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Hindi Section ( 12 Jul 2022, NewAgeIslam.Com)

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Muslim Countries Should Repeal Black Anti-Blasphemy Laws मुस्लिम देशों को अपमान के खिलाफ काले कानून को रद्द करना चाहिए: इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में हद से बढ़ना अधिक अतिवादी अकीदे और हिंसा को जन्म देती है

न्यू एज इस्लाम स्टाफ राइटर

4 जुलाई 2022

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अब पाकिस्तान और अन्य देशों के लिए समय आ गया है जहां अपमान के खिलाफ अभी भी कानून हैं वह ऐसे काले कानूनों पर पुनर्विचार करें और उन्हें निरस्त करें। पवित्र कुरआन के कई आयतों से यह स्पष्ट है कि कैसे इस्लाम के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मक्का में लगभग हर दिन अपमानित और सताया जाता रहा, जब उन्होंने घोषणा की कि अल्लाह ने मुझे एक रसूल के रूप में भेजा है और मेरा काम अल्लाह के संदेश को मानवता तक पहुंचाना है। लेकिन हमें कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि या तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या उनके सहाबा ने किसी भी तरह से हिंसक प्रतिक्रिया की या हम मुसलमानों को अब उनका अपमान करने वालों को दंडित करना चाहिए। कुछ बज़ाहिर गढ़े हुए हदीसों (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या उनके सहाबा की कथित बातें) में तौहीने रिसालत और इसकी सजा की बात की गई है। लेकिन कयामत के दिन गुस्ताखों को दण्ड देना खुदा का काम है। कुरआन में कहीं भी मुसलमानों को तौहीने रिसालत के लिए दुनिया में किसी को भी दंडित करने का कार्य नहीं दिया गया है।

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तौहीने रिसालत का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर मुसलमान बंटे हुए हैं। मुसलमानों का एक वर्ग, ज्यादातर उदार मुसलमान जो आधुनिक स्कूलों और कॉलेजों से शिक्षित हैं, तौहीने मज़हब के प्रति उदारवादी रवैया रखते हैं। फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की तरह, वह तौहीने रिसालत की आलोचना और निंदा करते हैं, लेकिन कानूनी कार्रवाई के लिए रास्ता खुला रखते हैं। वे आरोपी का सिर कलम करने की हद तक नहीं जाते। यहां तक कि कुछ इस्लामी उलमा और मुफ़स्सेरीन भी तौहीने रिसालत के लिए मौत की सजा का समर्थन नहीं करते हैं।

लेकिन दूसरी ओर, अधिकांश मुस्लिम-बहुल देशों में इस्लामी विद्वानों के एक वर्ग का मानना है कि अपमान करने वाला जीने के लायक नहीं है क्योंकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खिलाफ अपमान अक्षम्य है। इसलिए, यदि देश की अदालत आरोपी को बरी कर देती है, तो कोई भी मुस्लिम जजों की शरीअत से वाबस्तगी न होने की भरपाई के लिए मौत की सजा दे सकता है।

यह मुख्य रूप से पाकिस्तान में होता है जहां शरिया अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद तौहीने रिसालत के आरोपियों को न्यायेतर तरीके से मार दिया जाता है।

पाकिस्तान की एक ईसाई महिला आसिया बीबी को अदालतों ने तौहीने रिसालत के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन उन्हें अपनी मातृभूमि पाकिस्तान छोड़कर कनाडा में बसने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे अन्य लोग भी हैं जो इतने भाग्यशाली नहीं थे जिन्हें या तो गोली मार दी गई या उन्होंने लिंच कर दिया गया।

