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Hindi Section ( 28 May 2019, NewAgeIslam.Com)

Sincerity and Good Intentions – Part 1 इखलास व नेकनीयती के सबक


कनीज़ फातमा, न्यू एज इस्लाम

मौजूदा दौर का अवलोकन करने से यह परिणाम उभर कर सामने आता है कि आज अक्सर लोग ऐसे उद्देश्य के लिए जी रहे हैं कि उन्हें शोहरत व नामवरी मिले और वह दोसरों की नज़रों में महबूब बन जाएंl इस उद्देश्य का हुसूल चाहे माल व दौलत के जरिये हो या फिर इल्म व हुनर और इबादत व रियाज़त के जरिये, किसी भी काम में इखलास और नेकनीयती नजर नहीं आतीl इस अप्रिय कार्य के प्रतिबद्धता में जनता के साथ साथ इल्म वालों का एक बड़ा वर्ग भी लिप्त है (الا ما شاء اللہ) इखलास व नेकनियति का अभाव हमारे गिरावट का एक कारण हैl

हमारे समाज में फैलती जा रही इस बुराई का खात्मा करने के लिए यह सिलसिलेवार लेख आप तक पेश करने की सआदत  हासिल कर रही हूँl इस किस्तवार लेख में पाक हदीसों और नेक लोगों के कथन की रौशनी में बद दयान्ति की दुनयवी और उखरवी नुक्सानों और नेकनीयती के अनेकों लाभ बताए जाएंगे ताकि इस्लाम का कलमा पढ़ने वाले मुसलमानों के अन्दर इखलास व नेकनीयती का जज्बा पैदा हो सके और फिर इसके माध्यम से वह अपने कर्मों में सुधार करने में सफल हो सकें और दिखावे, झूट, गीबत, फसाद, कत्ल व गारत गरी, अत्याचार जैसी बरबादियों से सुरक्षित हो सकेंl

इखलास व अच्छी नीयत

हदीस नंबर १:

دَّثَنَا أَبُو مُوسَى الْهَرَوِيُّ إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ ، قَالَ : حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْجَبَّارِ أَبُو مُعَاوِيَةَ السِّنْجَارِيُّ ابْنُ أُخْتِ عُبَيْدَةَ بْنِ حَسَّانَ ، قَالَ : حَدَّثَنَا عُبَيْدَةُ بْنُ حَسَّانَ ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَابِتِ بْنِ ثَوْبَانَ مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ : حَدَّثَنَا أَبِي ، عَنْ جَدِّي ، قَالَ : شَهِدْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا مَجْلِسًا ، فَقَالَ : " طُوبَى لِلْمُخْلِصِينَ ، أُولَئِكَ مَصَابِيحُ الدُّجَى ، تَتَجَلَّى عَنْهُمْ كُلُّ فِتْنَةٍ ظَلْمَاءَ "

हज़रत साबित सौबान जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आज़ाद किये हुए गुलाम हैं, वह फरमाते हैं कि हम से हदीस बयान की मेरे वालिद ने और उन्होंने अपने वालिद हज़रत सौबान रज़ीअल्लाहु अन्हु से रिवायत की उन्होंने फरमाया:

एक बार मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मजलिस में हाज़िर था तो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “मुखलिस लोगों के लिए खुशखबरी है, वह अंधेरों में हिदायत के चराग हैं इन लोगों के माध्यम से हर अंधेरा फितना छट जाता है (अर्थात दूर हो जाता है)l

इस हदीस में मुखलिसीन का शब्द प्रयोग हुआ है, इसका मसदर इखलास है जिसका अर्थ यह है कि इंसान जो नेक काम करे, उसका कारण उस काम की नेकी हो और जो फर्ज़ या वाजिब अदा करे, उसका कारण इस कार्य की फर्जियत या वुजुब होl वह केवल अपने रब की रज़ा के लिए इस फेल को करे, ना वह कार्य किसी को दिखाना मकसूद हो ना किसी को सुनाना मकसूद हो, असल मकसूद बिल ज़ात अल्लाह पाक की रज़ा हो, जन्नत का हुसूल भी मतलूब हो और दोज़ख से निजात भी मतलूब होl तौरात में लिखा है, जिस कार्य से मेरी रज़ा का इरादा किया गया वह कार्य कम भी हो तो अल्लाह के नजदीक बहोत है और जिस कार्य से मेरी रज़ा का इरादा नहीं किया गया वह कार्य अगर बहोत भी हो तो मेरे नजदीक कम हैl

