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Hindi Section ( 20 Jul 2017, NewAgeIslam.Com)

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A True Muslim can Never be a Terrorist सच्चा मुसलमान कभी आतंकवादी नहीं हो सकता

 

गौस सिवानी

16 अक्टूबर, 2014

(इस्लाम आतंकवाद के उन्मूलन और ज़ुल्म व बर्बरता के खिलाफ आवाज बुलंद करने की बात करता है और इसके लिए अत्यधिक उन्नत संघर्ष की दावत देता है। आज इसके मानने वालों पर आतंकवाद का आरोप एक ऐतिहासिक उत्पीड़न है। संघ परिवार के परवरदा नरेंद्र मोदी भी तथ्य को स्वीकारने पर  मजबूर हैं और भारतीय मुसलमानों को शांति और सुरक्षा का अलमबरदार करार दे रहे हैं।)

मुसलमान न कभी आतंकवादी था और न ही होगा क्योंकि जो सच्चा मुसलमान होगा वह कभी आतंकवादी हो ही नहीं सकता। उन्हें अपनी शांती प्रियता के लिए किसी मोदी से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है,लेकिन सच का जादू सिर चढ़कर बोलता है और वह मोदी के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उनके राज्य में कई बेगुनाहों का फर्जी एनकाउंटर किया गया था मगर आज वह स्वीकार करने लगे हैं कि भारतीय मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं और वे शांति और सुरक्षा में विश्वास करते हैं। वह आतंकवाद और अशांति में भरोसा नहीं रखते। वे सदियों से शांति और भाईचारे के साथ रह रहे हैं। भारत इसी कारण एकजुट है और अमन व शांति का गहवारा बन चूका है क्योंकि मुसलमान मेल मुहब्बत के साथ यहाँ रहना चाहता है। उसे बार बार उकसाया जाता है,उसे आतंकित किया जाता है और उसके देश भक्ति होने पर सवाल उठाया जाता है लेकिन इसके बावजूद वे अत्याचार सहकर भी देश का भला ही चाहता है। इस देश की अखंडता और एकता को बनाए रखना चाहता है। हम यह बात एक मुसलमान के रूप में बार-बार कहते रहे हैं मगर बावजूद इसके इस पर विश्वास नहीं किया गया और हिन्दूस्तानी जेलों को मुसलमानों से भर दिया गया। सांप्रदायिक दंगों के नाम पर मुसलमानों का नरसंहार किया गया मगर हमनें वह भी सहन कर ली,आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह रहे हैं कि भारतीय मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं। वह प्यार व मुहब्बत से रहते हैं और अलकायदा व आतंकवादी संगठनों की परियोजनाओं को वह धूल में मिला देंगे,तब तो उन लोगों को होश आ जाना चाहिए जो इस देश में मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलते रहते हैं। जिनकी राजनीति का केंद्र ही मुस्लिम दुश्मनी है और दंगों की आग में राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे रहते हैं। प्रधानमंत्री ने अमेरिका The Council on Foreign Relations में संबोधन के दौरान कहा कि भारत आतंकवाद Imported  है, न कि Home Grown है। उन्होंने कहा कि यहां के मुसलमान अलक़ायदा की योजनाओं को फेल कर देंगे। हालांकि इस दौरे से पहले अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए अपने इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा था कि यहां के मुसलमान शांति में विश्वास रखते हैं। अलक़ायदा को उनसे निराशा हाथ लगेगी। उन्होंने अलकायदा प्रमुख ऐमन अल जवाहिरी की इस अपील पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए  इंटरव्यू के दौरान उन का जवाब था। जवाहिरी ने अपनी अपील में इस क्षेत्र में जंग छेड़ने की बात कही थी। अगर ऐसा संभव हुआ तो यह देश के लिए बेहद खतरनाक होगा,मगर प्रधानमंत्री को विश्वास है कि यहां के मुसलमान शांति से रहने में विश्वास रखते हैं। वह किसी भी तरह ऐसी देश और मानवता विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

सच का जादू सिर चढ़कर बोलता है:

