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Hindi Section ( 7 Feb 2021, NewAgeIslam.Com)

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Kashmir and Kashmiriyat कश्मीर और कश्मीरियत


संपादकीय रोज़नामा हमारा समाजनई दिल्ली

जम्मू व कश्मीर के पासपोर्ट धारकों को चीन की ओर से अलग वीजा जारी करने का विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि चीन ने भारत को भड़काने की दूसरी हरकत कर के यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी नियत में खोट है। चीन ने तिब्बत की सुलह के लिए आने वाले संवाददाताओं को ऐसे हैण्ड पैड दे कर जिसमें जम्मू व कश्मीर को अलग देश के रूप में दिखाया गया है, भारत को इशारे की भाषा में बहुत कुछ कहने का प्रयास किया है। हालांकि चीन की ओर से उठाया जाने वाला यह कदम भारत के खिलाफ पहला कदम नहीं है जिस पर हैरत की निगाह डाली जाए। लेकिन इसका यह अर्थ भी हरगिज़ नहीं कि यह कोई ऐसी मामूली हरकत है जिसको ऐसे ही अनदेखा कर दिया जाए।

यहां एक सवाल यह उठता है कि आखिर चीन ने कश्मीर के जरिए भारत के खिलाफ इस टकराव की शुरुआत क्यों की। जाहिर हैचीन इस तथ्य से अच्छी तरह से वाकिफ है कि यह भारत का वह क्षेत्र हैजहां उसके नागरिक बहुत चिंतित हैंयही वजह है कि वह आसानी से यहां के लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर सकता है। जिसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विकास कार्यों के नाम पर धन देकर इसकी शुरुआत की और अब यह दूसरी चाल है। दूसरी ओरकश्मीर में स्थिति ऐसी हो गई है कि यहाँ की भूमि एक मृत शरीर की तरह हो गई हैजिसकी आत्मा का निधन हो गया है। इसके लिएकश्मीर को स्वर्ग की उपाधि दिए जाने के आधार पर सभी सुविधाएँ गायब हो गई हैं। कश्मीर के लहराते उद्यानजो कभी हरियाली के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के फलों से भरे थेअब विस्फोटक से भड़े पड़े हैं। कश्मीर की पहाड़ियाँ जहाँ लोग अपने मन को सुकून देने के लिए छुट्टी पर जाते थे अब आतंकवादियों का अड्डा बन गए हैं। जिस झील का पानी दिल को तृप्त करता थावह अब ज़हर हो गई है। कश्मीर की घाटी जहाँ केसरसेबअनारकाजूअखरोट आदि की खेती होती थीअब बम विस्फोट और डायनामाइट के कारण बंजर हो गया है। कहने का तात्पर्य यह है कि जहाँ वे प्रकृति के सुंदर दृश्यों को देखते थे उस कश्मीर में गोला-बारूद और बम विस्फोट देखते हैं और कश्मीर के नागरिक जो उच्च नैतिकतासामाजिकता और आध्यात्मिकता का अवतार हुआ करते थेअब वहाँ से पलायन करने के लिए मजबूर हैं।

पाकिस्तानी सेना ने हमारे उन क्षेत्रों को आतंकवादियों के हवाले कर रखा है, जिसने कश्मीरियत को परवान चढ़ाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया था। तरह तरह के आतंकवादी तत्व और उनके खतरनाक कैम्पों के स्थापना के कारण ना केवल पाक अधिकृत कश्मीर का हुस्न दागदार हुआ है बल्कि पारम्परिक तौर पर जिन तत्वों के संयोजन को ऐसा क्षेत्र माना जाता था जिसे लंबे समय तक नाम नहीं दिया गया था। वास्तव मेंपाकिस्तान सेना ने न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के उन सभी जमाल परस्तों के लिए एक खतरनाक चुनौती पेश की हैजिसका समर्थन अब चीन कर रहा है। हमें इस पर हैरत नहीं होनी चाहिए कि तबाह हाल पाकिस्तान अपनी झुंझलाहट मिटाने के लिए किस के पास जा रहा है लेकिन यह बात गंभीरता से गौर करने की है कि अगर चीन हमारे विरोध में खुल कर आने को तैयार है तो आखिर उसके कारण क्या हैं? वास्तव में ट्रैक टोलियों पर हम से भी गलतियां हुई हैं जिसका उल्लेख यहाँ उचित नहीं होगा। हमने भी कुछ पा लेने की कोशिश में कुछ ऐसे कदम उठाए हैं जिसकी वजह से हमारे लंबे समय तक सहयोगी रहने वाले भी हम से दूर भागने लगे हैं। चीन को अपनी औकात का अंदाजा है लेकिन हम अपनी औकात भूल कर उन लोगों के दस्त नगर बन गए हैं जिनके हाथों कभी अच्छे काम नहीं हुए हैं। हमें डर है कि कहीं अंकल सैमभी हमें बीच मंजधार में ना छोड़ जाए! बहुत गंभीरता के साथ वैश्विक राजनीति को हमें हैंडल करना है। यही हमारी सफलता है। अपने हिंतों की रक्षा के साथ साथ अपने दोस्तों के गम में शरीक होना भी हमारी पुरानी परम्परा रही है। हमें यह याद रखना चाहिए कि हम महात्मा गांधी के देश के अमीन और पासदार हैं। जिन्हें दुनिया अमन मान चुकी है। हमें उसी अमन को आगे बढ़ाना है। समस्या आते हैं और हल हो जाते हैं मगर भड़कावे और जूनून में उठाए गए कदम की भरपाई कभी नहीं होती।

(बशुक्रिया हमारा समाज, नई दिल्ली)

URL for Urdu article: https://www.newageislam.com/urdu-section/اداریہ-روزنامہ-ہمارا-سماج-،نئی-دہلی/kashmir-and-kashmiriyat-کشمیر-اور-کشمیریت/d/2010

URL:https://www.newageislam.com/hindi-section/editorial-hamara-samaj-tr-nea-age-islam/kashmir-and-kashmiriyat-कश्मीर-और-कश्मीरियत/d/124246


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