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Hindi Section ( 17 Sept 2011, NewAgeIslam.Com)

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Honour Killing, Religion and Society आनर किलिंग और हमारा समाज


मौलाना नदीमुल वाजिदी (उर्दू से हिंदी अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम डाट काम)

इज़्ज़त के लिए कत्ल के मामलात में दिन ब दिन इज़ाफा होता जा रहा है। अदालतों की सख्ती के बावजूद भी आनर किलिंग के मामलात में कमी नहीं हो पा रही है। कानून के माहिर (विशेषज्ञ) लोगों का दावा है कि हर साल हिंदुस्तान में खानदान की इज़्ज़त और प्रतिष्ठा के नाम पर एक हज़ार से ज़्यादा नौजवानों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। परम्परागत समाज में इस तरह के वहशियाना सुलूक को न सिर्फ अच्छा समझा जाता है बल्कि उन पर फख्र भी किया जाता है।

आनर किलिंग की  ज़्यादातर घटनाएं हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में पेश आते हैं। एक अंदाज़े के मुताबिक इस साल तकरीबन नौ सौ जोड़ों को दूसरी ज़ात या दूसरे मज़हब में शादी करने के जुर्म में खुद उनके क़रीबी रिश्तेदारों ने कत्ल कर दिया। ज़्यादातर मामलात में कातिल गिरफ्तार नहीं किये जा सके। कुछ जगहों पर गिरफ्तारियाँ भी हुईं, लेकिन मुजरिमों की रक्षा के लिए स्थानीय पंचायतें और इलाकाई लीडर सक्रिय हो गये। ऐसा खयाल किया जा रहा है कि आनर किलिंग के मुजरिम कभी भी अपने जुर्म की सज़ा नहीं भुगत सकेंगे। हो सकता है सुबूत की कमी या फिर मारे गये लोगों करीबी रिश्तेदारों की तरफ से पैरवी न करने की वजह से मुजरिम बाइज़्ज़त रिहा हो जायें।

अब तक ये समझा जाता रहा कि आनर किलिंग में हमारा गैर-पढ़ा लिखा समाज ही शामिल है, लेकिन हाल ही में दिल्ली के पाश इलाके में इस तरह कत्ल के कई मामले सामने आये हैं, जिन से अंदाज़ा होता है कि ये सिर्फ गाँव देहात के ग़ैर पढ़े लिखे समाज की ही समस्या नहीं है बल्कि दिल्ली जैसे शहर के पढ़े लिखे लोग भी इज़्ज़त और प्रतिष्ठा के नाम पर जान लेने में पीछे नहीं हैं। अभी हाल ही में कत्ल की एक वारदात के बाद दिल्ली के पढ़े लिखे और खुशहाल समाज के तीन नौजवान पकड़े गये हैं उन्हें अपने अमल पर किसी तरह का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने अपना जुर्म कुबूल किया और बाद में उसका बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि एक ही गोत्र के लड़के और लड़की में शादी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जायेगी। अगर ऐसी हालत में किसी का कत्ल किया जाता है तो उसमें कोई बुराई नहीं है। एक गोत्र के लोग आपस में भाई बहन होते है, जिन में शादी नहीं हो सकती। इस तरह की शादी करने वालों को कत्ल कर देना ज़रूरी है।

आनर किलिंग की घटनाओं ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। लंदन मेट्रोपालिटन युनिवर्सिटी ने खास इस विषय पर सेमिनार किया। सामाजिक मामलों के जानकारों ने आंकड़ो की मदद से ये बताया कि आनर किलंग के मामले सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि एशिया के दूसरे देशों में भी सामने आ रहे हैं। इस सिलिसले में पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों का नाम लिया गया। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल पूरी दुनिया में लगभग पांच हज़ार लोग आनर किलिंग के नाम पर ज़िंदगी खो देते हैं। हमारे देश की संसद इस सिलसिले में एक सख्त कानून मंज़ूर कारने की तैयारी कर रही है, लेकिन इसकी कम ही संभावना है कि ये बिल संसद में पेश हो, अगर पेश भी हो गया तो महिला बिल की तरह इसकी मंज़ूरी भी आसान नहीं होगी। और अगर किसी तरह मंज़ूर भी हो गया तो इस पर अमल कराने की संभावना कम ही नज़र आती है। इसकी वजह ये है कि आनर किलिगं किसी एक गाँव, किसी एक इलाके और बिरादरी या खानदान का मामला नहीं है। पूरा पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान इसमें शामिल है। ये देश का बहुत बड़ा इलाका है, जहाँ से बहुत बड़ी तादाद में संसद सदस्य चुनकर संसद और राज्य की विघानसभाओं में पहुँचते हैं और अगर इन सदस्यों को दुबारा कामयाब होना है, और अपने क्षेत्र में राजनीति करनी है तो वो लोग जनता की इच्छाओं का सम्मान करने के लिए मजबूर होंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा एक गोत्र की शादी के विरोधी हैं और वो साफ तौर पर अपना ये विचार व्यक्त कर चुके हैं। हरियाण से ही कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल  भी ऐसी शादियों का विरोध कर रहे हैं। ऐसे हालात में ये बात कैसे कही जा सकती है कि अदालते इंसाफ के तकाज़ों को पूरा करने में कामयाब होंगी, या सरकार सख्त कानून बनाने के अपने इरादे पर पूरी तरह अमल कर पायेगी।

