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Hindi Section ( 13 Feb 2012, NewAgeIslam.Com)

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Mosques hindering Muslim integration in the US मस्जिदें मुसलमानों के अमेरिकी समाज में शामिल होने में रुकावट

मस्जिदें मुसलमानों के अमेरिकी समाज में शामिल होने में रुकावट

मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स काउंसिल (MPAC), लॉस एंजिलिस के सलाम अल-मरायती का कहना है कि अमेरिका में मुसलमानों को अमेरिकी मुसलमान होने की संवेदनशीलता पैदा करने की आवश्यकता है, लेकिन मस्जिदें इस अमल में रुकावट रही हैं। संगठन अमेरिकी मुसलमानों के साथ काम करता है और सरकारी संस्थानों, मीडिया, अंतर-विश्वास संस्थाओं और हॉलीवुड के स्टूडियो में निर्णायक भूमिका निभाने वाले लोगों के सामने अमेरिकी मुसलमानों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। न्यु एज इस्लाम डाट काम के सैफ शाहीन को दिए एक इंटरव्यु में अल-मरायती का कहना है कि अमेरिका और दुनिया भर में रहने वाले मुसलमानों को बहुलवाद और सबको शामिल करने वाले धर्मशास्त्र की ज़रूरत है न कि बहिष्कार करने वाले और मुकाबला करने वाले धर्मशास्त्र की ज़रूरत है। इंटरव्यु के सम्पादित अंशः

सैफ शाहीन, न्यु एज इस्लाम डाट काम

मुसलमान अमेरिका की बाकी की आबादी के साथ कितनी अच्छी तरह से घुले मिले हैं?

आमतौर पर मुसलमान अमेरिकी समाज में घुले मिले हैं, खासतौर से काम करने वाले लोग। मुसलमान उद्योग के सभी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। चाहे वह पेशेवर काम का क्षेत्र ही क्यों न हो - जैसे मेडिसिन (दवाओं), कानूनी काम या इंजीनियरिंग - या मजदूरी का काम, आपको मुसलमान हर जगह मिलेंगे। आपको शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया में भी अब अधिक मुसलमान मिलेंगे। मुझे लगता है कि ये एक बहुत घुलने मिलने वाले तब्के (वर्ग) का प्रतीक है।

असली चुनौती, पहचान और जो भूमिका मस्जिदें निभा रही हैं, के बारे में है। अमेरिका में कई मस्जिदें अपने ही तब्के और सामान्य रूप से पूरे अमेरिकी समाज में घुल मिल जाने की जद्दोजहद (संघर्ष) कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप वे युवा वर्ग में एक अमेरिकी मुसलमान होने का मतलब क्या है, के संबंध में उलझन पैदा कर रहे हैं।

राष्ट्रीय संवाद के मामले में मुसलमानों की आवाज न के बराबर है। और अगर मीडिया में किसी मुसलमान की कोई आवाज़ है तो उसे आमतौर से आतंकवादी कल्पना की जाती है जो दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व या उत्तर पूर्व अफ्रीका से आती है। इसलिए अमेरिकी जनता के बीच मुसलमानों की शबीह (छवि) को लेकर समस्या है और वह कौन हैं और वह खुद को कैसे परिभाषित कर रहे हैं, को लेकर खुद मुसलमानों के बीच भी समस्याएं हैं। और जहां तक ​​राजनीतिक गठबंधन का मामला है, तो मुझे लगता है यह भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि नीति निर्धारित करने वाली बातचीत में मुसलमानों की कोई आवाज नहीं है।

क्या आप कह रहे हैं मस्जिदें इंटीग्रेशन (एकीकरण) के अमल को रोकने का काम कर रही हैं?

मस्जिदों इंटीग्रेशन (एकीकरण) की समस्या से निपटने के लिए ट्रेनिंग से लैस नहीं हैं। मुझे नहीं लगता कि इंटीग्रेशन (एकीकरण) की कल्पना अमेरिका में मस्जिदों का हिस्सा हैं। यह राष्ट्रीय मामलों पर निर्देश देते हैं और यह आमतौर पर नकारात्मक होते हैं। अमेरिकी समाज में किसी को शामिल करने और युवा मुसलमानों को एक पहचान देने के मामले में माहौल बहुत विरोध करने वाला हो जाता है।

मुझे लगता है कि आम तौर पर मस्जिदें अब इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में मुसलमानों को बहुलवाद और सबको शामिल करने वाले धर्मशास्त्र की ज़रूरत है न कि बहिष्कार करने वाले और मुकाबला करने वाले धर्मशास्त्र की जरूरत है। और मुझे लगता है कि आलमी सतह पर उम्मत (मुस्लिम समुदाय) को इसी चुनौती का सामना है।

क्या ये वहाबी इस्लाम के प्रभाव के कारण है?

