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Hindi Section ( 25 Oct 2012, NewAgeIslam.Com)

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Muslims: Remember the Khutba of Hajjat-ul-Vida मुसलमानों! याद रखो हज्जतुलविदा का खुत्बा (भाषण)

 

क़ारी इस्हाक़ गोरा

26 अक्तूबर, 2012

(उर्दू से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने हज्जतुलविदा के अवसर पर जो खुत्बा (भाषण) दिया था, ऐसा प्रतीत होता है कि मुसलमान इस भाषण को भूल गए। शायद यही वजह है कि गुमराही मुसलमानों के स्वागत के लिए हर तरफ खड़ी नज़र आती है। इसका कारण क्या है? इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि अगर मुसलमान अल्लाह और उसके रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलें तो दावे के साथ कहा जा सकता है कि हर तरक्की उनके कदमों को चूमेगी। और मुसलमान जो चाहेंगे वो होगा।

बहरहाल ... हज के दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम अरफा तशरीफ़ लाये और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने वहां ठहरे। जब सूरज ढलने लगा तो आपने कसवा (अपनी ऊँटनी) को लाने का आदेश दिया। ऊँटनी तैयार कर के हाज़िर की गयी, तो आप इस पर सवार होकर बतन घाटी में तशरीफ ले गये और अपना वो खुत्बा इरशाद फ़रमाया जिस में धर्म के महत्वपूर्ण मामलों को बयान किया था। आपने खुदा की हम्दो सना (स्तुति) करते हुए खुत्बे को इस तरह शुरू किया।

'खुदा के सिवा कोई और माबूद (पूज्य) नही है। वो एक है कोई उसका साझी नहीं, खुदा ने अपना वादा पूरा किया, उसने अपने बन्दे (रसूल) की मदद फ़रमाई और अकेले उसी की ज़ात ने असत्य की सारी एकत्र शक्तियों को परास्त किया।

लोगो मेरी बात सुनो, मैं नहीं समझता कि आइंदा कभी हम इस तरह किसी मजलिस (सभा) में एकत्र हो सकेंगे। लोगो, अल्लाह का इरशाद है कि 'इंसानों! हमने तुम सबको एक ही मर्द और औरत से पैदा किया है और तुम्हें जमातों और क़बीलों में बाँट दिया कि तुम अलग पहुंचाने जा सको। तुम में अधिक सम्मान और इज़्ज़त वाला खुदा की नज़रों में वही है जो ख़ुदा से ज़्यादा डरने वाला है। इसलिए इस आयत की रौशनी में न किसी अरबी को अजमी पर कोई श्रेष्ठता हासिल है, न किसी अजमी को अरबी पर। न काला गोरे से अफ़ज़ल है, न गोरा काले से। हाँ! बुज़ुर्गी और फज़ीलत का कोई मानक है तो वो तक़वा है। इंसान सारे ही आदम की औलाद हैं और आदम की वास्तविकता इसके सिवा क्या है कि वो मिट्टी से बनाए गए। अब फज़ीलत और बरतरी के सारे दावे,  खून और माल की सारी मांगें और सारे इंतेक़ाम मेरे पैरों तले रौंदे जा चुके हैं। बस बैतुल्लाह की तौलियत और हज यात्रियों को पानी पिलाने की सेवा बाकी रहेंगीं, फिर आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया 'क़ुरैश के लोगो! ऐसा न हो कि ख़ुदा के हुज़ूर में तुम इस तरह आओ कि तुम्हारी गरदनों पर तो दुनिया के बोझ लदे हों,  और दूसरे लोग परलोक का सामान लेकर पहुंचे, और अगर ऐसा हुआ तो मैं ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ काम न आ सकूँगा।

क़ुरैश के लोगो! ख़ुदा ने तुम्हारी झूठी घमंड को समाप्त कर डाला, और बाप दादा की उपलब्धियों पर तुम्हारे गर्व की कोई गुंजाइश नहीं। लोगो तुम्हारे खून व माल और इज़्ज़तें एक दूसरे पर बिल्कुल हराम कर दी गईं, हमेशा के लिए। इन चीजों का महत्व ऐसा ही है जैसा तुम्हारे उस दिन और उस मुबारक महीने (ज़िल हिज्जा) के खासकर इस शहर में है। तुम सब ख़ुदा के आगे जाओगे और वो तुमसे तुम्हारे कामों के बारे में पूछ ताछ करेगा। देखो कहीं मेरे बाद गुमराह न हो जाना कि आपस में ही एक दूसरे का खून बहाने लगो।

