ग़ुलाम मोहियुद्दीन, न्यु एज इस्लाम
14 जून, 2012
(अंग्रेज़ी से तर्जुमा- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)
तुर्की के इस्लामी इमाम फ़तेह उल्लाह गोलेन एक मक़बूल और उभरती हुई तहरीक के मर्कज़ में हैं। उनके लाखों की तादाद में शागिर्द हैं जो रवादारी, बैनुल अक़ाइद मकालमे और तालीम की इनकी तालिमात पर अमल पैरा हैं। इनमें से कुछ ने अमेरीका और कुछ दीगर ममालिक में कामयाब और मेयारी स्कूलों का क़याम किया है। इन स्कूलों में रियाज़ी और साईंस पर ज़ोर दिया जाता है। इसके बावजूद भी गोलेन ना मालूम शै बने हुए हैं।
गुज़श्ता दहाई में पूरे अमेरीका और दीगर ममालिक में बहुत से मेयारी स्कूल क़ायम हुए हैं और इन तमाम स्कूलों में कुछ ख़ुसूसियात यकसाँ हैं। इनमें से ज़्यादा तर तालीमी एतबार से कामयाब हैं, इनमें रियाज़ी और साईंस पर ज़ोर दिया जाता है, एक और बात पर ज़ोर दिया जाता हैः इन का क़याम और इनमें से ज़्यादातर का नज़्म तुर्की के तारकीने वतन करते हैं।
फ़तेह उल्लाह गोलेन मुस्लिम दुनिया में तेज़ी से उभरती हुई और बाअसर ताक़त के रुहानी रहनुमा हैं जिसे गोलेन तहरीक के नाम से जाना जाता है। और लाखों की तादाद में शागिर्द इनका मवाज़ना गांधी और मार्टिन लूथर किंग से करते हैं। गोलेन रवादारी, बैनुल मज़ाहिब मकालमा को फ़रोग़ देते हैं, और सब से बढ़ कर वो तालीम को फ़रोग़ देते हैं। मिसाल के तौर पर ह्युसटन में एक हार्मनी स्कूल है जो टेक्सास में 36 चार्टर स्कूलों का तेज़ी से तौसी होती हुई चेन का हिस्सा है। ये स्कूल ज़्यादा तर समाज के महरूम तबक़े के तालिबे इल्मों की ख़िदमत करता है और उनमें सब के सब रियाज़ी और साईंस पर ज़ोर देते हैं। इन स्कूलों में तालीम का मेयार बहुत अच्छा है क्योंकि तालिबे इल्मों को जदीद टेक्नालोजी की मदद और हर एक तालिबे इल्म पर ख़ुसूसी तवज्जो दी जाती है। हार्मनी स्कूल में 20 हज़ार तालिबे इल्म हैं और दाख़िला लेने के लिए इंतेज़ार करने वालों की फ़ेहरिस्त में मज़ीद 30 हज़ार लोग हैं। इन स्कूलों में बहुत से असातिज़ा तुर्की के हैं।
मजमूई तौर पर अमेरीका के 26 सूबों में हार्मनी के जैसे ही 130 स्कूल हैं। इनका क़याम और नज़्म तुर्की के तारकीने वतनों में ताजिर और तालीमी शोबा में काम करने वाले तब्क़े की जानिब से किया जाता है। इमाम फ़तेह उल्लाह गोलेन अपने पैरोकारों को बताते हैं कि मुत्तक़ी मुसलमान होने के लिए उन्हें मसाजिद की तामीर नहीं करानी चाहिए बल्कि उन्हें स्कूलों की तामीर करानी चाहिए, और मज़हब की तालीम ना दे कर साईंस की तालीम देनी चाहिए। वेबसाइट पर अपने ख़ुत्बात में वो असल में कहते हैं: " तबिइयात, रियाज़ी और केमिस्ट्री का मुताला ख़ुदा की इबादत है।" लिहाज़ा गोलेन के पैरोकारों ने तुर्की से टोगो और ताइवान से टेक्सास तक दुनिया भर के दीगर मक़ामात पर एक हज़ार से भी ज़ाइद स्कूलों का क़याम किया है। इनका पैग़ाम ये है कि अगर आप तवील मुद्दत के लिए किसी भी समाजी मसला को हल करना चाहते हैं, तो हल तालीम के ज़रिए ही आना है।
