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Hindi Section ( 23 Sept 2012, NewAgeIslam.Com)

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The Noble Persona of Prophet Muhammad (Pbuh) As Mirrored In the Qur’an कुरान में प्रतिबिम्बित पैगम्बर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का महान व्यक्तित्व

 

मोहम्मद यूनुस, न्यु एज इस्लाम

13 सितम्बर, 2012

सह लेखक (अशफाकुल्लाह सैयद के साथ), इस्लाम का असल पैग़ाम, आमना पब्लिकेशन, यूएसए 2009

(अंग्रेजी से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

मुसलमानों के साथ साथ गैर मुसलमान विद्वान भी नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की जीवनी लिखने पर अपने ज्ञान को समर्पित करते हैं और इस सिलसिले में वो पूरी तरह से नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की प्रचीन जीवनी (सीरत) पर निर्भर करते हैं। लेकिन, प्रचीन सीरत पूरी तरह नबी करीम  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के प्रारंभिक काल की जीवनी लिखने वालों के विवरण पर आधारित रही हैं, जिसे नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की मृत्यु के 125 साल से भी अधिक के बाद इब्ने इस्हाक़ (d.151 AH/768 CE) के द्वारा संकलित किया गया और जिसे इसके लगभग पचास साल बाद इब्ने हिशाम (d. 218/834) के द्वारा प्रकाशित किया गया।

ये विवरण पूरी तरह से आम लोगों में लोकप्रिय ज़बानी चर्चा पर आधारित है जिसमें श्रोताओं की पसंद और स्वभाव के अनुसार वैचारिक वृद्धि और सनसनीखेज भावनात्मक अंदाज़ का सहारा लिया गया है [1] इसके अलावा, ये उस समय के साहित्यिक स्टाइल में लिखी गई हैं जिस दौर के लेख की विशेषता अतिश्योक्ति और अलंकरण करना था [2] इस तरह यह काल्पनिक अटकलबाज़ी और गलतियों से भरी पड़ी हैं। इसके बाद सदियों तक अनगिनत बार दोहराये जाने से इब्ने हिशाम के वर्णन के काल्पनिक अटकलबाज़ियाँ और गलतियां एक प्रणाली का हिस्सा बन गयीi और नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के निजी जीवन और मिशन का प्रतिनिधित्व करने वाले के रूप में इन्हें मान लिया गया। लेकिन, क्योंकि कुरान इससे कम से कम एक 175 साल पहले नाज़िल हुआ है और इतिहास की पूरी रोशनी में इसे दर्ज किया गया था, इसलिए जो तथ्य ये प्रदान करता है उसे ऐतिहासिक रूप से सही के तौर पर लिया जा सकता है [3] इसके अलावा, हाथ में खुदा के कभी न बदले गए शब्दों के तौर पर कुरान के रिकॉर्ड को प्रमाणिक माना जाना चाहिए और इसे नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम प्राचीन की प्राचीन जीवनी पर विशेषाधिकार दिया जाना चाहिए। इसी सिलसिले में ये एक कोशिश है!

नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के व्यक्तित्व के निर्माण में अक्सर एक समस्या ये आती है कि आप  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के जन्म से लेकर कुरान के आप पर नाज़िल होने से पहले के जीवन के बारे में कुरान लगभग खामोश है। ये आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के माँ बाप, पत्नियों, बच्चों, मित्रों या जानने वालों के नाम नहीं देता है और न ही उनके बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है, हालांकि ये आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के प्रारंभिक जीवन के बारे में निम्नलिखित संक्षिप्त टिप्पणी पेश करता है:

"क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी) (93:6) और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया (7) और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया"(93 : 8)

लेकिन कुरान में वही के नाज़िल होने के समय नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की उस वक्त की स्थिति पर कई विवरण पाये जाते हैं। हालांकि अधिकांश ये टिप्पणियाँ गुप्त और अस्पष्ट हैं, लेकिन नबी  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के व्यक्तित्व के निर्माण में इनसे मदद ली जा सकती है।

