New Age Islam
Tue Jun 09 2026, 09:56 PM

Hindi Section ( 25 Jun 2012, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Followers of the Religion Have the Greatest Hand in Harming It मज़हब को नुक़्सान पहुंचाने में सबसे बड़ा हाथ इसके मानने वालों का होता है

 

असद मुफ़्ती

24 जून, 2012

(उर्दू से तर्जुमा- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

लंदन में मुक़ीम मेरे एक दोस्त हाल ही में श्रीलंका के दौरे से वापिस आए तो उन्होंने बताया कि मुसलमानों को श्रीलंका में हर किस्म की मज़हबी आज़ादी हासिल है। मुस्लिम बाशिंदे मुक़ामी आम शहरियों के मुक़ाबले में ज़्यादा ख़ुशहाल हैं और आज़ादाना मज़हबी फ़राइज़ अंजाम देते हैं। मुसलमानों की तो सियासी पोज़ीशन भी दूसरी अक़ल्लियतों से बेहतर है, कई मुस्लिम अहम वज़ारतों और आला ओहदों पर फ़ाइज़ हैं। हत्ता कि एक ज़माने में वज़ीरे ख़ारिजा तक मुसलमान थे जैसा कि मैंने अभी बताया कि मुसलमानों को आज़ादाना मज़हबी फ़राइज़ और अपनी मज़हबी सरगर्मियां जारी रखने की आज़ादी हासिल है लेकिन ये देख कर मुझे हैरत हुई कि वहां अज़ान लाऊड स्पीकर पर नहीं दी जाती, मैंने वजह पूछी तो बताया कि अगर हम चाहें तो इजाज़त मिल जाएगी लेकिन हमने ख़ुद इसका मुतालिबा इसलिए नहीं किया कि दूसरे मज़ाहिब वाले भी इसका मुतालिबा करेंगे, हमारी पांचों अजानें तो दस मिनटों में ख़त्म हो जाएंगी लेकिन दूसरे मज़ाहिब की मनाजातें, गीत, भजन और कीर्तन तो घंटों चलेंगे। मैंने सोचा कि काश ये दूरअंदेशी और ज़्यादा नुक़्सान के पेशे नज़र थोड़े नफ़ा से दस्तबरदारी की तौफ़ीक़ हम सबको हो जाए, उन्होंने ठंडी सांस भर कर बताया।

मज़हब में उमूमन अक़ल व ख़िरद की बातें बर्दाश्त नहीं की जातीं, मुसलमानों के ख़ुद साख़्ता एतेक़ादात, महदूद ज़हनियत और कोताह नज़री से आज़ाद होना ही इस्लाम की बाज़याफ़्त है और बाज़याफ़्त के मानी ये नहीं हैं कि कोई चीज़ पेश की जा रही है बल्कि ये है कि इसमें जो मानी या मानी छिपे हुए हैं उनको ज़ाहिर किया जाय जैसा कि जिहाद और तादाद अज़्दवाज में ऐसा कौन सा पहलू है जिस पर फ़ख़्र किया जा सके। मेरे दोस्त बता रहे थे कि अब अज़ान के मफ़हूम को ही लीजिए अज़ान देने वाला दरअसल मुआशरे में गड़बड़ फैला रहा है, मुअज़्ज़न दूसरे लफ़्ज़ों में कह रहा है कि मैं किसी दुनिया वे इक़्तेदारे आला, किसी फ़रमारवाँ को नहीं मानता, कोई हुकूमत मैं तस्लीम नहीं करता, किसी क़ानून को मैं नहीं मानता, किसी अदालत के हुदूद इख़्तेयारात मुझ तक नहीं पहुंचते, किसी का हुक्म मेरे लिए हुक्म नहीं है, मैं किसी मोक़न्नना का क़ाइल नहीं हूँ, अवाम की अक्सरीयत मेरी नज़र में कीड़े मकोड़ों से ज़्यादा नहीं है।

