
अज़ीम एम. मियां
17 अप्रैल, 2013
(उर्दू से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)
अमेरिकी शहर बोस्टन में 15 अप्रैल को छुट्टी के दिन वार्षिक मैराथन दौड़ खत्म होने की लाइन पर बम धमाकों से लगभग 135 लोग घायल और 2 लोगों की मौत की दुखद और निंदनीय घटना ने पूरे अमेरिका को हिलाकर रख दिया। अमेरिका में बसे कई लाख मुसलमानों ने 11 सितंबर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के हादसे के बाद कई साल तक शक किये जाने वाली और जिसकी निगरानी की जा रही हो, ऐसे समुदाय के रूप में जीवन व्यतीत किया। अमेरिका में पलने वाली नई मुस्लिम पीढ़ी भी इस घटना के प्रभाव से नहीं बच सकी और अब ग्यारह साल के एक कठिन और धैर्य का इम्तेहान लेने वाले वक्त के बाद स्थिति कुछ सामान्य हो रही है और मुसलमान समुदाय एक बार फिर ध्यानपूर्वक और प्रेम के साथ खुद को अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में शामिल करने के लिए सक्रिय हो रहा है, तो बोस्टन में बम धमाकों की खबर ने उन्हें एक बार फिर सदमे, चिंता, खौफ़ और अनजाने अंदेशों से दो चार कर दिया है। मुसलमान आबादी वाले इलाके में गलियां और सड़कें खामोश और खाली नज़र आने लगीं। न्यूयॉर्क में ब्रुकलिन के पाकिस्तानी इलाक़े में भी यही स्थिति थी मगर ख़ुदा भला करे राष्ट्रपति ओबामा कि वो जब टीवी स्क्रीन पर आए तो बोस्टन के पुलिस चीफ़ और मेयर की तरह पूरी सावधानी से किसी समूह या व्यक्ति की ओर इशारा किये बिना बहुत ही ज़िम्मेदारी से कहा कि अभी हम जांच कर रहे हैं और घटना के ज़िम्मेदार तत्वों की पहचान और ज़िम्मेदारी के बारे में तथ्य खोज रहे हैं।
अगर ख़ुदा न करे वो तुरंत अलकायदा या किसी ऐसे समूह की पहचान कर देते तो अमेरिका के मुसलमानों के लिए बुरे दिनों की शुरुआत आज ही से हो जाती। जिस मुसलमान से भी मेरी बात हुई, वो सब एक ही दुआ मांग रहे हैं कि ख़ुदा करे घटना के ज़िम्मेदारों की पहचान और गिरफ्तारी जल्द से जल्द हो जाए और खुदा करे उसका नाम और मसलक (पंथ) भी ग़ैर मुस्लिम हो वरना पिछले ग्यारह सालों में अमेरिकी शहरों, राज्यों और संघीय सरकारों की मशीनरी में उच्च पदों पर बैठे कुछ ऐसे तत्व जो मुसलमानों की सख्त निगरानी और छवि को नकारात्मक रूप देने में खुशी महसूस करते हैं, वो खुल कर कहते कि हमारे दृष्टिकोण और राय कितनी सही है। मिसाल के लिए न्यूयॉर्क पुलिस के कमिश्नर केली, न्यूयॉर्क की मस्जिदों बल्कि न्यूयॉर्क से भी बाहर अपने पुलिस अफसर भेजकर मुसलमानों की निगरानी करने के खुफिया आपरेशन के विवाद और आपत्तियों को खत्म करके अपने कदम के पक्ष में औचित्य हासिल कर लेते। आखिर अमेरिकी व्यवस्था के सिद्धांत समानता, कानून का राज और पारदर्शिता के आधार पर स्थापित हैं और अमेरिकी नागरिक के लिए तो ये व्यवस्था काफी हद तक सैद्धांतिक और समानता वाली नज़र आती है।
इसी व्यवस्था की आज़ादी के बदौलत मुझ जैसे गैर-अमेरिकी पत्रकार के लिए अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में अब तक सभी प्रमुख कांग्रेसमैनों, सेनीटरों, राजनेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुँच और विशेष इंटरव्यूज़ लेने का सम्मान और मौक़ा मिल सका वरना एशियाई और अफ़्रीकी देशों में विदेशी मीडिया लिए इतनी पहुँच और सराहना कहाँ और कौन सा देश देगा? बहरहाल अभी तो अमेरिका के मुसलमान और पाकिस्तानी दिल थामे ये दुआ कर रहे हैं कि बोस्टन में धमाकों का ज़िम्मेदार कोई और ही निकले क्योंकि अमेरिका के मुसलमान 9/11 के बाद ऐसी किसी घटना और सार्वजनिक नाराज़गी के असर को बर्दाश्त नहीं कर सकते। अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा इस लेख के लिखे जाने तक बहुत सी ऐसी जानकारी और कदम से बाखबर किये जा चुके हैं कि जिन तक पहुँचना किसी और को नसीब नहीं लेकिन राष्ट्रपति ओबामा को जनता के सामने लाने से पहले विभिन्न सुरक्षा आवश्यकताओं, राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव और अमेरिकी जनता की संभावित प्रतिक्रिया को मद्देनजर रखना होगा। दुआ है कि इस घटना के अंतिम तथ्य और प्रभाव से अमेरिकी मुसलमान किसी और नुकसान से बचे रहें।
