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Hindi Section ( 4 Jun 2014, NewAgeIslam.Com)

Is it the Islamic Attitude? क्या यही इस्लामी अंदाज़ है?

 

समीउल्लाह मलिक

31 मई, 2014

मुसलमान केवल कुरान पर विचार कर के बहुत जल्द उस मुकाम पर पहुंच सकते हैं जहां अत्यधिक विकसित देश कई सालों की रिसर्च और अरबों डॉलर खर्च कर के पहुँचे हैं।'' मैंने किसी कॉलम में लिखा था और अपने पिछले कॉलम में दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक, वर्तमान समय में भौतिकी के सबसे बड़े शोधकर्ता फ्रैंक ट्रिपलर (Frank Trippler) की चार सौ पेज की मशहूर किताब Physics of Morality (फिज़िक्स आफ मोरॉलिटी) का वर्णन किया जिसके एक अध्याय Omega Point Theory (ओमेगा प्वाइंट थ्योरी) में उसने अपने एक शोध में ब्रह्मांड के अंजाम, आखिरत (परलोक), दोबारा उठाया जाना, जन्नत और दोज़ख (नरक) का वर्णन करते हुए स्वीकार किया कि ये बिल्कुल ऐसा ही है जैसे मुसलमानों की आसमानी किताब कुरान की सूरे बक़रा, सूरे अल-नजम और सूरे अलक़यामह में बताया गया है। और मेरे रिसर्च के मुताबिक़ परलोक का रूप बिल्कुल सूरे मुल्क की आयत जैसा है। मैंने अपने कॉलम में ये दरख्वास्त भी की है कि फ्रैंक ट्रिपलर तो साइंस और भौतिकी पढ़ते पढ़ते कुरान की सच्चाई तक जा पहुँचा और फिछले कई दशकों की सबसे बड़ी थ्योरी लेकर आ गया लेकिन हम भी अजीब लोग हैं सच्चाई की ये किताब हमारे घरों में, अलमारियों में, खूबसूरत जुज़दानों में और तावीज़ों में पड़ी रहती है और जो पुकार पुकार कर कहती है कि ''मुझ पर विचार तो करो' मुझ पर विचार तो करो।''

अगर इस पर विचार नहीं करते तो इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े भौतिकी वैज्ञानिक की आवाज़ सुन लो। इस कॉलम के  जवाब में कई लेखक जो उधार खाए बैठे हैं और बहस के लिए अपने दांत तेज़ करके मैदान में उतर आये हैं और मुझ से माँग की जा रही है कि ''विचार'' खुद से शुरू क्यों नहीं करता और बहुत से लोगों ने वो तरीका खोज लिया है कि जिससे मुसलमान अत्यंत विकसित राष्ट्रों से आगे निकल सकते हैं और मुझे अपने इस बयान की पुष्टि के लिए और दलील देने के लिए कहा है। दरअसल कुरान लौकिक सूत्रों का 'दस्तावेज़' है। कुरान में हर दौर के सभी ज्ञान मौजूद हैं। मसलन इसमें अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र भी है ... मौत क्या है? ... मौत के बाद एक और ज़िंदगी क्या है? ब्रह्मांड और उसके अंदर तत्वों का निर्माण कैसे हुआ? और किन किन तरीकों से अल्लाह ने संसाधन प्रदान किए ... वाह्य ज्ञान और आंतरिक ज्ञान...विश्व की विविधता की व्याख्या ... और परलोक में मौजूद जीवों की परिभाषा ... मन यानी पैरासाईकोलोजी या आध्यात्मिक ज्ञान ... चिकित्सा विज्ञान, भौतिक, जीव व वनस्पति विज्ञान... सूरज, चाँद, सितारों और आकाशगंगाओं का ज्ञान ... जैसे कुरान दुनिया और ब्रह्मांड के सभी ज्ञान या सूत्रों की 'माइक्रो फिल्म है जिसमें ब्रह्मांड के कण कण का ज्ञान 'लघु रूप' में मौजूद है।

