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Hindi Section ( 11 Aug 2022, NewAgeIslam.Com)

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Virtues and Status of Imam Hasan and Imam Hussain in the Light of Ahadith अहादीस की रौशनी में इमाम हसन और इमाम हुसैन करीमैन रजीअल्लाहु अन्हुमा के मनाकिब

गुलाम गौस सिद्दीकी, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

9 अगस्त 2022

यौमे आशूरा की मुनासिबत से हमारे लिए ख़ास तौर पर जरूरी है कि हम इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु और उनके जुमला असहाब व अहले बैत की शहादतों और कुरबानियों को याद करें जिनसे हमें सब्र व तहम्मुल की तालीम और हक़ पर कायम रहने की नसीहत मिलती है। आज हम इस दिन की मुनासिबत से हदीसों की रौशनी में ख़ास तौर पर इमाम हसन और इमाम हुसैन करीमैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा के कुछ मनाकिब बयान कर रहे हैं ताकि उनके ज़िक्रे खैर से हमारे दिलों में अहले बैत से मोहब्बत की शमा जलती रहे।

1- नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हसनैन करीमैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा की विलादत के बाद उनके कानों में अज़ान दी। सुबहान अल्लाह

हज़रत अबू राफेअ रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि जब सैय्यदा फातमा रज़ीअल्लाहु अन्हा के हाँ हसन बिन अली रज़ीअल्लाहु अन्हुमा की विलादत हुई तो नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत हसन बिन अली रज़ीअल्लाहु अन्हुमा के कानों में नमाज़ वाली अज़ान दी।

इमाम तिरमिज़ी, अबू दाउद और अहमद बिन हम्बल ने इस हदीस को रिवायत किया और इमाम तिरमिज़ी ने फरमाया कि यह हदीस हसन सहीह है।

इमाम हाकिम नीशापुरी अपनी मशहूर किताब अल मुस्तदरक अलल सहीहैनमें इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के कान में अज़ान के ताल्लुक से एक हदीस ज़िक्र करते हैं:

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने राफेअ अपने वालिद का यह बयान नकल करते हैं कि मैंने देखा कि जब हज़रत फातमा रज़ीअल्लाहु अन्हा के यहाँ हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु की विलादत हुई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद उनके कान में अज़ान दी।

इमाम हाकिम फरमाते हैं कि यह हदीस सहिहुल असनाद है लेकिन इमाम बुखारी और इमाम मुस्लिम ने इस हदीस को नकल नहीं किया।

(अल मुस्तदरक अलल सहीहैन लिल हाकिम अल निसाबुरी, किताब मार्फतुल सहाबा रज़ी अल्लाहु अन्हुम, अलहदीस: 4827)

2- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हसनैन करीमैन के नाम रखे। सुबहान अल्लाहिल अज़ीम व बिहमदिही

मौला अली रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि जब हज़रत हसन की विलादत हुई तो उन्होंने उनका नाम उनके चाचा के नाम पर जाफर रखा। (फिर मौला अली रज़ीअल्लाहु अन्हु ने) फरमाया: मुझे हुजूर रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बुला कर फरमाया: मुझे इन दोनों के नाम बदलने का हुक्म दिया गया है। (मौला अली रज़ीअल्लाहु अन्हु ने फरमाया) फिर मैंने अर्ज़ किया: अल्लाह और उसका रसूल बेहतर जानते हैं। पासा रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके नाम हसन व हुसैन रखे। (इस हदीस को इमाम अहमद बिन हम्बल ने अपनी मुसनद में, और इमाम अबू याला ने अपनी मुसनद हाकिम ने अपनी मुस्तदरक में रिवायत किया। इमाम हाकिम के कौल के मुताबिक़ यह हदीस सहिहुल असनाद है)

3- नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इमाम हसन और इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा की तरफ से अकीका किया। सुबहान अल्लाहिल अज़ीम व बिहमदिही

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हसन और हुसैन (करीमैन) की तरफ से अकीके में दो दुम्बे ज़बह किये। (इस हदीस को इमाम निसाई ने अपनी सुनन में रिवायत किया, 7:165, किताबुल अकिका, रकम: 4219)

4- रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इमाम हसन और इमाम हुसैन को अपना बेटा फरमाया। सुबहान अल्लाह अल अज़ीम व बिहमदिही

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसउद रज़ीअल्लाहु अन्हुमा रिवायत करते हुए फरमाते हैं: मैंने रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि उन्होंने हज़रत हसन और हज़रत हुसैन का हाथ पकड़ कर फरमाया: यह मेरे बेटे हैं।