हैरानी और अफसोस की बात ये है कि इन घटनाओं में हिंदू और सिख ही नहीं बल्कि मुसलमान भी शामिल हो रहे हैं। जबकि इस्लाम में शादी ब्याह के मामलों में हराम और जायेज़ रिश्तों की तफ्सीलात पहले से ही मौजूद है। इसके बावजूद अगर कोई जोड़ा इस्लामी शिक्षाओं से मुँह मोड़कर शादी करता है तो किसी व्यक्ति या समाज उसको कत्ल करने की सज़ा देने का अधिकार नहीं है। सज़ा देने का अधिकार सरकार के दायरे में आता है, और किसी को भी चाहे वो कितना भी असरदार और ताकतवर क्यों न हो, अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का अधिकार नही हैं। अगर कुछ मुस्लिम घराने परम्परागत मूल्यों  पर यकीन रखते हुए इस तरह की हरकतों में शामिल हो रहे हैं, तो ये बड़े अफसोस की बात है। इसलिए ज़िम्मेदार उलमा और जमातों को चाहिए कि वो मुसलमानों को इस तरह की हरकतों से दूर रखने के लिए पूरी ताकत के साथ आगे आयें। कुछ लोग ये गलत फहमी फैला रहे हैं कि मुस्लिम देशों में इस तरह के कत्ल को सरकारों की सरपरस्ती हासिल है। 2008 में सऊदी अरब के एक शेख ने अपनी बेटी को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया था, क्योंकि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अजनबी मर्दों के साथ चैट कर रह थी। जार्डन, सीरिया और मोरक्को में आनर किलिंग को सरकारों की सरपरस्ती हासिल है। पाकिस्तान और दूसरे खाड़ी देशों में इस कदम को कानूनी मंज़ूरी तो हासिल नहीं, लेकिन समाजी तौर पर इसे बुरा नहीं माना जाता है। मेरे खयाल से ये मुस्लिम देशों के खिलाफ झूठा प्रचार है। पाकिस्तान के बारे में जहाँ कुछ इलाकों में कबायली सिस्टम मज़बूत है और परम्परागत मूल्यों के सामने सरकारी कानून भी बेबस नज़र आते हैं, आनर किलिंग मौजूद है, लेकिन दूसरे मुस्लिम देशों के बारे में जानकारी लेने पर अंदाज़ा होता है कि इन देशों में आनर किलिगं के मामले बहुत कम ही सामने आते हैं।

देखा जाये तो ये मसला सिर्फ हिंदुस्तान का है और हिंदुस्तान में भी उन इलाकों का जो मज़हब और राजनीति दोनों मामले में इन्तेहापसंदी का शिकार हैं। ये माना कि हिंदू धर्मशास्त्रों में एक गोत्र के लोग आपस में भाई बहन माने जाते हैं, और इसलिए उनकी शादी के लिए मना है और जो लोग इस तरह के कार्यों में शामिल पाये जाते हैं, उनके लिए धर्मशास्त्रों में समाजी बायकाट और कत्ल जैसी सज़ाएं भी बतायी गयी हैं। खप पंचायतों का ये दावा है कि वो ये सज़ाएं देकर अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। 1955 तक एक गोत्र की शादी की आज्ञा नहीं थी और शायद ही कोई जोड़ा एक गोत्र में शादी की हिम्मत कर पाता हो, लेकिन हिंदू मैरिज ऐक्ट के ज़रिए सभी परम्परागत कानूनों को बदल दिया गया और कई तरह की शादियों पर पाबंदी लगा दी गयी। मिसाल के तौर पर नाबालिग़ लड़की की शादी को गलत ठहराया दी गयी। जबकि इससे पहले इस तरह की शादी जायेज़ थी। इसी तरह शादी शुदा मर्द या औरत को तलाक़ के बग़ैर शादी का अधिकार भी खत्म कर दिया गया। भाई बहन, चाचा भतीजी, चाची भतीजा, भाईयों और बहनों के बच्चे, इसी तरह दूसरे करीबी रिश्तों में शादी करने से रोक दिया गया। मगर इस क़ानून में गोत्र की शादी से मनाही नहीं की गयी। पहले दबे अंदाज़ में इस पर विरोध किया जाता था, क्योंकि पहले बहुत कम इस तरह की घटनाएं सामने आती थीं। पश्चिमी संस्कृति की नक़ल और बे-रोकटोक आज़ादी ने रिश्तों की पवित्रता को समाप्त कर दिया है और अब नौजवान लड़के लड़कियाँ मज़हब और समाज को नज़र अंदाज़ करके एक दूसरे के साथ ज़िंदगी गुज़ारना चाहते हैं, जबकि पुराने लोग इस रूझान के खिलाफ़ हैं, और अब ये रूझान सामाजिक असंतोष की शक्ल लेता जा रहा है और लोग कानून हाथ में लेने लगे हैं।