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में मुसलमानों के वोट का कोई योग दान नहीं है। उनकी राजनीति का केंद्र मुस्लिम वोट नहीं बल्कि हिंदू वोट रहा है। भाजपा को मुस्लिम वोट कहीं नहीं मिलता और कभी नहीं मिलता है। वह अपने जो राजनीतिक कार्यक्रम बनाती है और दोनों के अनुपात का हिसाब जोड़ती है इसमें मुस्लिम वोटों को शामिल नहीं रखती। क्योंकि उसे मालूम है कि यह वोट किसी भी हाल में उसे मिलने वाला नहीं है,बल्कि यह वोट कभी कभी उसके खिलाफ एकजुट होकर उसे हराने का काम करता है ज़ाहिर है कि हम प्रधानमंत्री से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि उन्होंने मुसलमानों की खुशामद और उनके वोट की लालच में इस प्रकार का बयान दिया होगा। भाजपा की राजनीति का मरकज़ मुसलमानों का खुशामद नहीं बल्कि मुसलमानों का विरोध है। बावजूद इसके अगर प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि भारतीय मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं और यहाँ अगर आतंकवाद आई है तो वह दूसरे देश से आई है,यह तथ्य स्वीकार्य है। उनके पास इंटेलिजेंस एजेंसियों की खबरें हैं और खुफिया सूचनाएं हैं जो कह रही हैं कि भारतीय मुसलमानों पर आतंकवाद का आरोप झूठ और बेबुनियाद है। जिन मुसलमानों को जेलों में बंद किया गया है उन्हें पुलिस और जांच एजेंसियों ने झूठे मामलों में फंसाया है। जिन लोगों को कोर्ट ने निर्दोष पाया है और रिहा कर दिया है उनके अलावा दूसरे लोग भी निर्दोष हैं और रिहाई के पात्र हैं और हमें विश्वास है कि उनकी भी जल्द ही रिहाई प्रक्रिया में आएगी।

बिजली गिरती है तो बेचारे मुसलमानों पर:

गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ फर्जी एनकाउंटर्स हुए थे और मरने वालों के बारे में पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो का कहना था कि वे आतंकवादी थे और पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर नरेंद्र मोदी को मारने के लिए आए थे। अब तक कि जांच से यह साबित हो चुका है कि मरने वाले आतंकवादी नहीं थे और न ही उन्होंने पाकिस्तान जाकर प्रशिक्षण लिया था। वह तो आम निर्दोष नागरिक थे। आरोपों के घेरे में मोदी सरकार आई थी और मोदी के करीबी अमित शाह इस आरोप में जेल गए थे। उनके खिलाफ जांच करने वाली सीबीआई ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। कोर्ट के आदेश से उन पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई थीं जिन्होंने एनकाउंटर अंजाम दिए थे और उनमें से अधिकांश अभी भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। गुजरात में अक्षरधाम मंदिर पर हमले के आरोप में कुछ मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था जो हाल ही में कोर्ट के फैसले के बाद रिहा हो गए हैं और उन्हें कोर्ट ने निर्दोष पाया है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक मुसलमानों को आतंकवाद के आरोप में जेलों में बंद किया गया है,जहां पिछले पंद्रह वर्षों से कांग्रेस की सरकार रही है। मालेगांव बम धमाकों के आरोप में भी शुरुआत में मुसलमानों को ही पकड़ा गया था लेकिन एक अवधि के बाद जब मूल दोषी पकड़े गए तो मुसलमानों को रिहा कर दिया गया। यहां भी अक्सर कोर्ट के फैसले में वह मुसलमान निर्दोष करार पाते हैं जो वर्षों से जेलों में बंद हैं। अब तक बहुत से मुसलमानों की रिहाई हो चुकी है और जो बचे हैं उनकी भी रिहाई होगी इंशा अल्लाह।