जैसे ही नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने वही को मौखिक रूप से प्राप्त किया और उनकी तिलावत करने लगे तो मक्का के लोग आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का मजाक उड़ाने लगेः ये लोग आपके अनुयायियों पर हंसते थे, और इन लोगों के किसी जगह से गुजरने पर एक दूसरे को आँख से इशारा करते थे और जैसे ही ये घर पहुंचते थे, लोग उनका मजाक उड़ाते थे (21:36, 25:41, 83:29-31) वो लोग नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को (नऊज़ो-बिल्लाह) बहुरुपिया, पागल (30:58, 44:14, 68:51) और पागल शायर कहा करते थे"(37: 3)। वो लोग सवाल करते थे कि मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम (6:37, 11 : 12, 13:7, 17:90-93, 21:5, 25:7 / 8 29:50) क्यों किसी चमत्कार को ज़ाहिर नहीं कर सके और क्यों क़ुरान दो शहरों में महत्वपूर्ण व्यक्ति पर नाज़िल नहीं हुआ" (43:31) इन लोगों ने ये भी ऐलान किया कि सुबह शाम दूसरे लोग आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को प्रशिक्षण या आदेश देते हैं (25:5, 44:14)

हम ये पाते हैं कि ये सभी आरोप वही के नीज़िल होने के समय में लगाए गए थे, इन लोगों ने कभी भी नबी  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के चरित्र पर कोई सवाल नहीं किया। ये स्पष्ट रूप से साबित करता है कि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम पाक नैतिक चरित्र वाले व्यक्तित्व के मालिक थे, और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम में कोई भी सामाजिक, नैतिक, राजनीतिक कमी नहीं थी, जो दर्शाता है कि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम शांत और विनीत स्वभाव के व्यक्ति थे, और आपने किसी के मामलों में कभी भी हस्तक्षेप नहीं किया। कुरान पर शोध करने पर हम पाते हैं कि जब तक खुदा ने नहीं चाहा होता और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को सिखाया नहीं होता तब तक नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम अपने श्रोताओं के सामने वही की तिलावत नहीं कर सकते थे। ये अपने श्रोताओं से इस बात पर चिंतन करने के लिए कहता है, क्योंकि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम वही के नाज़िल होने की शुरुआत से पहले इन लोगों के साथ रहे थे (10:16, 12:3, 42:52) ये साबित करता है कि नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने वही के नाज़िल होने से पहले अपनी पूरी ज़िंदगी में किसी भी साहित्यिक या शायराना या किसी भी दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक या धार्मिक दूरदर्शिता की प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं किया था। अपने जीवन के अंतिम हिस्से में पूरे अरब के लगभग शासक बनने की बात तो छोड़ दीजिए, इससे पता चलता है कि नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की न तो किसी आस्था को खोजने या धार्मिक वर्ग का नेतृत्व करने में कोई दिलचस्पी, और न ही इसके लिए प्रशिक्षण और न ही इच्छा थी। वही की ताक़त के अलावा आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का सबसे बड़ा उपहार आपकी महान व्यक्तिगत विशेषताएं थीं।

कुरान गवाही देता है कि नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम नें जंगे अहद में लोगों की गलतियों के बावजूद इन लोगों के साथ नरमी से पेश आये (3:159) आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने आसानी से तबोक के अभियान में (9:43) भाग न लेने पर लोगों को माफ कर दिया। आपने बिन बुलाए मेहमानों को खाना पेश किया और उनका ध्यान रखा, यहां तक ​​कि लोगों से मेल मुलाकात के लिए आयोजित खाने के बाद भी ठहर जाने वाले मेहमानों का ध्यान रखा जबकि आप लोगों के इस व्यवहार से नाराज़ भी हुए (33:53) नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अपने शत्रुओं की बख्शिश के लिए दुआ करके सखावत की बेहतरीन मिसाल पेश किया (9:80 / 84/113) इस तरह कुरान आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को सर्वश्रेष्ठ गुणों वाला रसूल बताता है (81:19), और बेहतरीन किरदार के लिए समर्पित बताया है (68:4) और आपकी साबित कदमी ने आपको अपने दुश्मनों के पास कुछ समझौता करने के लिए प्रोत्साहित करने से बचा लिया (17:74) आप अमीन थे (81:21) (ख़ुदा का एक मज़हर) मोमिनों (9:61) और पूरी मानवता के लिए आप रहमत थे (21:107)

