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Hindi Section ( 21 Jun 2019, NewAgeIslam.Com)

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Exploiting Islamic Historical Events for Terrorism –How to Defeat Terror Narratives? – Conclusion आतंकवादी बयानिये का सैद्धांतिक सद्दे बाब



मिसबाहुल हुदा कादरी, न्यू एज इस्लाम

४ जून २०१९

दीन व मज़हब का सहारा ले कर आतंकवादी एजेंडे पर काम करने वाले विध्वंसक तत्व बेझिझक इस्लामी जंगों और ख़ास तौर पर गजवात व सराया का हवाला पेश करते हैंl इसका उद्देश्य यह होता है कि सीधे सादे मुस्लिम नव युवकों की आतंकवादी मानसिकता धर्म की हवा से भड़काई जाएl और इस्लाम की सतही जानकारी रखने वाले इसे जिहाद समझ कर आतंकवाद की आग में खुद को झोंक देते हैंl अक्सर युवा यह समझने में असफल रहते हैं कि यह आतंकवादी संगठने जिन एतेहासिक इस्लामी अभियान का नाम ले रही हैं या जिन जंगी घटनाओं को आइडियल के तौर पर पेश कर रही हैं वह सीधे अल्लाह और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश से अंजाम पज़ीर हुएl

उदहारण के तौर पर गजवा ए बद्र को ही देख लेंl हक़ व बातिल के इस जंग से आतंकवाद का जोश व जज़्बा प्राप्त करने वाले मुस्लिम युवा इन दोनों के बीच एक बुनियादी तुलना करने से चूक जाते हैं कि प्रारम्भिक इस्लाम इन जंगों की प्रकृति क्या थी और इन आतंकवादी तत्वों के संघर्ष की प्रकृति क्या है! वह यह नहीं समझ पाते कि अल्लाह के रसूल के साथ में लड़ी जाने वाली उन जंगों का पृष्ठभूमि क्या था और इन आतंकवादी कार्यवाहियों की पृष्ठभूमि क्या है! उन गजवों और सरायों का उद्देश्य क्या था उनकी तखरीब कारियों का क्या उद्देश्य है! औरे इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नेतृत्व में अपने जान की बाज़ी लगाने वाले वह मर्दाने हक़ कौन लोग थे और अपनी आतंकवादी कार्यवाहियों में बेगुनाह लोगों का बेझिझक खून बहाने वाले यह मौत के सौदागर कौन लोग हैं!

और आखरी बात यह है कि हक़ व बातिल को नापने का सबसे आला पैमाना कुरआन हैl कुरआन जिसे हक़ कहे वही हक़ है और कुरआन जिसे बातिल करार दे बातिल वही हैl इसलिए, एक ऐसे दौर में कि जब अहले बातिल अपने चोले बदल बदल कर हमें गुमराह करने के लिए बार बार सामने आ रहे हैं हमें कुरआन के मापदंड पर उन्हें परखना ही होगा और यह जानना होगा कि वह जिस रास्ते पर जा रहे हैं कुरआन उसके बारे में क्या कहता है! और यह समझना होगा कि वह जिन इस्लामी जंगों और गजवों व सरायों के नाम पर हमें गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं उनके बारे में कुरआन क्या कहता हैl हमें अत्यंत बारीकी से यह देखना होगा कि कुरआन की रू से आतंकवादियों का तर्जे अमल कैसा है और यह जिन इस्लामी घटनाओं व व्यक्तित्व का नाम लेकर हमारा शोषण कर रहे हैं उनके बारे में कुरआन क्या कहता हैl जब हम मुसलमान यह फर्क करना सीख जाएं गे तब उन आतंकवादियों के धोखे से भरे हुए रणनीति को असफल करना हमारे लिए आसान हो जाएगाl

बद्र की घटना और बद्र वालों के बारे में कुरआन का बयान

बद्र के दिन अल्लाह की स्पष्ट सहायता मुसलमानों के साथ थी

कुरआन कहता है:

وَلَقَدْنَصَرَكُمُ اللَّهُ بِبَدْرٍوَأَنتُمْأَذِلَّةٌ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ (آل عمران : 123)

अनुवाद: यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दीl

गजवा ए बद्र में अल्लाह ने मुसलामानों की मदद के लिए एक हज़ार फरिश्तों को नाज़िल किया ताकि अल्लाह की मदद पा कर मुसलमानों के दिलों को सुकून मिले

कुरआन कहता है:

إِذْتَسْتَغِيثُونَرَبَّكُمْفَاسْتَجَابَلَكُمْأَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍمِّنَالْمَلَائِكَةِمُرْدِفِينَ (9) وَمَاجَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰوَلِتَطْمَئِنَّ بِهِ قُلُوبُكُمْ ۚ وَمَاالنَّصْرُ إِلَّا مِنْعِندِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌحَكِيمٌ (10)

अनुवाद: जब तुम अपने रब से फरियाद करते थे तो उसने तुम्हारी सुन ली कि मैं तुम्हें मदद देने वाला हूँ हज़ारों फरिश्तों की कतार सेl और यह तो अल्लाह ने किया मगर तुम्हारी ख़ुशी को और इसलिए कि तुम्हारे दिल चैन पाएं, और मदद नहीं मगर अल्लाह की और से बेशक अल्लाह ग़ालिब हिकमत वाला हैl कंज़ुल ईमान

ऊँघ की शकल में बदर के सहाबा पर अल्लाह की सकीनत नाज़िल हुई जिसके बाद जंग के मैदान में मुसलमानों के कदम जैम गए

कुरआन कहता है:

إِذْيُغَشِّيكُمُالنُّعَاسَأَمَنَةًمِّنْهُوَيُنَزِّلُعَلَيْكُممِّنَالسَّمَاءِمَاءًلِّيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذْهِبَعَنكُمْرِجْزَالشَّيْطَانِوَلِيَرْبِطَعَلَىٰقُلُوبِكُمْوَيُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ (11)

जब उसने तुम्हें ऊँघ से घेर दिया तो उसकी और से चैन (तस्कीन) थी और आसमान से तुम पर पानी उतारा कि तुम्हें उससे सुथरा कर दे और शैतान की नापाकी दूर कर दे और तुम्हारे दिलों की ढारस बंधाए और उससे तुम्हारे कदम जमा देl अनुवाद: (कंज़ुल ईमान)

बदर के दिन अल्लाह हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ था और उसने काफिरों के दिलों में डर पैदा कर दिया था

कुरआन कहता है:

إِذْيُوحِيرَبُّكَإِلَىالْمَلَائِكَةِأَنِّيمَعَكُمْفَثَبِّتُواالَّذِينَآمَنُوا ۚ سَأُلْقِيفِيقُلُوبِالَّذِينَكَفَرُواالرُّعْبَفَاضْرِبُوافَوْقَالْأَعْنَاقِوَاضْرِبُوامِنْهُمْكُلَّبَنَانٍ (12)

जब ऐ महबूब! तुम्हारा रब फरिश्तों को वही भेजता था कि मैं तुम्हारे साथ हूँ तुम मुसलमानों को साबित रखो जल्द ही मैं काफिरों के दिलों में डर डालूँगा तो काफिरों की गर्दनों से उपर मारो और उनकी एकाएक पोर (जोड़) पर मारोl अनुवाद: कंज़ुल ईमान

बद्र के दिन मुसलामानों के खिलाफ लड़ने वाला गिरोह अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का बागी गिरोह था और उनके लिए आखिरत में सख्त अज़ाब है

कुरआन कहता है:

ذَٰلِكَبِأَنَّهُمْشَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ اللَّهَ وَرَسُولَهُفَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُالْعِقَابِ (13) ذَٰلِكُمْفَذُوقُوهُوَأَنَّلِلْكَافِرِينَعَذَابَالنَّارِ (14)

यह इसलिए कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल से मुखालिफत की और जो अल्लाह और उसके रसूल से मुखालिफत करे तो बेशक अल्लाह का अज़ाब हैl यह तो जखो और उसके साथ यह है कि काफिरों को आग का अज़ाब हैl अनुवाद: कंज़ुल ईमान