आतंकवाद के आरोप में बंद मुस्लिम कोर्ट के आदेश पर रिहाई ने बार बार साबित किया है कि मुसलमान आतंकवादी नहीं बल्कि आतंकवाद का शिकार हैं। वह सरकार और पुलिस के द्वारा आतंकित किए जा रहे हैं। अब तक जितने लोगों को भी पकड़ा गया है उनमें बस एकाध ही को पुलिस सजा दिलाने में सफल हो पाई है। निर्दोष मुसलमानों की सबसे अधिक गिरफ्तारीयां कांग्रेस सरकार के दौरान हुई हैं। वर्तमान में इसमें कमी आई है और अब केंद्र से कांग्रेस सरकार का सफाया हुआ है,एक दो मामले में आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तारी के सामने आए हैं। यूं ही उत्तर प्रदेश में भी चाहे जितनी शांति की स्थिति खराब हो मगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद यहां आतंकवाद के आरोप में मुसलमानों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जो स्वीकार किया गया है कि यहां के मुसलमान आतंकवाद में शामिल नहीं हैं और शांति के साथ रहने में विश्वास करते हैं,तो हम उम्मीद करते हैं कि उनके मामलों में भी विशेष विचार किया जाएगा जो अब तक जेलों में बंद हैं और रिहाई नहीं हुई है। ऐसे बेगुनाह मुसलमान पूरे देश में अपने मुसलमान होने की सजा पा रहे हैं और उनके परिवार तबाह और बर्बाद हो रहे हैं और जो लोग रिहाई पा चुके हैं उनके जीवन भी आसान नहीं है। उनके पुनर्वास की कोशिश सरकार के ज़रिये होनी चाहिए और उन पर जो अत्याचार हुए हैं उनका मुआवजा मिलना चाहिए।

हिंदुत्व वादियों का नजरिया बदलेगा?

प्रधानमंत्री के बयान के बाद से कई भाजपाई भी उनसे नाराज हैं और संघ परिवार का एक वर्ग भी यह पसंद नहीं करता जिसका मानना है कि सभी मुसलमान आतंकवादी हैं और पाकिस्तानी एजेंट हैं। यह वर्ग मान कर चलता है कि भारत में रहने वाले मुसलमानों का दिल पाकिस्तान के साथ रहता है और इसीलिए वह क्रिकेट में पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। शिवसेना जो भाजपा की तरह ही हिंदुत्व में विश्वास रखती है और उसकी राजनीति भी मुसलमानों के विरोध पर केंद्रित रहती है। उसे भी यह बयान पसंद नहीं आया है। जाहिर है कि मुसलमानों को अपनी देश भक्ति साबित करने के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं। उन्होनें बार बार देश की सीमा पर अपनी देशभक्ति का परिचय दिया है,लेकिन संघ परिवार ही उन्हें शक शुबहे की दृष्टि से देखता है और उनके खिलाफ देश में माहौल तैयार करने की कोशिश करता है। अब उत्तर प्रदेश की ओर चुनाव में योगी आदित्यनाथ और अन्य भाजपाइयों ने मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार करना चाहा जो मुसलमानों ही नहीं बल्कि यहां की जनता के लिये भी दर्दनाक था। इसके बाद भाजपा के ही एक सांसद साक्षी महाराज ने धार्मिक मदरसों को निशाना बनाया और उनके खिलाफ हिंदुओं में शक व संदेह पैदा करने की कोशिश की। केवल इसी पर बस नहीं है बल्कि खुद मोदी के कैबिनेट में मंत्री मेनका गांधी ने एक बयान में कहा कि मांस के ऐक्सपोर्ट से होने वाली आय का उपयोग आतंकवाद में किया जा रहा है। इन सभी बयानों में जो चमत्कार हैं उन्हें समझा जा सकता है। ये सभी लोग मोदी ही पार्टी के हैं और उनकी छत्र छाया में रहने वाले हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने किसी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश नहीं दिया मगर अब उन्होंने जिस तरह बयान दिया है कि उन लोगों के होश भी ठिकाने आ जाने चाहिए और उन्हें सावधान हो जाना चाहिए। यह ठीक है कि राजनीतिज्ञ अवसर देखकर काम करते मगर प्रधानमंत्री के बयान को किसी राजनीतिक फायदे और नुकसान से ऊपर उठकर स्वीकार्य तथ्य के रूप में देखना चाहिए। कई मुस्लिम विरोधियों से ये बात ज़ाहिर हुआ कि वह सत्ता में आते ही मुसलमानों के खिलाफ आदेश जारी करेंगे और बंगला बोलने वाले मुसलमानों को बांग्लादेश भेजना शुरू कर देंगे मगर ऐसा नहीं हुआ और आज उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

16 अक्टूबर, 2014 स्रोत: रोज़नामा सहाफ़त, लखनऊ

URL for Urdu article: http://newageislam.com/urdu-section/ghaus-siwani/a-true-muslim-can-never-be-a-terrorist--سچا-مسلمان-کبھی-دہشت-گرد-نہیں-ہوسکتا/d/99693

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