मुझे नहीं लगता कि ये वहाबी इस्लाम से प्रभावित हैं। मुझे लगता है कि यह एक अलग संस्कृति में इस्लाम को लागू करने की आशंका है। शिया लोगों के साथ भी ऐसा ही मसला है। अमेरिकी संस्कृति के अनुसार न होने की वजह से शिया लोगों के साथ भी इसी तरह की समस्या है। इसलिए वहाबी इस्लाम समस्या नहीं है और यह भी जरूरी नहीं कि उग्रवाद एक मसला है। अमेरिकी लोगों से निस्बत और पहचान के बारे में इस्लामी फिक्र में जमूद (गतिरोध) एक समस्या है।

क्या ये एक वैचारिक समस्या के बजाय सामाजिक समस्या अधिक है?

मुझे ऐसा लगता है। ऐसे में एक ऐसे नज़रिये की जरूरत है जो कि प्रगतिशील हो, जो संस्कृति के साथ जुड़ा हो और प्रमाणिक तौर पर इस्लामी हो। बेशक इस तरह के नज़रिये की ज़रूरत है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है यह शिया दृष्टिकोण या वहाबी दृष्टिकोण से आता है। ये अधिक मायने नहीं रखता है। उसे एक प्रमाणिक इस्लामी दृष्टिकोण से आना चाहिए जो कुरान और नबी करीम (स.अ.व.) की तौसीक शुदह (सत्यापित) अविवादित सुन्नत पर आधारित होना चाहिए लेकिन अमेरिकी संदर्भ के तहत भी होना चाहिए। दूसरे शब्दों में, उसे हमारे बढ़ रहे नौजवान अमेरिकी मुसलमानों और बाकी के देशवासियों के लिए भी अर्थपूर्ण होना चाहिए।

समस्या यह है कि कई मस्जिदों में इस्लाम अरब या पाकिस्तान के प्रभाव में है। इसमें ये विदेशी पहलू है। और हमें इस्लाम की अमेरिकी तफहीम (समझ) को समझने की जरूरत है।

क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि कैसे मस्जिदें इंटीग्रेशन (एकीकरण) में रुकावट पैदा कर रही हैं?

आप किसी भी मस्जिद में जाएं वहां जुमा के खुत्बे में सहाबा की जीवनी को बयान किया जाता है। हम सहाबा से प्यार करते हैं लेकिन इल्म के लिए उन्हें ही एकमात्र ज़रिया के रूप में इस्तेमाल करना खुत्बे को सीमित करना है। या खुत्बा वज़ू करने के नियम और तरीकों पर होता है यानी छोटे मामलों पर जिनका हमारे तब्के के सामाजिक सच्चाईयों के साथ संबंध नहीं होता है। या आप एक इज्तेमा में जाएं तो वो घंटों इस बात पर बिताते हैं कि महिलाएं हैज़ के दौरान क्या कर सकती हैं और क्या नहीं करना चाहिए। अगर यह हमारे तब्के में धार्मिक शिक्षा के विषय होंगे तो ये उनकी चुनौतियों की तुलना में गैर मौजूँ (अप्रासंगिक) हैं जिनसे हम दो-चार हैं।

क्या इसके बारे में कुछ किया जा रहा है?

अब इमामों के लिए और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है और इन समस्याओं के बारे में बातचीत की जा रही है। उदाहरण के लिए, 20 और 30 साल की उम्र वाली महिलाएं जो मुस्लिम पति तलाश नहीं सकती हैं, क्योंकि (संभावित) मुस्लिम पति गैर मुस्लिम महिलाओं से शादी कर रहे हैं। अब हम इन समस्याओं पर चर्चा कर रहे हैं और पहचान के मुद्दे पर भी बात हो रही है।

आप कह रहे हैं कि उग्रवाद कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हम फोर्ट हुड हमले या टाइम्स स्क्वायर पर विफल बम विस्फोट जैसी घटनाओं के बारे में सुनते हैं?

