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Hindi Section ( 24 Jun 2014, NewAgeIslam.Com)

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Changes in today's Pakistan साईं बाबा ने कहा .......

हुसैन अमीर फ़रहाद

फ़रहाद साहब अस्सलामोअलैकुम, आओ आओ साईं बाबा, वालैकुमस्सलाम अच्छा हुआ आप आ गए। वरना मैं आने वाला था, सुनाओ क्या हाल है?

फ़रहाद साहब हाल तो आप देख ही रहे हैं। बदहाल है, अतीत इससे अलग नहीं है, रहा भविष्य तो वो भी ऐसा ही रहेगा।  आप बताएं कि इलेक्शन में हर पार्टी प्रमुख यही कहता था कि हम चेंज लाना चाहते हैं, यहां तक ​​कि अमेरिका के इलेक्शन में ओबामा भी कह रहा था I want change. फ़रहाद साहब ये चेंज क्या बला है? ज़रा इस पर रौशनी डालिए।

साईं बाबा! बेशक हर एक यही कह रहा था कि हम चेंज चाहते हैं, चेंज का अर्थ है, परिवर्तन, विविधता, मृत्यु और बदलाव आदि। अगर किसी का तबादला लाहौर हो जाए या वो मकान बदल ले, कौरंगी से औरंगी चला जाए या मुरीदके से कामूनके, तो कहा जाता है वो औरंगी से इंतेक़ाल कर गया या कामूनके स्तानांतरित हो गया और अगर किसी दोस्त से कहा कि चलो घूमने चलें, तो वो कहेगा मैं चेंज करके भी आया, यहाँ वो कपड़े बदलने की बात कर रहा है। यूरोप में तो साईं बाबा, लोग वाइफ से ले कर लाइफ तक बदल देते हैं। वो एक वाइफ बदलते हैं उनके वाहनों में एक अतिरिक्त पहिया (Spare Wheel) होता है। हम चार चार रखते हैं बांदियाँ अलग। हमें ओबामा से क्या लेना देना है। बुश भी हमारी बढ़ती आबादी को कम करने में ड्रोन हमलों से मदद करता था ओबामा भी कर रहा है कोई चेंज नहीं आया।

लेकिन बदलाव आया है। पहले शासक वर्ग के चेहरों पर रौनक़ हुआ करती थी, लिबास यूं लगता था जैसे ट्राफलगर स्क्वायर में सिलवाया है। बाल पेकाडली रॉयल हेयर कटिंग सैलून से बनवा कर आए हैं। इसक्रोफर का ग्राफ नब्बे प्रतिशत से गिर कर आज साठ फीसद तक आ गया है। इस वक्त विपक्ष वाले टीवी की बहसों में उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ती थीं, होंठ सूखे सूखे लगते थे, कपड़े मैले मैले रहते थे, किसी किसी की तो शेव भी बढ़ी होती थी, ऐसा लगता था जैसे टीवी की बहस में सीधे क़ब्रिस्तान से आए हैं किसी अपने प्यारे को दफना कर।

मगर अब वो बात नहीं है, लिबास भी देखने लायक, चेहरे पर भी रौनक और गालों पर लाली झलकने लगी है। कारें भी चमकीली हो गई हैं। मुझे व्यक्तिगत अनुभव है कि जब मैं कार पार्किंग में कार खड़ी करके और उंगलियों में एम्पाला की चाभियाँ घुमा कर दफ्तर की सीढ़ियों या फुटपाथ पर चल रहा होता तो मैं महसूस करता था कि मैं एक व्यक्तित्व हूँ अगर मैं न होता तो डिपार्टमेंट का सारा कारोबार बंद हो जाता। आज जब मैं बस स्टॉप पर बस के इंतेज़ार में खड़ा रहता हूं तो अपने आपको एक जन्मजात अनाथ सा लगता है। तो साईं बाबा, परिवर्तन तो आया है। किसी को नज़र न आए तो उसकी नज़र कमज़ोर हो गई। 260 रुपये तक टमाटर पहुंच जाए और आलू प्याज़ का पीछा कर रहा हो तो ये भी परिवर्तन है। खैरू खैर मोहम्मद खान बन गया है और शेरू शेर मोहम्मद खान बना है। ये तो दुनिया की रीति है।

