति के संदर्भ में आतंकवाद, अशांति और अराजकता को बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हमारी सैद्धांतिक, वैचारिक और धार्मिक सीमाओं के साथ हमारे व्यक्तिगत सीमाओं को भी कमज़ोर किया जा रहा है।

पाकिस्तान दुनिया में विचारधारा पर स्थापित होने वाला पहला राज्य है जिसका संविधान और क़ानून इस्लाम धर्म, शरीयते मोहम्मदी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम और कुरान पर आधारित है। यहां पर वही संविधान चलेगा जो हमें रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और कुरान व हदीस की रौशनी में मिलता है। यहां पर बसने वाले मोहम्मद अरबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शरीयत को मानने वाले हैं किसी स्वयंभू शरीयत के अनुयायी नहीं। मुसलमान शांति और प्रेम का संदेश आम करने वाले हैं। दुनिया में कोई क़ौम ऐसा चरित्र और विचार नहीं रखती जो  इस्लाम धर्म ने जो एक मोमिन मुसलमान को अता कर दिए हैं। बेशक जीवन और मौत अल्लाह के हाथ में है लेकिन अपनी जान की सुरक्षा और अपनी स्वतंत्रता का खयाल रखना हमारा हक़ है। ऐलाने जंग है उन मुर्दा और बीमार विचारों के खिलाफ जो मुसलमान होकर भी मुसलमान का खून बहाते हैं। जो खुद को ईमान वाला कहते हुए भी मोमिनों के साथ मौत की होली खेलते हैं। हमारे देश की व्यवस्था को तबाह करने वालों और हमारे देश में बारूद की फसलें बोने वालों से दोस्ती अब नहीं होगी। अभिमानी और साहसी बहादुर पाक सेना जो पाकिस्तानियों की जान व माल और स्वतंत्रता की रक्षक है उसे चाहिए कि अब डटकर इस्लाम और पाकिस्तान को नुकसान पहुँचाने वाली ताकतों का मुकाबला करें और उन्हें ऐसी इबरत नाक सज़ा दें कि वो कभी भी इस देश के किसी जवान और किसी बच्चे और इस्लाम की बेटी पर वार न करें। अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों के आशीर्वाद से जो हमारी शांति और व्यवस्था को तबाह कर रहे हैं उन्हें सबक सिखाया जाए।

इन हालात में जब आतंकवादी अपनी हठधर्मी की अंतिम हदें भी पार कर गए हैं शांति समझौतों और बातचीत करने वाले मूर्खों के स्वर्ग में आबाद हैं। आतंकवादी उन स्वार्थियों का टोला है जिन्हें ईमान और इस्लाम धर्म से कोई लेना देना नहीं है बल्कि वो सिर्फ अपने लिए सोचते हैं और अपने फायदे को इंसानी जान से ज़्यादा अहम मानते हैं। पूरी क़ौम को चाहिए कि देशभक्ति की भावना का प्रदर्शन करते हुए आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में पाक सेना और खुफिया एजेंसियों का भरपूर साथ दें और तब तक चुप न बैठें जब तक सरकार उग्रवादियों और आतंकवादियों के विरुद्ध जिहाद की घोषणा न कर दे।

18 अक्टूबर, 2012 स्रोतः रोज़नामा असास, पाकिस्तान

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