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Hindi Section ( 20 Aug 2021, NewAgeIslam.Com)

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European Countries Have Offered Asylum to Afghan Refugees, Muslim Countries Have Shut Their Doors यूरोपीय देशों की तरफ से अफगान शरणार्थियों को शरण देने की पेशकश जबकि मुस्लिम देशों मे उनके शरण का दरवाजा बंद

तुर्की, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है

1. संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम ने अफगान शरणार्थियों को अपनी सीमाओं में प्रवेश करने की अनुमति दी है।

  2. अमेरिकी सरकार ने अफगान शरणार्थियों के लिए 500 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है।

3. यूरोपीय गैर सरकारी संगठनों ने यूरोपीय नागरिकों से अफगान शरणार्थियों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया है।

4. मुस्लिम देशों ने अफगान शरणार्थियों या आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता की पेशकश नहीं की है

5. तालिबान ने विस्थापित अफगानों के प्रति कोई सहानुभूति या चिंता नहीं दिखाई है।

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न्यू एज इस्लाम स्टाफ राइटर

19 अगस्त 2021

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An Afghan national at a gathering to urge the international community to help Afghan refugees, in New Delhi on August 18 [Anushree Fadnavis/Reuters]

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जैसे ही तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आया, राजनीतिक अस्थिरता का मुख्य परिणाम अफगानों का बड़े पैमाने पर विस्थापन था। तालिबान के अत्याचारी शासन के डर से लगभग 400,000 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं और लाखों अफगान अफगानिस्तान से भाग रहे हैं, जैसा कि वह उनके पिछली सरकार में देख चुके हैं। अफगानों के बड़े पैमाने पर विस्थापन ने मानवीय संकट को जन्म दिया है। इस संकट में महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं और वे ही सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। कई अफगानों ने तुर्की भागने की कोशिश की है, जबकि कई ने पाकिस्तान के चमन में फ्रेंडशिप गेट से पाकिस्तान में प्रवेश किया है। उनमें से कुछ ईरान के सीमा पर भी भाग गए हैं, जहां लाखों अफगान पहले से ही शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। कई अफगान सीमावर्ती देशों में जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों से सीमावर्ती देशों में प्रवेश कर चुके हैं क्योंकि सरकारें उन्हें प्रवेश नहीं करने दे रही हैं।

इस मानवीय संकट का सबसे बुरा पहलू यह है कि अधिकांश मुस्लिम देशों ने विस्थापित अफगानों को अपने क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोक दिया है, यह तर्क देते हुए कि ऐसा करने से उन पर बोझ बढ़ जाएगा। इस वजह से, इन प्रवासियों को शोषण और पीड़ा का खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, तुर्की, मुस्लिम देशों के स्वघोषित नेता ने घोषणा की है कि वह अफगानिस्तान से शरणार्थियों को अपने क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देगा क्योंकि उसे पहले ही सीरिया से 4 मिलियन और अफगानिस्तान से 1 लाख 20 हज़ार शरणार्थीयों को शरण दे रखी है। इसने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है और शरणार्थियों की आमद को रोकने के लिए एक दीवार का निर्माण किया है। हालांकि, इसने तस्करों के लिए एक अवसर प्रदान किया है कि वे अफगान शरणार्थियों को तुर्की ले जाने के लिए प्रतिवयक्ति 1000 डॉलर चार्ज करें। तुर्की ने अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले लगभग 1,500 लोगों को हिरासत में लिया है।

People arriving from Afghanistan cross the fence at the Friendship Gate crossing point, in the Pakistan-Afghanistan border town of Chaman, Pakistan [Abdul Khaliq Achakzai/Reuters]

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पाकिस्तान, जो अफगानिस्तान के साथ सीमा साझा करता है और अफगानिस्तान के राजनीतिक मामलों में भारी रूप से शामिल है, ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अफगानिस्तान से अधिक शरणार्थियों को प्रवेश नहीं करने देगा। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान पहले से ही लाखों अपंजीकृत शरणार्थियों के साथ-साथ अफगानिस्तान से 14 लाख पंजीकृत शरणार्थियों की मेजबानी कर रहा है। आगे शरणार्थियों की आमद देश के लिए आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्याएं पैदा करेगी।

अफगानिस्तान की सीमा से लगे एक अन्य मुस्लिम देश उज्बेकिस्तान ने भी अपनी सीमाओं को सील कर दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई करेगा। कम से कम 158 अफगानों को अवैध रूप से देश में प्रवेश करने के लिए हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा, 446 अफगान सैन्य लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर और 585 सैनिक अवैध रूप से उज्बेकिस्तान में दाखिल हुए और उन्हें ताशकंद में उतरने के लिए मजबूर किया गया।

