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Hindi Section ( 16 March 2012, NewAgeIslam.Com)

Hazrat Ali –Man Of Knowledge And Vision हज़रत अली (रज़ि)- इल्म और बसीरत वाले इंसान


असग़र अली इंजीनियर (अंग्रेजी से अनुवाद‑ समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

इस्लाम ने अरब में इल्म के मैदान में एक महान परिवर्तन पैदा किया, जहां साक्षरता लगभग न के बराबर थी और अरब के लोग संस्कृति और सभ्यता के बजाय अपने नस्ब पर गर्व करते थे। महान इतिहासकार और कुरान के मोबस्सिर तबरी के अनुसार,  इस्लाम से पहले मक्का में 17 से अधिक लोग नहीं थे जो पढ़ लिख सकते थे। इस्लाम से पहले के समय के बारे में कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि यह दौरे जेहालत के नाम से जाना जाता है। इस पृष्ठभूमि में कुरान के इल्म पर जोर देने को समझा जाना चाहिए। कुरान की पहली आयत शब्द इक़रा (पढ़) के साथ शुरू होती है और शब्द इल्म कुरान में 800 से अधिक बार आया है जबकि उसके मुकाबले में जिहाद शब्द सिर्फ 41 बार आया है। कुरान ने इल् को रौशनी और जेहालत को अंधेरा कहा है।

ये कहा जा सकता है कि अरब में इल्म के तीन मुख्य स्रोत थे और ये कुरान,  पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) और हज़रत अली (रज़ि) थे। इसमें शक नहीं कि कुरान वह बुनियादी स्रोत था जो पैगम्बर (स.अ.व.) पर वही के तौर पर उतरा,  नबी करीम (स.अ.व.) ने हदीस (जो उन्होंने विभिन्न विषयों पर फरमाया) और सुन्नत (यानी आप (स.अ.व.) ने जो अमल किया) के ज़रिए इसमें साझेदारी की और लोगों ने जिस का मुशाहिदा किया और बयान किया। हज़रत अली (रज़ि) का तआवुन हम लोगों तक उनके खुत्बात के ज़रिए पहुंचा, क्योंकि हज़रत अली (रज़ि) महान वक्ता थे उनके भाषणों और कुछ पत्र जो उन्होंने अपने गवर्नरों को लिखा था, को बाद में नहजुल बलाग़ा के शीर्षक से जमा किया गया। पैगम्बर (स.अ.व.) की मशहूर हदीस है जिसमें आप (स.अ.व.) ने कुबूल किया है कि मैं इल्म का शहर हूँ और अली उसका दरवाज़ा हैं और कोई भी शहर में दरवाजे से दाखिल होता है। इल्म के मामले में हज़रत अली (रज़ि) की ये अहमियत थी। हज़रत अली (रज़ि) ने मुसलमानों की इल्मी तरक्की को बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुरान इलाही इल्म का ज़रिया है यानी अल्लाह से नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को हासिल इल्म फितरी था, और हज़रत अली (रज़ि) का इल्म वो था, जो उन्हें पैगम्बर (स.अ.व.) से मिला था और इसीलिए उनका इल्म,  इल्म अद्दीनी कहा जाता है और हज़रत अली (रज़ि) का इल्म समाज के बारे में उनकी बसारत से भी था। पैगम्बर (स.अ.व.) इंसाने कामिल थे और हज़रत अली (रज़ि) कमाल में आप (स.अ.व.) के बाद थे। इसलिए सूफी हज़रात के नज़दीक पैग़म्बर मुहम्मद (स.अ.व.) और हज़रत अली (रज़ि) प्रेरणा के दो स्रोत हैं। पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) ने इस दुनिया में क़याम किया लेकिन कभी उन्हें इससे उल्फत नहीं रही। हज़रत अली (रज़ि) जिन्होंने हमेशा पैग़म्बर (स.अ.व.) की सुन्नतों पर अमल करने की कोशिश की,  वो भी कभी इस दुनिया की चमक दमक की ओर आकर्षित नहीं हुए। हज़रत अली (रज़ि) के बारे में रवायत है कि उन्होंने फरमाया कि, " मैंने दुनिया को तीन बार तलाक दिया यानी कभी उसकी ओर आकर्षित नहीं हुआ।

हज़रत अली (रज़ि), नबी करीम (स.अ.व.) की तरह,  मुख्य रूप से दिल की गहराईयों से आध्यात्मिक थे और साथ ही नबी करीम (स.अ.व.) की तरह इस तथ्य से परिचित थे कि लाखों लोग इस दुनिया में रहते हैं और ये दुनिया ऐसी होनी चाहिए जो इंसानी ज़िंदगी को बामानी (अर्थपूर्ण) और हिदायत फराहम करने वाली और इंसानी मुसीबतों को कम करने वाला बनाए। दुनिया को छोड़ना कोई हल नहीं है। यह तभी मुमकिन है जब इंसान अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करे लेकिन अपने शरीर का गुलाम न बने।

