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The Message of Unity in Professor Akhtarul Wasey's Writings प्रोफेसर अख्तरुल वासे की तह़रीरों में एकता का संदेश

डॉ. ज़फ़र दारिक क़ासमी, न्यू ऐज इस्लाम

(गुज़िशता से पैवसता)

6 जून 2026

इसके साथ मैं यह भी कहना चाहूँगा कि 13 फ़रवरी 2019 को ईरान की अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (भारत शाखा) तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर इंटरफेथ अंडरस्टैंडिंग के संयुक्त में "विश्व धर्मों में पारिवारिक व्यवस्था" विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस अवसर पर प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने एक महत्वपूर्ण भाषण दिया, पाठकों के लाभ के लिए उसका एक संक्षिप्त अंश यहाँ प्रस्तुत है:

"महिलाओं और सज्जनों, मैं इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए इतना महत्वपूर्ण विषय चुनने पर आयोजकों को बधाई देना चाहता हूँ। आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ दूरी और अलगाव के पुराने विचार लगभग समाप्त हो चुके हैं। यातायात और संचार के विकास ने लोगों को एक-दूसरे के बहुत क़रीब ला दिया है और दुनिया एक वैश्विक गाँव जैसी दिखाई देने लगी है। लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि इस दौर में इंसानी रिश्ते कमज़ोर होते जा रहे हैं। परिवार बिखर रहे हैं और लोग मीडिया के शोर में सार्थक संवाद की खुशी खोते जा रहे हैं।

प्रोफेसर अख्तरुल वासे

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पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था। जो इंसान कभी समाज की चिंताओं को अपना समझता था, आज वह अकेलेपन का बोझ उठाने पर मजबूर है। विश्व के धर्मों ने मानवता को एकता और भाईचारे  में बाँधा है। उन्होंने केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि पूरी कायनात को ईश्वर का एक परिवार माना है,जिसे 'वसुधैव कुटुम्बकम्' कहा गया है।

मानव इतिहास की यात्रा आदम और हव्वा की संगति से शुरू हुई। परिवार की मूल इकाई पति और पत्नी हैं, जो कुरआन के अनुसार एक-दूसरे के लिए लिबास हैं। उनका संबंध केवल शारीरिक सुख के लिए नहीं, बल्कि मानव जाति की निरंतरता के लिए है। विवाह के पवित्र बंधन से परिवार का निर्माण होता है, जिसमें बेटे-बेटियाँ, भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी और अन्य रिश्ते शामिल होते हैं। यही रिश्ते समाज को विश्वास और मज़बूती प्रदान करते हैं। किसी भी समाज में रिश्तों का सम्मान उसकी सभ्यता का प्रमाण होता है।"

जिस प्रकार प्रोफेसर अख्तरुल वासे मुसलमानों से अपने देशवासियों के साथ संवाद करने की अपील करते हैं, उसी प्रकार वे देश के अन्य नागरिकों, विशेष रूप से सत्ता में बैठे लोगों से भी मुसलमानों के साथ संवाद  करने का आग्रह करते हैं। उनका मानना है कि इससे भारत की सामाजिक विविधता और आपसी सद्भाव सुरक्षित रहेगा। इससे किसी भी समुदाय को उपेक्षित या अलग-थलग महसूस नहीं होगा। तभी भारत वास्तव में दुनिया के लिए एक आदर्श बन सकेगा।

इसी संदर्भ में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा था। यह पत्र 19 जून 2022 को राष्ट्रीय सहारा उर्दू में पब्लिश हुआ था। यह पत्र उर्दू, हिन्दी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में मोजूद है।

इस पत्र में प्रोफेसर वासे ने भारत में अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, के सामने आने वाली कठिनाइयों का ज़िक्र किया है। उन्होंने पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की माँग की।

पत्र में यह भी कहा गया कि अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा और चिंता बढ़ रही है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। प्रोफेसर वासे के अनुसार, एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने से भारत की बहुलतावादी पहचान मजबूत होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से मुसलमानों के साथ संवाद शुरू करने का भी आग्रह किया ताकि शिकायतों और ग़लतफहमियों को दूर किया जा सके।

प्रोफेसर अख्तरुल वासे की यह तह़रीरैं ऐतिहासिक हैं। वे भारत के लोगों को आपसी सद्भाव, सम्मान और भाईचारे के साथ रहने का संदेश देती हैं। वे यह भी स्पष्ट करती हैं कि जब तक लोग एक-दूसरे के धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को नहीं समझेंगे, तब तक एक स्वस्थ और मज़बूत समाज का निर्माण संभव नहीं है।

जो समाज दुनिया के लिए आदर्श बनना चाहते हैं, उन्हें आपसी समझ, सहयोग और सम्मान की बुनियाद पर खड़ा होना होगा। ग़लतफहमियों के आधार पर दुश्मनी बढ़ाना किसी भी समाज के लिए हानिकारक है। समझदार क़ोमैं नफ़रत को बढ़ावा नहीं देतीं, बल्कि उसे समाप्त करने का प्रयास करती हैं।

इसलिए ज़रूरी है कि हम संवाद के महत्व को समझें और समाज में उसे बढ़ावा देने के लिए ईमानदारी से प्रयास करें।

(जारी)

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डॉ. ज़फ़र दारिक क़ासमी इस्लामिक इसकोलर, मुसन्निफ़ और न्यु ऐज इस्लाम के मुसतक़िल कालम निगार हैं।

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Article:  The Message of Unity in the Writings of Professor Akhtarul Wasey प्रोफेसर अख्तरुल वासे की तह़रीरों में एकता का पैग़ाम

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