New Age Islam
Sat Jan 16 2021, 06:59 PM

Loading..

Hindi Section ( 19 Jun 2014, NewAgeIslam.Com)

Tragedy of Model Town & Dr Quadiri vs. Sharifain मॉडल टाउन की दुर्घटना और क़ादरी बनाम शरीफ़ बंधु

 

 

 

 

मुजाहिद हुसैन, न्यु एज इस्लाम

20 जून, 2013

मिन्हाजुल क़ुरान फायरिंग मामले के बाद सरकार को एक नई स्थिति का सामना है क्योंकि अप्रत्याशित रूप से इसको ऐसे खतरनाक दुश्मनों से वास्ता पड़ गया है कि जिनके बारे में आम राय ये थी कि वो भविष्य में कोई विशेष खतरा नहीं।  न्यायिक जांच आसानी के साथ अगर अपना काम कर सकी और स्पष्ट तथ्यों को सामने ले आई तो शायद मुस्लिम लीग नवाज़ का नेतृत्व इस संकट से निकल सके, अन्यथा बड़े खतरे मंडराते नज़र आ रहे हैं। अगर अफवाहों और सोशल मीडिया के नेतृत्व में चलने वाले विरोधी अभियान के प्रभाव को देखा जाए तो मियां बंधु जल्द ही किसी बड़े अंजाम से दोचार होने वाले हैं क्योंकि इमरान खान अपनी पूरी शक्ति के साथ इस त्रासदी को राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करने के इच्छुक नज़र आते हैं जबकि मुस्लिम लीग का नेतृत्व पारंपरिक असमंजस के कारण डाँवां डोल है। पंजाब के मुख्यमंत्री जिनके बारे में आम तौर पर ये कहा जाता है कि वो खासे सक्रिय व्यवस्थापक हैं और मियाँ नवाज़ शरीफ़ की तुलना में इनके कदम राजनीतिक रूप से अधिक स्थिर होते हैं, उनका कौशल विभाजित नज़र आने लगा है क्योंकि वो जिस कदर जल्दबाज़ी और असहिष्णुता का प्रदर्शन करते हैं, उतनी ही निराशा उनको अक्सर घेरे रखती हैं।

ज़ाहिर है कि राज्य के सबसे बड़े व्यस्थापक के रूप में लाहौर मॉडल टाउन कांड में इनको किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती और हालांकि पाकिस्तान की पारंपरिक राजनीति में एक दूर की बात है लेकिन उन्हें राजनीतिक परिपक्वता का प्रदर्शन करते हुए न्यायिक जांच के फैसले के इंतेज़ार में तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए था। न्यायिक जांच जो कि मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने की स्थिति में बहुत हद तक विवादास्पद हो चुकी है, इसे न मानने वालों के बयान आने शुरू हो गए हैं जिसके बाद हालांकि इसे जारी रखा जाएगा लेकिन इसका महत्व बाकी नहीं रहेगा और आमतौर पर यही इल्ज़ाम लगाया जाएगा कि जांच को प्रभावित करने वाले सत्ता में मौजूद हैं। ये तो खैर एक सुझाव था जिसकी उपयोगिता इस वक्त शून्य भी नहीं लेकिन ये ज़रूर है कि इस त्रासदी के बाद जिस प्रकार के हालात का सामना सरकार को करना पड़ेगा वो काफी  गंभीर नज़र आते हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि ये घटना हमारी सामूहिक असंवेदनशील का जीता जागता प्रमाण है, जिससे पता चलता है कि असहिष्णुता और सख्ती पूरे समाज की जड़ों में दाखिल हो चुकी है और इससे छुटकारा आसानी से मुमकिन नहीं। अपने से असहमत और विभिन्न दृष्टिकोण को बर्दाश्त न करने की इस परम्परा की प्रक्रिया की समीक्षा ज़रूरी है लेकिन साथ ही उतना ही महत्वहीन भी क्योंकि हमारे यहां इस बात को भी नापसंद करने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है और इनकी अधिकता हमेशा शक्तिशाली होती है इसलिए ये काम स्वयं खतरों से खाली नहीं।

अगर इस घटना को सामने रख कर बात की जाए तो पता चलता है कि पंजाब सरकार में मौजूदा लोगों को मिन्हाजुल क़ुरान के प्रमुख सिर्फ इसलिए नापंसद हैं कि वो सरकार विरोधी अभियान को धीरे धीरे तेज़ कर रहे हैं, हालांकि वो व्यवस्था बदलने की एक बहुत हद तक ज़रूरी और भ्रामक अवधारणा प्रस्तुत करते हैं, लेकिन चूंकि वो इस काम के लिए धार्मिक आधार का सहारा लेते हैं और धार्मिक शिक्षा के लिए तैयार किये गये अपने संगठन का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए उनके पंथीय विरोधी बहुत ज़्यादा दुखी हैं।