कोई रस्मो व रिवाज व क़ानून मुझे तस्लीम नहीं है। किसी के हुक़ूक़, किसी का तक़द्दुस, किसी के इख़्तेयारात मैं नहीं मानता, एक अल्लाह के सिवा सबसे बाग़ी, सबसे मुनहरिफ़ और सबका इंकारी हूँ, अगर मग़रिब की अज़ान का मफ़हूम पाले तो ख़्वाह आप किसी से लड़ने और जंग करने जाएं या जज़िया का तक़ाज़ा करें या न करें या इस्लाम के क़बूल करने की दावत दें या ना दें, दुनिया ख़ुद आप से लड़ने के लिए आ जाएगी। ये तो सरासर आ बैल मुझे मार वाली बात है। यही बैल के मारने का ख़ौफ़ लाहक़ था कि पाकिस्तान के आलमे वजूद में आने से पहले मुसलमान ख़तरे में था फिर तक़सीमे मुल्क के बाद इस्लाम ख़तरे में घिर गया, फिर दो क़ौमी नज़रिया ख़तरे में आ पड़ा, फिर जौहरी असासों को ख़तरा लाहक़ हो गया, फिर पाकिस्तान ख़तरे की ज़द में आ गया और यादश बख़ैर इन दिनों बलोचिस्तान ख़तरे में है। उधर इटली में मुसलमानों की एक नुमाइंदा तंज़ीम ने ऐलान किया है कि यूरोप में इस्लाम ख़तरे में है क्योंकि इटली की एक अदालत ने फ़ैसला दिया है कि एक इमाम साहब को फ़ौरी तौर पर मुल्क बदर कर दिया जाय। बर्तानिया में एक इमाम को जनवरी से हिरासत में रखा गया है और आइन्दा हफ़्ते उसे अदालत में मुख़्तलिफ़ इल्ज़ामात के तहत पेश किया जाने वाला है। फ़्रांस में कई इमामों को मुल़्क बदर कर दिया गया है वहां की हुकूमत क़ानून में तब्दीली ला चुकी है कि तमाम इमाम फ़्रांसीसी ज़बान रवानी से बोलना सीखें और फ़्रांसीसी क़ानून, सक़ाफ़त और तारीख़ का मुताला करके वाक़फ़ियत हासिल करें उधर मेरे मुल्क हॉलैंड ने ऐसे क़वानीन नाफ़िज़ कर दिए हैं और मुस्लिम इमामों पर डच ज़बान सीखना लाज़िमी क़रार दे दिया गया है और उनके लिए ये ज़रूरी है कि डच तहज़ीब व तमद्दुन और सक़ाफ़त से रौशनास होने के लिए नेसाब पढ़ें।

मुसलमान इन तमाम मोताज़क्किरा इक़दामात को इस्लाम पर हमला समझते हैं और यूरोप में इस्लाम के लिए उसे ख़तरे की घंटी क़रार देते हैं और वो समझते हैं कि मग़रिब में इस्लाम पर हमले किए जा रहे हैं। इसी तरह की राय का इज़हार ग़लती पर मब्नी है, मसाजिद और दीनी मदारिस पर हमले करना बिलाशुबा इस्लाम से ख़ौफ़ का नतीजा है लेकिन ये चंद भटके हुए अफ़राद की हरकतें हैं ना कि हुकूमतों की पालिसी, मेरे हिसाब से फ़्रांस, बेल्जियम,  इटली और हालैंड में जो हुकूमतें इक़दामात कर रही हैं सारी दुनिया के मुसलमानों को इन इक़दामात का ख़ैर मक़दम करना चाहिए सारे यूरोप व इस्लाम को वहां के हालात से मुताबिक़त पैदा करने की ज़रूरत है, मग़रिब में मुक़ीम मुसलमान इमाम हज़रात मोक़ामी ज़बान नहीं बोलते और मोक़ामी तहज़ीब व सक़ाफ़त को समझ नहीं सकते। इमाम हज़रात मोक़ामी लोगों से मेल जोल ना बढ़ाएं उनसे रवाबित नहीं पैदा करें तो मुक़ामी आबादी पुर अमन इस्लाम के बारे में कैसे वाक़फ़ियत हासिल कर सकेगी। हम लोग (मुसलमान) अब यहां की अक्सरीयत का हिस्सा हैं। इस्लाम के लिए ज़रूरी है के वो अपना पुरअमन चेहरा अक्सरीयत को दिखाए, अपना भाई चारे और रवादारी का पैग़ाम अक्सरीयत तक पहुंचाए इसलिए फ़्रांसीसी और डच इक़दामात मुसबत नौईयत के इक़दामात हैं। उन्हें मन्फ़ी नहीं कहा जा सकता इसलिए हॉलैंड के मुसलमानों की अक्सरीयत ने क़ानून में लाई गई तब्दीली का ख़ैरमक़दम किया है, जहां तक बाज़ इमामों की गिरफ़्तारी और उन्हें मुल्क बदर करने का ताल्लुक़ है उनके ताल्लुक़ से हक़ीक़त ये है कि नफ़रत, तशद्दुद और इस्लाम के बरअक्स नज़रियात का प्रचार करने वाले ऐसे इमामों को मुस्लिम मुल्कों में भी यक़ीनन गिरफ़्तार कर लिया जाएगा कि ये मज़हबी और नस्ली बुनियादों पर नफ़रत और तशद्दुद की मुसलसल हौसला अफ़्ज़ाई करते रहे थे। ये लोग अपने मफ़ादात के लिए मज़हब को तो मानते हैं लेकिन मज़हब की बात को नहीं मानते।

असद मुफ़्ती,  एम्सटर्डम में मुक़ीम उर्दू के आज़ाद सहाफ़ी हैं।

24 जून 2012 बशुक्रियाः जंग, पाकिस्तान

URL for Urdu article: https://newageislam.com/urdu-section/followers-religion-greatest-hand-harming/d/7731

URL for this article: https://newageislam.com/hindi-section/followers-religion-greatest-hand-harming/d/7732


Loading..

Loading..