New Age Islam
Tue Jun 09 2026, 11:26 PM

Hindi Section ( 20 Jun 2012, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Support the right of Muslim girls, even if 15 year old, to choose their partners मुस्लिम लड़कियों के अपने जोड़े मुंतख़ब करने के हक़ की हिमायत करें


वी.एम. ख़लीलुर रहमान

15 जून, 2012

(अंग्रेज़ी से तर्जुमा- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

बैनुल अक़वामी सतह पर मारूफ़ इस्लामी मदरसा दारुल उलूम, देवबंद और दीगर इस्लामी इदारों ने दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फ़ैसले का ख़ैर मक़दम किया है। इस फ़ैसले में अदालत ने एक 15 साला मुस्लिम लड़की के शादी शुदा रहने के हक़ को बरक़रार रखा है और उसके नाबालिग़ होने और उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ अग़वा करने के उसकी माँ के दावे को मुस्तरद किया है। हमारे मुल्क में मुसलमानों के लिए पर्सनल ला है और इस का इतलाक़ मुसलमानों पर होता है।

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कुछ सरगर्म कारकुन जो हाय तौबा मचा रहे हैं उसका कोई मतलब नहीं है। असल में मुंदरजा बाला फ़ैसला शादी जैसे सुलगते मसले पर माक़ूल नुक़्तए नज़र की एक रौशन मिसाल है। हाईकोर्ट के जजों ने दरअसल शादी और जोड़े को भी बचा लिया।

पूरी दुनिया में बच्चों की शादियां हो रही हैं। इसका इन्हेसार समाजी व इक़तेसादी हालात पर है। 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादियां करने के लिए तमाम मज़ाहिब हिन्दू मत, ईसाईयत, इस्लाम वग़ैरा मुख़ालिफ़त नहीं कर रहे हैं। कई शंकराचार्यों ने कहा है कि लड़कियां जैसे ही सने बलोग़त को पहुंचे उनकी शादी कर देनी चाहिए।

यूनीसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट "दुनिया भर के बच्चों की हालत- 2009 " बताती है कि हिंदुस्तान में 20-24 साल उम्र की ख़वातीन की 47 फ़ीसद की 18 साल की क़ानूनी उम्र से पहले ही शादी हो जाती है। अमेरीका के मुख़्तलिफ़ रियासतों में शादी के बारे में क़वानीन मुख़्तलिफ़ हैं। आम तौर पर 16 साल की लड़कियां अपने वाल्दैन की रजामंदी से शादी कर सकती हैं, अगरचे ज़्यादा तर रियासतों में वाल्दैन की रजामंदी के बगै़र शादी करने के लिए 18 साल कम से कम उम्र है। रिपोर्ट ये भी बताती है कि दुनिया भर में बच्चों की शादी का 40 फ़ीसद हिंदुस्तान में होता है।

इसके अलावा एक और रिपोर्ट बताती है कि साल 2010 में अमेरीका में जिन ग़ैर शादीशुदा औरतों को बच्चे पैदा हुए उनमें अक्सरीयत नौजवान लड़कियों की थी (99 फ़ीसद नौजवान लड़कियों की उम्र 15 साल से कम थी, 88 फ़ीसद 15 से 19 साल की उम्र की थीं। 20 से 24 साल की 63 फीसद औरतों को होने वाले बच्चों के मुक़ाबले में 25 से 29 साल की औरतचों को एक तिहाई और 21 फ़ीसद बच्चे उन औरतों को हुए जो अपनी उम्र के तीसवें साल या इससे भी ज़्यादा में थीं)।

ऐसे हालात में जजों के पास 15 साला मुस्लिम लड़की की शादी को मंज़ूर करने के अलावा कोई चारा नहीं था। इस फ़ैसले ने जोड़े को राहत की सांस पहुंचाई होगी। इस्लामी क़वानीन मुआशरे की बेहतरी के लिए हैं ना के इसको गुमराह करने के लिए हैं।

हम ये नहीं कह सकते हैं 18 साल से पहले लड़कियां अपने तौर पर शादी करने के काबिल नहीं हो सकती हैं। इस हक़ीक़त के मद्दे नज़र कि इस लड़की ने अपनी पसंद के लड़के से शादी की और ना कि अपने वाल्दैन की पसंद से और ये इशारा करता है कि वो काफ़ी जुर्रतमंद है और चीज़ों का फ़ैसला करने के काबिल है। ऐसी भी लड़कियां हो सकती हैं जो 25 साल की उम्र में भी समझदार ना हों और अपनी शादी के बारे में फ़ैसला लेने के काबिल नहीं हों। इसका ये मतलब नहीं है कि मुसलमान लड़कियों की 18 से पहले शादी कर दी जानी चाहिए। मौजूदा ज़माने की मुसलमान लड़कियां आला तालीम हासिल करने में दिलचस्पी रखती हैं। इन दिनों मुसलमानों के दरमियान बच्चों की शादियां आम नहीं हैं। चीज़ें तेज़ी के साथ तब्दील हो रही हैं। मुस्लिम लड़कीयों की शादी की उम्र के बारे में मुस्लिम पर्सनल ला में तब्दीली करने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि इससे कोई मक़सद हल नहीं होगा बल्कि सिर्फ़ मसाइल पैदा होंगे।

URL for English article: https://newageislam.com/islamic-sharia-laws/support-right-muslim-girls,-even/d/7633

URL for Urdu article: https://newageislam.com/urdu-section/support-right-muslim-girls-choose/d/7673

URL for this article: https://newageislam.com/hindi-section/support-right-muslim-girls,-even/d/7674


Loading..

Loading..