अंग्रेजों के ज़माने में खाकरोब को ब्रिटेन की तरफ से खिताब मिला उसका नाम 'परसा'' था, खिताब के बाद वो परसू कहलाया। जब वो चार घोड़ों के टम टम में सवार होकर फिरता था तो चाबुक के साथ चांदी की एक झाड़ू भी लहरा रही होती थी जिसके तिनके चांदी के होते थे। फिर वो पर्सराम कहलाने लगा। तब ये मिसाल बनी कि, ''दौलत तेरे तीन नाम परसा, परसू, पर्सराम।'' तो साईं बाबा! सत्ता का तो अपना अलग नशा होता है, रिहाइश, लिबास, खुराक से लेकर लहजा तक तब्दील हो जाता है यहां तक ​​कि सत्ताधारी व्यक्ति के नज़दीकी लोगों के दिन भी फिर जाते हैं। अल्लामा इकबाल ऐसों के बारे में शेर में फरमाते हैं कि एक शेर को जंगल में खच्चर नज़र आया, उसे अजनबी सा लगा, पूछा तुम कौन हो? मैंने तुम्हें पहचाना नहीं। खच्चर ने कहा, वाह खूब कही, क्या मेरे मामू को भी नहीं पहचानते जो बादशाह के अस्तबल में हैं और बादशाह की सवारी में रहता है? (दरअसल खच्चर गधा और घोड़ी के मिलाप से पैदा हुआ है) वो शर्म के मारे बाप का नाम नहीं बता सकता। मुशर्रफ ये परिवर्तन लाया कि असेम्बली में पढ़े लिखे भर दिये। अब पढ़े लिखे और अनपढ़ों के अंतर पेश है। 

कहते हैं एक अंग्रेज शिकारी अंध महाद्वीप अफ्रीका में आदमखोरों के हाथ लगा, वो उसे बांधकर अपने सरदार के पास ले गए। उन्होंने उसे भूनने के लिए आग जलाई। सरदार कटाला ने अंग्रेज को पेय पदार्थ पीने की दावत दी और बड़े विनम्र तरीके से अंग्रेजी में बातचीत करता रहा। अंग्रेज ने कहा इतनी प्यारी अंग्रेजी आपने कहा से सीखी? सरदार कटाला गोगो ने कहा मैं कैम्ब्रिज का ग्रेजुएट हूँ। अंग्रेज ने खुश होकर कहा तब तो आप मुझे नहीं खाएंगे, कि आप पढ़े लिखे ग्रेजुएट और सुसभ्य इंसान हैं। कटाला गोगो ने कहा खाऊँगा तो मैं ज़रूर, लेकिन छुरी कांटे के साथ इसी टेबल पर बैठकर क्योंकि मैं पढ़ा लिखा ग्रेजुएट हूँ।

फ़रहाद साहब क्या किस्सा था बोतल के जिन्न का।

वो जब मैंने बोतल की डॉट खोली तो साईं बाबा इसमें से बहुत धुआं निकला, फिर एक जिन्न नज़र आया, वो भी हम पाकिस्तानियों की तरह बदहाल लगता था क्योंकि पूरा शरीर नंगा था, सिर्फ एक लंगोटी पहनी थी, कहा आक़ा सलाम हो तुम पर, मैं जिन्न हूँ, जिसने मुझे आज़ादी दिलायी मैं उसका गुलाम हूँ, हुक्म दीजिए आक़ा। मैं आपका हर काम कर सकता हूँ।

मैंने (दिल ही दिल में सोचा तू मेरे हर काम कर सकता है और हालत देखो तन पर फटी हुई लंगोटी लपेटी है) मैंने कहा हमारी हैसियत ग़ुलाम रखने की नहीं है, ज़रा हमारी हालत तो देखो, क्या हम खुद अमेरिका के गुलाम नहीं लगते? हमारे साथ बेशक रहो मगर दोस्त बनकर रहो। हम बहुत परेशान हैं, अगर तुम हर काम कर सकते हो तो हमारे यहां आतंकवादियों को खत्म कर दो।