इसके अलावा, आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद सहाबा (साथियों) का क़ुरान द्वारा नाम न लेना, जो बाद में खलीफा, गवर्नर और जनरल बने, इन सबने सबसे विनम्र और आज्ञाकारी अनुयायियों के रूप में आपके नेतृत्व को स्वीकार किया, ये स्पष्ट रूप से आपकी समुदाय में विशेष और असाधारण स्थिति को बताता है। प्राथमिक हदीसों के अनुसार, नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की मौजूदगी उन सबके लिए उत्साहित करने वाली अपील थी और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के व्यक्तित्व की कुछ खूबसूरत विशेषताएं और करामात उस समय बाहर आईं जो आप  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के साथ मौजूद लोग ही इसका अनुभव कर सकते थे। आपके असाधारण गुणों और विशेषताओं के नतीजे के रूप में नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के अपने साथियों के साथ विशेष संबंध थे जिसने आपके समकालीन सभी पर्यवेक्षकों को प्रभावित किया और तब से अपने विरोधियों को भी चकित किया हुआ है। ये स्पष्ट करता है कि क्यों सहाबा इकराम नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार रहते थे।

लेकिन, व्यक्तिगत स्तर पर, नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम दूसरों की तरह एक बशर (नश्वर प्राणी) थे (3:144, 18:110 41:6) आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के पास खुद को नुक्सान से बचाने या खुद को लाभ पहुंचाने का या दूसरों को नुक्सान या हिदायत देने की शक्ति नहीं थी (7:180, 10:49 72:21) मक्का के अन्य लोगों की तरह आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम पढ़े लिखे नहीं थे (7:157 / 158)। अगर ऐसा न होता तो बक बक करने वालों को संदेह होता (29:48) आप अल्लाह के रसूल थे और आपका मिशन खुदा के पैग़ाम (5:99, 7:158,13:40, 42:48 ) को स्पष्टीकरण के साथ (5:92, 16:82, 24:54) लोगों तक पहुँचाना था। ताकि इंसान अंधेरे से निकलकर रौशनी में आ सके (14:1, 57:9)

ये कहने की जरूरत नहीं है कि खुदा की रहनुमाई (मार्गदर्शन) को पहुंचाने वाले और कुरान की शिक्षाओं का नमूना (33:21) बनकर आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने खुद इसका व्यवहारिक  प्रदर्शन किया।  इसलिए ये निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने दूसरों को माफ किया और जाहिलों के साथ बहस से परहेज़ किया (7:199), आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने बेमुरव्वत पड़ोसियों (4:36, 42:40) और वो जिन्होंने पहले आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, उन लगों की भी मदद की (5:2), आपने व्यक्तिगत रूप से कुर्बानी देकर, यहां तक प्रतिकूल स्थिति में ज़रूरतमद लोगों के लिए खर्च किया (3:134, 108:2), और आपने गुस्से पर काबू किया और गुस्से की हालत में भी दूसरों को माफ किया (3:135, 42:37), आप सलाम का जवाब देने में बहुत विनम्र थे (4:86) दूसरों की बुराई करने और दूसरों को बुरा बोलने से परहेज़ किया (4:148), आप हमेशा दूसरों के बारे में अच्छी बातें किया करते थे ताकि समाज/ परिवार के बीच विवाद से बचा जा सके (17:53) आपने इबादतगाहों पर भी विनम्रता के साथ व्यवहार किया (7:31), आप नम्रतापूर्वक चलते थे, जब आप जाहिलों को संबोधित करते थे तब भी आप उनके लिए शांति की दुआ करते थे (25:63), आप न तो व्यर्थ ख़र्च करते थे और न ही कंजूसी से काम लिया करते थे बल्कि आप ने मध्यम व्यवहार को अपनाया था (25:6) आपने वही कहा जो सच और संबंधित (33:70), निष्पक्ष और उचित (मारूफ) (4:5) और अच्छे तरीके से (2:83) और नरम लहजे में (31 : 19) कहा। आपने अपने मुँह से वही कहा जो आपके दिल में था (3:167)

कुरान के मना करने से संबंधित करते हुए नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम बेहूदा बातों से (हर समय) दूर रहा करते थे (23:3) आपके चलने, बोलने और व्यवहार में घमंड बिल्कुल नहीं था (17:37, 19/31: 18) आप धोखाबाज़ी या दिखावटी तरीके की बात नहीं किया करते थे (22:30) आप कंजूसी से काम नहीं करते थे और दूसरों को भी ऐसा न करने की प्रेरणा देते थे (4:37), ज़रूरतमंद लोगों को देने से बचने के लिए आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने उसे कभी नहीं छिपाया जो कुछ भी आपके पास मौजूद था (4:37), आप धन को बाँटने में विश्वास रखते थे और ये कि आय में आपका हिस्सा केवल उतना है (4:32 ) जितना इसमें एक ज़रूरतमंद का हिस्सा होता है (70:24) आप जरूरतमंदों की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटे (47:38) और जब मालदार हुए तो कंजूसी से काम नहीं लिया (92:8-11), आपने कभी किसी का मज़ाक नहीं उड़ाया (49:11) दूसरों में कभी बुराई तलाश नहीं की (49:11) न दूसरों को बुरे नामों से अपमान नहीं किया (49:11) आप दूसरों पर बहुत अधिक संदेह नहीं करते थे (49 : 12) और आपने दूसरों की बुराई नहीं की और न ही धन एकत्र किया (104:2)

