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Hindi Section ( 11 Feb 2013, NewAgeIslam.Com)

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Miracles in the Quran क़ुरान में चमत्कार

 

ऐमन रियाज़, न्यु एज इस्लाम

12 नवंबर 2012

(अंग्रेजी से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

हम अनक़रीब ही अपनी (क़ुदरत) की निशानियाँ अतराफ (आलम) में और ख़़ुद उनमें भी दिखा देगें यहाँ तक कि उन पर ज़ाहिर हो जाएगा कि वही यक़ीनन हक़ है क्या तुम्हारा परवरदिगार इसके लिए काफी नहीं कि वह हर चीज़ पर क़ाबू रखता है (41:53)

पवित्र क़ुरान एक ऐसी आखरी आसमानी किताब है जो आखरी पैग़म्बर मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुई। किसी भी किताब के बारे में दावा करने के लिए कि ये खुदा की तरफ से एक इल्हामी (ईश्वरोक्ति) किताब है, उसे उस ज़माने की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। पिछला ज़माना चमत्कारों का ज़माना था, क़ुरान चमत्कारों का चमत्कार है। इसके बाद ज़बान (भाषा) और अदब (साहित्य) का समय आया। मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों का ये कहाना है कि क़ुरान इस धरती पर की सर्वश्रेष्ठ किताब है। और आज का दौर विज्ञान और टेक्नोलोज़ी का है। आइए देखते हैं कि क्या क़ुरान को वास्तव में एक इल्हामी किताब समझा जा सकता है।

विषय पर विचार करने से पहले, मैं पाठकों को याद दिला दूँ कि क़ुरान कोई साइंस की किताब नहीं है, ये निशानियों की एक किताब है। इसलिए विज्ञान के सम्बंध में क़ुरान की आयतों को पढ़ते और समझते हुए कोई वैज्ञानिक नहीं बन सकता।

खगोल विज्ञान के क्षेत्र में:

खगोल विज्ञानी इस बात को स्पष्ट करते हैं कि ये दुनिया कैसे अस्तित्व में आई। वैज्ञानिक लोग इसे बिग बैंग (Big Bang) कहते हैं। सबसे पहले ये एक प्राथमिक नेब्युला था, जो बिग बैंग के साथ अलग हो गये जिससे आकाशगंगाओं और सितारों का जन्म हुआ। क़ुरान कहता है:

जो लोग काफिर हो बैठे क्या उन लोगों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों बस्ता (बन्द) थे तो हमने दोनों को शिगाफ़ता किया (खोल दिया) और हम ही ने जानदार चीज़ को पानी से पैदा किया इस पर भी ये लोग ईमान न लाएँगे (21:30)

अब ये ज्ञात तथ्य है कि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है, ये एडविन हब्बल (Edvin Hubbel) थे जिन्होनें इसकी खोज की। क़ुरान कहता है:

और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है (51:47)

कुछ दशकों पहले ये माना जाता था कि सूरज स्थिर है, लेकिन ताज़ा वैज्ञानिक खोज के अनुसार हमें ये पता चला कि सूरज को एक परिक्रमा पूरा करने में लगभग 25 दिन लगते हैं।

''और वही वह (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने रात और दिन और आफ़ताब और माहताब को पैदा किया कि सब के सब एक (एक) आसमान में पैर कर चक्मर लगा रहे हैं (21:33)

जल चक्र के क्षेत्र में :

चक्कर (खाने) वाले आसमान की क़सम (इसका मतलब बारिश है, अल्लाह ने विशेष रूप से बारिश का उल्लेख नहीं करता, क्योंकि बारिश के अलावा दूरसंचार, टीवी और रेडियो की तरंगे भी लौटती हैं,'' ( 86:11)

''क्या तूने उस पर भी नज़र नहीं की कि यक़ीनन ख़ुदा ही अब्र को चलाता है फिर वही बाहम उसे जोड़ता है-फिर वही उसे तह ब तह रखता है तब तू तो बारिश उसके दरमियान से निकलते हुए देखता है और आसमान में जो (जमे हुए बादलों के) पहाड़ है उनमें से वही उसे बरसाता है- फिर उन्हें जिस (के सर) पर चाहता है पहुँचा देता है- और जिस (के सर) से चाहता है टाल देता है- क़रीब है कि उसकी बिजली की कौन्द आखों की रौशनी उचके लिये जाती है (24:43)

भूविज्ञान के क्षेत्र में। भूवैज्ञानिक हमें ये बताते हैं कि धरती की त्रिज्या (Radius) लगभग 3750 मील है। पृथ्वी की पपड़ी का सतही भाग बहुत ही पतला है। और इस बात की बहुत संभावना है कि इस ऊपरी परत में कम्पन्न पैदा हो। और ऐसा इसकी वलय प्रक्रिया की वजह से है, जिसने पहाड़ों को जन्म दिया, जिससे धरती को स्थायित्व मिलता है। क़ुरान की सूरे अलनबा की आयत 6 और 7 में अल्लाह ने फरमाया है कि ''हमने ज़मीन को वुस्अत (विस्तार) अता की और पहाड़ को खम्भे की मानिंद (समान) पैदा किया।''

क़ुरान में अल्लाह ने सूरे अलगाशेआ की आयत 19, और सूरे नाज़ियात की आयत 32 में फरमाया है कि, और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं।''

और भूविज्ञानी आज ये कहते हैं कि पहाड़ धरती को स्थिरता प्रदान करते हैं।

क़ुरान सूरे अम्बिया आयत 31, सूरे लुक़मान आयत 10 और सूरे  अलनहल आयत 15 में कहता है:

और हम ही ने ज़मीन पर भारी बोझल पहाड़ बनाए ताकि ज़मीन उन लोगों को लेकर किसी तरफ झुक न पड़े और हम ने ही उसमें लम्बे-चौड़े रास्ते बनाए ताकि ये लोग अपने-अपने मंज़िलें मक़सूद को जा पहुँचे।''

समुद्र  विज्ञान के क्षेत्र में पवित्र क़ुरान ने सूरत अलफ़ुरकान की आयत 53 में कहा है ''और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने दरयाओं को आपस में मिला दिया (और बावजूद कि) ये खालिस मज़ेदार मीठा है और ये बिल्कुल खारी कड़वा (मगर दोनों को मिलाया) और दोनों के दरमियान एक आड़ और मज़बूत ओट बना दी है (कि गड़बड़ न हो)।'' (25: 53)

सूरे रहमान की आयत 19 और 20 में क़ुरान इरशाद फ़रमाता है:

''उसी ने दरिया बहाए जो बाहम मिल जाते हैं। दो के दरमियान एक हद्दे फ़ासिल (आड़) है जिससे तजाउज़ नहीं कर सकते।''

जब भी कोई विशेष प्रकार का पानी किसी दूसरे प्रकार के पानी के साथ बहता है, तो वह अपने घटकों को खो देता है, और जिस पानी में वो बहता है उसमें ही जा मिलता है। कुरान दो पानियों के इस तरह एक दूसरे में समाहित होने वाली जगह का हवाला 'बरज़ख' नज़र न आने वाली रुकावट के रूप में किया है।

भ्रूणविज्ञान के क्षेत्र में क़ुरान भ्रूण के विभिन्न चरणों को संक्षेप में दिया है।

' और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया। फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा। फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है (सूरे  अलमोमेनून, आयत 12 से 14)

''तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है। फिर तुम लोग (दोबार की) क्यों नहीं तस्दीक़ करते। तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं (क़ुरान 56: 57- 59)

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