साईं बाबा, इस जिन्न ने कहा! मैं बोतल में घुसता हूँ तुम ऊपर से ढक्कन बंद कर देना।

मैंने कहा जिन्न भाई ये क्या बात है पहली बार एक काम कहा था, तो तुम दोबारा बंद होने का प्राथमिकता दे रहे हो? जाने को कह रहे हो, अल्लाह तुम्हें लंबी ज़िंदगी दे, तेरे बच्चे जियें, अल्लाह तुम्हें डिफेंस कॉलोनी में मकान दे दो हज़ार गज़ वाला, हम बहुत परेशान हैं हमारा ये काम कर दो। यार तुमको सवाब होगा, समझते क्यों नहीं हो? कहा कि जो काम तुम्हारी सरकार नहीं कर सकी, सेना जवाब दे गई वो काम अकेला कैसे कर लूँ, मुझे बोतल में बंद कर दो और तुम ऊपर से डॉट लगा दो। और दोनों लंबी तान कर सोते हैं। तुम लोग आतंकवादियों को कभी भी खत्म नहीं कर सकते क्योंकि तुम उन्हें सही जगह तलाश नहीं कर रहे हो। अगर तुम आतंकवाद को खत्म करना चाहते हो तो दो काम ज़रूरी हैं।

(1) उन चार हज़ार अमरिकियों का पता लगाओ जिन्हें पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने एक ही रात में चार हज़ार वीज़े दिए थे।

(2) दूसरा काम ये है कि अपने ड्रोन हमले बंद कराओ, ये कुछ डॉलर जो तुम्हें मिले हैं ये भी इसलिए मिले हैं कि गाड़ी जैसे चल रही है चलने दो। ब्रेक न मारो। अगर ब्रेक मारोगे तो हम सहायता में ब्रेक मार देंगे। सच बात ये है कि मैं एक कंटेनर गायब नहीं कर सकता, तुम लोग 19 हजार कन्टेनर्ज़ असलहे से भरे हुए गायब कर गये, क़सम है सुलैमान अलैहिस्सलाम की, कि तुम तो मुझसे भी अधिक शक्तिशाली जिन्न हो। मैं तुम्हारे आगे क्या हैसियत रखता हूं, मैं तुम्हारे यहां आना पसंद नहीं करता था, समुद्र की लहरें मुझे बहाती हुई यहाँ ले आई हैं। हमारी जिन्न सोसाइटी में तुम लोग बहुत बदनाम हो।  अच्छा जिन्न भाई बल्कि महाजिन्न भाई, क्या तुम मिलावट खत्म कर दोगे! हम उससे बहुत तंग हैं। आटा ऐसा रहा है कि अशरफ भाई ने आधी रोटी अपनी कलाई पर चाकू की तरह फेरी नसें कट गई और वो मर गया, यहां कोई चीज़ बेकार  जब हम खरीद कर लाते हैं तो घर तक कुत्ते हमारा पीछा करते हैं, कभी कभी तो हमला भी कर देते हैं कि कमबख्तों हमारे खाने वाली चीज़े तीन सौ रुपये किलो क्यों खरीदते हो? जिन्न ने कहा सियासत और शराफत में भी मिलावट है?

मैंने कहा जिन्न भाई यहां तो शुद्ध राजनीति नहीं है जो है उसे स्याह (काला) सत (सच) कहते हैं, इसमें अधिक मात्रा शैतानी की होती है। और यहाँ जो शराफत कहीं कहीं पाई जाती है वो इन मिलावट करने वालों ने शर (बुराई ) और आफत को मिला कर बनाई होती है इसमें शराफत का तत्व 12 प्रतिशत होता है। जिन्न भाई कभी राजा बाज़ार गए हो? वहाँ एक कराची वाला खाना खाने होटल में घुसा। बोर्ड पर मुर्गे की तस्वीर भी बनी थी। लिखा था यहां मुर्गे की नहारी उपलब्ध है। उसने आर्डर दिया नहारी का, जब नहारी आई तो इसमें एक मोटी सी बोटी थी। उसने होटल वाले से कहा, ये भैंस की बोटी मालूम होती है? होटल वाले ने कहा, भई आपके अंदाज़े की दाद देनी चाहिए, बहुत खूब पहचाना, ये भैंस की बोटी है, बात ये है कि आजकल मुर्गी की कमी हो गई है तो हमने मुर्गी भैंस मिलाकर नहारी का सिलसिला शुरू कर दिया। ग्राहक ने पूछा Ratio (अनुपात) क्या रखा है? होटल वाले ने कहा, बस फिफ्टी फिफ्टी। आधी भैंस आधा मुर्गा।