इस लेख में नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के वैवाहिक जीवन के बारे में किसी भी हवाले को नज़रअंदाज़ किया गया है क्योंकि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की बीवियों के बारे में कुरान का हवाला (संदर्भ) कुछ आयतों और कुछ हिस्सों तक ही सीमित हैं, जिसकी इस्लाम के प्रारंभिक काल में जीवनी लिखने वालों ने बहुत रंगीन और अंलंकृत ढंग से व्याख्या की है।

 संक्षेप में इस लेख ने नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के महान व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है और आम तौर पर पाठकों को विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता जो साहित्यिक युक्ति के द्वारा प्रचार करने वाले, इस्लाम की आलोचना करने वाले संशोधनवादी राजनीतिज्ञ दावा करें, कार्टूनिस्ट खाका बनाएँ या फिल्म बनाएं, लेकिन मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम सचमुच महान इंसान थे, यहां तक ​​कि यदि आप खुदा के रसूल होने का श्रेय  नहीं दिया जाता, तब भी। जहां तक मुसलमानों का संबंध है उनके सामने अगर, नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम या आपकी बीवियों या आपकी शादी के बारे में कोई भी संकीर्ण विवरण आता है, तो वो समझ जाएं कि ये नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की प्राचीन ज़माने की जीवनी से लिया गया है जो अटकलबाज़ी पर आधारित है और बहुत अजीब भी है [4]

जहां तक ​​चालाक और दुर्भावनापूर्ण उत्तेजना पैदा करने वालों और इस्लाम की आलोचना करने वालों और गैर मुसलमानों का संबंध है, वो नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के चरित्रहनन या अनुमान पर आधारित जीवनी से आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की बीवियों के बारे में कहानियां पैदा करते हैं,  तो ऐसे में मुसलमानों को कुरान की निम्नलिखित घोषणाओं की रौशनी में उन्हें अनदेखा कर देना चाहिए।

ि और (ऐ रसूल जिस तरह ये कुफ्फ़ार तुम्हारे दुश्मन हैं) उसी तरह (गोया हमने ख़ुद आज़माइश के लिए शरीर आदमियों और जिनों को हर नबी का दुश्मन बनाया वह लोग एक दूसरे को फरेब देने की ग़रज़ से चिकनी चुपड़ी बातों की सरग़ोशी करते हैं और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो ये लोग) ऐसी हरकत करने न पाते"(6:112)

और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है"(25:31)

नोट्स

1. इसके भरपूर तरीके से उनके निम्नलिखित काम से स्पष्ट किया जा सकता है:

विवरण के एक हिस्से में नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के शहीद सहाबा खबीब का काव्. कलपना के द्वारा उनकी गहरी भावनाओं को बताया गया है जिसमें वह फांसी से पहले खड़े हैं [5] एक और हिस्से में दृश्य इस कल्पना के विपरीत है, जिसमे संकेत दिया गया है कि शहीद फांसी से पहले लगातार रोए जा रहे हैं [6]

इस विवरण में प्रोपगंडा करने वाले कवि काब इब्ने अशरफ और उसकी पत्नी के बीच अलग होते समय की बातचीत का हवाला इसी तरह किया गया है, जैसे वो अबु नायला, जो काब इब्ने अशरफ घर उसे मारने के लिए आया था और वो अबु नायला की आवाज पर बाहर निकल आया [7] शायर को अचानक मार दिया जाता है और यह अविश्वसनीय विचार है कि कत्ल होने वाले कवि की अपनी पत्नी से अलग होते समय हुई बातचीत को, उसकी पत्नी उसके क़ातिल को बता रही है। संदर्भ के रूप में दिए गए शब्द स्पष्ट रूप से अटकलबाज़ी पर आधारित थे।

