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Hindi Section ( 13 Apr 2015, NewAgeIslam.Com)

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I will play Holi beginning in the name of the Lord, saying bismillah. 'मैं खेलूं होरी, पढ़ पढ़ बिस्मिल्लाह'

 

वुसतुल्लाह ख़ान

13 अप्रैल 2015

 मरियम सिद्दीकी

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ये जो मुंबई की 12 साल की मुसलमान बच्ची मरियम सिद्दीकी ने 195 स्कूलों के साढ़े चार हज़ार बच्चों के बीच भगवद्गीता जानने के मुक़ाबले में 100 में से 100 नंबर हासिल कर लिए तो ऐसा क्या अजीब हो गया कि मीडिया ने मरियम का पीछा कर लिया.

महाराष्ट्र का कोई न कोई मंत्री हार-फूल पहना रहा है और लोकल कांग्रेसी भी उसे लड्डू खिलाने में किसी से पीछे नहीं.

हाँ, आज वाकई ये गर्व की बात है लेकिन आज से 70 बरस पहले तक ये अक्सर हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए पेशावर से तमिलनाडु तक एक आम बात हुआ करती थी. इसे ही तो गंगा जमुनी तहज़ीब कहते थे.

पहचानना मुश्किल

अब देवबंद की गलियों में सफ़ेद कुर्ते, पायजामे, टोपी में घूमने वालों को ही ले लें, नाम न बताएँ तो किसी को भी न पता चले कि अस्सलाम वलैकुम कहने वाला यह बंधु मौलवी हमीदुल्लाह है या बृजमोहन जी चले जा रहे हैं.

लखनऊ में नवरात्रि के नौ दिन ख़लील अहमद अंसारी समेत बहुत से मुसलमान शाकाहारी हो जाते हैं कि नहीं? अहमदाबाद के लक्ष्मण कोसी का परिवार 80 साल से मोहर्रम का ताज़िया निकाल रहा है या नहीं?

और ये बनारस का मोहम्मद अली नस्लों से दशहरे का रावण क्यों बना रहा है? और सीमा पार पाकिस्तान में हेमंतदास हैदरी को 82 वर्ष की उम्र में भी हैदराबाद से मुल्तान तक मोहर्रम की मजलिसें पढ़ने से क्यों फुर्सत नहीं?

और भारत या पाकिस्तान में शिया मुसलमानों के साथ-साथ हुसैनी हिन्दुओं का मातम करते चलना कौन सी बड़ी बात है? और ये ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के दरबार में हर वक़्त मुसलमानों से ज़्यादा हिन्दू क्यों होते हैं?

एक युग से गाय नहीं काटते

पाकिस्तान के ज़िला थरपारकर के शहर मिट्ठी में मुसलमान आज से नहीं एक युग से गाय नहीं काटते. और रहे मिट्ठी के हिन्दू तो वो कभी ताज़िया बनाने और ईद मिलादुन्नबी में ऊंटों का जुलूस निकालने से बाज़ नहीं आते.

मजाल है मंदिर में घंटी बजने के समय साथ वाली मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान शुरू हो जाए और नमाज़ के समय साथ वाले मंदिर से घंटियाँ बजने लगें.

जब हम मीडिया वाले थरपारकर वालों से पूछते हैं कि ये सब क्या है? तो वो हँसते हुए कहते हैं, ये बात तुम्हारी समझ में नहीं आने की. इसके लिए सदियों साथ रहना पड़ता है. इसके लिए स्वर्ण मंदिर की नींव का पत्थर रखने वाला मुसलमान फ़कीर मियाँ मीर बनना पड़ता है.

पाकिस्तान में इन दिनों जिस तरह का सांप्रदायिक चलन है उसे देखते हुए अब तो मेरे हिन्दू दोस्त भी कह जाते हैं कि भाई, हम तो हिन्दू होने की वजह से ज़िंदा हैं, शिया होते तो कभी के मारे जाते.

बच्ची की सीख

महान हिन्दुस्तानी शायर रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी का नाम तो आपने सुना होगा. उनका एक शेर भी सुनते जाइए,

मालूम है कुछ तुमको मोहम्मद का मक़ाम, वो उम्मते इस्लाम तक महदूद नहीं है.

और बाबा बुल्ले शाह को भी सुन ही लें,

नाम नबी की रातां चढ़ी, बूंद पड़ी अल्लाह अल्लाह

और मैं खेलूं होरी, पढ़ पढ़ बिस्मिल्लाह

मेरे हिसाब से मुंबई की बच्ची मरियम ने भगवद्गीता का मुक़ाबला जीतकर अगर मुझ जैसे बुड्ढों को कोई सीख दी है तो वो ये कि पहले सबको पढ़ो, समझो, फिर चाहे जो भाषणबाज़ी करो.

वुसतुल्लाह ख़ान, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान

Source: http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2015/04/150412_wusat_muslim_girl_geeta_rns

URL: https://www.newageislam.com/hindi-section/play-holi-lord-bismillah/d/102443

 

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