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Hindi Section ( 9 Dec 2013, NewAgeIslam.Com)

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History of Namaz in Islam- Part 6 इस्लाम में नमाज़ का इतिहास- इस्लाम में नमाज़ (6)

 

नास्तिक दुर्रानी, न्यु एज इस्लाम

9 दिसंबर, 2013

क़ुरान में नमाज़ का हुक्म और उसका निर्देश दिया गया है और इसे अदा न करने वाले को सजा के लायक करार दिया गया है, लेकिन हमें इसमें रोज़ाना की फर्ज़ पांच नमाज़ों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। 1, यही कारण है कि "नाज़िल होने के कारणों" पर निर्भर करते हुए नमाज़ के फ़र्ज़ होने के समय का निर्धारण करना हमारे लिए मुश्किल है। इसके अलावा हमें क़ुरान में नमाज़ कि स्थिति और हर एक की रिकअतों की तादाद के बार में कोई उल्लेख नहीं मिलता। यही कारण है कि इस विषय पर शोध के लिए हमें हदीस और अहले अखबार की किताबों पर निर्भर होना पड़ता है।

तमाम कोशिशों के बावजूद व्याख्या करने वाले क़ुरान से कोई ऐसी कोई स्पष्ट आयत का निर्धारण करने में नाकाम रहे हैं जो बिना किसी व्याख्या के रोज़ाना की पाँचों नमाज़ों का स्पष्ट तौर पर उल्लेख करती हो। 2,

हमें ये शक बिल्कुल भी नहीं है कि नमाज़ का हुक्म रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वस्सलम पर तब नाज़िल हुआ जब वो हिजरत (पलायन) से पहले मक्का में रहते थे। उसकी वजह "अलसलात" का मक्की सुरत में अवतरित होना है जैसे सूरे अलमुदस्सिर 3 और सूरह अलकौसर, जो नाज़िल होने के क्रम के एतबार से बारहवीं सूरे है। ये सारी सूरतें मक्का में नाज़िल हुई थीं, इसमें कहा गया है किः फसल्ले ले-रब्बेका वनहर 4, जबकि कुछ दूसरी मक्की सूरतों में भी ये हुक्म मौजूद है। हमारी इस राय को बल सीरत व अखबार की किताबों से मिलता है, जिनमें बताया गया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वस्सलम खदीजतुल कुबरा रज़ियल्लाहू अन्हा के साथ उनकी मृत्यु से पहले तक नमाज़ पढ़ा करते थे, जो इसरा से पहले की बात है। 5, और ये कि आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहू अन्हू के साथ नमाज़ के वक्त मक्का के आस पास जाते और वहाँ नमाज़ पढ़ते। एक बार अबु तालिब ने उन्हें नमाज़ पढ़ते हुए देख लिया तो उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वस्सलम से उस नमाज़ के बारे में पूछा। अबु तालिब की मृत्यु भी इसरा से पहले हुई थी। 6, दूसरी खबरों में बताया गया है कि सबसे पहले इस्लाम लाने वाले लोग नमाज़ पढ़ा करते थे यानी इसरा से पहले, इससे मालूम होता है कि नमाज़ का हुक्म इसरा से पहले मक्का में दिया गया था।

बल्कि सूरे अलअलक़ जिसे सूरे "इक़रा" भी कहा जाता है, में आया है: अरायतल्लज़ी यन्हा- अब्दन एज़ा सल्ला (अनुवाद) भला तुमने उस शख्स को देखा जो मना करता है। (यानि) एक बन्दे को जब वो नमाज़ पढ़ने लगता है। 7, अक्सर उलमा की राय में वही (Revelation) के रूप में सबसे पहले नाज़िल होने वाली सूरे है। उक्त आयत इस बात की दलील देती है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम नबूवत के नाज़िल होने के वक्त से ही नमाज़ अदा करते थे। टीकाकार उल्लेख करते हैं कि उक्त आयत अबु जहल बिन हशाम की वजह से नाज़िल हुई क्योंकि उसने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को मक़ाम के पास नमाज़ पढ़ने से मना किया थाः "अगर मैंने मोहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को नमाज़ पढ़ते हुए देखा तो मैं उसकी गर्दन पर चढ़ जाऊँगा।" 8, आगे व्याख्या करने वाले लिखते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने अबु जहेल की धमकी पर ध्यान नहीं दिया जिस पर अबु जहेल ने कहाः मोहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) मुझे किस बात की धमकियाँ दे रहा है जबकि वादी में मेरी मजलिस के यार सबसे ज़्यादा हैं। तो अल्लाह ने फरमायाः अगर वो नहीं रुका तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर घसीटेंगे, तब वो अपनी मजलिस के यार बुला ले, तो जब वो अपनी मजलिस के यार बुलाएगा हम अपने दोज़ख (नरक) के मोवक्किलों को बुला लेगें। 9,

ये व्याख्या इस बात की दलील है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम नबूवत के शुरुआती सालों में लोगों की आँखों के सामने नमाज़ पढ़ा करते थे और वो भी मक्का की सबसे स्पष्ट स्थान पर जो कि मक़ाम है, जो कि कुरैश के सरदारों में से एक सरदार को ये अच्छा नहीं लगा जो कि अबु जहेल है। इसलिए उसने रसूलुल्लल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को धमकी दी, इससे मालूम होता है कि ये आयत सूरे इक़रा की शुरुआती आयतों के नाज़िल होने के कुछ ही अर्से बाद नाज़िल हो गई थी यानि जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम और अबु जहेल के बीच इस बात को लेकर तनाव हो गया था और कुरैश को ये बात पसंद नहीं आई थी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम सबके सामने मक़ाम पर उनका मुक़ाबला करते हुए एक ऐसे खुदा के लिए नमाज़ अदा करें जिसे न वो मानते हैं और न ही उसकी इबादत करते हैं। इसलिए अबु जहेल ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

व्याख्या करने वाले उलमा बताते हैं कि सूरे इक़रा की शुरुआती आयतेः अल्लमल इंसाना मालम यालम, तक क़ुरान की सबसे पहले नाज़िल होने वाली आयतें थीं जबकि बाकी की आयतें बाद में नाज़िल हुईं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को अबु जहेल की धमकी का मामला उस राय का समर्थन करता है।

संदर्भ:

1- नोलदका का इतिहास अलक़ुरान 151/1 (जर्मन असल)

2- Moldeke, Gesch. d. qoran., I. S., 51, ​​Mittwoch, S., 9

3- आयत 42

4– दूसरी आयत

5- 311/2 और उससे आगे

6- इब्ने हिशाम 157/1, अलतिबरी 313/2, अलबलाज़री की अनसाबुल अशराफ 113/1 और उससे आगे

7- आयत 9 और 10

8– तफसीर अलतिबरी 163/2 और उससे आगे

9– तफसीर अलतिबरी 164/30

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http://www.newageislam.com/hindi-section/nastik-durrani,-new-age-islam-नास्तिक-दुर्रानी/history-of-namaz-in-islam--part-2--इस्लाम-में-नमाज़-का-इतिहास--नमाज़-(2)/d/34525

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