अगर कोई व्यक्ति अपने पिता की ख़ुशी के लिए कोई इबादत करे या अपनी औलाद की ख़ुशी के लिए कोई इबादत करे और उसमें खुलूस ना हो तो वह इबादत अल्लाह की बारगाह में मकबूल नहीं होगा बल्कि यह काम दिखावे का होगाl

इमाम राज़ी शाफई फरमाते हैं: इखलास का अर्थ है: नीयत इखलास और हर इबादत में नीयत इखलास जरूरी है अर्थात वह इबादत केवल अल्लाह की रज़ा के लिए की जाए और चूँकि सभी लोगों को यह आदेश दिया गया है कि वह इखलास के साथ इबादत करें, इसलिए इबादत में नीयत करना जरूरी है, इसलिए इमाम शाफई यह कहते हैं कि वुजू करना भी इबादत है, इसलिए वुजू में नीयत करना फर्ज़ हैl (तफसीर ए कबीर ११ पृष्ठ 242, दारुल अहया अल तुरासुल अरबी, बैरुत, १४१५ हिजरी)

हदीस नंबर २:

دَّثَنِي حَدَّثَنِي سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ ، قَالَ : بَلَغَنِي أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ ، قَالَ : " الْعَمَلُ الصَّالِحُ الَّذِي لا تُرِيدُ أَنْ يَحْمَدَكَ عَلَيْهِ أَحَدٌ إِلا لِلَّهِ ۔

अता बिन साइब से मरवी है फरमाया: मुझ तक यह बात पहोंची है कि हज़रत अली रज़ीअल्लाहु अन्हु ने इरशाद फरमाया: नेक काम वह है जिसपर खुदा के सिवा और किसी की तारीफ़ ना चाहोl

हदीस नंबर ३:

حدثنَا داود بْن مُحَمَّد ، أنه سمع أبا عَبْد اللَّه النباجي ، يَقُول : خمس خصال فيها تمام العمل : معرفة اللَّه ، ومعرفة الحق ، وإخلاص العمل لله ، والعمل على السنة ، وأكل الحلال ، فإن فقدت واحدة لم يرتفع العمل ، وذلك أنك إذا عرفت اللَّه ، ولم تعرف الحق لم تنتفع ، وإذا عرفت الحق ، ولم تعرف اللَّه لم تنتفع ، وإذا عرفت اللَّه وعرفت الحق ، ولم تخلص العمل لم تنتفع ، وإن عرفت اللَّه ، وعرفت الحق ، وأخلصت العمل ، ولم يكن العمل على السنة لم تنتفع ، وإن تمت الأربع ولم يكن الأكل من الحلال لم تنتفع .

 दाउद इब्ने मोहम्मद ने बयान की, उन्होंने अब्दुल नबाही से यह कहते हुए सूना: पांच सिफतें ऐसी हैं जिनके जरिये अमल पूरा होता है: (१) अल्लाह पाक की मारफ़त के साथ उस पर ईमान लाना, (२) हक़ की मारफ़त (३) अल्लाह पाक के लिए नेकनीयती के साथ कोई अमल करना (४) सुन्नत तरीका विकल्प करना (५) हलाल खानाl इसकी तफसील इस तरह बयान करते हैं (अनुवाद) “अगर इन पाँचों में से कोई एक भी खसलत ना पाई गई तो अमल मकबूल नहीं होगाl

इसकी तफसील यह है कि जब तूने अल्लाह पाक को पहचान लिया और हक़ को ना पहचाना तो तुझे कोई लाभ नहीं पहुंचेगाl और इसी तरह जब तूने हक़ को जान लिया लेकिन अल्लाह पाक को नहीं जान सका तो भी लाभदायक नहींl अगर तूने अल्लाह पाक की मारफत के साथ हक़ की भी मारफत करली लेकिन अमल में इखलास और नेक नीयती नहीं है तो यह भी बेकार हैl और अगर तूने अल्लाह की मारफत और हक़ की मारफ़त कर ली और साथ ही तेरे अमल में इखलास भी है लेकिन सुन्नत तरीके पर नहीं है तो भी बेकार है और अगर चारों खसलतें तेरे अन्दर मौजूद हैं लेकिन हलाल कमाई नहीं है तो यह भी बेकार हैl (تاریخ دمشق ، ابن عساکر ، حرف السین، ذکر من اسمہ سعید، رقم الحدیث ۱۹۷۵۰،  اردو ترجمہ  از حسان رضا تیغی منقول از کتاب الاخلاص والنیۃ  لابن ابی الدنیا )

