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Hindi Section ( 11 Jan 2015, NewAgeIslam.Com)

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Today We All are Pakistanis, But.... आज हम सब पाकिस्तानी, लेकिन …

 

 

 

कल्पेश याग्निक

17 दिसम्बर, 2014

बच्चों के ऐसे रक्तपात ने जिस तरह उन पाकिस्तानी मां के कलेजे को चीर दिया है; ऐसे सदमे, संकट और संदेह के क्षणों में हर हिन्दुस्तानी मां उनके साथ दृढ़ता से खड़ी है। जैसा कि 9/11 आतंकी हमले पर फ्रांस के सबसे प्रतिष्ठित अखबार ली मोंड ने लिखा था : टुडे वी आर ऑल अमेरिकन्स, जैसा कि 1962 में बर्लिन जाकर अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने कहा था : टुडे वी आर ऑल बर्लिनर्स - वैसा ही दैनिक भास्कर कहना चाहता है : आज हम सब पाकिस्तानी। इस दारुण दु:ख की घड़ी में हमारा हृदय उतना ही क्रंदन कर रहा है।

आज उन मासूम चीखों, विस्फारित नेत्रों और नन्हें पवित्र शवों के सामने सारे भेदभाव निरर्थक हैं। पाकिस्तान ख़ुद जिम्मेदार है इस आतंक को पैदा करने का- यह सच आज बाद में। अरब सागर में कश्तियों पर सवार आतंकी हत्यारे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने भेजे थे यह भी आज बेमानी। लश्कर-ए-तैयबा, कश्मीर में भेजे जाने वाले ज़र-ख़रीद घुसपैठिए, सैनिकों के सिर काटने वाले कायराना कारिन्दे आज सबकुछ दफ़न कर देना चाहिए। क्योंकि यह मानवता पर सबसे क्रूरतम आतंकी हमला है।

आज तो सिर्फ़ उन बच्चों के लिए दिल धड़क रहे हैं। लेकिन

आज कुछ करने का समय भी है। कुछ कर गुजरने का।

 तालिबान का प्रवक्ता मोहम्मद उमर खोरासनी "कहीं से' दुनिया भर के मीडिया को फोन लगाकर शान से बताता है कि "हमने बच्चों को गोलियों से उड़ा दिया।पता लगाएं कि ये "कहीं' कहां है? खोरासनी हो या मुल्ला या उमर या कहर - तत्काल गोलियों से भून दिया जाना चाहिए।

 एक बच्चे ने वीभत्स दृश्य बताते हुए कहा कि हम बुत से बन गए, क्योंकि वो हिलते ही गोलियां मार रहे थे। इससे हिलते ही, देखते ही गोली मार देने की सीख मिली। बजाय इसके कि नवाज़ शरीफ हुकूमत को इसके लिए कोसें कि इसी तालिबान को वे तो एक बार बढ़ावा दे रहे थे -आज कहें कि शरीफ पाकिस्तानी इितहास में कालिख बने इसी दिन को दहशतगर्दियों का नामोनिशां मिटाने वाले जेहाद के पहले दिन में बदल सकते हैं। हवाई हमले शुरू कर।

 बजाय कि पाकिस्तानी फौज को आतंक का रहनुमा करार देने के, आज तो यह देखना है िक वह आतंक के विरुद्ध युद्ध छेड़ता है या नहीं। निर्णायक युद्ध। यूं भी सेना पर पाकिस्तान शिक्षा से आठ गुना ज्यादा खर्च करता है। तो अब लड़े।

इस निर्णायक युद्ध में हम हिन्दुस्तानी उतनी ही ताकत से पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। चूंकि अब बातें भी अंतिम सांसें गिन रही हैं। समय बढ़ता जा रहा है। प्रथम विश्व युद्ध 4 साल चला था। द्वितीय 6 साल। आतंक के विरुद्ध अमेरिका का अफगान में युद्ध 12 साल चला। लेकिन आतंक है कि अनंत है। अनंत बना दिया गया है। पाकिस्तान ने भी। अमेरिका ने भी। रूस ने भी। इराक ने भी। सीरिया ने भी। हिन्दुस्तान ने भी। सबने इसे ज़िंदा रख रखा है।

चुन-चुन कर मारते नहीं। कहीं न कहीं हमदर्दी अलग रखने लगते हैं। इसी पेशावर में, इसी तहरीक-ए-तालिबान ने पांच साल पहले बाज़ार में कार बम से इतने ही लोग उड़ा दिए थे। सब चुप रहे। रूस के बेसलान में आतंकियों ने 777 बच्चे बंधक बना लिए थे। क्या कर पाए? सारे विश्व के नेता सैन्य व खुफिया अफसर, कानून सब देख रहे हैं बहुरुपिये जेहादी जॉन के खंजर लिए पत्रकारों के गला काटने के वीडियो। चुप। भीरू। आतंक से ये क्या बचाएंगे?

 45 लाख बच्चियां आतंक के डर से स्कूल नहीं जा पा रही हैं। हम मलाला को नोबेल मिलने पर खुश हो जाते हैं - आतंक के विरुद्ध कुछ नहीं करते। कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि वे तालिबान से याचना करते हैं कि उन्हें ले लें - बच्चों को छोड़ दें। याचना नहीं, यातना के योग्य हैं तालिबानी। इस्लामिक स्टेट। इंडियन मुजाहिदीन। जो भी नाम हो। यंत्रणा देनी होगी। मृत्युदंड।

  यह सब करें, तो ही हमारा, समूचे विश्व का आज पाकिस्तानी हो जाना सार्थक होगा।

 अन्यथा वे बच्चे हमें कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे।

Source: http://www.bhaskar.com/news/ABH-bhaskar-editorial-by-kalpesh-yagnik-4842270-NOR.html

URL: http://newageislam.com/hindi-section/kalpesh-yagnik/today-we-all-are-pakistanis,-but--आज-हम-सब-पाकिस्तानी,-लेकिन-…/d/100963

 

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