(इमाम ज़हबी ने अपनी किताब सैर आलामुल नबला में इस हदीस को ज़िक्र किया है। 284:3)

5- इमाम हसन और इमाम हुसैन रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अहले बैत में से हैं। सुबहान अल्लाह

उम्मुल मोमिनीन हज़रत उम्मे सलमा रज़ीअल्लाहु अन्हा से मरवी है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत फातमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन (रज़ीअल्लाहु अन्हुम) को जमा फरमाया फिर उनको अपनी चादर में दाखिल कर के फरमाया: या अल्लाह! यह मेरे अहले बैत हैं।

(इस हदीस को इमाम तबरानी ने अपनी मोजमुल कबीर, 3:53, हदीस नंबर: 2663, इमाम हाकिम ने अपनी मुस्तदरक, 3: 158, हदीस नंबर: 4705, और इमाम तबरी ने अपनी तफसीर की किताब, जामेउल बयान फी तफ्सीरुल कुरआन, 8:22 में नकल किया है)

6- हज़रत फातमा की औलाद हज़रत इमाम हुसैन को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की औलाद होने का शरफ हासिल है। सुबहान अल्लाह

हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ीअल्लाहु अन्हु फरमाते हैं: मैंने रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सूना कि हर औरत के बेटों की निस्बत उनके बाप की तरफ होती है सिवाए फातमा की औलाद के, क्योंकि मैं उनका नसब हूँ और मैं ही उनका बाप हूँ।

(इस हदीस को इमाम तबरानी ने अपनी मोजमुल कबीर के अन्दर रिवायत किया: 3:44, हदीस नंबर: 2631)

हज़रत उमर रज़ीअल्लाहु अन्हु से यह भी रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि कयामत के दिन हर नसब मुनकता हो जाएगा सिवाए मेरे नसब (औलादे फातमा) और रिश्ते के। (हाकिम: अल मुस्तदरक, तबरानी: अल मोजमुल कबीर, अहमद बिन हम्बल: फ़ज़ाएले सहाबा) ।

नसारा नजरान के साथ मुबाहेला के लिए भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इमाम हसन व हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा को अपने फरजंद के तौर पर साथ ले कर गए जिस पर कुरआन की आयत गवाह है।

7- इमाम हसन और इमाम हुसैन रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के गुलशन ए दुनिया के फूल हैं। सुबहान अल्लाह

हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि मैं रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाज़िर हुआ तो हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने या गोद में खेल रहे थे। मैं ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क्या आप इन दोनों से मोहब्बत करते हैं? तो नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: मैं इनसे क्यों कर मोहब्बत न करूँ हालांकि वह दोनों तो मेरे गुलशन दुनिया के फूल हैं जिनकी खुशबु को मैं सूंघता रहता हूँ।

(इस हदीस को इमाम तबरानी ने अपनी मोजमुल कबीर 4:155, हदीस नंबर 3990 और इमाम हैस्मी ने अपनी किताब मजमउल ज़वाएद, 9:181 में ज़िक्र किया है)

8- जिसने हसनैन करीमैन, उनके वालिदैन और नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोहब्बत की वह कयामत के दिन नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ होगा। सुबहान अल्लाह

हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हसन और हुसैन (रज़ीअल्लाहु अन्हुमा) का हाथ पकड़ कर फरमाया: जिसने मुझसे मोहब्बत की, और जिसने इन दोनों, इन दोनों के वालिद और इनकी वालिदा से मोहब्बत की, तो वह कयामत के दिन मेरे साथ मेरे ठिकाने पर होगा।

(इस हदीस को इमाम तिरमिज़ी और अहमद ने रिवायत किया है और इमाम तिरमिज़ी के बकौल यह हदीस हसन है)

9- इमाम हसन और इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा जन्नती जवानों के सरदार हैं। सुबहान अल्लाह

हज़रत अबू सईद खुदरी रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: हसन और हुसैन जन्नती जवानों के सरदार हैं।

(इस हदीस को इमाम तिरमिज़ी ने अपनी अल जामेउल सहीह में रिवायत किया: हदीस नंबर 3768)

10- रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोहब्बत करने वाले पर हसनैन करीमैन से मोहब्बत करना वाजिब है।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ीअल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: जो शख्स मुझ से मोहब्बत करता है उस पर लाज़िम है कि वह इन दोनों से भी मोहब्बत करे।

(इस हदीस को इमाम निसाई ने अपनी सुनन कुबरा में रिवायत किया। हदीस नंबर 8170)

