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Hindi Section ( 18 Nov 2013, NewAgeIslam.Com)

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Peace, the Means for Security शांति, सुरक्षा का साधन और स्रोत

 

मौलाना वहीदुद्दीन खान

15 अक्टूबर, 2013

कुरान की आयत (11: 91) में ज़िक्र है कि शोएब अलैहिस्सलाम से उनकी उम्मत ने किस तरह बात की थी:

'वह बोले: शोएब! तुम्हारी अक्सर बातें हमारी समझ में नहीं आतीं और हम तुम्हें अपने समाज में एक कमज़ोर व्यक्ति जानते हैं, और अगर तुम्हारा परिवार होता तो हम तुम्हें संग सार (पत्थरों से मार कर क़त्ल करना) देते और (हमें उसी का लिहाज़ है वरना) तुम हमारी निगाह में कोई इज़्ज़त वाले नहीं हो।'

इस आयत में शोएब अलैहिस्सलाम के क़बीले के लोगों के द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा का उल्लेख है। जिन्होंने सिर्फ कबायली रीति रिवाज के आधार पर उन्हें सुरक्षा प्रदान किया था, बावजूद इसके कि वो सच्चे मोमिन नहीं थे। बिल्कुल इसी स्थिति का उल्लेख मसनद इमाम अहमद में है जिसके अनुसार अल्लाह ने हर नबी को उसकी उम्मत की हिफाज़त करने की ताक़त के साथ भेजा है।

आधुनिक शासन प्रणाली के आने से बहुत पहले प्राचीन काल में लोगों की रक्षा उनके अपने क़बीले के सदस्य किया करते थे। क़बायली रीति रिवाज के अनुसार अपने क़बीले के सदस्यों की सुरक्षा दूसरे कबीलों से करना क़बीले के लोगों की ज़िम्मेदारी थी। उस दौर में ये तरीका नबियों की सुरक्षा का भी एक प्रेरणा स्रोत साबित हुआ। इसलिए (खूंखार कुफ़्फ़ार अरब से) पैगम्बरे इस्लाम मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की सुरक्षा क़बीला बनू हाशिम के सरदार अबु तालिब ने किया था। हालांकि अबु तालिब ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया लिकन उन्होंने क़बायली रीति रिवाज के अनुसार उनके दुश्मनों से पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की रक्षा की।

समकालीन दौर में क़बायली प्रणाली पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है लेकिन वो हिफ़ाज़ती ताक़त जिसने एक ज़माने में अपनी भूमिका निभाई थी अब राज्य की आधुनिक अवधारणा पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था के द्वारा अपनी भूमिका अदा करती है। ये व्यवस्था अब मोमिनों और उन लोगों को भी जो दावत में लगें हैं या लोगों को राहे ख़ुदा की दावत दे रहे हैं इस तरह की सुरक्षा प्रदान करता है। आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अब अपने सभी नागरिकों को इस बात की गारंटी देते हैं कि वो बिना किसी बाधा के अपनी मर्ज़ी से चयनित धर्म का पालन कर सकते हैं और उसका प्रचार प्रसार कर सकते हैं, बशर्ते वो हिंसा का सहारा लें।

अतीत में नबियों की रक्षा करने वाला सुरक्षा ढाल क़बायली प्रणाली पर आधारित थी। ये सुरक्षा का एक क़बायली तरीक़ा था। इसमें इसके इस्लामी होने जैसी कोई बात नहीं थी। इसके बावजूद नबियों ने इसे स्वीकार किया। इसी तरह समकालीन दौर में जो सुरक्षा मुसलमानों को हासिल है, वो लोकतांत्रिक है और ये सुरक्षा कोई खास इस्लामी सुरक्षा नहीं है। इसलिए नबियों की सुन्नत के मिलते जुलते रूप में मुसलमानों को भी इस सुरक्षा प्रणाली को स्वीकार करना चाहिए और इस सुरक्षा प्रणाली के तहत अपने जीवन को गुज़ारना चाहिए और शांतिपूर्ण स्रोतों का इस्तेमाल करते हुए दावत में या लोगों को राहे खुदा की तरफ बुलाने में लगना चाहिए।

हालांकि पूरी दुनिया में मुस्लिम 'लीडरों' ने सिर्फ शाब्दिक बल्कि शारीरिक रूप से भी इसके खिलाफ जंग छेड़ते हुए गलत तरीके से लोकतंत्र को लादेनियत का नाम दे दिया है। इस तरह उन्होंने अनावश्यक रूप से खुद को लोकतंत्र का दुश्मन बना लिया है। जिसकी वजह से उन्होंने महत्वपूर्ण रिआयतों को खो दिया है जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था ने उन्हें प्रदान किया था।

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