जैसे हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम के किस्से में बेहतरीन प्लानिंग की जानकारी मौजूद है ... हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के किस्से में आवाज़ों को एक जगह से दूसरी जगह स्थानानंतरित करने के ज्ञान की चर्चा है ... इसी तरह हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम की घटना में डीप फ्रीज़र के फार्मूले को इंगित किया गया है ... हज़रत मरियम के बयान में आध्यात्मिक ज्ञान की तरफ इशारा मौजूद है ... हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के किस्से में फिरौन के दौर में जादूई और बहुत ही विकसित विज्ञान (पिरामिड टेक्नालोजी) में महारत को स्पष्ट रूप से बयान किया गया है ... हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की घटना में ब्रह्मांडीय अनुसंधान के सिद्धांत का बयान हुआ है कि किस तरह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने मन को अनुसंधान के अनुसार बना कर अल्लाह तक पहुँच हासिल की... हजरत ईसा अलैहिस्सलाम की घटना में चिकित्सा विज्ञान और मेडिकल साइंस के चरमोत्कर्ष की चर्चा को विषय बनाया गया है। इस समय विज्ञान के सभी विकासों की निर्भरता ''स्पीड' पर है। साइंस के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि ''समय और स्थान' को नकार कर के अधिकतम गति पर नियंत्रण हासिल कर लिया जाए।

कुरान में हज़रत सुलेमान के किस्से में एक ऐसे व्यक्ति का उल्लेख हुआ है जिसने रानी बिलक़ीस का बहुत बड़ा सिंहासन 1500 मील की दूरी से एक सेकण्ड में उनके पास पहुंचा दिया था। जैसे कि समय और स्थान को ''निरर्थक'' करने का फार्मूला भी कुरान में मौजूद है ... इसमें अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र भी है और भौतिक और आध्यात्मिक वैज्ञानिक ज्ञान  भी मौजूद है। राष्ट्रों के उत्थान और पतन के तथ्य भी लिखे हैं। इसमें धर्म एवं संस्कृति भी है और दुनिया व आखिरत में सफलता के सिद्धांत भी मौजूद हैं ... यानी ये किताब दुनिया और परलोक के जीवन में सफलता की एक पूर्ण और निश्चित 'कुंजी' है। बावजूद इसके कि कुरान सभी भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान, अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र, धर्म व संस्कृति और वैज्ञानिक और लौकिक रचना के सूत्रों दस्तावेज़ है।

मुसलमानों की बदहाली देखिए और दूसरे राष्ट्रों की प्रगति को भी देखेः पड़ोसी देश चीन का वार्षिक निर्यात 2210 अरब डालर है, यूरोप का कुल वार्षिक निर्यात 2173 अरब डॉलर है और इसके बाद सिर्फ अमेरिका का जी.डी.पी. 8.16 खरब डालर से ज़्यादा हो गया है और उसका कुल वार्षिक निर्यात 1575 अरब डॉलर है, जर्मनी 1493 अरब डॉलर, जापान 697 अरब डॉलर है ... इसके मुक़ाबले में पाकिस्तान, सऊदी, ईरान सहित 55 इस्लामी देशों का कुल निर्यात केवल 640 अरब डॉलर है ... दुनिया की 13 बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने 84 प्रतिशत वैश्विक खाद्य पदार्थों पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा है और ये तेरह कंपनियाँ यहूदियों की संपत्ति हैं। इन कंपनियों के उत्पादों का उपयोग कर के मुसलमान प्रतिदिन करोड़ों डालर इसराईल को 'गिफ्ट' कर देते हैं। विकसित (गैर मुस्लिम) देशों के कुछ निवासी दुनिया की कुल आय का 83 प्रतिशत प्राप्त कर लेते हैं जबकि दुनिया के 4 अरब आदमी गरीब जबकि एक अरब लोग गरीबी रेखा की भी अंतिम सीमा से निचले स्तर पर जीवित हैं...