मैंने ये आयत पढ़ी, इन्नल्लाहा ला योगैय्यरो मा बेक़ौमिन हत्ता योग़ैय्यरू मा बेअन्फोसेहिम (13: 11) अल्लाह उस क़ौम की हालत कभी नहीं बदलता जिन्न भाई जो क़ौम अपनी हालत खुद न बदले। जिन्न रोने लगा और मिन्नतें करने लगा कि आक़ा मुझे बोतल में दोबारा बंद कर दो, उसने अपनी पुरानी लंगोटी से चिंदी फाड़ी और अपनी बहती नाक और आंसू पोछें। कहा या अल्लाह मुझे माफ कर दीजिए। मजबूरन मुझे उसकी इच्छा पूरी करनी पड़ी। और शहबाज़ क़लंदर का नाम लेकर पूरी ताकत से बोतल को दूर समंदर की लहरों के हवाले कर दिया।

फ़रहाद साहब! अमेरिका हमारे यहां इंसानों का शिकार कर रहा है, क्या इस मौसम में शिकार की इजाज़त है?

शिकार तो अमेरिका कब से कर रहा है लेकिन पहले वज़ीरिस्तान में कर रहा था अब हंगो फिर पेशावर लाहौर का रुख करेगा। जासूसी विमानों के द्वारा क़बायलियों के बूढ़ों, बच्चों और औरतों को मारा जा रहा है, अमेरिका कहता है उनमें इतने विदेशी थे, पाकिस्तान से तुरंत बयान दोहराया जाता है, हाँ इनमें तीन विदेशी भी थे। बात ये है कि यदि वास्तव में हमारे यहां कोई विदेशी है तो उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए या उनकी लाश जनता को दिखाकर उनके देश के हवाले की जाय। अपनी सीमाओं की रक्षा भी ज़रूरी है, लेकिन उस देश के राजदूत को भी बुलाकर चेतावनी दी जाए कि अपने आदमियों को रोकें। लेकिन साईं बाबा! डॉलर की खुशबू बड़ी ज़ालिम होती है। इंसान सभी नियम कानून भूल जाता है। क़तर की बात है हम रेगिस्तान से जीप में आ रहे थे, मेरे साथ चार और अफसर थे, हमें पहाड़ी के पास एक बेहोश आदमी मिला, बड़े जतन किए लेकिन उसे होश नहीं आया, उसके चेहरे पर पानी के छींटे भी मारे, मगर बेअसर।

एक पाकिस्तानी मंत्री ने मुझे ये बात बताई थी कि नए डॉलर के नोट अगर किसी बेहोश को सुंघाए जाएं तो वो होश में आ जाता है और होशमंद पागलों की सी हरकतें करने लगता है। संयोग से मुझे मिस्टर ब्राउन ने कुछ डॉलर दिए थे मैंने डॉलर निकाले और बेहोश व्यक्ति को सुँघाए वो तुरंत होश में आ गया। साईं बाबा ये ज़ालिम डॉलर इंसान की अक़्ल को खराब कर देता है, उसकी सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। डॉलर का डसा हुआ भागता खूब है जैसे ट्यूनीशिया का राष्ट्रपति भागा और ढीठ भी बन जाता है जैसे मिस्र के राष्ट्रपति। मगर हमारा क्या होगा साईं बाबा!

फरवरी, 2014 स्रोत: मासिक सौतुल हक़, कराची

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