केवल ईरान, एक शिया-बहुल देश, ने अपनी सीमाओं को खुला रखा है, भले ही वह पहले से ही दस लाख पंजीकृत अफगान शरणार्थियों की मेजबानी कर रहा हो। यूएनएचआरसी ने अफगान शरणार्थियों के साथ ईरान के व्यापक और मानवीय व्यवहार की प्रशंसा की है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ईरान ने अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली में अफगान नागरिकों को शामिल किया है। यूएनएचआरसी को उम्मीद है कि ईरान अफगान शरणार्थियों को आतिथ्य और सुरक्षा प्रदान करता रहेगा।

दूसरी ओर, यूरोपीय देशों ने अफगान शरणार्थियों के लिए सबसे बड़ी चिंता और सहानुभूति व्यक्त की है जैसा कि उन्होंने सीरिया में मुस्लिम शरणार्थियों के लिए अपनी चिंता और सहानुभूति व्यक्त की थी। चूंकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान में शरणार्थी संकट को दूर करने के लिए किसी भी मुस्लिम देश ने कोई गंभीर, वित्तीय या राजनयिक कदम नहीं उठाया है, यूरोपीय देशों और गैर सरकारी संगठनों ने उनके लिए वास्तविक चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शरणार्थियों, संघर्ष पीड़ितों और अफगानिस्तान की स्थिति से अन्य लोगों की तत्काल जरूरतों के लिए अतिरिक्त 500 मिलियन डॉलर प्रदान किए हैं, जिनमें विशेष आव्रजन वीजा चाहने वाले भी शामिल हैं।

As thousands of people attempt to flee Afghanistan with the Taliban in control, some people here in the Valley are looking to help. (WHSV)

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इसके अलावा, 46 सीनेटरों ने "इंसानी पेरोल कैटेगरी" का मुतालबा किया है ताकि अफगान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक हस्तियों को तुरंत संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थानांतरित होने दिया जाए।

संयुक्त राज्य अमेरिका 30,000 अफगानों को स्थानांतरित करने में मदद करेगा, जिनमें से कुछ को अस्थायी रूप से टेक्सास के एल पासो के फोर्ट ब्लेज़ में आरज़ी तौर पर रखा जाएगा।

सेव द चिल्ड्रन और प्रो असेल जैसे गैर सरकारी संगठनों ने यूरोपीय देशों से अपने देशों में विस्थापित अफगानों को फिर से बसाने और यूरोप में उनके लिए और अधिक पुनर्वास स्थलों का निर्माण करने का आह्वान किया है।

ऐसे समय में जब अफगान नागरिकों को इस्लामिक देशों की मदद की जरूरत है, उन्होंने उनके लिए अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों ने उनके लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं और उनकी मदद का आश्वासन दिया है। कल एक प्रेस बयान में, ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन आने वाले वर्षों में 20,000 अफगानों, विशेषकर महिलाओं, लड़कियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी धरती में समायोजित करेगा। ब्रिटेन ने सीरिया संकट के पीड़ितों के लिए भी यही किया।

Travelers enter in Pakistan through a border crossing point in Chaman, Pakistan, Monday, Aug. 16, 2021. A special flight of Pakistan’s national airline PIA has arrived in Islamabad carrying 329 passengers from Kabul, and another carrying 170 people will arrive later today. A spokesman for the airline said Saturday that the airline will operate three flights tomorrow to transport Pakistanis and other nationalities looking to leave Kabul. (AP Photo/Jafar Khan

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कनाडा भी 20,000 शरणार्थियों को स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया है, जबकि मुस्लिम देश ताजिकिस्तान ने कहा है कि वह 100,000 अफगानों को आश्रय देगा।

मौजूदा संकट से प्रभावित अफगानों के लिए इस्लामिक देशों के पास कोई योजना नहीं है। संकट से विस्थापित लोगों और गरीब अफगानों की मदद करने के लिए उनके पास कोई वित्तीय योजना नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका कतर को 2,000 अफगान शरणार्थियों को स्वीकार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।

अफगान वर्तमान में बड़ी कठिनाई और परीक्षण के दौर से गुजर रहे हैं। उन्हें भोजन और चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है। तालिबान, जो इस्लामी कानून का पालन करने का दावा करते हैं और कानून के आधार पर सरकार स्थापित करने के लिए दृढ़ हैं, उन्हें इन विस्थापित अफगानों के लिए कोई चिंता नहीं है। उन्होंने अभी तक अफ़गानों से अपने देश को नहीं छोड़ने की अपील नहीं की है। हालांकि उन्होंने कहा है कि वह किसी भी समूह के खिलाफ हिंसा का सहारा नहीं लेंगे, इसने लोगों के बीच, विशेष रूप से हजारा और उज्बेक्स जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कोई विश्वास नहीं बनाया है। तालिबान ने अभी तक कोई बड़ा बयान नहीं दिया है जिसमें लोगों से देश न छोड़ने की अपील की गई है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तालिबान अल्पसंख्यकों, महिलाओं और शिक्षा को लेकर क्या नीति अपनाएगा। इसलिए लोग सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन की आस में यूरोपीय देशों की ओर पलायन कर रहे हैं। इस बीच, मुस्लिम देश आम अफगानों की दुर्दशा के मूकदर्शक बने हुए हैं।

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