अगर किसी के पास अमानत रखवाई जाए तो वो इस बात का पाबंद रहे कि अमानत रखवाने वाले को अमानत पहुंचा दे। लोगो हर मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है और सभी आपस में भाई भाई हैं। अपने गुलामों का ध्यान रखो, हाँ गुलामों का ख़याल रखो, उन्हें वही खिलाओ जो तुम खुद खाते हो, ऐसा ही पहनाओ जैसा तुम पहनते हो। दौरे जिहालत का सब कुछ मैंने पैरों से रौंद दिया। जिहालत के वक्त के खून के सरे इंतेकाम अब निष्प्रभावी हैं। पहला बदला जिसे मैं निष्प्रभावी करार देता हूँ मेरे अपने खानदान का है। रबियता बिन हारिस के दूध पीते बेटे का खून जिसे बनू हज़ील ने मार डाला था, अब मैं माफ करता हूं। दौरे जिहालत का सौदा अब कोई हैसियत नहीं रखता। पहला सूद (ब्याज) जिसे मैं छोड़ता हूँ, अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के खानदान का सूद है, अब ये खत्म हो गया। लोगो अल्लाह ने हर हकदार को उसका हक़ खुद दे दिया, अब कोई किसी वारिस के हक़ के लिए वसीयत न करे। बच्चा उसी से जोड़ा जाएगा जिसके बिस्तर पर वो पैदा हुआ। जिस पर हरामकारी साबित हो उसकी सजा पत्थर है, हिसाब और किताब ख़ुदा के यहां होगा। जो अपना परिवार बदलेगा या कोई गुलाम अपने आका के मुकाबले किसी और को अपना आका जाहिर करेगा, उस पर खुदा की लानत। कर्ज़ काबिले अदायगी है। आरिताली हुई चीजें वापस करनी चाहिए। तोहफे (उपहार) का बदला देना चाहिए और जो कोई किसी की ज़मानत लेने वाला बने वो तावान अदा करे। किसी के लिए ये जायज़ नहीं कि वो अपने भाई से कुछ ले, सिवाय उसके जिस पर उसका भाई राज़ी हो और खुशी खुशी दे, खुद पर और एक दूसरे पर ज़्यादती न करो। औरत के लिए जायज़ नहीं कि वो अपने पति का माल उसकी बिना इजाज़त किसी को दे।

देखो! तुम्हारे ऊपर तुम्हारी औरतों के कुछ अधिकार हैं। उसी तरह उन पर तुम्हारे अधिकार वाजिब हैं। औरतों पर तुम्हारा ये हक़ है कि वो अपने पास किसी ऐसे व्यक्ति को न बुलाएँ जिसे तुम पसंद नहीं करते और वो कोई खयानत न करे, कोई काम खुली बेहयाई का न करें और वो अगर ऐसा करें तो ख़ुदा की तरफ से इसकी इजाज़त है कि तुम उन्हें मामूली शारीरिक सजा दो और वो रुक जायें तो उन्हें अच्छी तरह खिलाओ पहनाओ।

महिलाओं से बेहतर बर्ताव करो, क्योंकि वो तुम्हारी पाबंद हैं और खुद अपने लिए कुछ नहीं कर सकतीं। इसलिए उनके बारे में खुदा का लिहाज़ रखो कि तुमने उन्हें ख़ुदा के नाम पर हासिल किया और उसी के नाम पर वो तुम्हारे लिए हलाल हुईं। लोगो, मेरी बात समझ लो मैंने हक़े तब्लीग (प्रचार) अदा कर दिया। मैं तुम्हारे बीच ऐसी चीज़ छोड़े जाता हूँ कि तुम कभी गुमराह न हो सकोगे, अगर इस पर बने रहे और वो ख़ुदा की किताब है। और हां देखो दीनी मामलों में झूठ से बचना कि तुम से पहले के लोग इन्हीं बातों के कारण खत्म कर दिये गये।

शैतान को अब इस बात की कोई उम्मीद नहीं रह गई है कि उसकी इस शहर में पूजा की जाएगी। लेकिन इसकी संभावना है कि ऐसे मामलों में जिन्हें तुम कम महत्व देते हो, उसकी बात मान ली जाए और वो उसी पर राज़ी है, इसलिए तुम अपने धर्म और ईमान की हिफाजत करना।

लोगो अपने रब की इबादत करो। पाँच वक्त नमाज़ अदा करो, महीने भर का रोज़ा रखो। अपने मालों का ज़कात खुशदिली से देते रहो, अपने ख़ुदा के घर का हज करो और अपने खानदान के मुखिया की इताअत (बात मानो) करो तो अपने रब की जन्नत में दाखिल हो जाओगे।

अब अपराधी खुद अपने अपराध का ज़िम्मेदार होगा और अब न पिता के बदले बेटा पकड़ा जाएगा, और न बेटे का बदला पिता से लिया जाएगा, सुनो! जो लोग यहाँ मौजूद हैं उन्हें चाहिए कि ये आदेश और बातें उन लोगों को बता दें, जो यहाँ नहीं हैं। हो सकता है कि कोई गैर मौजूद तुम से अधिक समझने और महफ़ूज़ रखने वाला हो। और लोगो तुमसे मेरे बारे में (खुदा यहाँ) सवाल किया जाएगा। बताओ तुम क्या जवाब दोगे?

लोगों ने जवाब दिया कि हम गवाही देंगे कि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अमानत (दीन) पहुंचा दी और आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने हक़े रिसालत अदा फरमा दिया और हमारी खैरख्वाही फरमाई।

ये सुनकर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अपनी शहादत की उंगली आसमान की तरफ उठाई और लोगों की ओर इशारा करते हुए तीन बार इरशाद फ़रमाया 'ख़ुदाया गवाह रहना! ख़ुदाया गवाह रहना! ख़ुदाया गवाह रहना!''

26 अक्तूबर, 2012, सधन्यवाद: रोज़नामा हमारा समाज, नई दिल्ली

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