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Hindi Section ( 22 Apr 2015, NewAgeIslam.Com)

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इराक से कैसे निकलेगा आईएस

 

By रॉबर्ट ए. पैपे

21 अप्रैल 2015

रणनीति की कमी के लिए आलोचना सहने के बावजूद अमेरिका और इसके सहयोगियों ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पिछले एक वर्ष में उसके नियंत्रण वाले इराक एवं सीरिया के क्षेत्र अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए बेहद खतरनाक बन गए थे, लेकिन अब उसके नियंत्रण वाले क्षेत्र में एक तिहाई से ज्यादा की कमी हुई है।

ओबामा प्रशासन द्वारा मोसुल को फिर से नियंत्रण में लेने की योजना घोषित होने के बाद यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जंग में कौन-सी रणनीति कारगर होगी। कई लोग पूछते हैं कि क्या मोसुल का आक्रामक होना संभव है। हां है, लेकिन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ पूरी सफलता इस पर निर्भर है कि अमेरिका अपनी 'हथौड़े और निहाई' वाली रणनीति पर कितना टिका रहता है।

हवाई अभियान ने इस रणनीति का इस्तेमाल करते हुए इस्लामिक स्टेट को घिरने को मजबूर कर दिया- या तो वह विरोधी जमीनी सेना पर स्थानीय वर्चस्व हासिल करने के लिए अपने बलों पर ध्यान केंद्रित करे, लेकिन तब अमेरिकी वायु सेना के 'हथौड़े' से उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, या हवाई हमलों से बचने के लिए वह अपने लड़ाकों को छोटी-छोटी टुकड़ियों में बिखेर दे, लेकिन अपने विरोधियों के जबर्दस्त जमीनी बलों की 'निहाई' पर उसके पिटने का खतरा है। यानी किसी भी सूरत में इस्लामिक स्टेट को नुकसान उठाना ही होगा। अमेरिकी वायु सेना का हौसला बुलंद है और उसने स्थानीय जमीनी बलों की शक्ति में कई गुना वृद्धि की है।

इस्लामिक स्टेट के दो मुख्य लक्ष्य हैं-विस्तार और एकीकरण। जब से उसके खिलाफ हवाई अभियान शुरू हुआ है, उसके विस्तार पर रोक लगी है, लेकिन यह अभियान शायद ही सुन्नी क्षेत्र में नियंत्रण मजबूत बनाने की जेहादियों की रणनीति में सेंध लगा पाया है।

अमेरिका सीरिया और इराक के बीच इस्लामिक स्टेट की भारी सैन्य गतिविधि को सीमित करने और उसके आगामी विस्तार को रोकने के लिए हवाई हमलों का उपयोग कर सकता है। अगर इस्लामिक स्टेट को अपने लोगों और सामग्रियों को भारी मात्रा में इकट्ठा करने से रोक दिया जाता है, तो वह इराक में अपनी स्थिति फिर से बेहतर बनाने में अक्षम रहेगा।

पिछली गर्मियों से इस्लामिक स्टेट ने हवाई हमलों के बावजूद इराक और सीरिया के सुन्नी क्षेत्रों में अपना नियंत्रण बढ़ाया है। हवाई हमलों ने इसके कमांड एवं नियंत्रण ढांचे को निशाना जरूर बनाया, मगर ये हमले राजस्व पैदा करने वाले तेल कार्यक्रमों को स्थायी नुकसान पहुंचने में विफल रहे।

वर्ष 2006 से अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के पिछले तीन नेताओं को मारा है, लेकिन हर बार शीघ्र ही एक नया नेता उभरकर सामने आ गया। जब तक अमेरिका और उसके सहयोगी इस तरह के व्यवधान का फायदा उठाने के लिए अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई नहीं करते, इस्लामिक स्टेट शीघ्र ही संगठित हो जाएगा और उसके नेताओं को मारने की रणनीति को विफल कर देगा।

इसलिए सुन्नी क्षेत्र पर पुनः अधिकार हासिल करने और इस्लामिक स्टेट से निपटने के लिए एक नए दृष्टिकोण की जरूरत है। सबसे पहले इस्लामिक स्टेट का विरोध करने वाले सुन्नियों की पहचान करके उनका समर्थन करना होगा। यहां कुर्दिश या शिया नेतृत्व वाले इराकी लड़ाकों पर जोर देने की किसी भी रणनीति के विफल होने की संभावना है, जैसा कि पहले भी हो चुका है।

लिहाजा नए अभियान की शुरुआत नीनेव प्रांत में स्थित पुलिस बल और अनबार प्रांत के सुन्नी कबीलों का समर्थन हासिल कर की जा सकती है। दरअसल इन दोनों ही जगहों में इस्लामिक स्टेट को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस्लामिक स्टेट ने जब नीनेव को अपने कब्जे में लिया था, तो इराक की शिया सरकार ने यहां के 24 हजार जवानों के पुलिस बल को धन और हथियारों से वंचित कर दिया था। इसी तरह अनबार प्रांत में इस्लामिक स्टेट ने उनके साथ नहीं आने वाले सैकड़ों लोगों को मार डाला था। इस्लामिक स्टेट जब इनके क्षेत्र पर कब्जा जमाना चाहेगा, तो ये समुदाय उसके लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं। पिछले छह महीनों से इस्लामिक स्टेट ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में जिस तरह से न केवल शिया, बल्कि कुछ सुन्नी समुदायों के खिलाफ बर्बर ताकत का इस्तेमाल किया है, उसने सुन्नी समुदाय में विभाजन के लिए मंच तैयार किया है।

मोसुल पर पुनः कब्जे की योजना की घोषणा को पहला कदम कहा जा सकता है, पर इराकी सरकार की कार्रवाई ही सुन्नी समुदाय को पूरी तरह से संगठित कर सकती है। इसके साथ ही जरूरी है कि इराकी सरकार और सुन्नी कबीलाइयों के बीच सत्ता हस्तांतरण समझौता अमेरिका सुनिश्चित करे, जिसमें इराकी कुर्द की तरह सुन्नी प्रांत को व्यापक स्वायत्तता की व्यवस्था हो। इससे सुन्नियों का यह भय खत्म होगा कि इराक से इस्लामिक स्टेट के जाने के बाद कहीं शिया वर्चस्व तो स्थापित नहीं हो जाएगा। अधिक स्वायत्तता की गारंटी इस्लामिक स्टेट के खिलाफ विद्रोह के लिए सुन्नियों को प्रेरित कर सकती है। हालांकि व्यावहारिक बात यह है कि सुन्नी प्रतिरोध को बढ़ावा देकर इस्लामिक स्टेट को हराना आसान नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि सुन्नियों की स्वायत्तता के लिए पैरवी की जाए, जिसे स्वीकार करने के प्रति बगदाद अनिच्छुक रहा है। इसके बाद ही अमेरिकी वायु सेना एवं विशेष बल स्थानीय सहयोग से आईएस को पीछे हटने को मजबूर कर सकते हैं। यदि यह रणनीति कारगर रही, तो हम जल्द ही इराक में इस्लामिक स्टेट की पराजय देख सकेंगे।

रॉबर्ट ए. पैपे -शिकागो विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर

Source: http://www.amarujala.com/news/samachar/reflections/columns/how-islamic-state-out-from-iraq-hindi/

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/रॉबर्ट-ए-पैपे/इराक-से-कैसे-निकलेगा-आईएस/d/102621

 

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