New Age Islam
Wed Aug 17 2022, 05:21 PM

Hindi Section ( 22 Jul 2022, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

How Easily Some Traditions Get Entrenched कितनी आसानी से कुछ परंपराएं जड़ पकड़ लेती हैं

सुमित पाल, न्यू एज इस्लाम

18 जुलाई 2022

मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस नुक्सान का अंदाजा लगाते हुए जो उनके नाम पर किया जा सकता था, यह फरमा दिया कि मेरी तरफ मंसूब कोई भी हदीस अगर अल फुरकान की रूह के खिलाफ हो तो उसे सहीह न माना जाए।

प्रमुख बिंदु:

1. इस्लाम, किसी भी हाल में संगसारी की इजाज़त नहीं देता।

2. वह हदीसें जो यह दावा करती हैं कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ज़िनाकार औरतों को संगसार करने की सज़ा सुनाई थी, गंभीर उलमा ने इनसे इनकार किया है।

3. कुछ रिवायतें कितनी आसानी से जड़ पकड़ सकती हैं और जवाज़हासिल हो जाने के बाद उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना मुश्किल होता है।

-------

फिलहाल, मैं एक बहुत ही दिलचस्प और अत्यधिक अध्ययन के काबिल किताब, “The Comic Teachings of Mulla Nasruddin and Other Treasures” का अधययन कर रहा हूँ, जो इमाम जमाल रहमान ने लिखी है। इस किताब में लेखक ने बड़ी खूबसूरती से बताने की कोशिश की है कि कुछ रिवायात कितनी आसानी से जड़ पकड़ सकती हैं और जवाज़हासिल हो जाने के बाद उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना कितना मुश्किल होता है।

संगसारी का बहुत वहशियाना अमल या जिनाकार औरतों को संगसार किया जाना इसकी बेहतरीन मिसाल है हालांकि कुरआन में ऐसी कोई आयत नहीं है जो इस वहशियाना अमल की तौसीक करती हो। कुछ मुसलमानों के लिए बस इतना कह देना ही काफी है कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसकी इजाज़त दी है, और वह इस झूट को दिल से मां लेते हैं। मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस नुक्सान का अंदाजा लगाते हुए जो उनके नाम पर किया जा सकता था, यह फरमा दिया कि मेरी तरफ मंसूब कोई भी हदीस अगर अल फुरकान की रूह के खिलाफ हो तो उसे सहीह न माना जाए।

वह हदीसें जो यह दावा करती हैं कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिनाकार औरतों को संगसार करने की सज़ा सुनाई थी, गंभीर उलमा ने इनसे इनकार किया है, लेकिन कुछ हदीस के इमामों ने सुनन इब्ने माजा की एक दिल को हिला देने वाली रिवायत का भी ज़िक्र किया है। इस ख्याली कहानी के मुताबिक़, मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को संगसारी पर एक आयत अता की गई जिसे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी पाक बीवी हज़रत आयशा के सुपुर्द कर दिया, और उन्होंने वह कागज़ अपने तकिये के नीचे रख लिया जिस पर यह आयत लिखी हुई थी। कागज़ क्यों नहीं हासिल की गई और प्रकाशित नहीं हुई? क्योंकि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार हो गए, और इसके बाद पेश आने वाली अफरा तफरी में, एक बकरी कमरे में दाखिल हुई और कागज़ को खा गई!

इसके बावजूद, तालिबान और आइएसआइएस एक नज़ीर (अरबी में इबरत) कायम करने के लिए संगसार करते हैं और मैंने मुसलमान उलमा (सुन्नी फिरके से संबंध रखने वाले) को संगसारी (संग का अर्थ पत्थर है अरबी में हजर को कहते हैं) का जवाज़ पेश करते हुए देखा है। इब्ने अरबी के माहिर विलियम चटक ने रद्द न किये जाने के काबिल सबूतों के साथ यह साबित किया है इस्लाम ने कभी भी संगसार करने की इजाज़त नहीं नहीं दी। यह एक मा कबल सामी कबायली रिवाज था जो शुरूआती यहूदियत और जज़ीरा नुमा अरब के इस्लाम से पहले के कबीलों में मौजूद था।

असल में, तल्मूद के मुताबिक़, नवजात यहूदियत में सज़ा के दो तरीके थे: संगसार करना (अल्ज़ाफ/एल्ज़: यदेष भाषा में पत्थर फेंकने के कार्य की शक्ल) और सलीब पर चढ़ाना। ईसा अलैहिस्सलाम को मस्लूब किया गया था, हालांकि इस्लाम इस बात पर विश्वास नहीं करता कि ऐसा कभी हुआ है। चूँकि इस्लाम ने यहूदियत से बहुत से तरीकों को उधार लिया था और इसका एक कबायली अतीत भी रहा था, इसलिए बहुत से गैर इस्लामी तर्ज़े अमल इस्लाम के अंदर दाखिल हो गए, यहाँ तक कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात (हदीस) के कम से कम तीन काबिले एहतेराममुरत्तब करने वालों ने संगसारीवाली हदीसों को आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मंसूब कर दिया।

असल बात यह है कि जब इस प्रकार के परिवर्तन और संदेहास्पद हदीसों की भरमार लगी हुई है तो पुरे ज़मीन पर मुसलमान उन पर यकीन क्यों करते हैं? यहाँ तक कि इस्लाम में एक बहुत हिंसक फिरका भी है। उसे अहले हदीस कहते हैं! आप इस इस्लामी फिरके के अनुयायिओं की मानसिकता का बखूबी अंदाजा लगा सकते हैं। बुखारी, जिन्हें हदीसों का सबसे आला और सबसे अधिक मुस्तनद दार मुरत्तब समझा जाता है, आपने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कम से कम 1000 हदीसें जमा कीं जो पश्चमी एशिया की बोलियों में पहले से प्रचलित सादा मुहावरे और कहावतें थीं। सर हेम्लटन गब की ‘Ancient Arab Wisdom’ पढ़ें। इसलिए या तो मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों को बेवकूफ बना रहे थे या बुखारी ने इस गलत फहमी के तहत मेहनत की कि यह कथन मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हैं। नूपुर शर्मा ने बुखारी का हवाला दिया और पुरी इस्लामी दुनिया ने उनके खिलाफ फतवे जारी किये थे। इसलिए अब समय आ गया है कि तमाम मुस्लिम उलमा अपने मज़हबी और सहीफाई लिटरेचर को इन अनियमितताओं और खराबियों से पाक करें।

English Article: How Easily Some Traditions Get Entrenched

Urdu Article:  How Easily Some Traditions Get Entrenched کچھ روایات کتنی آسانی سے جڑ پکڑ لیتی ہیں

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/traditions-hadees-stoning/d/127550

New Age IslamIslam OnlineIslamic WebsiteAfrican Muslim NewsArab World NewsSouth Asia NewsIndian Muslim NewsWorld Muslim NewsWomen in IslamIslamic FeminismArab WomenWomen In ArabIslamophobia in AmericaMuslim Women in WestIslam Women and Feminism

Loading..

Loading..