वास्तव में उग्रवाद समस्या है, लेकिन यह पहचान की समस्या से अलग है। जब आप पहचान के मसले को बुनियाद-परस्ती के फ्रेमवर्क के अंदर देखते हैं तो ये पहले से ही आपको माज़ूर (विकलांग) बनाए रखता है। यही वजह है कि मैं दोनों को अलैहदा करना चाहता हूँ। लेकिन क्या ऐसे लोग हैं जो आतंकवादी बन जाते हैं? बिल्कुल। और क्या एक मजबूत मुस्लिम पहचान की गैरमौजूदगी (अनुपस्थिति) है? बिल्कुल। लेकिन इंतेहापसंद अपवाद हैं, नियम नहीं हैं।

किस हद तक 9/11 ने मुस्लिम समुदाय के भीतर खुद एहतेसाबी को बढ़ावा दिया है?

इसने कुछ वक्त के लिए किया, लेकिन मुझे लगता है कि मस्जिद का नेतृत्व करने वाले अधिकतर लोग पुराने तरीके पर वापस चले गए। केवल कुछ ही इसके अपवाद हैं जहां मस्जिदें वाकई में पहचान बनाने के अमल में लगी हुई हैं और दूसरों के साथ एक समानता, जो तौहीद का एक महत्वपूर्ण पहलू है - इस्लाम की तफहीम में इस्लाह (सुधार) करने के लिए, अक दूसरे के साथ काम कर रहे हैं, जिससे ये नौजवान लोगों और अमेरिकी समाज के लिए अर्थपूर्ण और लागू करने के लायक हो।

मध्य और दक्षिण एशिया की तरह क्या अमेरिका में टीवी चैनल्स या अन्य मीडिया हैं जो इस्लामी exclusivism का प्रचार करते हैं?

वो बड़े पैमाने पर देखे नहीं जाते हैं। आप इराक़ियों को इराकी चैनल, सीरियाई को सीरिया के चैनल मिस्री को मिस्र के चैनल और पाकिस्तानियों को पाकिस्तानी चैनल देखते हुए पा सकते हैं।

अमेरिका में शिया सुन्नी के संबंध कैसे हैं?

दोनों के संबंध सुखद हैं और इससे ज़्यादा कुछ नहीं। लेकिन फिर भी, वहाँ एक दूसरे से संबंध के मामले में कई समस्याएं हैं और मैं कहता हूँ कि सुन्नियों के साथ ही शिया लोगों के बीच वैसे ही समस्याएं है। दोनों के बीच अच्छी और प्रभावी बातचीत की कमी है।

किस तरह की सिफारिशें आपके जैसे संगठन सरकार को पेश करते हैं?

हम नीति से जुड़े मामलों पर सुझाव देते हैं, चाहे यह हमारे तब्के के स्वास्थ्य और कल्याण का मामला हो, युवा नेता तैयार करने, पहचान या अन्य सार्वजनिक नीति के मामलों जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, अमेरिका और मुस्लिम बहुल देशों के बीच वैश्विक संबंध हों।

उदाहरण के लिए 9/11 के बाद की तुलना में आज इस्लामोफ़ोबिया को आप कहाँ पाते हैं?

अब ये बहुत गंभीर है। ये 9/11 के बाद की तुलना में अब ज्यादा संगठित और (बेहतर) आर्थिक मदद पाने वाली स्थिति में है। इसलिए यह इस्लाम के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक खतरनाक हमला है। और पहले की तुलना में इसे 2012 के चुनाव में अधिक प्रयोग किया जा रहा है। मेरा मानना ​​है कि 23 राज्यों ने शरीयत विरोधी वोट की पहल को शुरू किया है, और ये सिर्फ इसलिए है ताकि दझिणपंथी दल वोटरों को मतदान केंद्र तक ला सकें।

क्या अभी जारी रिपब्लिकन प्राइमरीज़ में इस्लामोफोबिया के रुझानात हैं?

जी हाँ। लेकिन मुझे खुशी है कि मिट रोमन (Mitt Romney) ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि उनहोंने रिपब्लिकन बहस में इस्लामोफ़ोबिया को मंज़ूरी नहीं दी थी।

सैफ शाहीन, आस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कालर हैं।

URL for English article: http://www.newageislam.com/interview/mosques-hindering-muslim-integration-in-the-us/d/6584

URL for Urdu article: https://www.newageislam.com/urdu-section/mosques-obstacle-for-muslims-in-being-a-part-of-the-american-society--مساجد-مسلمانوں-کے-امریکی-سماج-میں-شامل-ہونے-میں-رکاوٹ/d/6613

URL: https://newageislam.com/hindi-section/mosques-hindering-muslim-integration-/d/6629


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