इस्लाम के इब्तेदाई दौर में सत्ता के लिए संघर्ष था लेकिन हज़रत अली (रज़ि) ने खुद को तब तक इससे दूर रखा, जब तीसरे खलीफा हज़रत उसमान गनी (रज़ि.) की हत्या के बाद सत्ता की जिम्मेदारी उन पर डाल नहीं दी गई। हज़रत अली (रज़ि) जबकि सत्ता के लालच से बहुत दूर थे वो हकीकयत से परिचित थे कि सत्ता दूसरे को काबू में करने के लिए नहीं चाहता बल्कि कानून,  नैतिकता और न्याय के कुछ सिद्धांतों को लागू करने के लिए चाहता है। कुरान बेहतरीन रहनुमाई करता है लेकिन वो सभी लोग जो इस्लाम में दाखिल हुए वो कामिल मुसलमान नहीं बन सके। उन्हें हर तरह की दुनियावी लालच और यहां तक ​​कि उनमें से कई ने दुनियावी फायदे हासिल करने के लिए इस्लाम स्वीकार किया।

इसलिए हज़रत अली (रज़ि) की तर्जीह (वरीयता) मुसलमानों को हक़ीक़ी (वास्तविक) मोमिन के तौर पर ढालने की थी और उन्हें नेक मुसलमान बनाने और दुनिया को कुरान की शिक्षाओं को ध्यान में रखते हुए इस दुनिया को न्यायपूर्ण स्थान बनाने की थी।  कुरान करीम ने आध्यात्मिक और शारीरिक जरूरतों और भौतिकता और आध्यात्मिकता में संतुलन स्थापित करने की कोशिश की और नबी करीम (स.अ.व.) इसकी सही मिसाल थे। नहजुल बलाग़ा हज़रत अली (रज़ि) की नसीहतों का ज़बरदस्त स्रोत है। क्योंकि हज़रत अली (रज़ि) दूसरों को कंट्रोल करने के लिए सत्ता की इच्छा कभी नहीं रखी जब तक  उन पर सत्ता की जिम्मेदारी डाल नहीं दी गई और कानून और न्याय के शासन लगाने के लिए जितनी सख्ती हो सकती थी हज़रत अली (रज़ि) ने उतनी बरती। इस अमल में उनके करीबी सहयोगी भी उनसे दूर हो गए लेकिन उन्होंने परवाह नहीं की। अब्दुल्लाह बिन अब्बास उनके करीबी सहयोगी थे और इसके बावजूद भी हज़रत अली (रज़ि) ने उन्हें एक सख्त खत तब लिखा था, जब उन्होंने  बसरा का गवर्नर रहते हुए बैतुल-माल से अपने हिस्से से अधिक पैसा लिया था। उन्होंने मायूसी में बसरा छोड़ दिया था।

हज़रत अली (रज़ि) ने बसरा के गवर्नर औऱ अपने वफ़ादार सहयोगी मलिक बिन अश्तर को भी खत लिखा था जिसे शासन के सिद्धांतों का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है। इस पत्र में हज़रत अली (रज़ि) ने मलिक बिन अश्तर को सुझाव दिया था कि, ये मत कहो कि आपका फरमारवाँ और डिक्टेटर हू और इसलिए तुम्हें मेरे आदेश का पालन करना चाहिए,  क्योंकि यह तुम्हारे दिल को बदज़न कर देगा। उन्होंने लिखा कि,  'खुदा के हक़ और इंसानों के हुक़ूक़ का अपने अमल के ज़रिए अपने ज़हन को एहतेराम करने दो...... वरना तुम खुद के साथ और इंसानियत के साथ नाइंसाफी कर रहे होगे।

उन्होंने मलिक अश्तर को सुझाव दिया कि 'जनता का ध्यान उसी तरह रखो जैसे अपने बच्चों का रखते हो और उनके सामने भलाई के इन कामों का ज़िक्र न करो जो तुमने किया है,  और उसके बदले में जो इज़हारे तसक्कुर (कृतज्ञता) करे तो उसे अनदेखा न करो।

हज़रत अली (रज़ि) ने लिखा है, जो लोगों में सबसे बेहतर हो और जिसे खौफज़दा (भयभीत) न किया जा सके,  जो अक्सर गलती न करता हो, जो राहे हक़ से नहीं हटता है और खुदगर्ज़ और लालची न हो उसको बतौर चीफ जस्टिस इंतेखाब किया जाना चाहिए।

इस तरह हम पाते हैं कि हज़रत अली (रज़ि) का तसव्वुरे एक्तेदार जनता के लिए था। जनता से ऊपर कभी कुछ भी नहीं लेकिन दुर्भाग्यवश दुनिया इस कदर कामिल नहीं है जो उनके इस तसव्वुर को कुबूल कर सके और हज़रत अली (रज़ि) ने अपना जीवन देकर इसकी कीमत अदा की,  और इस मकसद के लिए रमज़ान की 21 तारीख को आप शहीद हो गए।

लेखक इस्लामी विद्वान और सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसायटी एंड सेकुलरिज़्म, मुंबई के प्रमुख हैं।

URL for English article: http://www.newageislam.com/islamic-personalities/hazrat-ali-–man-of-knowledge-and-vision-/d/3373

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/hazrat-ali---a-man-of-knowledge-and-insight--حضرت-علیؓ---علم-اور-بصیرت-والے-انسان/d/6413

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