2. इस ज़माने की रिपोर्ट व्याख्या करती है कि राजा सुलैमान एक रात में अपनी सभी सौ पत्नियों के साथ हम बिस्तरी किया करते थे [8], किंग आर्थर कोर्ट के सर की अजनबियों को बाहर निकालने के लिए एक गाय के बराबर पत्थर को फेंक दिया करते थे और जो एक बार उछलने पर पेड़ के शीर्ष पर पहुंच जाते थे यानी एक बार उछलते थे तो दो सौ हाथ की लंबाई के बराबर ऊँचाई तक जाते थे [9]

3. नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने माने जीवनी लेखक मैक्सिम रोडिंसन, जो वही के खुदाई होने का नही मानता था, "बेशक कुरान सत्य की एक मजबूत बुनियाद प्रदान करता है" [मोहम्मद, अंग्रेजी अनुवाद, दूसरा संस्करण 1996, लंदन]

4. से नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के निम्नलिखित बयान से जाहिर किया जाता है जिसमें आप  सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने पैग़म्बर आदम अलैहिस्सलाम को अपने सफरे मेराज के बारे में बताया था, जिसके बारे में कुरान कहता है: "वो ज़ात (हर नुक्स और कमजोरी से) पाक है जो रात के थोड़े से हिस्से में अपने (महबूब और मुकर्रब) बंदे को मस्जिद हराम से (इस) मस्जिद अक्सा तक ले गई जिसके आस पास को हमने बाबरकत बना दिया है ताकि हम इस (बंदए कामिल) को अपनी निशानियाँ दिखाएँ, बेशक वही खूब सुनने वाला खूब देखने वाला है।"

"फिर मैंने ऊँटों की तरह होंठ वाले पुरुषों को देखा। उनके हाथों में आग के गोले थे जिसे वो अपने मुंह में डाल रहे थे और शरीर के अंतिम भाग से निकाल कर फिर मुंह में डाल रहे थे। मैंने पूछा, ए जिबराईल ये लोग कौन हैं? उन्होंने जवाब दिया कि, 'ये वो लोग हैं जो यतीमों का हक़ मार रहे थे। इसके बाद मैंने सीनों से लटकी महिलाओं को देखा और पूछा, जिबराईल ये कौन हैं? जिबराईल अमीन ने उत्तर दिया और कहा कि ये वो महिलाएं हैं जिन्होंने अपने पति के बच्चों पर अत्याचार किया, अपनों पर नहीं। इसके बाद वो मुझे जन्नत में ले गए जहां एक खूबसूरत होंठ वाली नवयुवती को देखा, जैसा कि मैं उसकी ओर आकर्षित हो गया था, मैंने पूछा, "तुम किससे संबंध रखती हो? उसने जवाब दिया, 'ज़ैद इब्ने हारसा" - मोहम्मद हुसैन हैकल, लाइफ ऑफ मोहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम), अंग्रेजी अनुवाद इस्माइल रागी, 8वां संस्करण, कराची, 1989, पृष्ठ 143

5. इब्ने हिशाम, सीरतुन्नबी, उर्दू अनुवाद गुलाम रसूल, दिल्ली 1984, Vol.2, Chap.124, पृष्ठ 197

6. इब्ने हिशाम, सीरतुन्नबी, उर्दू अनुवाद गुलाम रसूल, दिल्ली 1984, Vol.2, Chap.124, पृष्ठ 198

7. इब्ने हिशाम, सीरतुन्नबी, उर्दू अनुवाद गुलाम रसूल, दिल्ली 1984, Vol.2, Chap.109, पृष्ठ 35

8. सही बुखारी, Vol.7, एक्सेशन 169

9. मार्क ट्वेन, ए कनेक्टिकट यांकी इन किंग आर्थर्स कोर्ट, यूएसए, 1988 पृष्ठ 23

मोहम्मद यूनुस ने आईआईटी से केमिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की है और कार्पोरेट इक्ज़ीक्युटिव के पद से रिटायर हो चुके हैं और 90 के दशक से क़ुरान का गहराई से अध्ययन और उसके वास्तविक संदेश को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी किताब इस्लाम का असल पैग़ामको साल 2000 में अलअज़हर अलशरीफ, काहिरा की मंज़ूरी प्राप्त हो गयी थी और इसे यूसीएलए के डॉ. खालिद अबुल फ़ज़ल का समर्थन भी हासिल है। मोहम्मद यूनुस की किताब इस्लाम का असल पैग़ामको आमना पब्लिकेशन मेरीलैण्ड, अमेरिका ने साल 2009 में प्रकाशित किया।

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