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Islam is Not Dependent on Us Muslims इस्लाम हम मुसलमानों का मोहताज नहीं

बिलाल अहमद परे, न्यू एज इस्लाम

उर्दू से अनुवाद न्यू एज इस्लाम

16 दिसंबर 2021

इस्लाम दीने फितरत और दीने मुबीन है। यह भाईचारे और सहिष्णुता का धर्म है। यह समानता और न्याय का धर्म है। यह आज्ञाकारिता का नाम है। यह साम्य (इज्तेमाईयत) सिखाता है - यह सच्चे माबूद की इबादत की ओर ले जाता है। यह शरीयत के आधार पर जीने के सिद्धांत सिखाता है। यह अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दुनिया के अन्य धर्मों से अद्वितीय और श्रेष्ठ है। यह समय की आवश्यकताओं के अनुसार मानवता को मार्गदर्शन प्रदान करता है।

इस्लाम सभी रिश्तों के अधिकारों का संरक्षक है। यह रिश्तेदारों, दोस्तों, यात्रियों और पड़ोसियों के साथ-साथ गैर-मुसलमानों के अधिकारों की गारंटी देता है। न केवल पशु-पक्षी बल्कि पेड़-पौधे, जल और अन्य संसाधन के जीवन की भी रक्षा करने वाला धर्म हैं। यह अमीर और गरीब, स्वस्थ और बीमार, पुरुषों और महिलाओं, युवा और बुजुर्गों के पुनर्वास के लिए प्रयास करता है। यह मानवता का पथप्रदर्शक है जो असहाय और जरूरतमंदों को अकेला नहीं छोड़ते। जहां न केवल अल्लाह के अधिकारों की पासदारी की जाती है बल्कि मखलूक के अधिकारों का भी पास व लिहाज़ रखा जाता है।

इस्लाम धर्म अपने अनुयायियों को हर स्थिति में, हर जगह, हर समय और हर मौसम में मार्गदर्शन करता रहा है। इस्लाम अतीत में अपने अनुयायियों का मार्गदर्शन करने में एक सफल धर्म रहा है। और अब न केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी सभी प्रकार की स्थितियों, परिस्थितियों, मुद्दों आदि को हल करने में दीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस्लाम वर्तमान में अपनी अनूठी विशेषताओं के साथ दुनिया में सबसे अधिक फैलने वाला धर्म है। जिसके फॉलोअर्स दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं।

भूकंप हो या बाढ़, बाढ़ हो या तूफान, प्राकृतिक आपदा हो या मानवीय, बादल फटना हो या भू-स्खलन, कोरोना वायरस हो या टिड्डी दल, फकीर हो या गरीब, विधवा हो या अनाथ, कर्जदार हो या राहगीर, हर तरह की समस्या का हल पेश करने में इस्लाम ही सबसे आगे दर्स देने वाला दीन नजर आएगा। इस धर्म का एक गुण यह है कि यह धन को प्रचलन में रखने का आग्रह करता है - ताकि समाज में संतुलन बना रहे।

इस्लाम ही एकमात्र ऐसा धर्म है जिसने बच्चे के जन्म से लेकर कब्र तक और कब्र से कयामत तक पूरे जीवन का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहाँ समाज के दृष्टिकोण को न्याय के पैमाने पर बनाए रखा जाता है। जो उसके वास्तविकता, सच्चाई, भाईचारे और रास्तगोई पर आधारित है। जहाँ मृत्यु के बाद के अंतिम चरणों को स्पष्ट रूप से बयान किया गया है ताकि उसके मानने वालों को सिखाया जाए कि एक उद्देश्यपूर्ण जीवन कैसे जीना है। यह अपने मानने वालों को एक निर्माता (खालिक) के साथ जोड़ने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सर्वोच्च धर्म है।

इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो अद्भुत जानकारी प्रदान करता है जिसके अधीन आधुनिक विज्ञान सहित दुनिया के सभी विज्ञान हैं। इस्लाम ने चौदा सौ साल पहले कई महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा उठाया जिससे मानव ने सदियों की लगातार विचार और शोध करने के बाद ही जान लिया। जिसमें विशेषतः पौदों की आवाज़, चींटियों का आपसी बातचीत, दो दरियाओं का आपस में न मिलना, इत्यादि उल्लेखनीय है। कुरआन इस्लाम की कसौटी और माप है।

इस्लाम किसी चार्ली हेब्दो जैसे शत्रुतापूर्ण व्यक्ति का मोहताज नहीं है, न ही उसे वसीम जैसे मुस्लिम नाम वाले व्यक्ति की आवश्यकता है, जिसके पास झूठे और अशुद्ध विचार हों। यह तथाकथित मुस्लिम शासकों के नैतिक पतन के शिकार कठपुतली राजाओं से भी मिटने वाला धर्म नहीं है, और न ही किसी प्रकाशन घर की नापाक साजिशों से इसके अनुयायियों की संख्या कम होगी।

अल्लाह के अंतिम पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  जिन्होंने कहा कि यह धर्म हर उस जगह पहुंच जाएगा जहां दिन और रात का चक्कर चलता है और अल्लाह किसी भी कच्चे और पक्के घर को नहीं छोड़ेगा जहां वह इस धर्म को दाखिल न कर देगा चाहे इसे सम्मान के साथ स्वीकार किया जाए या इसे रद्द कर के अपमान स्वीकार कर ली जाए। यही कारण है कि 21वीं सदी के एक अध्ययन के अनुसार इस्लाम प्रतिशत और दुनिया भर में प्रसार के मामले में सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है।

फानूस बन के जिसकी हिफाजत हवा करे

वह शम्मा क्या बुझे जिसे रौशन खुदा करे

यह संसार में आने वाले लोगों के नैतिक प्रगति का, सच्चे मालिक का इरफ़ान प्राप्त करने का दीन है, अल्लाह पाक ने दीन के खातिर ऐसे बंदों से काम लिया जिनसे लोगों का गुमान भी नहीं था और ऐसे बंदों को गुमराही में धकेल दिया जो अपने आप को बुद्धिमान व फित्तीन कल्पना करते हुए नहीं थकते थे अल्लाह पाक इरशाद है राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं। (अल आराफ: 178)

अल्लाह पाक ने ने कई कौमों के नाम और निशान को मिटा दिया और कई कौमों को सम्मान, गरिमा, ऊंचाई, उरूज, ज्ञान और बादशाहत अता फरमाई, जिन्होंने इसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था। यह सब इस्लाम के कारण ही उन्हें नसीब हो पाया।

इस्लाम हमारे न मानने से जर्रा बराबर रुकने वाला दीन नहीं है, और न ही यह किसी भी तरह से अपनी गति को रोकने वाला है। यह उस बंदे का सौभाग्य है जिसे इस्लाम का निस्वार्थ धन प्राप्त हो जाए और अंततः उसके जीवन का अंत इसी पर हो सके। अल्लाह हमें इस्लाम पर जमना अता करे- आमीन

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(जनाब बिलाल अहमद परे न्यू एज इस्लाम के लिए एक नियमित स्तंभकार हैं। वह जम्मू और कश्मीर राज्य के दक्षिणी भाग में त्राल से हैं। उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से इस्लामी अध्ययन में परास्नातक किया है। आपके लेख अक्सर इस्लामी समाजी मसलों पर राज्य के विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों में अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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Urdu Article: Islam is Not Dependent on Us اسلام ہمارا محتاج نہیں

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