एक गोत्र में शादी की मनाही अगर हिंदुओं का धार्मिक मामला है तो सरकार को उसे क़ानूनी संरक्षण प्रदान करना चाहिए। इस तरह लोग कानून को अपने हाथ में लेने से बाज़ रह सकते हैं। मज़हब का मामला बड़ा नाज़ुक और संवेदनशील होता है। कोई भी राष्ट्र खासतौर से पूर्वी देशों के लोग धर्म को नज़रअंदाज़ करके नहीं चल सकते हैं। अगर हिंदू एक गोत्र की शादी को बुरा समझते हैं तो सरकार उसे जायेज़ करने पर क्यों तुली हुई है। आनर किलिंग पर कानून के ज़रिए काबू नहीं पाया जा सकता है। इस सिलसले में अदालते भी कुछ नहीं कर सकती हैं। सियासत और समाज के ठेकेदार और मज़हब को मानने वाले समुदाय अगर एकजुट हो जायें, तो अदालत, सरकार और कानून सब बेबस हो जाते हैं। फिलहाल ही ऐसा हो रहा है और जब तक सरकार हिंदू समाज की इच्छाओं के मुताबिक हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन करके एक गोत्र की शादी को निषिध्द शादियों की सूची में शामिल नहीं करेगी ऐसा ही होता रहेगा और नौजवान जोड़ों को एक दूसरे से जुदा होने पर मजबूर किया जाता रहेगा। अगर उन्होंने खप पंचायतों के आदेशों को नहीं माना, तो उन्हे समाजिक बहिष्कार या हत्या जैसी सज़ाओं का सामना करना पड़ेगा। हो सकता है उन्हें जान बचाने की खातिर देश भी छोड़ना पड़ जाये। ये भी सम्भव है कि आनर किलिंग का भूत उन्हें ज़िंदगी की आखरी सांस तक न छोड़े।

जहाँ तक मुसलमानों का मामला है, इस्लाम में प्रतिष्ठा की खातिर हत्या की कोई शिक्षा इस्लाम में नहीं है, और न ही हदीस में हैं। जिन औरतों से शादी जायेज़ है और जिन औरतो से शादी हराम है शरीअत में उनको पहले से ही तय कर दिया गया है। इन औरतों से हटकर निकाह करने वालों का निकाह होता ही नहीं है। इसके बावजूद अगर वो एक साथ ज़िंदगी गुज़ारते हैं तो हराम काम करते हैं। इस्लामी हुकूमत हो तो उन्हें इस्लामी कानून के मुताबिक सज़ा मिलेगी, लेकिन हिंदुस्तान जैसे लोकतांत्रिक देश में इस्लामी कानून लागू नहीं है इसलिए किसी को कत्ल जैसी सज़ा देने का अधिकार नहीं है। अलबत्ता ऐसे जोड़ो से ऐसी नफरत की जानी चाहिए जैसा एक सभ्य समाज बलात्कार करने वालों के साथ करता है। और उनसे इस तरह दूर रहना चाहिए जिस तरह लोग अपराधियों से दूर रहते हैं। हमारे खयाल में तो आनर किलिंग  जैसे खतरनाक रुझान पर काबू पाने के लिए धार्मिक शिक्षा को आम करने की और बच्चों की सही इस्लामी सिध्दांतो के मुताबिक परवरिश करने की ज़रूरत है।

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