हदीस नंबर ४:

حدثنا محمد بن يزيد قال : حدثنا إسحاق بن سليمان حدثنا أبو جعفر الرازي : عن الربيع بن أنس قال علامة الدين الإخلاص لله وعلامة العلم خشية الله (کتاب الاخلاص والنیۃ  لابن ابی الدنیا )

रबीअ बिन अनस से मरवी है, फरमाया: दीन की पहचान नेक नीयती और इखलास है और इल्म की पहचान अल्लाह का डर हैl

हदीस नंबर ५:

حدثنا سريج بن يونس و إسحاق بن إسماعيل وغيرهما قالوا : حدثنا جرير بن عبد الحميد عن عبد العزيز بن رفيع : عن أبي ثمامة قال قال الحواريون لعيسى عليه السلام : ما الإخلاص لله ؟ قال : الذي يعمل العمل لا يحب أن يحمده عليه أحد من الناس قالوا : فمن المناصح لله ؟ قال : الذي بحق الله قبل حق الناس إذا عرض عليه أمران أحدهما للدنيا والآخر للآخرة بدأ بأمر الله قبل أمر الدنيا (کتاب الاخلاص والنیۃ  لابن ابی الدنیا )

अबू समामा से मरवी है, फरमाया: हवारियों ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम से अर्ज किया: अल्लाह पाक के लिए इखलास क्या चीज है? हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया: बन्दा जब कोई काम करे तो यह ना चाहे कि इस पर कोई व्यक्ति उसकी प्रशंसा करेl अर्ज किया: अल्लाह पाक के लिए खुलूस रखने वाला कौन है? फरमाया: वह व्यक्ति जो लोगों के हक़ से पहले अल्लाह के हक़ को अदा करेl जन उस पर दो मामले पेश हों एक दुनिया का, दोसरा आखिरत का तो वह दुनिया से पहले अल्लाह पाक के मामले को पूरा करेl

इखलास और नेक नीयती से अल्लाह पाक की रज़ा हासिल होती हैl हम में से कुछ लोग यह कहते हैं कि हम इतनी इबादतें करते हैं इतना नेक अमल करते हैं लेकिन इसके बावजूद हमें दुनिया में खुशहाली नहीं मिलती, और कुछ ऐसे हैं कि वह अपने निजात याफ्ता होने का दावा करने लग जाते हैं और अपने अन्दर एक तरह का गुरुर व तकब्बुर पैदा कर लेटे हैंl इसकी वजह या तो यह हो सकती है कि हम ने अपने आमाल को खुलूस के साथ अदा नहीं किया होl रही बात निजात याफ्ता होने की तो इमाम राज़ी तफसीर कबीर सुरह बैय्येना की आयत ५ की तफसीर में लिखते हैं:

यह आयत इस पर दलालत करती है कि कोई मुसलमान कभी भी इस मर्तबे पर नहीं पहुंचता कि वह अल्लाह पाक की गिरफ्त और उसके अज़ाब से बेख़ौफ़ हो जाए और उसको यह इल्म हो कि वह जन्नत वालों से है, नबियों (अलैहिमुस्सलाम) के सिवा क्योंकि उनको यकीन होता है कि वह जन्नत वालों में से हैं, इसके बावजूद वह सारे मुसलमानों अधिक अल्लाह से डरते हैंl (सहीह बुखारी हदीस नंबर: सुनन निसाई हदीस नंबर:) واللہ انی لارجو ان کون اخشا کم للہ واعلمکم بما اتقی (सहीह मुस्लिम हदीस नंबर:) अल्लाह की कसम! मुझे उम्मीद है कि मैं तुम सब से अधिक अल्लाह से डरने वाला हूँ और तुम सबसे अधिक तकवा का इल्म रखने वाला हैl (तफसीर ए कबीर पृष्ठ २५२ दारुल अहया अल तुरासुल अरबी, बैरुत) (जारी)

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