अब ज़रा अपने पाकिस्तानी अंदाज़ का भी कुछ ज़िक्र हो जाए। पिछले दिनों न्युयॉर्क के एक होटल में पाकिस्तानी मूल के डॉक्टरों के संगठन 'अपना' के सदस्यों का वसंत के मौसम में होने वाली सभा हुई। तीन दिवसीय कार्यक्रम में चर्चा का भी एक कार्यक्रम शामिल था जिसका विषय "पाकिस्तान में डॉक्टरों का क़त्ल" था। इसका मकसद पाकिस्तानी डॉक्टरों के संगठन की ओर से डॉक्टरों की टार्गेट किलिंग की निंदा और विरोध प्रदर्शन था। चर्चा के माडरेटर और वक्ता डॉक्टर तक़ी थे जबकि पैनल में शामिल दोहरी नागरिकता कानून से प्रभावित पूर्व सदस्य राष्ट्रीय असेम्बली फराह नाज़ इसफ़हानी और पूर्व सदस्य पंजाब असेम्बली डॉ. अमीना बटर थीं। इन दोनों को आम चुनाव के बजाय महिलाओं के लिए विशेष सीटों पर पीपुल्स पार्टी ने नामित किया था। चर्चा के पैनल में शामिल तीसरी महिला वरिष्ठ पत्रकार बीना सरवर थीं। पाठकों चर्चा में बहुमत अमेरिका में पाकिस्तानी मूल के डॉक्टरों की थी जो "अपना" के सदस्य हैं। जहां तक पाकिस्तान में डॉक्टरों की टार्गट किलिंग की निंदा का सम्बंध है तो ऐसे नजायज़ और अकारण हत्या पर "अपना" ही क्या, दुनिया का हर इंसान निंदा करेगा। बहैसियत पाकिस्तानी किसी भी पाकिस्तानी का नाहक खून शर्मनाक और निंदनीय और दंड के लाएक़ जुर्म है।
"अपना" जैसे प्रोफेशनल संगठन के प्लेटफार्म से डॉक्टरों की हत्या एक महत्वपूर्ण विषय और बहुत निंदनीय कृत्य है जिसके लिए "अपना" ने बिल्कुल सही तौर पर ये चर्चा आयोजित करके अपनी डॉक्टर बिरादरी की सेवा की है लेकिन चर्चा के पैनल के कुछ सदस्यों ने जब इस विषय को अपने निजी एजेंडे के रंग में पेश करने की कोशिश की और निंदा प्रस्ताव में भी इसे पाकिस्तानी डॉक्टरों की हत्या करार देने के बजाय मसलक (पंथ) का रंग देने की कोशिश की तो चर्चा के कुछ श्रोताओं ने सवाल और जवाब के समय इस पर आपत्ति जताई और अपने पक्ष को बताते हुए कहा कि टार्गेट किलिंग का शिकार होने वाले डॉक्टर पाकिस्तानी नागरिक हैं और "अपना" पाकिस्तानी मूल के डॉक्टरों की लाभ न कमाने वाला संगठन और पाकिस्तानी, अमेरिकन पहचान रखने वाला है। इसलिए कुछ वक्ता इस किलिंग को दूसरा कोई रंग देने की कोशिश के बजाय पाकिस्तान की राष्ट्रीय हानि और राष्ट्रीय समस्या के रूप में इसकी निंदा और विरोध होना चाहिए।
चर्चा के वक्त एक अवसर पर चिकित्सक और कुछ श्रोता डॉक्टरों के बीच कटु वाद विवाद होते हुए भी देखा गया जो चर्चा और विरोध के प्रयोजनों के भी खिलाफ था। "अपना" (APPNA) के नाम, चार्टर, बाई लाज़, मेम्बरशिप और उद्देश्यों के अनुसार पाकिस्तानी मूल के डॉक्टरों की एक संस्था है जो अमेरिका के पाकिस्तानियों की सबसे प्रतिष्ठित, कुशल, संगठित और प्रोफेशनल संगठन है और यही उसकी पहचान और धुरी है। अमेरिका में लगभग 16 हजार पाकिस्तानी डॉक्टर रहते हैं जिनमें से संगठन के अध्यक्ष डॉ. जावेद सुलेमान के अनुसार 4 हजार इस संगठन के सदस्य हैं इसलिए "अपना" को अपनी पाकिस्तानी, अमेरिकन पहचान के साथ अनावश्यक समस्याओं में उलझने के बजाय सबको साथ लेकर चलने की राह को अपनाना चाहिए। बाक़ी 12 हजार पाकिस्तानी मूल के डॉक्टरों को भी अपने साथ शामिल करने की रणनीति अपनाने में सभी का भला है। न कि चर्चाओं में पाकिस्तानियों को और भी बांटने वाले अनावश्यक या कम अहम मुद्दों को उछालना चाहिए। चर्चा के वक्ता और श्रोता दोनों ही डॉक्टर और "अपना" के सदस्य थे मगर एक दूसरे का विरोध कर रहे थे। "अपना" को तो अमेरिका में पाकिस्तानियों का मार्गदर्शन करने के लिए नेतृत्व की भूमिका निभा कर अपनी सेवाओं को और भी उपयोगी बनाना चाहिए। हर रंग और स्वभाव के पाकिस्तानी को साथ लेकर संयुक्त प्लेटफार्म और उद्देश्यों की सुंदरता पैदा करने की रणनीति की ज़रूरत है।
14 अप्रैल, 2013 स्रोत: रोज़नामा जंग, कराची
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