हाल ही में, पाकिस्तान के अंदर कुछ मुसलमानों ने एक श्रीलंकाई व्यक्ति की हत्या कर दी और फिर उसे आग लगा दी। वह पाकिस्तान की एक फैक्ट्री में मैनेजर था। उसकी गलती यह थी कि उसने कारखाने की दीवारों पर कुरआन की आयतों और हदीसों और इस्लामी नारों वाले स्टिकर और पोस्टर पर आपत्ति जताई। उसका मानना था कि कारखाने की दीवारों पर धार्मिक स्टिकर नहीं लगाने चाहिए। इसलिए एक दिन उसने दीवारों से स्टिकर और पोस्टर नोच डाले। इसका उद्देश्य पैगंबर या कुरआन का अपमान करना नहीं था। उसने बस अपनी नाराजगी और नापसंदीदगी का इज़हार किया था। उसे नहीं पता था कि उसकी यह हरकत पाकिस्तान में अपमान है। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने उसे पीट-पीट कर मार डाला और उसके शरीर में आग लगा दी।

लेकिन अपमान के लिए मौत की सजा केवल गैर-मुसलमानों पर ही लागू नहीं होती है। पाकिस्तान में मुसलमानों को भी गुस्ताख करार दिया जाता है। पाकिस्तान में अपमान की परिभाषा में वे मुसलमान भी शामिल हैं जो कथित तौर पर इस्लाम के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपमान करते हैं। किसी मुस्लिम द्वारा अनजाने में कोई भी बयान या शब्द या कार्य जिसे तौहीने रिसालत के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता है, उसे जेल या अनियंत्रित भीड़ के हाथों मौत तक पहुंचा सकता है। कुछ महीने पहले पाकिस्तान में मुसलमानों की भीड़ ने एक मानसिक रूप से कमजोर मुस्लिम शख्स की हत्या कर दी थी। तौहीने मज़हब मामले को मजाक में बदलने का दिलचस्प वाकया पाकिस्तान के एक थाने में हुआ। एक मुस्लिम व्यक्ति शिकायत लेकर थाने गया। एसएचओ ने उसके साथ बदतमीज़ी और गाली गलौज की। उस व्यक्ति ने एसएचओ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, आरोप लगाया कि उसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपमान किया है क्योंकि उसका नाम मुस्तफा था, जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नामों में से एक है।

तौहीने मज़हब की एक और घटना एक इस्माइली शिया डॉक्टर और एक सुन्नी मुस्लिम एमआर (चिकित्सा प्रतिनिधि) के बीच हुई। एमआर डॉक्टर के क्लिनिक गए और उससे बात करना चाहते थे। डॉक्टर ने उसे काफी देर तक इंतजार कराया। गुस्से में, एमआर ने डॉक्टर के कक्ष में प्रवेश किया और अपना विजिटिंग कार्ड उनकी मेज पर रखते हुए कहा, "मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता और जब भी खाली हों डॉक्टर मुझे कॉल कर सकते हैं।" एमआर के व्यवहार से नाराज होकर डॉक्टर ने उनका विजिटिंग कार्ड फर्श पर फेंक दिया। एमआर ने अपना विजिटिंग कार्ड उठाया और तौहीने रिसालत कानून के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कारण यह था कि विजिटिंग कार्ड पर उनका नाम मुहम्मद लिखा हुआ था।

पिछले साल, पंजाब सरकार ने पाकिस्तान में एक कानून पारित किया, जिसने पैगंबर का नाम लिखित या मौखिक रूप से रखने से पहले खतम-उन-नबियिन (अंतिम पैगंबर) कहना अनिवार्य कर दिया। इसलिए, जो कोई भी इस शब्द का उल्लेख करना भूल जाता है, उस पर तौहीने मज़हब का आरोप लगाया जा सकता है।

एक अन्य घटना में, एक इस्लामिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने दूसरे फिरके के एक मौलवी के घर की दीवारों पर एक धार्मिक कार्यक्रम मिलाद-उन-नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पोस्टर चिपका दिया। मौलवी ने पोस्टर को फाड़ दिया क्योंकि उसने इसे दूसरे फिरके की शरारत समझा। इस्लामिक संगठन ने उनके खिलाफ पाकिस्तान के तौहीने रिसालत कानूनों के तहत मामला दर्ज कराया। उस मौलवी और उनके बेटे को जेल भेज दिया गया।