तुर्की में हर जगह गोलेन के स्कूल हैं और सबसे बेहतर समझे जाते हैं। जहां लाखों डालर की हाईटेक सहूलियात हैं और जहां लड़कियां लड़कों के बराबर हैं और अंग्रेज़ी पहली जमात में ही पढ़ाना शुरू किया जाता है। गोलेन ने सिर्फ तालीमी शोबा को ही मुतास्सिर नहीं किया है। एक नौजवान इमाम के तौर पर 60 की दहाई में शुरूआत करते हुए उन्होंने मुतवस्सित तब्क़े के तुर्कों के ऊपर ज़ोर दिया कि वो मग़रिब से सीखें और उसके इक़दार को गले लगाऐं। जिनमें से एक ग़ैर मोतवक़्क़े तौर पर पैसा कमाना भी शामिल था। इंटरनेट पर दिए ख़ुत्बा में भी उन्होंने अपने पैरोकारों को बताया कि: "अगर आप अमीर होने के तरीक़ों की तलाश में नहीं ... तो ख़ुदा की नज़र में ये एक गुनाह है।" इस तरह तुर्की में उनके शागिर्द कामयाब ताजिर बन गए और लाखों डालर की गोलेन सल्तनत को क़ायम किया है जिसमें स्कूल के अलावा टीवी स्टेशन, एक बड़ा बैंक, तुर्की की सब से बड़ी तिजारती एसोसियेशन, और सबसे बड़ा अख़बार शामिल है।
गोलेन अपने पैरोकारों को दीगर अक़ाइद के लोगों से मुकालमा के लिए कहते हैं। रवादारी उन के पैग़ाम का एक बहुत अहम हिस्सा है। गोलेन रवायती मर्कज़ी धारे के इस्लाम के एनातोली वर्ज़न की तरग़ीब देते हैं जिसे उन्होंने सईद नूरसी की तालीमात से लिया है और वो उन्हें जदीद बनाते हैं। अपने पैरोकारों के लिए गोलेन एक ज़िंदा नबी की तरह हैं, और उन्होंने अपने असर का इस्तेमाल तुर्की की सियासत को तब्दील करने के लिए किया है। गोलेन ने तुर्की के सियासी निज़ाम को एतेदाल पसंद इस्लामी जमहूरियत बनाने में मदद की है।
बहुत कम लोग ने गोलेन को बज़ाते ख़ुद देखा होगा। वो एक अलग थलग और क़यास ना किये जा सकने वाले अपने इबादत के कमरे से वैबकास्ट के ज़रिए ख़िताब करते हैं। 1999 में वो अमेरीका आए। एक दहाई से भी ज़्यादा से ख़ुद मुसल्लत जिलावतनी में वो पेंसिलवेनिया में रह रहे हैं। इनके बारे में ख़याल किया जाता है कि अगर वो तुर्की वापस गए तो वहां शोर व गोगा होगा और कुछ लोग उन्हें बहुत ताक़तवर होते देखना पसंद नहीं करते हैं। बहुत ताक़तवर, ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि उनके पैरोकार तुर्की हुकूमत और पुलिस में अहम ओहदों पर फ़ाइज़ हैं।
इमीग्रेशन फ़्राड पर सवालात उठाए गए लेकिन टेक्सास चार्टर स्कूलों के एसोसिएशन के डेविड डन का कहना है कि अहल अमेरीकियों के ख़सारा की वजह से स्कूल को तुर्की से रियाज़ी और साईंस के असातिज़ा लाने की इजाज़त दी जाती है। इन स्कूलों में इस्लाम की तालीम नहीं दी जाती है। ऐसा करना गै़रक़ानूनी होगा क्योंकि ये पब्लिक स्कूल हैं और अगर ये ख़ुद को किसी भी मज़हब से जोड़ते हैं तो ये अपने रास्ते से भटकेंगे। क्लास रूम्ज़ में नताइज ज़्यादा अहम हैं। क्या बच्चे आला सतह पर रियाज़ी, साईंस, पढ़ना और लिखना सीख रहे हैं? और वाज़ेह तौर पर इन स्कूलों में ये हो रहा है। न्यूज़वीक ने अमेरीका के 10 सबसे बेहतरीन स्कूलों में हार्मनी के दो स्कूलों को शामिल किया है। हर साल मुल्क भर में ये स्कूल मज़ीद खुल रहे हैं और इंतेज़ार करने वालों की फ़ेहरिस्त मज़ीद लंबी होती जा रही है।
(सीबीएस टेलीविज़न के प्रोग्राम "60 मिनट" पर मब्नी)
ग़ुलाम मोहियुद्दीन हिंदुस्तानी नेज़ाद रिटायर्ड डाक्टर हैं और अमेरीका में मुक़ीम हैं।
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