गजवा ए बद्र के दिन पीठ दिखा कर भागने वाले अल्लाह के गुस्से और अज़ाब के हकदार हैं

कुरआन कहता है:

يَا أَيُّهَا الَّذِينَآمَنُواإِذَالَقِيتُمُالَّذِينَكَفَرُوازَحْفًافَلَاتُوَلُّوهُمُالْأَدْبَارَ (15) وَمَن يُوَلِّهِمْيَوْمَئِذٍدُبُرَهُ إِلَّا مُتَحَرِّفًالِّقِتَالٍأَوْمُتَحَيِّزًاإِلَىٰفِئَةٍفَقَدْبَاءَبِغَضَبٍمِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُجَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَالْمَصِيرُ (16)

ऐ ईमान वालों! जब काफिरों के लाम (लश्कर) से तुम्हारा मुकाबला हो तो उन्हें पीठ ना दोl और जो उस दिन उन्हें पीठ देगा मगर लड़ाई का हुनर करने या अपनी जमात में जा मिलने को, तो वह अल्लाह के गुस्से में पलता और उसका ठिकाना दोज़ख है, और क्या बुरी जगह है पलटने कीl अनुवाद: कंज़ुल ईमान

गजवा ए बद्र में जो कुफ्फार मारे गए उन्हें अल्लाह ने कत्ल किया और अल्लाह ने ही उन पर कंकरियाँ बरसाई और इसी तरह काफिरों को शिकस्त देता है

कुरआन कहता है:

فَلَمْتَقْتُلُوهُمْوَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَارَمَيْتَإِذْرَمَيْتَوَلَٰكِنَّ اللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِيَالْمُؤْمِنِينَمِنْهُبَلَاءًحَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌعَلِيمٌ (17) ذَٰلِكُمْوَأَنَّ اللَّهَ مُوهِنُكَيْدِالْكَافِرِينَ (18)

तो तुमने उन्हें कत्ल नहीं किया बल्कि अल्लाह ने उन्हें कत्ल किया, और ऐ महबूब! वह ख़ाक जो तुमने फेंकी टी बल्कि अल्लाह ने फेंकी और इसलिए कि मुसलमानों को इससे अच्छा इनाम अता फरमाए, बेशक अल्लाह सुनता जानता हैl यह तो लो और उसके साथ यह है कि अल्लाह काफिरों का दावं सुस्त करने वाला है अनुवाद: कंज़ुल ईमान

बद्र का वाकिया ज़ालिम काफिरों के लिए खुदा का फैसला था जिसमें कसरत के बावजूद कुफ्फार शिकस्त से दो चार हो जाए

अल्लाह फरमाता है:

إِنتَسْتَفْتِحُوافَقَدْجَاءَكُمُالْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوافَهُوَخَيْرٌلَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوانَعُدْوَلَنتُغْنِيَعَنكُمْفِئَتُكُمْشَيْئًاوَلَوْكَثُرَتْوَأَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ (8:19)

ऐ काफिरों! अगर तुम निर्णय मांगते हो तो यह निर्णय तुम पर आ चुका और बाज़ आओ तो तुम्हारा भला है और अगर तुम फिर शरारत करो तो हम फिर ना देंगे और तुम्हारा जत्था तुम्हें कुछ काम ना देगा चाहे कितना ही बहोत हो और उसके साथ यह है कि अल्लाह मुसलमानों के साथ हैl अनुवाद: कंज़ुल ईमान

यह तो हकीकत है बद्र की घटना और बद्र वालों की, जबकि यह बताने की कतई आवश्यकता नहीं कि मौजूदा दौर के खारजी आतंकवादियों की कार्यवाहियां कुरआन और इस्लाम से परस्पर विरोधी हैंl इस सन्दर्भ में अधिक जानकारी के लिए इस साईट के दोसरे लाभकारी लेखों का अध्ययन किया जा सकता हैl

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