ताहिरुल क़ादरी के बारे में विरोधी राय बनाना उनकी पंथीय प्रतिबद्धता और अपने संगठन और व्यक्तित्व के निर्माण में शामिल किये गये अत्यधिक स्नेह के कारण है। जाहिर है ताहिरुल क़ादरी का राजनीतिक विरोध एक मुश्किल काम है क्योंकि उन्होंने राजनीतिक रूप से इतनी गलतियाँ नहीं कीं जितनी आम तौर पर पाकिस्तानी राजनीति में की जाती हैं। ताहिरुल क़ादरी के सारे विरोध का कारण उनकी पंथीय प्रतिबद्धता है क्योंकि वो अपने से अलग पंथ के कट्टरपंथी लोगों के लिए असहनीय हैं, इसका कारण बहुत सरल है। वो उपमहाद्वीप के उलझे हुअ पंथीय संघर्ष में अपना एक विशेष स्थान बनाने में सफल हो चुके हैं और एक बहुत कुशल व्यवस्थापक के रूप में खुद को मनवा चुके हैं, जो बहुत तेज़ी के साथ तरक्की करते हुए मज़हबी संगठन के निर्माण से जुड़ी हर प्रकार की सफलता हासिल कर लेता है और फिर उनकी महत्वाकांक्षाएं ऐसी हैं कि वो सब कुछ पलट देना चाहते हैं। ताहिरुल क़ादरी उस समय और असहनीय हो जाते हैं जब वो बहुमत की वैश्विक अवधारणा से बिल्कुल उलट विचार प्रस्तुत करते हैं और पश्चिमी देशों में भी इसको सराहा जाता है। मेरे विचार में इस सम्बंध में ताहिरुल क़ादरी की आखरी और सबसे स्पष्ट गलती कई सौ पृष्ठों पर आधारित फतवा था जो उन्होंने आत्मघाती हमलों के बारे में प्रकाशित करवाया।

मियां बंधुओं के साथ ताहिरुल क़ादरी के विरोध का एक और प्रमुख कारण उनके परिवार के साथ पुराने सम्बंध भी हैं। जिसके बारे में अलग अलग समय में बहुत कुछ सामने आता रहा। अब ताहिरुल क़ादरी राजनीतिक रूप से एक नई किश्ती पर सवार हैं और उनके बारे में एक आम धारणा ये है कि वो ताकतवर सत्ता की आँखों का तारा हैं। वो नवाज़ शरीफ़ की सरकार को पलटना चाहते हैं और इस उद्देश्य के लिए उनका धार्मिक व्यक्ति और संगठन का उपयोग किया जा रहा है।  इससे पहले वो पिछली सरकार के खिलाफ एक विवादास्पद कंटेनर अभियान चला चुके हैं जिसके दौरान वो ये समझते थे कि सरकार उनके धरने के कारण उलट जाएगी और वो पाकिस्तान की राजनीति में बदलाव लाने वाले के जैसा व्यक्तित्व बन जायेगें। लेकिन ये धरना स्पष्ट रूप से नाकाम हुआ, बल्कि ताहिरुल क़ादरी को जल्दबाज़ी में ख्याति प्राप्त करने वाली जैसी उपाधि से भी नवाज़ा गया। उनकी दोहरी नागरिकता की भी आलोचना की गयी और यहां तक ​​कह दिया कि वो पाकिस्तान में बाहरी शक्तियों के कहने पर अराजकता पैदा करना चाहते हैं।

एक बार फिर ताहिरुल क़ादरी पाकिस्तान की राजनीति में हलचल पैदा करने की कोशिशों में लगे हैं, जिनको जल्दबाजी और गुस्से के तहत उठाए गए कदमों के कारण बहुत अधिक महत्व हासिल हो गया है। मॉडल टाउन की त्रासदी ने अल्लामा साहब को वो शक्ति पहुंचा दी है जिसके बारे में वो अभी सोच भी नहीं सकते थे, यदि वो वास्तव में अच्छे प्रशासक साबित हुए तो वो इस घटना को एक घातक हथियार में बदल सकते हैं, जिसका उपयोग पाकिस्तान की राजनीति में याद रखा जाएगा।

देखना ये है कि वो किस प्रकार की प्रतिक्रिया के तहत अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हैं और सरकार के लिए किस प्रकार की कठिनाइयाँ पैदा करते हैं। अगर वो मौजूदा आंदोलन के तहत सरकार को गिराने में सफल हो जाते हैं तो देखना ये है कि खुद उनके हिस्से में क्या आता है? और वो वास्तव में अपनी प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने में सफल होंगे या किसी दूसरे के लिए रास्ता साफ करने तक सीमित रहेंगे? ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन देखना ये भी है कि वो पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति जो तेज़ी के साथ हिंसक रुख अख्तियार कर रही है उसका सामना कैसे कर पाते हैं?

मुजाहिद हुसैन ब्रसेल्स (Brussels) में न्यु एज इस्लाम के ब्युरो चीफ हैं। वो हाल ही में लिखी "पंजाबी तालिबान" सहित नौ पुस्तकों के लेखक हैं। वो लगभग दो दशकों से इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर मशहूर अखबारों में लिख रहे हैं। उनके लेख पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक अस्तित्व, और इसके अपने गठन के फौरन बाद से ही मुश्किल दौर से गुजरने से सम्बंधित क्षेत्रों को व्यापक रुप से शामिल करते हैं। हाल के वर्षों में स्थानीय,क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद और सुरक्षा से संबंधित मुद्दे इनके अध्ययन के विशेष क्षेत्र रहे है। मुजाहिद हुसैन के पाकिस्तान और विदेशों के संजीदा हल्कों में काफी पाठक हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग की सोच में विश्वास रखने वाले लेखक मुजाहिद हुसैन, बड़े पैमाने पर तब्कों, देशों और इंसानियत को पेश चुनौतियों का ईमानदाराना तौर पर विश्लेषण पेश करते हैं।

URL for Urdu article:

http://www.newageislam.com/urdu-section/mujahid-hussain,-new-age-islam/tragedy-of-model-town-and-dr-quadiri-vs-sharifain--سانحہ-ماڈل-ٹاون-اورقادری-بمقابلہ-شریفین/d/87639

URL for this article:

http://www.newageislam.com/hindi-section/mujahid-hussain,-new-age-islam/tragedy-of-model-town---dr-quadiri-vs-sharifain-मॉडल-टाउन-की-दुर्घटना-और-क़ादरी-बनाम-शरीफ़-बंधु/d/87640

 

Loading..

Loading..