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Hindi Section ( 10 Feb 2020, NewAgeIslam.Com)

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The Quran, Torah and Injeel: A short Introduction कुरआन, तौरात और इंजील: एक संक्षिप्त परिचय


कनीज़ फातमा, न्यू एज इस्लाम

अल्लाह पाक का इरशाद है “उसने हक़ के साथ आप पर किताब नाज़िल की जो उन किताबों की पुष्टि करने वाली है जो इससे पहले नाज़िल हो चुकी हैं और उसने तौरात और इंजील को नाज़िल कियाl इस किताब से पहले लोगों की हिदायत के लिए और फुरकान (हक़ और बातिल में इम्तियाज (अंतर) करने वाला) नाज़िल किया, बेशक जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों के साथ कुफ्र किया उनके लिए सख्त अज़ाब है और अल्लाह ग़ालिब मुन्तकिम है”l (आल इमरान)

जम्हूर मुफ़स्सेरीन का इस बात पर इज्माअ है कि कुरआन पाक की इस आयत में किताब से मुराद कुरआन करीम हैl और तंजील का अर्थ है किसी चीज को क्रम से नाज़िल करनाl और कुरआन मजीद आप पर जरूरत और मसलिहत के एतेबार से साल में नाज़िल हुए हक़ का अर्थ है सच्चाई, कुरआन की दी हुई अतीत की खबरें और भविष्य की भविष्यवानियाँ सब सच्ची हैं और कुरआन के वादे और वईद भी सच्चे हैंl इसलिए कुरआन ए पाक हक़ है, हक़ का दोसरा अर्थ यह है कि जब कोई उस समय उस मात्रा और उस कैफियत में आई हो कि जिस समय, मात्रा और जिस कैफियत में इसको होना चाहिए इस लिहाज़ से कुरआन ए करीम के अहकाम भी हक़ हैं क्योंकि वह अहकाम सहीह समय में नाज़िल हुए, सहीह मात्रा (जैसे, कितने फ़राइज़ हों) और सहीह कैफियत (जैसे कौन सी चीज फर्ज़ की जाए और कौन सी हराम) के साथ नाज़िल हुए, इसलिए कुरआन मजीद की खबरें और वादे और वईद भी हक़ हैं क्योंकि वह सादिक है और कुरआन के अहकाम भी हक़ हैं क्योंकि वह सहीह समय, सहीह मात्रा और सहीह कैफियत के साथ नाज़िल हुए हैंl

कुरआन मजीद के अतिरिक्त इस आयत में तौरात और इंजील का भी उल्लेख हैl तौरात और इंजील क्या हैं? निम्नलिखित परिचय पेश किये जा रहे हैंl

तौरात का अर्थ व मफ़हूम

कुछ उलेमा और शोधकर्ता ने लिखा है कि तौरात का शब्द तौरिया से लिया गया है, तौरिया किनाया को कहते हैं चूँकि तौरात में अधिकतर मिसालें हैं इसलिए इसको तौरिया कहा गया और कुछ उलेमा ने कहा है कि यह इब्रानी भाषा का शब्द है और इब्रानी भाषा में तौरात का अर्थ शरीअत हैl यह दोसरी राय अधिक सहीह हैl

तौरात मौजूदा बाइबिल (पवित्र पुस्तक) का एक भाग है , पवित्र पुस्तक के दो अहम हिस्से हैंl (१) पुराना अहद नामा (ओल्ड टेस्टामेंट) और (२) नया अहद नामा (न्यू टेस्टामेंट)l

पुराना अहद नामा नए अहद नामे से तुलना में अधिक ज़खीम हैl कुल बाइबिल अर्थात पुराना अहद नामा और नया अहद नामा सारे ईसाईयों की धार्मिक किताब है, लेकिन यहूदियों की मज़हबी किताब केवल पुराना अहद नामा हैl

पुराने अहद नामे के सामग्री असल में यहूदियों के भिन्न पवित्र सहिफों का संयोजन हैl पुराने अहद नामे को यहूदियों के उलेमा ने तीन भागों में बांटा हैl (१) तौरात (२) अंबिया के सहीफे (३) पवित्र सहीफेl

तौरात को हज़रात मूसा ( अलैहिस्सलाम) की ओर मंसूब किया जाता हैl इसमें इंसानों की पैदाइश से ले कर बनी इस्राइल के इतिहास तक और इसके बाद हज़रात मूसा (अलैहिस्सलाम) की वफात तक बहस की गई हैl बनी इस्राइल के लिए जो सामाजिक नियम और इबादत के तरीके बनाए गए थे वह सब इसमें दर्ज हैंl असल तौरात निम्नलिखित पांच सहीफों पर आधारित हैl

असल तौरात के मश्मुलात पांच हैं:

(१) तकवीन: इसमें हज़रत मूसा ( अलैहिस्सलाम) से पहले के लोगों के हाल बयान किये गए हैं ताकि आल ए याकूब हाइलाइट होंl उर्दू की किताब में इस सहीफे का नाम पैदाइश हैl

(२) खुरुज: इसमें हज़रात मूसा (अलैहिस्सलाम) की विलादत से ले कर उनके एलान ए नबूवत और कोहे तूर पर जाने और उनको अहकाम दिए जाने तक के हाल मजकुर हैंl

(३) लाविय्यीन: इसमें विशेषता के साथ बनी इस्राइल की इबादतों के तरीके का उल्लेख हैl उर्दू की किताब में इस सहिफे का नाम अह्बार हैl