11- हसनैन करीमैन से बुग्ज़ रखने वाले नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बुग्ज़ रखने वाला है।

हज़रत अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: जिसने हसन और हुसैन से बुग्ज़ रखा उसने मुझ ही से बुग्ज़ रखा।

(इस हदीस को इब्ने माजा ने अपनी सुनन और इमाम निसाई ने अपनी अल सुनन अल कुबरा में रिवायत किया)

12- जिसने हसनैन करीमैन से बुग्ज़ रखा वह अल्लाह और रसूल के नज़दीक मब्गूज़ है।

हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ीअल्लाहु अन्हु ने फरमाया कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सूना: जिसने हसन व हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा से बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा, और जिसने मुझसे बुग्ज़ रखा वह अल्लाह के हाँ मब्गूज़ होगा और जो अल्लाह के हाँ मब्गूज़ गा, उसे अल्लाह आग में दाखिल करेगा

(इस हदीस को इमाम हाकिम ने अपनी अल मुस्तदरक में रिवायत किया, हदीस नंबर: 4776)

13- हसनैन करीमैन से जंग करने वाला नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जंग करने वाला है।

हज़रत ज़ैद बिन अरकम रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अली, हज़रत फातमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुम से फरमाया: जिससे तुम्हारी जंग होगी मेरी भी उससे जंग है, और जिसके साथ तुम सुलह करोगे मेरी भी उससे सुलह है।

(इस हदीस को इमाम तिरमिज़ी ने अपनी अल जामेअ अल सहीह में रिवायत किया, हदीस नंबर 3870

14- हसनैन करीमैन की वजह से नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सजदे को लम्बा कर दिया करते थे।

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सजदे में होते तो हसन या हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा आते और नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पुश्त पर सवार हो जाते जिसकी वजह से नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सजदों को लम्बा कर देते थे।

एक मुकाम पर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया गया कि: या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! क्या आप ने सजदों को लम्बा कर दिया है तो नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: मुझ पर मेरा बेटा सवार था इसलिए (सजदे से उठने में) जल्दी करना अच्चा न लगा।

(इस हदीस को इमाम अबू याला ने अपनी अल मुसनद में रिवायत किया, हदीस नंबर 3428)

15- हसनैन करीमैन से मोहब्बत करने वाले के लिए जन्नत है और उनसे नफरत करने वालों के लिए दोज़ख है।

हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि मैंने रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सुना: हसन और हुसैन मेरे बेटे हैं जिसने हसन और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा से मोहब्बत की, उसने मुझसे मोहब्बत की, और जिसने मुझ से मोहब्बत की उससे अल्लाह ने मोहब्बत की और जिससे अल्लाह ने मोहब्बत की अल्लाह ने उसे जन्नत में दाखिल कर दिया। जिसने हसन और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा से बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा, और जिसने मुझसे बुग्ज़ रखा उस पर अल्लाह का गज़ब हुआ और जिस पर अल्लाह का गज़ब हुआ अल्लाह न उसे आग में दाखिल कर दिया।

(इस हदीस को इमाम हाकिम ने रिवायत किया है और फरमाया कि यह हदीस सहीह है: हदीस नंबर 4776)

16- इमाम हसन और इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा को बोसा लिया करते थे। सुबहान अल्लाह

हज़रत अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हमारे पास रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ लाए और उनके साथ हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा थे एक (शहजादा) एक कंधे पर सवार था और दूसरा दुसरे कंधे पर और नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दोनों (हज़रत हसन और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हुमा) को बारी बारी चूम रहे थे।

(इस हदीस को इमाम अहमद बिन हम्बल ने अपनी अल मुसनद में रिवायत किया, हदीस नंबर 9671)

हदीसों में हसनैन करीमैन के मजकुरा बाला मनाकिब के अलावा और भी मनाकिब बयान हुए हैं, लेकिन वक्त की किल्लत की वजह से इतने मनाकिब पर इक्तिफा करता हूँ। अल्लाह पाक इन्हें कुबूल फरमा कर हम सब को दारैन की सआदतें अता फरमाए और हसनैन करीमैन की मोहब्बत हम तमाम मुसलमानों के कुलूब में रासिख कर दे। आमीन बजाह सैयदुल मुरसलीन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम।

Urdu Article: Virtues and Status of Imam Hasan and Imam Hussain in the Light of Ahadith احادیث کی روشنی میں امام حسن اور امام حسین کریمین رضی اللہ عنہما کے مناقب

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/imam-hasan-imam-hussain-light-ahadith/d/127690

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