तौहीने रिसालत कानूनों के दुरुपयोग की ऐसी ही अजीबोगरीब घटनाएं पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हो रही हैं। पाकिस्तान के प्रमुख इस्लामी आलिम मुफ्ती तारिक मसूद का कहना है कि पवित्र पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नामूस के तहफ्फुज़ के नाम पर हद से अधिक भावुकता के कारण आज बड़ी संख्या में मुफ्ती और उलमा कैद हैं। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मार्ग पर अपना जीवन व्यतीत करने वाले उलमा को गुस्ताखे रसूल करार दिया गया। जीभ फिसलना अपमान का कारण हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप या तो बम से उड़ाया या लिंच किया जा सकता है। उनका कहना है कि इस भावुकता को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

गुस्ताखी करने वाले का गला काटने का नया चलन शुरू हो गया है और यह परंपरा आईएसआईएस द्वारा अपनाए गए हत्या के तरीके से जुड़ी हुई है। सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान आईएसआईएस ने अपने दुश्मनों के गले चाकू और खंजर से काटे। एक नारा, 'गुस्ताखे रसूल की एक ही सज़ा, सर से तन से जुदा, सर तन से जुदा' पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय हो गया है। (यह नारा अब हमारे देश में भी लोकप्रिय हो रहा है।) हाल ही में पाकिस्तान के एक ही मदरसे के दो शिक्षिका ने चाकू से एक शिक्षिका की गर्दन काट दी। पीड़ित और हत्यारा दोनों ही मुसलमान थे, लेकिन पीड़िता का कुछ धार्मिक मुद्दों पर केवल मतभेद या उदारवादी राय थी। इतनी सी बात पर शिक्षिका को गुस्ताख समझा गया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।

अब पाकिस्तान और अन्य देशों के लिए समय आ गया है जहां अपमान के खिलाफ अभी भी कानून हैं वह ऐसे काले कानूनों पर पुनर्विचार करें और उन्हें निरस्त करें। पवित्र कुरआन के कई आयतों से यह स्पष्ट है कि कैसे इस्लाम के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मक्का में लगभग हर दिन अपमानित और सताया जाता रहा, जब उन्होंने घोषणा की कि अल्लाह ने मुझे एक रसूल के रूप में भेजा है और मेरा काम अल्लाह के संदेश को मानवता तक पहुंचाना है। लेकिन हमें कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि या तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या उनके सहाबा ने किसी भी तरह से हिंसक प्रतिक्रिया की या हम मुसलमानों को अब उनका अपमान करने वालों को दंडित करना चाहिए। कुछ बज़ाहिर गढ़े हुए हदीसों (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या उनके सहाबा की कथित बातें) में तौहीने रिसालत और इसकी सजा की बात की गई है। लेकिन कयामत के दिन गुस्ताखों को दण्ड देना खुदा का काम है। कुरआन में कहीं भी मुसलमानों को तौहीने रिसालत के लिए दुनिया में किसी को भी दंडित करने का कार्य नहीं दिया गया है।

English Article: Muslim Countries Should Repeal Black Anti-Blasphemy Laws: Exaggeration In Exalting The Status Of Prophet Mohammad Leads To Extremist Beliefs And Violence

Urdu Article:  Muslim Countries Should Repeal Black Anti-Blasphemy Laws مسلم ممالک کو اہانت کے خلاف کالے قوانین کو منسوخ کرنا چاہیے: پیغمبر اسلام کی شان میں مبالغہ آرائی انتہا پسندانہ عقائد اور تشدد کو جنم دیتی ہے

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/muslim-countries-repeal-blasphemy-laws-prophet-extremist/d/127467

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