(४) एदाद: इसमें खुरुज के बाद के बनी इस्राइल के हालात उल्लेखित हैं कि किस प्रकार बनी इस्राइल ने उर्दन और उर्दन से परे का इलाका फतह किया और इसमें क्रमिक अहकाम और नियमों का भी उल्लेख हैl उर्दू की किताब में इस सहिफे कानाम गिनती हैl

(५) तस्निया: इसमें एतेहासिक पृष्ठभूमि पर नज़र डाली गई है और नियमों का एक संग्रह पेश किया हैl यह सहिफा हज़रात मूसा (अलैहिस्सलाम) की वफात के ज़िक्र पर ख़त्म होता हैl यह पांच सहीफे असल तौरात हैं इसके अलावा पुराने अहद नामे में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के बाद में आने वाले अंबिया पर नाज़िल होने वाले सहिफों को भी शामिल किया गया, जैसे यूशा, कजाह समवील और मामलुक आदि ज़बूर भी इन सहिफों में शामिल है कुछ सहिफों का जुज़ हैंl यह कुल सहिफे हैंl पुराने अहद नामे (उर्दू) में तौरात के पांच सहिफों के यह सहीफे शामिल हैंl शुरू में इन सहिफों की सूचि है यह तमाम सहीफे इब्रानी भाषा में थे हाँ दानियाल और उजरा आरामी भाषा में थेl

इंजील का शाब्दिक अर्थ व मफहूम

इंजील इब्रानी भाषा के शब्द हैl अरबी के किसी शब्द से जुड़ा नहीं है और इसका कोई वज़न नहीं हैl कुछ उलेमा ने कहा है कि यह शब्द नज़ल से जुड़ा है नजल ज़मीन फूटने वाले  पानी को कहते हैं और चश्मा के फराख करने को भी कहते हैं इंजील भी अहकाम ए इलाही का सरचश्मा है और इसमें तौरात के मुश्किल अहकाम को आसान किया गया है इसलिए इसमें नजल की मुनासिबत पाई जाती हैl तफ़सीर ए कश्शाफ़ के लेखक अल्लामा ज़मख्शरी ने कहा है कि तौरात और इंजील दोनों अजमी भाषा के शब्द हैं, हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) और उनके हव्वारी नसलन और मजहबन, ईसाई थे और उनकी धार्मिक जुबान इब्रानी थी या मगरीबी आरामी, यूनानी भाषा में इंजील का अर्थ बशारत हैl इंजील को बशारत इसी लिए कहा गया है कि हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) ने सैयदना मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बशारत दीl कुरआन ए पाक में है:

आयत:

‘‘واذ قال عیسیٰ ابن مریم یبنی اسرآئیل انی رسول اللہ الیکم مصدقالمابین یدی من التورۃ ومبشرا برسول یاتی من بعدی اسمہ احمد (अलसफ)

अनुवाद: “और जब ईसा बिन मरियम ने कहा: ऐ अबनी इस्राइल बेशक मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का रसूल हूँ दर आं हालांकि मैं अपने से पहली किताब तौरात की तस्दीक करने वाला हूँ और उस अज़ीम रसूल की बशारत देने वाला हूँ जिसका नाम अहमद है”l

इंजील की तारीख़ी हैसियत और उसके मश्मुलात

“जैसा कि असल इंजील अब मं व अन बाकी नहीं है और मौजूदा अनाजील हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) के बाद तालीफ़ की गई हैंl हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी ज़िन्दगी के आखरी तीन सालों में जो खुतबात और कलिमात इरशाद फरमाए थेl आप के ज़िंदा आसमान पर उठाए जाने के काफी समय के बाद आपके विभिन्न हव्वारियों और शागिर्दों ने आपकी सीरत को मुरत्तब किया और इस सीरत में उस वही ए रब्बानी को भी दर्ज कर दिया जो वास्तव में इंजील है, फिर इसमें जमाने के साथ साथ परिवर्तन होते रहे और कमी बेशी और तहरीफ़ होती रही, इब्रानी भाषा से इसको सौ से अधिक भाषाओं में मुन्तकिल किया गया, उस समय दुनिया में चार इंजीलें मौजूद हैंl मता की इंजील, मरकस की इंजील, लुका की इंजील और युहन्ना की इंजीलl यह इंजीलें हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) की सीरत और आपकी शिक्षाओं पर आधारित हैं और रसूलों के आमाल हैं अर्थात हव्वारियों के और पोलिस ‘पीतरस’ युहन्ना और याकूब के मकातिब हैं अर्थात खुतूत’ और युहन्ना का मुकाश्फा है’ और जो मजमुआ उन सारी चीजों पर आधारित है उस को नया अहद नामा कहते हैं’ इसको पवित्र किताब और बाइबिल भी कहते हैं, बाइबिल लातीनी भाषा का शब्द है इसका अर्थ किताबों का संग्रह हैl और यह शब्द इल्हामी नोश्तों के संग्रह के मजमुए के लिए प्रयोग होता हैl कैथोलिक बाइबिल के नोश्तों की संख्या से अधिक है हमने जो विवरण दर्ज की है वह प्रोटेस्टेंट बाइबिल के अनुसार है” (तिब्यानुल कुरआन, अल्लामा सईदी रहमतुल्लाह अलैह)l

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