वैश्विक पूंजीवाद की रणनीति तय करने वाले पश्चिमी आर्थिक विशेषज्ञों के पास गरीबी दूर करने के लिए ''छिटक जाने वाली अर्थव्यवस्था'' (ट्रिकल डाउन इकानोमी) की रणनीति है। यानी अमीरों की इमारत के बर्तन इस हद तक भर दिए जाएं कि वो छलकने लगें और उनके छलकने से गरीबों का भी कुछ भला हो जाए ... प्रिय पाठकों सोचने की बात ये है कि मुसलमानों की बदहाली को समृद्धि में बदलने का आखिर कोई तरीका तो होगा ......? विभिन्न राष्ट्रों के उत्थान व पतन के इतिहास का अध्ययन कर इस तथ्य का खुलासा होता है कि रिसर्च का मुक़ाबला रिसर्च से ही सम्भव है। जिस क़ौम ने भी प्रगति की है शोध, विचार, रिसर्च और अविष्कारों के माध्यम से ही की है। इसलिए कि ''विचार'' और रिसर्च, कुरानी चिंतन शैली है। जो राष्ट्र भी कुरानी शिक्षाओं 'शोध, विचार और रिसर्च'' पर अमल करेगी दुनिया में विकास और समृद्धि और वृद्धि हासिल करेगा, मुस्लिम या गैर मुस्लिम इसमें कोई भेद नहीं ...

मुसलमानों के लिए अत्यधिक विकास का शॉर्टकट कुरान में रिसर्च और विचार से जुड़ा है। इसके अलावा सभी रास्ते पीछडेपन की तरफ ले जाता है ... और ये इस लेख की बात को पूरा करता है।

अविष्कारों का कानूनः ... मनुष्य के विचार दो दिशाओं में काम करते हैं, पहला वो किसी भी वस्तु के वाह्य रूप को देखता है, लेकिन जब कल्पनाओं को किसी एक बिंदु पर केंद्रित कर के इस वस्तु की गहराई यानि इसके गूढ़ में झांका जाता है, तो विचार, जिज्ञासा और रिसर्च का विचार इस वस्तु के आंतरिक भाग में पहुंचकर उस वस्तु के अंदर गहराई से छिपी हुई क्षमताओं और ज्ञान को चेतना के स्तर पर खींच लाती है और नतीजे में कोई न कोई आविष्कार अस्तित्व में आ जाता है। इसलिए कि मानव दिमाग चिंतन या कल्पना या विचार या रिसर्च ''प्रारंभिक बिंदु' की गहराई में जाकर उन ज्ञान और क्षमताओं तक पहुँच की क्षमता रखता है कि जहां शुरु से लेकर अंत तक सभी ज्ञान कई लाख साल से मौजूद थे, हैं और रहेंगे... इसकी मिसाल ये है कि इंटरनेट का ज्ञान आज से लाखों साल पहले भी इंसान के तहत, चेतना में मौजूद था लेकिन जब किसी शोधकर्ता ने विचार किया तो ये ज्ञान उभर कर वर्तमान दौर में व्यावहारिक रूप में हमारे सामने आ गया। कुरान जैसे महान दस्तावेज़ को सुंदर रेशमी गिलाफों में बंद कर हाथ से दूर ऊंची जगह पर रखकर सुबह और शाम चूम कर, आँखों को लगा लेना, और उसकी मूल शिक्षाओं 'अमल, विचार व रिसर्च' से इंकार करना ..... क्या यही मुसलमानी अंदाज़ है.....?

31 मई 2014 स्रोतः रोज़नामा अज़ीज़ुल हिंद, नई दिल्ली

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http://newageislam.com/urdu-section/samiullah-malik/is-it-the-islamic-attitude?--کیا-یہی-اندازِ-مسلمانی-ہے؟/d/87352

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